लाल क़िले पर झंडा फहराने को लेकर दुनिया भर के अख़बारों ने क्या छापा - BBC News हिंदी

लाल क़िले पर झंडा फहराने को लेकर दुनिया भर के अख़बारों ने क्या छापा

27-01-2021 08:26:00

लाल क़िले पर झंडा फहराने को लेकर दुनिया भर के अख़बारों ने क्या छापा

अमरीका से लेकर पाकिस्तान के अख़बारों ने लाल किले पर किसानों के पहुंचने पर क्या लिखा, पढ़िए इस ख़बर में.

समाप्तरिपोर्ट में इस बार को भी रेखांकित किया गया है कि केंद्र सरकार ने ट्रैक्टर मार्च को रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन वो इसमें नाकाम हुई, इससे पता चलता है कि किसानों के साथ जारी गतिरोध की जड़ें कितनी गहरी हैं. प्रधानमंत्री मोदी अपने राजनीतिक विपक्ष को एक तरह से तहस-नहस करने के बाद सबसे प्रभावशाली शख़्सियत बने, लेकिन किसानों ने उनकी ज़रा भी परवाह नहीं की है.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी दिल्ली में मंगलवार को तनाव का माहौल था, जहां कुछ अधिकारियों ने ये दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों में उग्रवादी तत्व शामिल हैं जो किसानों के दिल्ली में दाख़िल होने पर हिंसक हो जाएंगे.इमेज स्रोत,'मोदी अब हमें सुनेंगे'

ऑस्ट्रेलिया केसिडनी मॉर्निंग हेराल्डमें छपी ख़बर में कहा गया है कि हज़ारों किसान उस ऐतिहासिक लाल क़िले पर जा पहुंचे, जिसकी प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी साल में एक बार देश को संबोधित करते हैं.ख़बर में पंजाब के 55 वर्षीय किसान सुखदेव सिंह के हवाले से कहा गया है, "मोदी अब हमें सुनेंगे, उन्हें अब हमें सुनना होगा.'' सुखदेव सिंह उन सैकड़ों किसानों में से एक थे जो ट्रैक्टर परेड के तय रास्ते से हटकर अलग रास्ते पर चल पड़े थे. इनमें से कुछ लोग घोड़ों पर भी सवार थे. headtopics.com

अख़बार ने दिल्ली के एक थिंक टैंक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउँडेशन के विश्लेषक अंबर कुमार घोष के हवाले से लिखा है, "किसान संगठनों की पकड़ बड़ी मज़बूत है. उनके पास अपने जनसमर्थकों को सक्रिय करने के लिए संसाधन हैं और वे लंबे समय तक विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं. किसान संगठन अपने विरोध को केंद्रित रखने में काफी सफल रहे हैं."

ख़बर के मुताबिक, भारत की 1.3 अरब आबादी में लगभग आधी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है और एक अनुमान के मुताबिक, करीब 15 करोड़ किसान इस समय सरकार के लिए सिरदर्द बने हुए हैं.अख़बार ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का बयान याद दिलाया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'किसान अपनी ट्रैक्टर रैली के लिए 26 जनवरी के अलावा कोई दूसरा दिन चुन सकते थे.'

इमेज स्रोत,'सुरक्षा इंतज़ामों को ठेंगा दिखाया'अलजज़ीरा नेअपनी ख़बर की शुरुआतकुछ इस तरह की है- "भारत के हज़ारों किसानों ने नए कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए राजधानी में मुग़ल काल की इमारत लाल क़िले के परिसर पर एक तरह से धावा बोल दिया, हिंसक विरोध प्रदर्शनों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई."

ख़बर में कहा गया है कि "गणतंत्र दिवस की परेड के मद्देनज़र किए गए व्यापक सुरक्षा इंतज़ामों को ठेंगा दिखाते हुए प्रदर्शनकारी लाल क़िले में दाख़िल हुए, जहां सिख किसानों ने एक धार्मिक ध्वज भी लगाया.''ख़बर में इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया गया है कि ये वही लाल क़िला है जहां भारत के प्रधानमंत्री हर साल 15 अगस्त को मनाए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराते हैं. headtopics.com

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ख़बर के साथ प्रकाशित एक तस्वीर में दिखाया गया है कि सड़क पर एक शव है, जिसे तिरंगे से ढका गया है और उसके आसपास प्रदर्शनकारी बैठे हुए हैं. साथ ही एक पोस्टर का ज़िक्र किया गया है जिसमें लिखा है- "हम पीछे नहीं हटेंगे, हम जीतेंगे या मरेंगे."ख़बर में 52 वर्षीय किसान वीरेंद्र भीरसिंह के हवाले से लिखा गया है, "पुलिस ने हमें रोकने की भरपूर कोशिश की, लेकिन रोक नहीं पाई." इसी तरह 73 साल के किसान गुरबचन सिंह के हवाले से लिखा गया है, "उन्होंने जो क़ानून बनाए हैं, हम उन्हें हटाकर रहेंगे."

