कोरोना वायरस ने किस तरह से रक्तदान को प्रभावित किया है? - BBC News हिंदी

World Blood Donor Day 2021 : कोरोना वायरस ने किस तरह से रक्तदान को प्रभावित किया है?

14-06-2021 18:10:00

World Blood Donor Day 2021 : कोरोना वायरस ने किस तरह से रक्तदान को प्रभावित किया है?

यह उन लोगों की कहानी है जिन्हें कोविड-19 के दौरान अपनों के लिए ख़ून जुटाने में कड़ी मशक़्क़त करनी पड़ी है.

Getty Imagesआपातकालीन परिस्थितियों के लिए 24 घंटे चलने वाली एक हेल्पलाइन भी शुरू की गई, ताकि किसी भी मरीज़ को ख़ून की कमी की समस्या न हो.यहां ये बात ध्यान देने वाली है कि नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों और भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सुझावों के अनुसार, कोरोना की वैक्सीन लेने के 28 दिनों बाद तक कोई भी ख़ून नहीं दे सकता है.

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जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो गए हैं, उनके लिए भी ऐसी ही गाइडलाइन हैं. जो लोग कोरोना के संक्रमण से पूरी तरह उबर चुके हैं, वो नेगेटिव रिपोर्ट आने के 28 दिनों बाद रक्तदान कर सकते हैं. वहीं, संक्रमित लोगों के नज़दीकी संपर्क में आए लोग नेगेटिव रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद ख़ून दे सकते हैं.

क्या आने वाले दिनों में रक्तदान की कमी एक समस्या बन जाएगी?टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कोरोना की महामारी और प्रतिबंधों को लेकर लोगों के ज़हन में जो डर बैठा है, उसके कारण आने वाले दिनों में भारत में रक्तदान में चिंताजनक रूप से कमी आ सकती है. headtopics.com

इमेज स्रोत,Getty Imagesपहले से ही रक्तदान में कमी की समस्या झेल रहे ब्लड बैंकों के सामने एक टीकाकरण अभियान से एक नई चुनौती खड़ी हो गई है.सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोरोना का टीका लगवाने के 28 दिनों बाद तक कोई रक्तदान नहीं कर सकता है. विशेषज्ञों का आकलन है कि इस नियम से आने वाले दिनों में देश में दस लाख यूनिट तक ख़ून की कमी हो सकती है.

एक और चिंताजनक समस्या है, ख़ून को अस्वीकार करने की. बीबीसी द्वारा आरटीआई के तहत हासिल की गई जानकारी के अनुसार, ख़ून जुटाने में आई कमी के बावजूद कुल जमा किए गए ख़ून का छह प्रतिशत हिस्सा अस्वीकार कर दिया गया.अंशुल गोयल जैसे कार्यकर्ता इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति मानते हैं.

रक्तदान: फ़ायदे और ग़लत अवधारणाएंभारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रक्तदान का केवल ये मक़सद नहीं है कि ज़रूरतमंद लोगों को ख़ून मुहैया कराया जा सके.रक्तदान के कई अन्य फ़ायदे भी हैं:रक्तदान से दिल की बीमारियां होने की आशंका कम होती है.

रक्तदान करने से ख़ासतौर से मर्दों के ख़ून में आयरन का स्तर बना रहता है, इससे दिल का दौरान पड़ने की आशंका काफ़ी कम हो जाती है.नियमित रूप से रक्तदान करने से दिल के दौरे को भी काफ़ी हद तक टाला जा सकता है.इसके अलावा रक्तदान करने से नई रक्त कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया तेज़ होती है. headtopics.com

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रक्तदान करना बहुत तरह के कैंसर से क़ुदरती सुरक्षा कवच हासिल होता है.इमेज स्रोत,Getty Imagesहालांकि, बहुत से लोग ये समझते हैं कि ख़ून दान कर देने से शरीर में कमज़ोरी आ जाती है. ये बिलकुल ग़लत सोच है.सच तो ये है कि रक्तदान करने से शरीर में नया ख़ून और नई रक्त कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया तेज़ होती है. रक्तदान करने से ख़ून में जो कमी आती है, उसकी भरपाई शरीर केवल दो महीने में कर लेता है.

