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पेगासस मामले में जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा केंद्र, विशेषज्ञों के पैनल से जांच कराने को तैयार

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14-09-2021 05:30:00

पेगासस मामले में जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा केंद्र, विशेषज्ञों के पैनल से जांच कराने को तैयार Pegasus SupremeCourt

पेगासस जासूसी कांड में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से इन्कार कर दिया है। सरकार ने कहा कि पेगासस या किसी अन्य साफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है या नहीं इसकी जानकारी हलफनामे में नहीं दी जा सकती।

पेगासस जासूसी कांड में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से इन्कार कर दिया है। सरकार ने कहा कि पेगासस या किसी अन्य साफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी हलफनामे में नहीं दी जा सकती। राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना ठीक नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फिर साफ किया कि कोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली कोई जानकारी हासिल करने में रुचि नहीं रखता। कोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल करने वालों ने निजता के अधिकार के हनन का आरोप लगाया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि क्या किसी स्पाईवेयर का प्रयोग किया गया हैकोर्ट सिर्फ यह जानना चाहता है कि क्या किसी स्पाईवेयर का प्रयोग किया गया है और अगर किया गया है तो क्या कानून सम्मत तरीके से किया गया है? सरकार हलफनामा दाखिल करती तो कोर्ट को उसका स्पष्ट रुख पता चलता। लेकिन अगर सरकार हलफनामा नहीं दाखिल करता चाहती तो कोर्ट इस मामले में फैसला सुरक्षित कर रहा है और अंतरिम आदेश पारित करेगा। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जरनल तुषार मेहता से कहा कि वह फैसला सुरक्षित रख रही है। दो-तीन दिन में कोर्ट अंतरिम आदेश पारित करेगा। वरिष्ठ पत्रकार एन राम और एडीटर्स गिल्ड की याचिकाओं सहित आठ-नौ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित हैं। इनमें पेगासस जासूसी कांड की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है।

यह भी पढ़ेंकेंद्र सरकार का रुख जानने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, देगा अंतरिम आदेशकेंद्र सरकार की ओर से शुरू में दाखिल संक्षिप्त हलफनामे में कहा गया था कि याचिकाएं अनुमानों और आशंकाओं तथा मीडिया में आई अपूर्ण जानकारी पर आधारित हैं। सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष समिति गठित करने का भी प्रस्ताव दिया था। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने सरकार के हलफनामे पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए स्पष्ट तौर पर यह बताने की मांग की थी कि पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल सरकार ने किया है कि नहीं। कोर्ट ने भी सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। पिछली सुनवाई पर केंद्र सरकार ने विस्तृत हलफनामा दाखिल करने पर फैसले के लिए कोर्ट से कुछ समय मांग लिया था। headtopics.com

यह भी पढ़ेंसरकार विशेषज्ञ समिति गठित करने को तैयारसोमवार को सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाओं में जांच मांगी गई है। सरकार एक विशेषज्ञ समिति गठित करने को तैयार है, जो मामले की जांच करके कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। इस पर जस्टिस रमना ने कहा कि आपने पिछली सुनवाई पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने की बात कही थी। मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि सरकार हलफनामा दाखिल कर बताए कि किसी निश्चित उपकरण का इस्तेमाल हुआ है कि नहीं।

यह भी पढ़ेंमौजूदा कानूनी व्यवस्था में अनधिकृत काल इंटरसेप्ट नहीं हो सकतीमेहता ने कहा कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में टेलीग्राफ एक्ट, आइटी एक्ट के तहत कोई भी अनधिकृत काल इंटरसेप्ट नहीं हो सकती। सरकार ने संसद को भी यही बताया है। मेहता की दलील पर पीठ के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पिछली बार ही कोर्ट साफ कर चुका है कि वह ऐसी किसी जानकारी को जानने की इच्छुक नहीं है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ती हो। यहां कोर्ट के सामने कुछ नागरिक आए हैं, जिन्होंने निजता के अधिकार के हनन की बात कही है। आपको बताना होगा कि उनके अधिकार का हनन हुआ है कि नहीं। मेहता ने कहा कि निजता के अधिकार के हनन की आशंका को सरकार भी गंभीरता से लेती है।

यह भी पढ़ेंसिब्बल ने कहा, जानकारी देने से मना नहीं कर सकती सरकारएन राम के वकील कपिल सिब्बल ने सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार कोर्ट को जानकारी देने से मना नहीं कर सकती। हमारे अधिकार की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, जिससे सरकार मना कर रही है। सरकार को बताना होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की गई? अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने माना है कि भारत को निशाना बनाया गया। जर्मनी ने अपने यहां स्वीकार किया है। भारत सरकार स्वीकार नहीं करना चाहती, लेकिन साफ-साफ मना भी नहीं कर रही।

यह भी पढ़ेंसरकार का पक्षसरकार के पास कुछ ऐसा छिपाने लायक नहीं है। वह कोर्ट को बता सकती है। लेकिन ऐसी जानकारी हलफनामा दाखिल कर सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अगर कहा जाएगा कि किसी निश्चित साफ्टवेयर का प्रयोग हुआ है तो आतंकी संगठन सचेत हो सकते हैं, क्योंकि हर चीज का काउंटर साफ्टवेयर भी होता है। headtopics.com

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सामरिक मामलों मे कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए.

पेगासस जासूसी कांडः विस्तृत हलफनामा दायर करने के इच्छुक नहीं- SC से बोला केंद्रसॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सरकार ने किसी विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है या नहीं, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित जानकारी को हलफनामे का हिस्सा बनाना राष्ट्रहित में नहीं होगा।

पेगासस विवाद: सॉलिसिटर जनरल बोले सरकार नहीं दाखिल करना चाहती हलफनामा | DW | 13.09.2021 पेगासस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी नहीं चाहती है. वह केवल स्पाइवेयर के अवैध उपयोग के जरिए आम नागरिकों द्वारा लगाए गए अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों से चिंतित है. SupremeCourtofIndia Pegasus

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