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तबाही के मुहाने पर अफगान: तालिबान के समक्ष अमेरिकी समर्पण से अफगान में शांति स्थापना की संभावना कमजोर, दक्षिण एशिया में बढ़ा अस्थिरता का खतरा

Opinion- तबाही के मुहाने पर अफगान: तालिबान के समक्ष अमेरिकी समर्पण से अफगान में शांति स्थापना की संभावना कमजोर, दक्षिण एशिया में बढ़ा अस्थिरता का खतरा @Chellaney @BJP4India @INCIndia #Talibans #Afghanistan

24-07-2021 05:13:00

Opinion- तबाही के मुहाने पर अफगान: तालिबान के समक्ष अमेरिकी समर्पण से अफगान में शांति स्थापना की संभावना कमजोर, दक्षिण एशिया में बढ़ा अस्थिरता का खतरा Chellaney BJP4India INCIndia Talibans Afghanistan

बाइडन ने अपने शीर्ष सैन्य कमांडर की राय को भी दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर मुहर लगाई। यह एक ऐसे फैसले का प्रतीक बना जिसमें दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना एक आतंकी मिलिशिया के हाथों परास्त हो गई।

अफगानिस्तान से निकलने की लचर अमेरिकी योजना और जल्दबाजी ने अफगानिस्तान को तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है। जब तालिबान काबुल के आसपास तेजी से अपना कब्जा जमा रहा है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन वापसी के इस कदम को तर्कसंगत ठहरा रहे हैं। इसमें अफगानियों के लिए विध्वंस के संकेत ही छिपे हैं। इससे अमेरिका के प्रति वैश्विक भरोसा भी घटेगा। बाइडन ने अपने शीर्ष सैन्य कमांडर की राय को भी दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर मुहर लगाई। यह एक ऐसे फैसले का प्रतीक बना, जिसमें दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना एक आतंकी मिलिशिया के हाथों परास्त हो गई। तालिबान अफगानिस्तान से अमेरिका को बेदखल करने के अपने स्वप्न को साकार करने के कगार पर है। इसका असर अफगानिस्तान से परे भी दिखेगा। अमेरिकी शक्ति के पराभव की ओर संकेत करने वाला यह घटनाक्रम वैश्विक जिहादी मुहिम का हौसला बढ़ाने का काम करेगा।

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अमेरिका अफगान में राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं आतंकी हमला का प्रतिशोध लेने के लिए गया थाबाइडन ने दुरुस्त ही कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान में राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं गया था। वह तो असल में 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमला का प्रतिशोध लेने के लिए ही वहां घुसा था। इस देश में हाईवे, अस्पताल, बांध और संसद बनाने का जिम्मा भारत जैसे देशों का रह गया। भले ही अमेरिकी सैनिक 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से वापसी करें, लेकिन यह सिलसिला तो एक जुलाई को तबसे ही शुरू हो गया, जब अमेरिका ने वहां अपने आखिरी एयरबेस बगराम में बिजली आपूर्ति बंद कर रातोंरात अपना बोरिया बिस्तर बांध लिया। यह एयरबेस अमेरिकी युद्ध का केंद्र्रंबदु जैसा रहा। इससे सुरक्षा आवरण भरभरा गया। अफगान सुरक्षा बल वहां पहुंचकर स्थिति अपने नियंत्रण में लेते, उससे पहले ही लुटेरे लूट-खसोट कर चले गए। अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी ने वियतनाम की याद दिला दी है। अमेरिका उस युद्ध को भी आधा-अधूरा छोड़कर भाग निकला था। जैसे अमेरिका ने दक्षिण वियतनाम में अपने साथियों को उनके हाल पर छोड़ दिया था उसी तरह यह वापसी अफगानियों को बर्बर इस्लामिक ताकतों की मोहताज बनाकर छोड़ देगी।