इमेज स्रोत,'लाल क़िले पर खालिस्तान का झंडा'पाकिस्तान केअंग्रेज़ी अख़बार डॉन की ख़बरमें कहा गया है कि ऐतिहासिक स्मारक लाल क़िले की एक मीनार पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तान का झंडा लगा दिया.ख़बर में कहा गया है कि "कृषि सुधारों का विरोध कर रहे हज़ारों किसान मंगलवार को बैरिकेड्ट हटाकर ऐतिहासिक लाल क़िले के परिसर में घुसे और वहां अपने झंडे लगा दिए.''

ख़बर में कहा गया है कि निजी ख़रीदारों की मदद करने वाले कृषि क़ानूनों से नाराज़ किसान दिल्ली के बाहर बीते दो महीने से डेरा डाले हुए हैं, जो साल 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.इस ख़बर के साथ डॉन ने कई तस्वीरें लगाई हैं जिनमें दिखाया गया है कि प्रदर्शनकारी रस्सी के सहारे लाल क़िले की मीनार पर चढ़कर झंडे लगा रहे हैं जहां एक प्रदर्शनकारी के हाथ में तलवार भी है.

कुछ तस्वीरों में किसानों को बैरिकेड्स हटाते दिखाया गया है जहां पुलिस उन पर आंसू गैस के गोले दाग़ रही है. और पढो: BBC News Hindi »

India Today Conclave East 2021 | India’s China Policy: Combat or compromise?

General Bikram Singh (Retired), BJP Lok Sabha Member Tapir Gao, Former MP Ninong Ering, and Former Indian Ambassador Rajiv Dogra shared their insights and views on the 'India’s China Policy—combat or compromise?' at the India Today Conclave East 2021.

Ye Hitler kee sarkar h..desh ko barbad kr dega..aur chutiye andhbhakt gobar log kya samjhenge is chiz ko भारत देश तेरे लाल शर्मिन्दा हैं जैचन्दो के गद्दार अभी जिन्दा है BBC k jaedatar pic dekhne se malum chalta hai ki wo kya dikhana Chahta hai It's not matter Tu bahot dekh bhakt ho Kia Kiya tune desh k liye bta dena thora ithas

bjp ordered to police an attack to farmers and farmers vehicles. police is no respect of indian flag. watching this video. FarmersProtestDelhi Look this Sikh guy try to save but other covered face guy hit Purani aadat hai inki ,,Desh ko bechne ki ,bika huaa aatmsamman hai inka गोभी जी ने विश्व में डंका बजवा दिया 🤔

द ट्रिब्यून ने लिखा है, 'लाल किले पर दीप सिद्धू ने ही उस युवक को केसरी झंडा लगाने के लिए दिया था।' ये वही आदमी है जिसे एक महीने पहले किसान नेताओ ने इस 'आंदोलन का दुश्मन' बताया था। अखबार के मुताबिक, इसी व्यक्ति ने परेड से एक दिन पहले तय रुट से न जाने के लिए किसानों को भड़काया। दुनिया को छोड़ो अपना देखो फेक न्यूज फैलने में महरात हासिल है ।।क्यो न हो कांग्रेस जैसे नेताओं का गान्ड जो चाटते हो ताकि चुनवा का टिकट मिल सके ।।अपना अपना राष्ट्रपति का तो ब्दानम कर दिया फेक न्यूज फैला कर ।।