इसके अलावा, ख़ून देने वाले को अपनी सेहत के बारे में उपयोगी जानकारियां मिलती हैं. रक्तदान करने वालों को ख़ून देने से पहले अपनी सेहत की जांच करानी पड़ती है. इस दौरान जो मिनी ब्लड टेस्ट होता है, उससे लोगों को सभी ज़रूरी जानकारियां हासिल होती हैं.यह भी पढ़ें

#HisChoice: 'हां, मैं स्पर्म बेचता हूं पर यह कोई गुनाह नहीं'परीक्षण के दौरान अगर कोई ख़ून देने वाला किसी ख़ास बीमारी से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे सही समय पर इसकी जानकारी मिल जाती है. इस दौरान उस इंसान की पहचान और जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है.

इस तरह, रक्तदान से न केवल इसे पाने वाले को बल्कि ख़ून देने वाले को भी कई फ़ायदे होते हैं. सभी सेहतमंद लोगों को इसके ज़रिए पूरे समाज की सेवा करने का भी मौक़ा मिलता है.रक्तदान को महादान कहना बिल्कुल सही है. क्योंकि तकनीक की तमाम प्रगति के बावजूद, अब तक इंसान प्रयोगशाला में ख़ून की एक भी बूंद नहीं तैयार कर सका है. इस तरह ख़ून को ऊपरवाले की सबसे बड़ी रचना कहा जाता है. headtopics.com

ख़ून की अहमियत और रक्तदान की उपयोगिता समझने के लिएकौन, कब और कैसे रक्तदान कर सकता है?इमेज स्रोत,नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल की वेबसाइट के मुताबिक़,18 से 65 साल की उम्र के सभी सेहतमंद महिलाएं और पुरुष रक्तदान कर सकते हैं.पुरुष हर दो महीने में रक्तदान कर सकते हैं. वहीं, महिलाएं हर तीन महीने के अंतर पर ख़ून दे सकती हैं.

यह भी पढ़ें'गोल्डन ब्लड' जो बचा सकता है सबकी जानहालांकि, सभी ब्लड बैंकों को चाहिए कि वो रक्तदान करने वालों की सेहत को लेकर, काउंसिल की सभी गाइडलाइंस का पालन करें. इन दिशा-निर्देशों के अनुसार:रक्तदान करने वाले का वज़न 45 किलोग्राम से कम नहीं होना चाहिए.

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रक्तदान के वक़्त देने वाले का ब्लड प्रेशर और उसके शरीर का तापमान नियमित होना चाहिए.रक्तदान करने वाले के हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5 ग्राम से कम बिल्कुल नहीं होना चाहिए.जिन महिलाओं की पिछले साल बच्चे हुए हों या फिर जो अभी भी अपने बच्चों को दूध पिलाती हों, वो क़तई रक्तदान नहीं कर सकती हैं.

ख़ून देने वाले का रक्तदान के तीन महीने पहले तक मलेरिया का इलाज नहीं हुआ होना चाहिए.ख़ून देने वाले को रक्तदान के एक महीने पहले तक डिप्थीरिया, हैजा, टाइफाइड, टिटनस, प्लेग और गामा ग्लोबिन के टीके नहीं लगे होने चाहिए. रक्तदान से एक साल पहले के दौरान रक्तदाता को रैबीज़ का टीका भी नहीं लगा होना चाहिए.

रक्तदान से 12 महीने पहले के समय में रक्तदाता ने न तो अपने शरीर पर टैटू बनवाया हो और न ही उसके बदन पर एक्यूपंक्चर के निशान होने चाहिए.ख़ून देने वाले को हिपेटाइटिस-बी और सी, टीबी, एचआईवी और कुष्ठ रोग से नहीं पीड़ित होना चाहिए. इसके अलावा रक्तदाता को किसी तरह के कैंसर का मरीज़ भी नहीं होना चाहिए.

