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2-डीजी: डीआरडीओ के तीन वैज्ञानिकों की देन है कोरोना की दवा, जानिए इनके बारे में

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहे देश के लिए एक नई दवा की खबर नई उम्मीद लेकर आई है। भारत के औषधि महानियंत्रक

10-05-2021 22:05:00

2-डीजी : डीआरडीओ के तीन वैज्ञानिकों की देन है कोरोना की दवा , जानिए इनके बारे में 2DG DRDO CoronaMedicine DRDO _India PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहे देश के लिए एक नई दवा की खबर नई उम्मीद लेकर आई है। भारत के औषधि महानियंत्रक

विज्ञापनडॉ. सुधीर चांदना, डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. अनिल मिश्रा।- फोटो : अमर उजालापढ़ें अमर उजाला ई-पेपरकहीं भी, कभी भी।ख़बर सुनेंख़बर सुनें2-डीजी (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) दवा को ऐसे समय मंजूरी मिली है जब भारत कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर से घिरा है और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना पर भारी दबाव है। खास बात यह है कि यह दवा पाउडर के रूप में पैकेट में आती है, इसे पानी में घोलकर पीना होता है। संकट के समय में वरदान मानी जा रही इस दवा को तैयार करने के पीछे तीन वैज्ञानिकों का दिमाग रहा है। ये हैं डॉ. सुधीर चांदना, डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. अनिल मिश्रा।

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डॉ. सुधीर चांदनाहिसार के रहने वाले सुधीर चांदना डीआरडीओ में अतिरिक्त निदेशक हैं और उन्होंने इस दवा को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। चांदना का जन्म अक्तूबर 1967 में हिसार के पास रामपुरा में हुआ था। उनके पिता हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत थे। उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से बीएससी और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी की। साल 1991 से 1993 तक उन्होंने ग्वालियर और फिर दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियल मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में अपनी सेवा दी।

डॉ. अनंत नारायण भट्टउत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले डॉ. अनंत नारायण भट्ट डीआरडीओ के न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जन्मस्थान गगहा में हुई और बीएससी उन्होंने किसान पीजी कॉलेज से की। इसके बाद उन्होंने अवध विश्वव्द्यालय से बायोकेमिस्ट्री में एमएससी की। सीडीआरआई लखनऊ से उन्होंने ड्रग डेवलपमेंट (औषधि विकास) विषय में पीएचडी पूरी की। इसके बाद वह बतौर वैज्ञानिक डीआरडीओ से जुड़ गए। headtopics.com

डॉ. अनिल मिश्रामूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले डॉ. अनिल मिश्रा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टरल फेलो रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमएससी की थी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की थी। वह डीआरडीओ के न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में वैज्ञानिक हैं और साइक्लोट्रॉन एडं रेडियो फार्मास्यूटिकल साइंसेज डिवीजन में भी सेवाएं दे रहे हैं। साल 2002 से 2003 तक वह जर्मनी के प्रतिष्ठित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं।

इस दवा को डीआरडीओ की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला नामिकीय औषिध तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) ने हैदराबाद के डॉ.रेड्डी लेबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है। इस संबंध में जारी एक बयान के मुताबिक पिछले साल शुरुआत में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तैयारियों करने का आह्वान किया गया, जिसके बाद डीआरडीओ ने इस दवा पर काम शुरू किया।

इस दवा को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। इस दवा से कीमती जिंदगियों के बचने की उम्मीद है क्योंकि यह दवा संक्रमित कोशिकाओं पर काम करती है। यह कोविड-19 मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम करती है।’

मंत्रालय ने कहा, ‘एक मई को डीसीजीआई ने इस दवा को कोविड-19 के मध्यम एवं गंभीर लक्षण वाले मरीजों के इलाज के लिए सहायक पद्धति के रूप में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी। सामान्य अणु और ग्लूकोज के अनुरूप होने की वजह से इसे भारी मात्रा में देश में ही तैयार व उपलब्ध कराया जा सकता है।’ सहायक पद्धति वह इलाज है जिसका इस्तेमाल प्राथमिक इलाज में मदद करने के लिए किया जाता है। headtopics.com

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रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘डीआरडीओ की 2-डीजी दवा वायरस से संक्रमित कोशिका में जमा हो जाती है और वायरस की वृद्धि को रोकती है। वायरस से संक्रमित कोशिका पर चुनिंदा तरीके से काम करना इस दवा को खास बनाता है।’ दवा के असर के बारे में मंत्रालय ने बताया कि जिन लक्षण वाले मरीजों का 2डीजी से इलाज किया गया वे मानक इलाज प्रक्रिया (एसओसी) से पहले ठीक हुए।

