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आइएमएफ ने भी भारत के नए कृषि कानूनों पर लगाई मुहर, कहा- इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता

आइएमएफ ने भी भारत के नए कृषि कानूनों पर लगाई मुहर, कहा- इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता #IMF #GeetaGopinath #agriculturelaw

27-01-2021 16:56:00

आइएमएफ ने भी भारत के नए कृषि कानूनों पर लगाई मुहर, कहा- इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता IMF GeetaGopinath agriculturelaw

गोपीनाथ ने नए कृषि कानूनों पर एक सवाल के जवाब में कहा ये कृषि कानून खासतौर से विपणन क्षेत्र से संबंधित हैं। इनसे किसानों के लिए बाजार बड़ा हो रहा है। अब वे बिना कर चुकाए मंडियों के अलावा विभिन्न स्थानों पर भी अपनी पैदावार बेच सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा है कि भारत के नए कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है, लेकिन साथ ही कमजोर किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को सुधारों की जरूरत है। गोपीनाथ ने कहा कि बुनियादी ढांचा समेत ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधारों की जरूरत है। भारत सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानूनों को लागू किया था और इन्हें कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया जो बिचौलियों को खत्म करेंगे और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की आजादी देंगे। 

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कमजोर किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा की जरूरत भी जताईगोपीनाथ ने नए कृषि कानूनों पर एक सवाल के जवाब में कहा, 'ये कृषि कानून खासतौर से विपणन क्षेत्र से संबंधित हैं। इनसे किसानों के लिए बाजार बड़ा हो रहा है। अब वे बिना कर चुकाए मंडियों के अलावा विभिन्न स्थानों पर भी अपनी पैदावार बेच सकेंगे। हमारा मानना है कि इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है।' उन्होंने कहा, 'जब भी कोई सुधार किया जाता है तो उससे होने वाले बदलाव की कीमत होती है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे कमजोर किसानों को नुकसान न पहुंचे। यह सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराई जा सकती है। अभी एक फैसला किया गया है और देखना होगा कि इसका क्या नतीजा सामने आता है।'

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West Bengal में ध्रुवीकरण से किसे होगा फायदा, चुनाव में क्या हिंदु-मुस्लिम पर जंग? देखें श्वेतपत्र

पश्चिम बंगाल का चुनाव क्या है? ये समझ लीजिए कि इतिहास करवट ले रहा है. अब से 75 साल पहले, यानि 1946 में बंगाल की ज़मीन संप्रदाय के नाम पर डायरेक्ट एक्शन की तलवार से बंटी थी. उस बंटवारे के ठीक 75 साल बाद पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव इसकी सियासी जमीन में गहरी लकीरें खींचते दिख रहे हैं. क्यों और कितना जरूरी है ‘हम’ यानि हिंदू मुस्लिम फैक्टर पश्चिम बंगाल की राजनीति में और क्या इसका असर चुनावों पर पड़ेगा? 2011 की जनगणना ने पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी 27 प्रतिशत दर्ज की थी. कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या के हिसाब से पश्चिम बंगाल देश में चौथे नंबर पर है. लेकिन पहले तीन राज्य लक्षद्वीप, जम्मू-कश्मीर और असम की कुल मुस्लिम आबादी को जोड़ भी दिया जाए तब भी पश्चिम बंगाल के 2 करोड़ 46 लाख मुसलमान उन राज्यों से 50 लाख ज्यादा बैठते हैं. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल की सियासत में ये वोट हमेशा अहम रहे हैं. देखें श्वेतपत्र, श्वेता सिंह के साथ.

घाट घाट का पानी पीने वाली से क्या कहना ये रिश्ता क्या कहलाता है अब LW और कांग्रेस की गोद में बैठकर पत्रकारिता करने वालों को IMF आईएमएफ भी बिका हुआ लगेगा। Ye kisan h hi nhi toh enko kya pta fayda aur nuksan😎🤗👍 Satya hai Rahul Maya vipaksh Jawab do सालों सब मिलकर किसानो की वाट तो लगा दिये जयहिन्द😂देश के किसानों से बेहतर खेती को कौन जानता होगा पागल ही होंगे वे लोग जो ऐसे सर्टिफ़िकेट से देश को उल्लू बनाने के काम में लगे है गम्भीर बात ये है कि भाजपा नेतृत्व क्यों जनता किसान ज़मीन उपज के निर्णयों को पूँजीपतियों को सौंपना चाहता है क्या भारत सरकार निकम्मे लोगों से भरी

Breaking: दिल्ली पुलिसवालों के परिवार वाले आज विरोध प्रदर्शन करेंगे सही भी है, कोई अपने भाई पति बेटे को मरने के लिए थोड़े ही भर्ती करवाता है, मतलब सिपाही की जान की कोई कीमत नही है क्या? वो मरता रहेगा क्या? कृषि के नाम पर कर की हेराफेरी करके धनकुबेर बने कृषकों द्वारा आम-आदमी के रूप में स्थापित हो चुके गरीब किसानों को सदैव शोषित-पीड़ित-प्रताड़ित बनाए रखने के लिए तथैव इन्हें खुले बाजार से दूर रखने हेतु हीं भ्रष्टाचारियों व विपक्षियों की मदद से इस किसान-हितैषी कानून का विरोध हो रहा ।

सब बिके हुए है Sari duniya ko samagh aa gaya kisan kanoon lekin ek congress ke Yuvraj aur unki party ko samagh nahi aa rahi isliye ye kisan aandolan ka bakheda khada kiya hai punjab se. Pappu ko bhi bata do