ख़ून देने वाले को दिल की कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए.अगर कोई इंसान डायबिटीज़ का मरीज़ है तो, जो लोग खान-पान पर नियंत्रण या मुंह से ली जाने वाली दवाओं के ज़रिए अपना इलाज कर रहे हों, वो रक्तदान कर सकते हैं. लेकिन, जो लोग डायबिटीज़ कम करने के लिए इंसुलिन ले रहे हों, वो ख़ून नहीं दे सकते हैं.

हालांकि, आप रक्तदान के पात्र हैं या नहीं, इस बारे में और जानकारी आप अपने नज़दीकी ब्लड बैंक से हासिल कर सकते हैं.अंतरराष्ट्रीय रक्तदाता दिवसइमेज स्रोत,इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़,वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन पर हर साल विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है. कार्ल लैंडस्टीनर ने ही इंसानों के ब्लड ग्रुप की खोज की थी.

इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2004 में की थी.इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट सोसाइटीज़, स्वस्थ लोगों को ख़ुद से रक्तदान के लिए जागरूक करने का काम कर रही है.मई 2005 में 58वें विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान, 192 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दिन को सभी सदस्य देशों में मनाने का फ़ैसला किया था. इसका मक़सद दुनिया भर के रक्तदाताओं द्वारा इंसानियत के नाम पर किए जाने वाले इस काम के लिए उनका सम्मान करना है.

इस साल विश्व रक्तदाता दिवस का नारा है: 'ख़ून दीजिए और दुनिया की धड़कनें चलाते रहिए.'अंतररराष्ट्रीय रक्तदाता दिवस के वैश्विक कार्यक्रम का आयोजन इस बार इटली की राजधानी रोम में आयोजित किया जाएगा. और पढो: BBC News Hindi »

जनसंख्या कानून पर UP में फिर सियासत तेज, विधेयक का ड्राफ्ट तैयार, देखें दंगल

पूरे देश की निगाहें अब 2022 की ओर टिकी है क्योंकि 2022 में ही देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सत्ता सिंहासन का फैसला होगा. जब यूपी में विधानसभा के चुनाव होंगेय मैदान मारने के लिए सियासी दलों की तैयारी अभी से शुरु हो चुकी है और इसी बीच योगी सरकार ने नई जनसंख्या नीति लाने की तैयारी करके नया मुद्दा छेड़ दिया है. लेकिन उससे पहले विधि आयोग के ड्राफ्ट से सूबे में सियासी हलचल फिर तेज हो गई है. सवाल है कि क्या यूपी में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाने का फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ का चुनावी स्टंट. देखें वीडियो.

महाराज जी,सादर प्रणाम🙏myogiadityanath चरण स्पर्श कासगंज उत्तर प्रदेश तिरंगा रैली निकालते के समय चंदन गुप्ता शहीद हो गए आजतक उनके परिवार के लोगों को न्याय (चंदन चौक,बहन को सरकारी नोकरी,दोषियों को सज़ा) की दरकार है आप से निवेदन है की कासगंज के शहीद चंदन को न्याय दें🙏 कोरोना काल ने रक्तदान को बहुत बुरी तरह से प्रभावित किया है । जो लोग भूतकाल में कोरोना संक्रमित हुए हैं। वह लोग यह सोचकर रक्तदान नहीं कर रहे हैं कि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाएगा। जिस कारण वश रक्तदान में भारी गिरावट आई है।

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क्या कोरोना संक्रमण से बचाव में कारगर है शाकाहार, वैज्ञानिकों ने किया अध्‍ययन, आप भी जानेंजब से कोरोना महामारी की शुरुआत हुई है तब से यह बहस चल रही है कि कुछ खाद्य पदार्थ या विशेष प्रकार की डाइट कोरोना से बचाव में सहायक हो सकती है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस तरह के दावे कितने विश्वसनीय हैं।

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