मंत्रालय ने कहा, ‘इस दवा से इलाज करने पर मरीजों के विभिन्न मापदंडों के समान होने में एसओसी के औसतन समय के मुकाबले 2.5 दिन कम समय लगा।’ बयान के मुताबिक, ‘चिकित्सकीय परीक्षण के नतीजों के मुताबिक इस दवा से अस्पताल में भर्ती मरीज जल्दी ठीक हुए और उनकी अतिरिक्त ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हुई। 2डीजी से इलाज कराने वाले अधिकतर मरीज आरटी-पसीआर जांच में निगेटिव आए।’

विस्तार2-डीजी (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) दवा को ऐसे समय मंजूरी मिली है जब भारत कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर से घिरा है और देश के स्वास्थ्य अवसंरचना पर भारी दबाव है। खास बात यह है कि यह दवा पाउडर के रूप में पैकेट में आती है, इसे पानी में घोलकर पीना होता है। संकट के समय में वरदान मानी जा रही इस दवा को तैयार करने के पीछे तीन वैज्ञानिकों का दिमाग रहा है। ये हैं डॉ. सुधीर चांदना, डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. अनिल मिश्रा।

विज्ञापनडॉ. सुधीर चांदनाहिसार के रहने वाले सुधीर चांदना डीआरडीओ में अतिरिक्त निदेशक हैं और उन्होंने इस दवा को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। चांदना का जन्म अक्तूबर 1967 में हिसार के पास रामपुरा में हुआ था। उनके पिता हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत थे। उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से बीएससी और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी की। साल 1991 से 1993 तक उन्होंने ग्वालियर और फिर दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियल मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में अपनी सेवा दी। headtopics.com

डॉ. अनंत नारायण भट्टउत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले डॉ. अनंत नारायण भट्ट डीआरडीओ के न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जन्मस्थान गगहा में हुई और बीएससी उन्होंने किसान पीजी कॉलेज से की। इसके बाद उन्होंने अवध विश्वव्द्यालय से बायोकेमिस्ट्री में एमएससी की। सीडीआरआई लखनऊ से उन्होंने ड्रग डेवलपमेंट (औषधि विकास) विषय में पीएचडी पूरी की। इसके बाद वह बतौर वैज्ञानिक डीआरडीओ से जुड़ गए।

डॉ. अनिल मिश्रामूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले डॉ. अनिल मिश्रा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टरल फेलो रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमएससी की थी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की थी। वह डीआरडीओ के न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में वैज्ञानिक हैं और साइक्लोट्रॉन एडं रेडियो फार्मास्यूटिकल साइंसेज डिवीजन में भी सेवाएं दे रहे हैं। साल 2002 से 2003 तक वह जर्मनी के प्रतिष्ठित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं।

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जानिए इस दवा के बारे मेंइस दवा को डीआरडीओ की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला नामिकीय औषिध तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) ने हैदराबाद के डॉ.रेड्डी लेबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है। इस संबंध में जारी एक बयान के मुताबिक पिछले साल शुरुआत में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तैयारियों करने का आह्वान किया गया, जिसके बाद डीआरडीओ ने इस दवा पर काम शुरू किया।

इस दवा को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। इस दवा से कीमती जिंदगियों के बचने की उम्मीद है क्योंकि यह दवा संक्रमित कोशिकाओं पर काम करती है। यह कोविड-19 मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम करती है।’

मंत्रालय ने कहा, ‘एक मई को डीसीजीआई ने इस दवा को कोविड-19 के मध्यम एवं गंभीर लक्षण वाले मरीजों के इलाज के लिए सहायक पद्धति के रूप में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी। सामान्य अणु और ग्लूकोज के अनुरूप होने की वजह से इसे भारी मात्रा में देश में ही तैयार व उपलब्ध कराया जा सकता है।’ सहायक पद्धति वह इलाज है जिसका इस्तेमाल प्राथमिक इलाज में मदद करने के लिए किया जाता है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘डीआरडीओ की 2-डीजी दवा वायरस से संक्रमित कोशिका में जमा हो जाती है और वायरस की वृद्धि को रोकती है। वायरस से संक्रमित कोशिका पर चुनिंदा तरीके से काम करना इस दवा को खास बनाता है।’ दवा के असर के बारे में मंत्रालय ने बताया कि जिन लक्षण वाले मरीजों का 2डीजी से इलाज किया गया वे मानक इलाज प्रक्रिया (एसओसी) से पहले ठीक हुए।

मंत्रालय ने कहा, ‘इस दवा से इलाज करने पर मरीजों के विभिन्न मापदंडों के समान होने में एसओसी के औसतन समय के मुकाबले 2.5 दिन कम समय लगा।’ बयान के मुताबिक, ‘चिकित्सकीय परीक्षण के नतीजों के मुताबिक इस दवा से अस्पताल में भर्ती मरीज जल्दी ठीक हुए और उनकी अतिरिक्त ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हुई। 2डीजी से इलाज कराने वाले अधिकतर मरीज आरटी-पसीआर जांच में निगेटिव आए।’