150 के लगभग लोग मारे गए प्रोटेस्ट करते करतेतब उन्होंने कुछ था तो आज क्यों पूछ रहे हैं सिख कभी देश भक्त नहीं हो सक्ता । जो अपनी ननकखना साहीब और बहुत कुछको बालातकारीको सौंप दिया हो और हिन्दको आँख दिखा रहा हो वे देश भक्त कभी नही हो सक्ता । हिन्दु आगे बदो देश बचाओ । केंद्र सरकार को किसानों से माफी मांगनी चाहिए जो उन्होंने किसानों के साथ किया 2 महीने से वह सर्दी में बैठे हुए हैं। रोड पर लेकिन सरकार नहीं सुन रही है।सरकार खुद ही दंगाबाजी करवाती है और गोदी मीडिया उस का साथ देकर यह बोल रही है कि किसान माफी मांगे

पुलिस और किसानों दोनों में से कुछ ने बेगुनाहों पर जुल्म किया है. दोनों को पहचान कर सजा मिलनी चाहिए। भारत की अस्मिता को चोट पहुँचने का भारत विरोधी ताकतों का लक्ष्य पूरा हो चुका है, सरकार को अब इन दंगाईयो से कोइ बात नही करनी चाहिए , फिर देखते है देश विरोधी ताकते कितने दिन इन दंगाईयो का खर्चा उठती है। आंदोलन के नाम पर पुलिस पर पत्थरबाजी, तलवार से हमला अंधाधुंध ट्रैक्टर दौड़ा कर देश के जवानों पर चढ़ाना... इतनी बहादुरी 1984 में दिखाई होती तो शायद कई बेगुनाह सिख जिंदा जलने से बच जाते!! मेरे देश का अन्नदाता भक्षक नहीं हो सकता। किसान_नहीं_गुंडे

खुश तो बहोत होगे 😏 BBC stop fake & misleading news BANBBC BBCFakeNewsChampions BBCAgainstIndia BBCfakenews British LeftistMedia BBC Backing LeftistChina bbcbangla Bangladesh BBCUrdu Pakistan bbcnepali bbcchinese China Together Spreading Propaganda News Against India & Indians Media is sharing more stories like this.

Yes sari दुनिया में कमतरी जाहिर हुई ह सरकार और failure hue sabhi लोकतंत्र के jimedar लोगसंगथन सरकार नेता I a s aur experts thinks टैंक बस कंटेनर बेरीकेडिंग कराई किसने चीन पाक सीमा पर ध्यान सेना को देने देना BA MA IAS IPS तो यह होना!🙏😢 बात आपकी सही! पर होत वही जो शाह सोच राखा ! जैसे मोदी ध्यान बाल उगवान् दाढी उगवान् पर लगवा राखा !! चाणक्य खुद को चंद्र गुप्त मोदी को सिद्ध ए तरहां कर राखा !!!

ज्यादातर दंगाई सिख थे न कि हिन्दू किसान। चाहे लालकिला हो या I T O सब जगह इन्हीं सिखों ने आतंक मचाया । इनको 1984 में भी ऐसा ही पागलपन हुआ था जिसे इंदिरा गांधी ने तब ठंडा कर दिया था पर मोदी में वो दम नहीं। I demand severe punishment for those who have committed this atrocity in the name of peasant movement(मैं उन लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग करता हूं जिन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर यह अत्याचार किया है)

लाल किला तो फतेह कर लिया, ननकाणा साहिब, करतारपुर साहिब पर कब झंडा फहराओगे...? दुनिया .. my foot याद है पोखरण के समय भी दुनिया भौक रही थी पर क्या उखाड़ लिया हिंदुस्तान का हिंदी में भोंके या अंग्रेजी में, हम भारतीय कुत्तों के भोकने में फर्क नहीं करते। Modi ji to so rhe h... Kutto ka karnama PMOIndia narendramodi AmitShah HMOIndia शुरु से ही दिख रहा था यह किसान आंदोलन नहीं बल्कि देश विरोधी ताकतें देशद्रोही, नकारा नेताओ RahulGandhi ArvindKejriwal के साथ मिलकर अपना खेल खेल रही है। इन उत्तपाती कमीनो का सही इलाज जरूरी है।

वामपंथियों की महीने भर पूर्व से किसान कानून को बहाना बनाकर दिल्ली को हिंसाग्रस्त करने की गुप्त योजना थी और वो 26 जनवरी 2021 को पूर्ण हुई | पुलिस इन वामपंथियों पर कठोर धाराओं में FIR दर्ज करे व सजा दे अन्यथा दिल्ली हिंसा का अखाडा प्रतिवर्ष बनेगी 🙏🙏 HMOIndia CPDelhi