बाइडन ने अफगानिस्तान से वापसी को बताया वाजिब बाइडन ने अफगानिस्तान से वापसी को वाजिब बताते हुए कहा कि आखिर अमेरिका की कितनी संतानों के जीवन को जोखिम में डालेंगे? उनकी यह भ्रामक टिप्पणी तथ्यों को नेपथ्य में डाल रही है। एक जनवरी, 2015 को जब अफगानिस्तान में अमेरिका की सैन्य भूमिका समाप्त हुई तबसे उसकी तपिश अफगान सुरक्षा बलों की ही झेलनी पड़ी है। इन वर्षों के दौरान अमेरिका के 99 जवान मारे गए, जबकि अफगान सुरक्षा बलों के 28,000 सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। headtopics.com

बाइडन द्वारा तालिबान समझौते पर अमल एक ऐतिहासिक गलती के रूप में गिना जाएगाअमेरिका का अपने सबसे लंबे युद्ध का समापन तो तार्किक है, लेकिन इस कीमत पर नहीं कि ऐसे आंतकी समूह के साथ सौदेबाजी करनी पड़े, जिसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने पैदा किया और आज भी बदस्तूर उसकी परवरिश कर रही हैं। 1996 से 2001 के बीच तालिबान का शासन क्रूरता की पराकाष्ठा वाला रहा। उसमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का विध्वंस भी शामिल था। इसने 1975-79 के दौरान कंबोडिया में चीन समर्थित कम्युनिस्ट शासन की भयावहता की ही याद दिलाई। गत वर्ष तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तालिबान से किया गया समझौता और अब बाइडन द्वारा उस पर अमल एक ऐतिहासिक गलती के रूप में गिना जाएगा। अमेरिका दुनिया के सबसे दुर्दांत आतंकियों से समझौता किए बगैर और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाले बिना भी अफगानिस्तान से विदाई ले सकता था। बाइडन ने ट्रंप के तमाम फैसलों को पलटने में जरा भी देरी नहीं की, पर अफगानिस्तान के मामले में उन्होंने अपने पूर्ववर्ती का ही अनुसरण किया। इससे भी बदतर बात यह है कि बाइडन की जल्दबाजी ने जमीनी हालात तेजी से बदलकर आसन्न पराजय का द्वार खोल दिया है। अफगानिस्तान में बदलती स्थितियों के गहरे निहितार्थ हैं। इससे वहां भारत के खिलाफ नया आतंकी मोर्चा खड़ा हो सकता है, जिससे भारत का ध्यान चीन से भटक सकता है, जो उसे सीमा पर परेशान किए हुए है। यह आशंका भी है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां अफगान धरती से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां बढ़ा सकती हैं।

अमेरिकी फौज की एक छोटी टुकड़ी का अफगानिस्तान में तैनात रहना उचित होताअमेरिकी फौज की एक छोटी टुकड़ी का अफगानिस्तान में तैनात रहना उचित होता। इससे न केवल अफगान सुरक्षा बलों के लिए मदद का ढांचा मौजूद रहता, बल्कि सुरक्षा आवरण के एकाएक ढहने का जोखिम भी कम हो जाता। साथ ही आतंकियों की ऐशगाहों के फिर से उभरने पर भी विराम लगता। बाइडन इसके बजाय उस समझौते पर अमल में आगे बढ़ गए, जिसका तालिबान पहले से ही उल्लंघन कर रहा है। 25 जून को अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी कह चुके हैं कि अफगानिस्तान का भविष्य अब खुद उसके हाथ में है। असल में तालिबान के समक्ष अमेरिकी समर्पण ने अफगानिस्तान में शांति स्थापना को कमजोर करने के साथ ही दक्षिण एशिया में अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है। जैसा कि गनी ने कहा, ‘अब अमेरिका की भूमिका न्यून हो गई है और शांति या अशांति का सवाल पाकिस्तान पर निर्भर करता है।’