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वारदात: अब जेल में ही कटेगी Ram Rahim की सारी जिंदगी, तीसरी बार उम्र कैद

25 अगस्त 2017, दो साध्वियों से यौन शोषण में राम रहीम को पहली उम्र क़ैद. 17 जनवरी 2019, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के क़त्ल में राम रहीम को दूसरी उम्र क़ैद. और अब 18 अक्टूबर 2021, मैनेजर रंजीत सिंह के मर्डर में राम रहीम को तीसरी उम्र क़ैद. बीस साल वाली पहली उम्र क़ैद को छोड़ दें, तो बाक़ी उम्र क़ैद उम्र भर की है. 60 से ऊपर के हो चुके गुरमीत राम रहीम की बची कुची उम्र क़ायदे से अब जेल की चारदिवारी के अंदर ही गुज़रेगी. राम रहीम की सज़ाओं की फेहरिसत में नई फेहरिस्त सोमवार को जुड़ी, पंचकूला सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह के क़त्ल के इल्ज़ाम में राम रहीम को उम्र कैद की सज़ा दी है. देखिए वारदात का ये एपिसोड.

DRDO_India PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI घंटा मेरा.......🛎🛎 कोरोना की दवाई इतनी ही कारगर है तो लोग इतना क्यो मर रहे हैं DRDO_India PMOIndia MoHFW_INDIA ICMRDELHI TMC, congress से आए नेताओ को अहम् भूमिका दे कर High comman ने यह संकेत, यह messg भी दिया है कि जो नेता दूसरी पार्टियों से BJP में शामिल हुए हैं मेहनत करेंगें result देंगे, इनाम भी मिलेगा। सवाल है क्या BJP अब मिर्जाफरो की मदद से चलेगी?

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कोरोना की नई दवा 2-DG है इन वैज्ञानिकों के दिमाग की उपज डीआरडीओ की यह दवा ऐसे समय में आई है जब कोरोना की तीसरी लहर की बात हो रही है। वहीं, देशभर में ऑक्सिजन की क‍िल्‍‍‍‍लत बनी हुई है। दूसरी लहर से रेकॉर्ड मौतें हो रही हैं और स्वास्थ्य संसाधनों पर भारी दबाव है। अच्छी बात यह है कि 2-डीजी दवा पाउडर के रूप में पैकेट में आती है और इसे पानी में घोल कर पीना होता है। NoBrain-Lockdown India SaveDown India Appeal Save India& Citizens-to break the chain total lockdown for a month Aggressive lockdown on unlawful illegal Politics Aggressive lockdown onall political parties Protect what left& repair-Till Vaccinate all MakeSense of We all beingHuman कोरोना की नई दवा के बारे में जाने : PMOIndia narendramodi BJP4India INCIndia aajtak RahulGandhi rajeevdhyani ओर कृपया कर यह भी जान लीजिए कि इसी DRDO की स्थापना कांग्रेस के शासनकाल में वर्ष 1958 में नेहरू जी ने की थी.....

IIT कानपुर के सब रजिस्ट्रार ने खुदकुशी की, बेटे के कोरोना संक्रमित होने से थे परेशानआईआईटी कानपुर के सब रजिस्ट्रार सुरजीत दास ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वो कुछ दिनों से बेटे के कोरोना संक्रमित होने से परेशान चल रहे थे. हालांकि, उनकी आत्महत्या करने का कोई कारण अभी तक सामने नहीं आया है. Probelm har place pe hai but probelms ko khud pe havi na hone de. Khud ki positivity banye rakhe Situation jaldii thik hogi. jaan dena se sab thik ho jye to aj hamri country🇮🇳 itni badi problem se lad rahii hoti.🙏🙏🙏. Jai hind🇮🇳

उत्तर प्रदेश: कोरोना वायरस की दूसरी लहर आने के बाद चौथे भाजपा विधायक की मौतउत्तर प्रदेश में रायबरेली के सलोन सीट से भाजपा विधायक दल बहादुर कोरी का लखनऊ के एक निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमण के बाद होने वाली समस्याओं के कारण निधन हो गया. पिछले महीने तीन अन्य भाजपा विधायकों की मौत हो चुकी है. पिछले साल दो भाजपा विधायकों की मौत इस महामारी के कारण हुई थी. अब जगे, old news. What will happen in by-election,? Thakur nahi.

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थाईलैंड की महिला की लखनऊ में कोरोना से मौत, कमिश्नर ने दिए जांच के आदेशपुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि थाईलैंड की युवती की लखनऊ में कोरोना संक्रमण से मृत्यु के प्रकरण में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट लखनऊ के आदेशानुसार डीसीपी पूर्वी के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा जांच प्रारंभ कर दी गयी है.