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किताबों से बढ़ती दूरी

किताबों से बढ़ती दूरी in a new tab)

22-10-2021 00:43:00

किताबों से बढ़ती दूरी in a new tab)

जल्द से जल्द किसी चीज को सीखने-जानने की इच्छा ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग बनाती है।

देश में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच जन-जन तक है। युवा पीढ़ी को इस क्रांति से बेहद लाभ मिल रहा है। कोरोना महामारी में अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच की कड़ी यह स्मार्टफोन ही था। लोग अपने घरों में कैद थे, कोई किसी से मिलजुल नहीं सकता था, तब स्मार्टफोन के माध्यम से लोग एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे। पर हमारी जरूरत का यह सामान कब हमारी आदत बन गया, पता ही नहीं चला। युवा पीढ़ी अपना वक्त गेम खेलने, विडियो देखने, चैटिंग करने, आदि में बर्बाद करने लगी। यह हम सब के लिए एक चिंता का विषय है। इसने जो महत्त्वपूर्ण चीज हमसे छीन ली, वह है धैर्य।

यूपी: प्रैक्टिकल परीक्षा के नाम पर दूसरे स्कूल ले जाकर 17 छात्राओं का शोषण - BBC News हिंदी '30 दिनों के अंदर दोषी आर्मी मैन को करें अरेस्ट, AFSPA तुरंत हटाएं', नगा जनजाति समूह ने सौंपे 5 सूत्रीय ज्ञापन धर्म परिवर्तन के बाद रिजवी बोले: इस्लाम का दूसरा नाम ही आतंक है, जिसकी शुरुआत 1400 साल पहले अरब के रेगिस्तान में हुई

जैसे-जैसे हम विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे हमारा धैर्य कम होता जा रहा है। किसी एक किताब को पूरा करने में सामान्यत: एक हफ्ते का वक्त लगता है। घटते धैर्य के कारण एक बड़ा हिस्सा किताब पढ़ना छोड़ कर सिनेमा देखने लगा। शुरुआती दौर में हिंदी फिल्में ढाई से तीन घंटे की हुआ करती थीं। फिर फिल्म निर्माताओं ने दर्शकों के घटते धीरज को देखते हुए फिल्मों को और छोटा कर दिया। अब फिल्में अधिक से अधिक दो घंटे में पूरी हो जाती हैं। पर लोगों का धैर्य अब दो घंटे की फिल्म देखने की भी गवाही नहीं दे रहा। एक बड़ा हिस्सा यू-ट्यूब पर पंद्रह-बीस मिनट का विडियो देखने लगा। यूट्यूब पर विडियो देखने वाली युवा पीढ़ी अब ‘रील्स’ देखने लगी है। मात्र एक मिनट का विडियो। एक मिनट में मनोरंजन। रील्स से भी एक कदम आगे ‘मीम’ का प्रचलन उभर आया। एक तस्वीर को इस तरह बनाया जाता है, जिससे लोगों को हंसाया जा सके। मनोरंजन मात्र कुछ सेकेंड में। हफ्तों लगा कर एक किताब पढ़ने से अच्छा है, कुछ सेकेंड में मीम देख कर हंसना। कौन है इसके लिए जिम्मेदार? घटता धैर्य। हम हमेशा हड़बड़ी में रहते हैं। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हमारे पास वक्त ही नहीं है कोई किताब पढ़ने का। हम बस दौड़ते जा रहे हैं।

ऐसा नहीं कि सिर्फ किताबों के प्रति हम सब का रुझान कम हुआ है, बल्कि बहुत सारी चीजें इस भाग-दौड़ के चक्कर में पीछे छूट गई हैं। मसलन, बुजुर्गों के साथ समय बीतना, बागवानी करना, सुबह सैर को जाना, मोहल्ले के छोटे बच्चों से बातचीत करना, आदि। आज के दौर में किताब पढ़ना तो दूर, लोग किताब खरीदना भी नहीं चाहते। हिंदी साहित्य की स्थिति तो और खराब है। अंग्रेजी व्यापार की भाषा है, इसलिए लोगों को मजबूरन पढ़ना पड़ रहा है। हिंदी प्यार की भाषा है, इसलिए एक बड़ी आबादी इसे अनदेखा कर रही है। हिंदी अखबारों की भी युवाओं के बीच लोकप्रियता घटती जा रही है। प्रतियोगिता निकालने के चक्कर में हिंदी पट््टी के लोग भी अंग्रेजी अखबार पढ़ रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? हिंदी किताबों और अखबारों से युवा पीढ़ी दूर क्यों हो रही है? क्या घटते धैर्य के साथ कोई और घटक भी है, जिस पर काम करने की अत्यंत आवश्यकता है? headtopics.com

