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स्विटजरलैंड को आशंका 2030 तक पूरा नहीं कर सकेगा पेरिस समझौते में किया वादा, जानें- क्‍यों

स्विटजरलैंड को आशंका 2030 तक पूरा नहीं कर सकेगा पेरिस समझौते में किया वादा, जानें- क्‍यों #Switzerland

14-06-2021 20:10:00

स्विटजरलैंड को आशंका 2030 तक पूरा नहीं कर सकेगा पेरिस समझौते में किया वादा, जानें- क्‍यों Switzerland

स्विटजरलैंड के लोगों ने एक जनमत संग्रह में सरकार के उस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया है जिससे वो 2030 तक कार्बन उत्‍सर्जन के अपने लक्ष्‍य को पाने में सफल हो सकता। सरकार का कहना है कि अब उसको कुछ और उपाय अपनाने होंगे।

दुनिया के बढ़ते तापमान को लेकर बार-बार अंतरराष्‍ट्रीय संगठन चेतावनी दे रहे हैं। वहीं विकसित देश इस दिशा में कदम उठाने के लिए विकासशील देशों पर लगातार दबाव डाल रहे हैं। लेकिन हकीकत ये भी है कि ऐसे देशों के लोग खुद आगे आकर कोई सहयोग नहीं देना चाहते हैं। इसका ताजा उदाहरण स्विटजरलैंड हैं, जहां के लोगों ने सरकार के उन कानूनों को खारिज कर दिया है कि जिसमें कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कदम उठाए जाने की बात कही गई थी। इसके लिए सरकार ने एक जनमत संग्रह कराया था जिसमें सरकार को मुंह की खानी पड़ी है।

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दरअसल स्विटजरलैंड में सरकार ने तीन प्रस्‍तावों पर लोगों की राय जाननी चाही थी। इनमें से एक कार्बन उत्‍सर्जन को कम करने के लिए नए और कड़े कदम उठाना भी शामिल था। इसके तहत सरकार ने कार फ्यूल पर सरचार्ज और एयर टिकट पर लेवी लगाने का प्रस्‍ताव रखा था। लेकिन 51 फीसद से भी अधिक लोगों ने सरकार के विरोध में अपना वोट दिया। आपको बता दें कि स्विटजरलैंड में सरकार के किसी भी कदम के लिए लोगों की सहमति ली जाती है। ताजा प्रस्‍तावों पर जो मतदान कराया गया उसका नतीजा रविवार को घोषित कर दिया गया, जिसमें सरकार को हार का सामना करना पड़ा है।

यह भी पढ़ेंइस परिणाम के सामने आने के बाद देश के पर्यावरण मंत्री सिमोनेटा सोमारुगा ने कहा कि ऐसे में स्विटजरलैंड के लिए वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में कमी के अपने लक्ष्य को पाना मुश्किल हो जाएगा। गौरतलब है कि पेरिस समझौते के मुताबिक स्विटजरलैंड को वर्ष 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को 1990 के स्तर से आधा करना है। सोमारुगा का ये भी कहना है कि लोगों ने सिर्फ एक कानून को मानने से और लागू करने से इनकार किया है। देश की जनता ने पर्यावरण की सुरक्षा से इनकार नहीं किया है। उन्‍होंने ये भी कहा कि लोग चाहते हैं कि पर्यावरण की सुरक्षा और मजबूत हो लेकिन वो ये नहीं चाहते हैं कि इस तरह का कानून इसका जरिया बने। उनका ये भी कहना है कि अब जबकि सरकार का प्रस्‍ताव गिर गया है तो वो उन कदमों को उठाने पर विचार करेगी जिस पर विवाद न बन सके। ऐसे में सरकार ईंधर के आयात पर कर लगा सकती है। साथ ही सरकार आम सहमति के जरिए पर्यावरण संबंधी नीतियां भी बनाने की कोशिश करेगी। headtopics.com

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