बाइडन के कदम पीछे खींचने से चीन को पाक के जरिए अफगान में पैठ बढ़ाने का मिलेगा मौकाबाइडन के कदम पीछे खींचने से चीन को अपने पिट्ठू पाकिस्तान के जरिये अफगानिस्तान में पैठ बढ़ाने का मौका मिलेगा। अफगान प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच और बेल्ट एंड रोड परियोजना में उसे ईरान एवं पाकिस्तान के बीच सेतु बनाने के लिए चीन तालिबान को वह दो पेशकश करेगा, जिसकी इस समूह को शिद्दत से दरकार है। पहली अंतरराष्ट्रीय मान्यता और दूसरी आर्थिक मदद। तालिबान को रूस से भी मान्यता मिलने की उम्मीद है। ऐसे में तालिबान स्वयं में सुधार करने के बजाय अपने मध्यकालीन तौर-तरीकों को ही और सख्ती से लागू करेगा। तालिबान व्यापक वैश्विक जिहादी मुहिम का ही एक हिस्सा है। ऐसे में अमेरिका को अफगानिस्तान से बाहर खदेड़ने के उसके पूरे होते सपने से दुनियाभर में जिहादी आतंकवाद को नई ताकत मिलेगी। अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने 2014 में लिखा था कि गत चार दशकों के दौरान विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े मसलों पर बाइडन का रुख गलत रहा है। अब अफगानिस्तान में आकार लेती त्रासदी के रूप में बाइडन को लेकर की गई गेट्स की वह तल्ख टिप्पणी पुष्ट होती दिख रही है।

( लेखक सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं ) और पढो: Dainik jagran »

मुंबई मेट्रो: उद्धव ठाकरे के बयान से भाजपा-शिवसेना के साथ आने के कयास तेज

महाविकास आघाड़ी सरकार को बने दो साल होने को आ रहे हैं. पर शायद ही कोई महीना ऐसा बीतता हो जब शिवसेना और बीजेपी के साथ आने की अटकलें ना लगी हों. आज तो खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान ने फिर से इन अटकलों को जिंदा कर दिया. ठाकरे ने कहा- मेरे पूर्व मित्र और यदि हम फिर से एक साथ आते हैं, तो भविष्य के मित्र हो सकते हैं. ठाकरे ने यह बात औरंगाबाद में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में कहा है. देखें वीडियो.

Chellaney BJP4India INCIndia ओहो ! ये तो न्यूज़ है । wow वैसे कभी ये भी छापो के तालिबान के जन्म अमरीका के द्वारा ही हुआ था, जिसका इस्तेमाल उसने रूस के खिलाफ जंग में किया था । हिंसा के कारण पैदा करने वाला हिंसा खत्म कैसे करेगा ? कभी सवाल किए हो ऐसा ? अमरीका एक कोबरा है, किसी का दोस्त नही

Sawan 2021: सावन के महीने में इन कामों की मनाही, खान-पान में भी बरतें सावधानीसावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होने वाला है. सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को है. सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. भोले भक्त इस पूरे महीने शिव को प्रसन्न करने के प्रयत्न करते हैं. इस महीने में कुछ खास कार्य शुभ माने जाते हैं वहीं कुछ कार्य करने की मनाही है. पंडित प्रवीन मिश्रा बता रहे हैं कि सावन के महीने में कौन से काम करने चाहिए और किन कामों को करने से बचना चाहिए.

दिल्‍ली में 24 घंटों में आए कोरोना के 58 नए मामले, एक व्‍यक्ति की मौतदिल्‍ली में कोरोना के नए मामलों की संख्‍या में लगातार कमी आ रही है. देश की राजधानी में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 58 नए मामले दर्ज किए गए जबकि एक शख्‍स की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई. Justice4ECoR_SC_ST_ALP SKMondalIES AshwiniVaishnaw DRMKhurdaRoad EastCoastRail EastShramik agm_ecor jyotsnadevi33 BapiSaradar5 Bapi42567399 Kamalpr78404791 PMOIndia Training training training training training do training do training do

