दलित युवकों की ख़ुदकुशी की कोशिश, बाल कटाने को लेकर हुई थी पिटाई - BBC News हिंदी

दलित युवकों की बाल कटाने की ख़्वाहिश ख़ुदकुशी की कोशिश में बदली

11-06-2021 18:46:00

दलित युवकों की बाल कटाने की ख़्वाहिश ख़ुदकुशी की कोशिश में बदली

कर्नाटक के कई गांवों में दलितों के बाल कटाने का मुद्दा विवाद की वजह क्यों बन जाता है?

इसके बाद गांव के लोग अपने घरों से बाहर आ गए.हनुमंता ने बताया, "वो हम पर चीखने लगे- तुम यहां क्यों आए हो? ये हमारी जगह है. हमारी निजी जगह है. जब हमने पूछा कि हम बाल क्यों नहीं कटा सकते हैं तो वो हमें धक्के देने लगे और उसके बाद उन्होंने हमारी पिटाई की."

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उन्होंने बताया "वो संख्या में हमसे काफी ज़्यादा था. वो 20 से ज़्यादा लोग थे. हम सिर्फ़ दो लोग थे. जब हमने कहा कि हम शिकायत करेंगे तो वो बोले जो करना चाहते हो कर लो."हनुमंता ने जो कहा उसकी पुष्टि एक वीडियो से भी होती है. इसमें ये घटना दर्ज है. यह वीडियो वायरल हो गया था.

हनुमंता ने बीबीसी को बताया, "हमारे एक लड़के ने घटना का कुछ हिस्सा अपने मोबाइल फ़ोन पर रिकॉर्ड कर लिया था."दलितों के सिर्फ़ 20 घर, लिंगायतों के 500हनुमंता और बसवाराजू एक ही गांव में रहते हैं. हनुमंता बताते हैं कि वो दलित कॉलोनी में रहते हैं. यहां सिर्फ़ 20 घर हैं जबकि लिंगायतों के 500 मकान हैं. गांव में मुसलमान भी रहते हैं लेकिन उनकी आबादी ज़्यादा नहीं है और वो किसी बात में दखल नहीं देते हैं. headtopics.com

बाल कटाने के लिए हनुमंता और उनके भतीजे पहले पास के तालुका येलबुर्गा पहुंचे लेकिन वहां लॉकडाउन की वजह से सबकुछ बंद था. वो वापस गांव लौटे और एक बड़े घर के पास बाल काट रहे व्यक्ति के पास गए.कोप्पल के पुलिस अधीक्षक टी. श्रीधर ने बीबीसी को बताया, "ये दोनों युवा बाल कटाना चाहते थे और इसी वजह से बहस शुरू हुई. मकान के मालिक ने कहा कि जहां बाल काटने वाले काम कर रहे हैं, वो उनकी निजी जगह है और वहां उनका कोई काम नहीं है. "

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आज प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना कम जरूर हुआ लेकिन रूप बदल रहा है. आज यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, कोरोना कमजोर हुआ लेकिन खत्म नहीं हुआ है. देश-विदेश के मेडिकल एक्सपर्ट कह रहे हैं कि कोरोना लगातार नए रूप लेकर फैलना शुरु हो चुका है. लेकिन फिर भी हमारे देश में लापरवाहों की ऐसी भीड़ है जो कोरोना को न्योता दे रही है. कोरोना की उस तीसरी लहर के न्योतेबाजों को हमने अपने कैमरे में कैद किया है. एक स्टिंग ऑपरेशन महामारी से बचाने वाले नियमों की धज्जियां उड़ाकर वायरस को फैलाने वाली पार्टियां आयोजित करने वाले कैद हुए हैं. देखें ये रिपोर्ट.

Aditya Birla sun life insurance is a fraud company and looting the people through their insurance policies. I request to all Indians not to purchase the insurance policies of Aditya Birla sun life insurance. Otherwise, you have to weep for your decision. गाँव तो गाँव शहरों में भी कमरा किराए पर नहीं दी जाती, उच्च वर्ग वालों की घरो को तो सोचों भी मत, पिछड़ा वर्ग के मकान मालिक भी अनुसूचित जाति के लोगो को हेय दृष्टि से देखते हैं, यही है असली इंडिया l

दरअसल यही स्थिति मध्य और उत्तर भारत में भी हैं, जो यहाँ पर ट्विटर ट्विटर खेल रहे है और अपने आपको तथाकाथित उच्च जाति के मानते हैं, उनका इस गैर मानवतावादी सोच का समर्थन दिया जाता है l किसी दिन छत्तीसगढ़ के गाँव जाइए और देखिए हालत कैसे है! अतंकवादि ही तो रिपोर्ट है जब मस्जिद में रेप होता हूं तो तुम्हारे कुरैसी ईरान चले जाते है क्या

दलित किया भारतीय नहीं है जो उसे इस तरह शोषित किया जाता है... मूर्खो को सोच बदलने कि जरूरत है 21वीं सदी में ज़ी रहा है.. अब ये सब सह नहीं पायेगा.. अब यह पूरा आधुनिक भारत है बंद करो. भेदभाव, जात पात.. 🇮🇳 'यहां सिर्फ़ 20 घर हैं जबकि लिंगायतों के 500 मकान हैं. गांव में मुसलमान भी रहते हैं लेकिन उनकी आबादी ज़्यादा नहीं है और वो किसी बात में दखल नहीं देते हैं.?' गौर करने वाली बात है अगर मुसलमान दखल देने लगे तो वो 20 घर मुसलमानों के खिलाफ हो जायेगा।

21वी सदी में भी अगर ये हो रहा है तो अफसोस हम कहा है!!? इंसानों में इंसानों से ऐसा भेदभाव !?

Pune: केमिकल फैक्ट्री में हादसा, बाल-बाल बची कर्मचारी निशा ने बताई आपबीतीमहाराष्ट्र के पुणे में एक वाटर प्योरिफाइंग केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से सोमवार को कुल 18 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे के वक्त फैक्ट्री में तकरीबन 37 लोग काम कर रहे थे. हादसे में बाल-बाल बची कर्मचारी निशा उस दिन की अपनी आपबीती बताई. वह बताती हैं कि जिस दिन यह घटना हुई उनके डिपार्टमेंट हेड ने उन्हें किसी काम से कहीं भेज दिया था, जिसकी वजह से वह बाल-बाल बच गईं. देखें वीडियो.

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