पाठक कम हो रहे हैं। उन्हें कैसे वापस लाया जाए, इस पर विमर्श की आवश्यकता है। इंटरनेट न चाहते हुए भी लोगों को अपने संजाल में फंसा लेगा। आप का वक्त इंटरनेट पर इस प्रकार बर्बाद होगा कि आपको ग्लानि के बजाय आनंद आने लगेगा। यह आनंद क्या किताबों और अखबारों से संभव है? जिस सुगमता से ज्ञान इंटरनेट पर मौजूद है, क्या उसे किताबों और अखबारों के माध्यम से मुहैया नहीं कराया जा सकता? यह सिर्फ लेखकों और संपादकों की जिम्मेदारी नहीं है। उनसे अधिक, कहीं न कहीं हम पाठकों की भी है। हम सब को यह प्रण लेना चाहिए कि महीने में कम से कम दो किताबें जरूर पढ़ेंगे। ज्ञान अर्जित करने के लिए वक्त देना पड़ता है। धैर्य ज्ञान की कुंजी है। बेशक ‘रील्स’ में किसी का नृत्य देख कर मनोरंजन किया जा सकता है, लेकिन जो ज्ञान किताबों से मिलता है, वह कहीं और से मिल पाना असंभव है। इसलिए किताबों से प्रेम करना जरूरी है। आचार-विचार की शुद्धि बिना किताबों के संभव नहीं। वह विकास ही किस काम का, जहां लोगों में मानवीयता, समझदारी, संवेदना और दया भाव न हो!

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गलत पहचान, गई 14 जान... Nagaland Firing पर सियासी उबाल, देखें हल्ला बोल

नगालैंड में एक गलत पहचान की वजह से 14 लोगों की मौत हो गई. गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जो बयान दिया उसके मुताबिक सुरक्षाबलों को एक गाड़ी में उग्रवादियों के होने की सूचना मिली थी. गाड़ी आई तो रुकने के लिए कहा गया, नहीं रुकी तो जवानों ने फायरिंग की और 6 लोगों की मौत हो गई. उसके बाद लोगों का गुस्सा भड़का तो बेकाबू भीड़ को कंट्रोल करने की कोशिश में 8 और की जान चली गई. अब नगालैंड को लेकर सियासत तेज है और एक बार फिर से AFSPA को हटाने की मांग शुरु हो गई है. हल्ला बोल में देखें अहम बहस.

उत्तराखंड: मूसलाधार बारिश से मरने वालों की संख्या 47 हुई, नैनीताल से संपर्क बहालउत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो गई है. भारी बारिश से कई मकान ढह गए. कई लोग अब भी मलबे में फंसे हुए हैं. सड़कों, पुलों और रेल पटरियों को नुकसान पहुंचा हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य भर में भारी क्षति हुई है. सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा. धामी ने राहत प्रयासों के लिए प्रत्येक ज़िलाधिकारियों को 10-10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

अरब सागर से उठे चक्रवात से हुई उत्‍तराखंड में हुई भीषण बारिश, देशभर में दिखा असरतीन दिनों तक हुई भारी बारिश ने हर किसी को हैरान और परेशान कर दिया है। यह भीषण रूप शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के साथ अरब सागर से उठे तूफान के कारण रहा। इसका असर देश के अधिकांश हिस्सों के साथ मध्य हिमालय तक दिखा। ☎️HELLO____ इंद्र भगवान 📞 मोटर बंद कर दो पानी भर गई

उत्तराखंड के बाद बंगाल से सिक्किम तक बारिश से तबाही, दार्जिलिंग में लैंडस्लाइडबंगाल के जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के पड़ाही इलाकों पर पिछले 45 घंटे से लगातार हो रही बारिश के चलते कई जगहों पर लैंडस्लाइड की घटनाएं सामने आई हैं. महानदी में एनएच 55 पर भूस्खलन हुआ है. सुकना तक सड़क जाम हो गई है. कुरस्योंग में लैंडस्लाइड के चलते एक घर को भी नुकसान पहुंचा है. बताया जा रहा है कि घटना के वक्त घर पर कोई मौजूद नहीं था.

भारत से मैच से पहले अपनों के ही निशाने पर आई पाकिस्तानी टीम - BBC News हिंदीटी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के आग़ाज़ से वहाँ के प्रशंसक काफ़ी नाराज़ हैं. लोग जमकर अपनी ही टीम पर तंज़ कस रहे हैं. 2014 में जितना सामान 100 रुपये में मिलता था उतने ही सामान के 2021 में 200 रुपये ख़र्च करने पड़ते हैं. Pakistan मे सारे पोंके है 😁 westindies ke sath jeeta tha pakistan

उत्तराखंड में भारी बारिश और बाढ़ से कम से कम 47 लोगों की मौत - BBC Hindiमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का हवाई सर्वेक्षण किया और मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की. Modi ji ne Uttrakhand ke 47 logo ke marne pr dukh jahir kiya lekin 500 kisano ke marne pr dukhi nahi huye. Aur na hi Kashmir main mare gaye 9 Jawan 5 Civilian pr dukh jahir kiyaa क्या TV न्यूज़ चैनल वाले आर्यन ख़ान का सहारा लेकर ड्रग्स् का प्रचार प्रसार कर रहे हैं..

आज का जीवन मंत्र: भगवान बलि से नहीं, सत्य बोलने से और सेवा करने से प्रसन्न होते हैंकहानी - महात्मा गांधी जी चंपारण के एक गांव में सेवा कार्य कर रहे थे। उसी समय वहां से जुलूस निकल रहा था। गांधी जी को उत्सुकता जागी कि चंपारण में कुछ तो अलग होता है, मैं भी जाकर देखूं कि यहां कैसा जुलूस निकल रहा है। | aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, story of mahatma gandhi, prerak katha GodiMedia se bhi prassan hotey hain bhagwaan Jo sacche aur acche ho.un ke sath kabi bura nhi hota 😇😇 बलि बलपूर्वक नहीं होनी चाहिए