सीवर की सफ़ाई करते हुए मरने वाले सरकारी गिनती में शामिल नहीं - फ़ैक्ट चेक - BBC News हिंदी

सीवर की सफ़ाई करते हुए मरने वाले सरकारी गिनती में शामिल नहीं - फ़ैक्ट चेक

31-07-2021 11:17:00

सीवर की सफ़ाई करते हुए मरने वाले सरकारी गिनती में शामिल नहीं - फ़ैक्ट चेक

संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'मैनुअल स्केवेंजिंग' के दौरान किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. लेकिन क्या यह सच है?

वीडियो कैप्शन,कुंभ मेले में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच सफ़ाईकर्मियों के पांव धोए थे.यहां यह समझना होगा कि साल2013 में मैनुअल स्केवेंजिंग (हाथ से मैला उठाने वाले) नियोजन प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियमलाया गया था और यहां सरकार ने 'मैनुअल स्केवेंजर' की परिभाषा तय की है.

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इस परिभाषा के मुताबिक "ऐसा व्यक्ति जिससे स्थानीय प्राधिकरी हाथों से मैला ढुलवाए, साफ़ कराए, ऐसी खुली नालियां या गड्ढे जिसमें किसी भी तरह से इंसानों का मल-मूत्र इकट्ठा होता हो उसे हाथों से साफ़ कराए तो वो शख़्स 'मैनुअल स्केवेंजर' कहलाएगा."

इस अधिनियम के तीसरे अध्याय का सातवां बिंदु कहता है कि इसके लागू होने के बाद कोई स्थानीय अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति किसी भी शख़्स को सेप्टिक टैंक या सीवर में 'जोख़िम भरी सफ़ाई' करने का काम नहीं दे सकता है.अधिनियम में सेप्टिक टैंक और सीवर के संदर्भ में 'जोख़िम भरी सफ़ाई' को भी परिभाषित किया गया है. headtopics.com

इसका मतलब है सभी स्थानीय प्राधिकरणों को हाथ से मैला उठाने की व्यवस्था ख़त्म करने के लिए सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफ़ाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना होगा. कोई भी ठेकेदार या प्राधिकरण सेप्टिक टैंक और सीवर साफ़ कराने के लिए बिना सुरक्षा गियर दिए सफ़ाईकर्मी से सफ़ाई नहीं करा सकता. यह पूरी तरह प्रतिबंधित है.

लेकिन सच यही है कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई के दौरान ज़्यादातर सफ़ाईकर्मियों को सीवर के भीतर जाना ही पड़ता है.यह भी पढ़ें:इमेज स्रोत,Getty Images'सिर्फ़ इस साल अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है'सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजकबेज़वाड़ा विल्सन

ने बीबीसी से सरकार के इस बयान पर बात करते हुए कहा, ''इन पांच सालों में सफ़ाई करने के दौरान 472 सफ़ाईकर्मियों की मौत हुई है.''इससे पहले सरकार ने 340 लोगों के मौत की बात मानी थी लेकिन उसमें भी 122 लोगों की गिनती नहीं की गई. इस साल 2021 में अब तक 26 लोगों की मौत सीवर की सफ़ाई करते हुए हुई है. तो अब तक कुल 498 लोगों की मौत हो चुकी है जिसे सरकार पूरी तरह ख़ारिज कर रही है."

विल्सन कहते हैं, ''सरकार तो पहले भी यही कहती थी कि देश में हाथ से मैला ढोने का चलन खत्म हो गया है लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास प्रमाण हैं कि ऐसा घड़ल्ले से हो रहा है तब जाकर सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सरकार साल 2013 में एक्ट लेकर आई.'' headtopics.com

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''अब जब कोर्ट ने इसमें दख़ल देना बंद कर दिया है तो फिर वही बात कह रहे हैं कि देश में मैनुअल स्केवेंजिंग नहीं है, इससे कोई मर नहीं रहा है. सोचिए, लोग मर रहे हैं और कैसे एक मंत्री संसद में ये कह रहे हैं कि कोई मौत ही नहीं हुई है.''इमेज स्रोत,

Getty Images/SUDHARAK OLWEपरिभाषा की व्याख्या का सवालसरकार तकनीकी परिभाषा के हवाले से यह दावा कर रही है. इस साल फरवरी में जब केंद्र सरकार ने संसद में 340 लोगों की सफ़ाई करने के दौरान मौत का आंकड़ा पेश किया था तो वहां 'मैनुअल स्केवेंजिंग' शब्द का प्रयोग न करके 'सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई' शब्द का इस्तेमाल किया था.

यानी 2013 के अधिनियम के विपरीत सरकार सीवर साफ़ करने वाले लोगों को मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मान रही है.इस सवाल पर विल्सन कहते हैं, ''ये लोग परिभाषा की दुहाई दे रहे हैं कि मैनुअल स्कैवेंजिंग का मतलब हाथ से मैला ढोना है और वो नहीं हो रहा, लेकिन जो लोग सीवर के अंदर घुस रहे हैं, क्या वो मैला छुए बिना काम कर रहे हैं? वो तो खुद को मैले में डुबो ले रहे हैं.''

''एक्ट तो यही कहता है कि मानव मल-मूत्र, सीवर, सेप्टिक टैंक को अगर किसी भी तरह से हाथ से साफ़ किया जा रहा है तो वह प्रतिबंधित है. तो परिभाषा के आधार पर भी ये झूठ है. उन्हें समझना होगा कि वो ऐसे लोगों की जान के साथ ऐसा नहीं कर सकते.''बेजवाड़ा विल्सन कहते हैं, ''सरकार तो ये भी कह रही है कि ऑक्सीज़न की कमी से देश में लोग नहीं मरे तो क्या हम जो देख रहे हैं या देखा है सबकी पुष्टि सरकार के बयानों से होगी? यह सबसे आसान तरीका है कि कह दो कि कोई डेटा ही नहीं है और सवालों और परेशानियों से बच जाओ क्योंकि अगर आपने डेटा दिया तो आपसे और सवाल पूछे जाएंगे और अगर डेटा सही नहीं हुआ तो लोग सवाल उठाएंगे. इससे बेहतर है, कह दो कि ऐसा हुआ ही नहीं और डेटा ही नहीं है. जवाबदेही से बचने का इससे आसान तरीका और क्या होगा?'' headtopics.com

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Bilkul jhutha sarakar hai जिस तरह कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा इसी तरह 5 सालों में सीवर की सफाई के दौरान किसी भी सफाई कर्मचारी की मौत नहीं हुई संघियों को सच्चाई से उतनी ही नफरत है जितनी महात्मा गांधी से Jumlebaaj mc bhosadiwala Sidhe sidhe bolo koi mara hi nahi Only paida hua h tabhi to population itni badh gayi h

' They ' do need to undergo TRAINING for telling ' LIES ' ,don't they 100 करोड़ परसेंट 🤬 उसी तरह जिस तरह ऑक्सिजन की कमी से कोई नहीं मारा!😏😏😏 कितना आसानी से झूठ बोलते हो मोदी जी सफेद झूठ ये दावा उतना ही सच है जितना ये दावा कि आक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई।

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Besharmi ki had . It's totally safed jhuth! झूठ

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