नॉनस्टॉप 100: Maharashtra में बारिश का कहर, भूस्खलन के 3 हादसों में 36 की मौतमहाराष्ट्र के रायगढ़ पर टूटा मौसम का कहर, भूस्खलन के अलग-अलग 3 हादसों में 36 लोगों की मौत. रायगढ़ में रेस्क्यू मिशन के दौरान सिर्फ एक जगह से निकाले गए 32 लोगों के शव, दूसरी जगह ने 4 शव निकाले गए. महाराष्ट्र में बाढ़ की आपदा पर पीएम मोदी ने सीएम उद्धव से किया संवाद, केंद्र से हर संभव मदद का दिया भरोसा. सैलाब की तबाही से जूझ रहे महाराष्ट्र के रायगढ़ में हेलीकॉप्टर से गिराई जा रही राहत सामग्री, कोस्ट गार्ड टीमें राहत और बचाव के मिशन में जुटीं. सतारा में दर्दनाक हादसा, सैलाब में बह गए मां-बेटा. देखें नॉनस्टॉप 100.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की जीत के पीछे जंग से ज़्यादा राजनीति, बोले अफ़ग़ान सलाहकार - BBC Hindiअफ़ग़ानिस्तान सरकार के एक बड़े सलाहकार ने कहा है हाल के समय में तालिबान की लगातार जीत की वजह लड़ाई नहीं बल्कि राजनीति है. 👍 तो जाओ UNO पाक पर लगवाओ परतिबनध!

दैनिक भास्कर पर दबिश के विरोध में संसद ठप: राज्यसभा में विपक्ष ने भास्कर ग्रुप पर छापे के विरोध में नारेबाजी की, लोकसभा में भी हंगामा; दोनों सदन स्थगितमानसून सत्र में दैनिक भास्कर ग्रुप पर सरकारी दबिश का मुद्दा विपक्ष ने जोर-शोर से उठाया है। विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में भास्कर ग्रुप पर इनकम टैक्स विभाग के छापों का विरोध किया और नारेबाजी की। इसके बाद सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में भी हंगामा हुआ, यहां फोन टैपिंग और जासूसी का मुद्दा भी उठा। लोकसभा को भी 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया है। | Parliament Monsoon Session Update; Dainik Bhaskar Tax Raids Rajya Sabha Adjourned As Members Raise Slogans, राज्यसभा में विपक्ष ने भास्कर ग्रुप पर छापे के विरोध में नारेबाजी की, लोकसभा में भी हंगामा; दोनों सदन स्थगित घटिया मोदी

शबनम की फांसी पर विचार की मांग: क्षमा याचना की चिट्ठी राज्यपाल ने योगी सरकार के पास भेजी, वकील की दलील- सूली पर लटकाया तो दुनिया में खराब होगी भारत की छविदेश की पहली महिला को फांसी देने के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील सहर नक़वी ने इस मामले में एक पत्र प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को लिखा था। राज्यपाल ने पत्र का संज्ञान लेते हुए पूरे मामले पर निर्णय लेने के लिए कारागार विभाग को निर्देश दिए हैं। | Governor sent a letter of apology to the UP government, may consider reducing the death sentence; Vakin's argument - If hanged on the cross, the image of Indian women in the world will be spoiled;क्षमा याचना की चिट्ठी राज्यपाल ने यूपी सरकार को भेजी, फांसी की सजा कम करने पर हो सकता है विचार; वकीन की दलील- सूली पर लटकाया तो दुनिया में भारतीय महिलाओं की छवि होगी खराब CMOfficeUP fasi honi chaiye CMOfficeUP But she is women CMOfficeUP और अगर भविष्य में फिर किसी महिला ने ऐसी घिनौनी हरकत को दोहरा दिया तो इसका जिम्मेदार किसको ठहराया जाएगा इस हत्यारन ने अपने पुरे परिवार को बेरहमी से मार डाला,,उस वक्त क्या भारत की छवि को इसने चार चांद लगा दिएथे एक हत्यारन को बचाने के लिए भारत की छवि बिगड़ने की बात करना ठीक नहीं