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टोक्यो ओलंपिक: हॉकी टीम की जीत के स्टार सिमरनजीत सिंह बोले-बचपन में जो सपना देखा था, आज पूरा हो गया

आंखों में खुशी के आंसू आए जा रहे हैं। मैं समझा नहीं सकता कि कैसे बयां करूं। बचपन में जब अपने घर से ताऊ जी के साथ पंजाब

05-08-2021 22:22:00

टोक्यो ओलंपिक: हॉकी टीम की जीत के स्टार सिमरनजीत सिंह बोले-बचपन में जो सपना देखा था, आज पूरा हो गया TokyoOlympics HockeyTeam BronzeMedal

आंखों में खुशी के आंसू आए जा रहे हैं। मैं समझा नहीं सकता कि कैसे बयां करूं। बचपन में जब अपने घर से ताऊ जी के साथ पंजाब

ख़बर सुनेंआंखों में खुशी के आंसू आए जा रहे हैं। मैं समझा नहीं सकता कि कैसे बयां करूं। बचपन में जब अपने घर से ताऊ के साथ पंजाब गया था तो मन में था कि हॉकी में कुछ बड़ा करूंगा। मेरे परिवार के खून में हॉकी है। खुशी है कि आज बरसों पुराना सपना पूरा हुआ।फोन पर बात करते हुए कांस्य पदक विजेता होने का गौरव भी पीलीभीत के खिलाड़ी सिमरनजीत की आवाज में झलक रहा था। फोन पर हुई बातचीत में कहा कि पूरा भरोसा है कि देश में हॉकी अब फिर से ऊंचाई पर होगी। भारत की जीत में सिमरनजीत सिंह ने दो गोल किए। उन्होंने ही भारत के लिए पहला और पांचवां गोल किया।

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सिमरनजीत ने बताया कि टीम ने ओलंपिक पदक के लिए खूब मेहनत की थी। उन्हें खुशी है कि उन्होंने जरूरत पड़ने पर देश के लिए बेहतर खेल दिखाया। वह गांव में लकड़ी की स्टिक से ही खेलने की कोशिश करते थे। उनकी खेल में रुचि देखकर दस साल की उम्र में ही पंजाब निवासी ताऊ उन्हें अपने साथ ले गए।

इसके बाद हॉकी का उनका सफर हुआ। मैच में जब-जब मौका मिला तो पूरी जान लगा दी। खुशी इस बात की है कि वह अहम मौकों पर टीम के काम आए। कोच और कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों ने तय किया था कि पूरी जान लगा देंगे। सिमरनजीत सिंह ने बताया कि मैच जीतने के बाद उन्होंने फोन पर अपनी मां मंजीत कौर और पिता इकबाल सिंह से बात की। पीलीभीत के मझोला में रह रहा उनका पूरा परिवार बहुत खुश था। उन्होंने बताया कि जब वह खेल हॉस्टल गए थे तो वहां कई बार घर की याद आती थी। headtopics.com

पिता जी अक्सर कहा करते थे कि जब एक मुकाम पर पहुंच जाओगे तो यह परेशानियां याद भी नहीं रहेंगी। ताऊ जी के साथ माता-पिता की कड़ी मेहनत के कारण ही यहां तक पहुंच पाया हूं। उन्होंने इतनी कम उम्र में मुझे हॉकी के लिए अपने से दूर कर दिया था। शायद इसी दिन के लिए यह सब कुछ हुआ था।

उम्मीद है कि हॉकी अब नए मुकाम पर पहुंचेगीसिमरनजीत के अनुसार भारतीय हॉकी ने पिछले कुछ सालों में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। उनका कहना है कि इस पदक के बाद उम्मीद है कि हॉकी एक नए मुकाम पर पहुंचेगी। नई पीढ़ी का हॉकी की ओर झुकाव बढ़ेगा। जिस तरह से जीतने के बाद लोगों के बधाई के फोन आ रहे हैं, उससे पूरी टीम ही बहुत खुश है। अभी इस टीम को इससे भी आगे जाना है। भविष्य में गोल्ड की तैयारी करनी है।

विस्तारआंखों में खुशी के आंसू आए जा रहे हैं। मैं समझा नहीं सकता कि कैसे बयां करूं। बचपन में जब अपने घर से ताऊ के साथ पंजाब गया था तो मन में था कि हॉकी में कुछ बड़ा करूंगा। मेरे परिवार के खून में हॉकी है। खुशी है कि आज बरसों पुराना सपना पूरा हुआ।विज्ञापन

फोन पर बात करते हुए कांस्य पदक विजेता होने का गौरव भी पीलीभीत के खिलाड़ी सिमरनजीत की आवाज में झलक रहा था। फोन पर हुई बातचीत में कहा कि पूरा भरोसा है कि देश में हॉकी अब फिर से ऊंचाई पर होगी। भारत की जीत में सिमरनजीत सिंह ने दो गोल किए। उन्होंने ही भारत के लिए पहला और पांचवां गोल किया। headtopics.com

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सिमरनजीत ने बताया कि टीम ने ओलंपिक पदक के लिए खूब मेहनत की थी। उन्हें खुशी है कि उन्होंने जरूरत पड़ने पर देश के लिए बेहतर खेल दिखाया। वह गांव में लकड़ी की स्टिक से ही खेलने की कोशिश करते थे। उनकी खेल में रुचि देखकर दस साल की उम्र में ही पंजाब निवासी ताऊ उन्हें अपने साथ ले गए।

इसके बाद हॉकी का उनका सफर हुआ। मैच में जब-जब मौका मिला तो पूरी जान लगा दी। खुशी इस बात की है कि वह अहम मौकों पर टीम के काम आए। कोच और कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों ने तय किया था कि पूरी जान लगा देंगे।जीतने के बाद माता-पिता से की बातसिमरनजीत सिंह ने बताया कि मैच जीतने के बाद उन्होंने फोन पर अपनी मां मंजीत कौर और पिता इकबाल सिंह से बात की। पीलीभीत के मझोला में रह रहा उनका पूरा परिवार बहुत खुश था। उन्होंने बताया कि जब वह खेल हॉस्टल गए थे तो वहां कई बार घर की याद आती थी।

पिता जी अक्सर कहा करते थे कि जब एक मुकाम पर पहुंच जाओगे तो यह परेशानियां याद भी नहीं रहेंगी। ताऊ जी के साथ माता-पिता की कड़ी मेहनत के कारण ही यहां तक पहुंच पाया हूं। उन्होंने इतनी कम उम्र में मुझे हॉकी के लिए अपने से दूर कर दिया था। शायद इसी दिन के लिए यह सब कुछ हुआ था।

उम्मीद है कि हॉकी अब नए मुकाम पर पहुंचेगीसिमरनजीत के अनुसार भारतीय हॉकी ने पिछले कुछ सालों में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। उनका कहना है कि इस पदक के बाद उम्मीद है कि हॉकी एक नए मुकाम पर पहुंचेगी। नई पीढ़ी का हॉकी की ओर झुकाव बढ़ेगा। जिस तरह से जीतने के बाद लोगों के बधाई के फोन आ रहे हैं, उससे पूरी टीम ही बहुत खुश है। अभी इस टीम को इससे भी आगे जाना है। भविष्य में गोल्ड की तैयारी करनी है। headtopics.com

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जब बिना आरक्षण के गरीब परिवारों से आये खिलाड़ी अपनी मेहनत और लगन से Olympics में जा सकतें हैं तो भारत का हर नोजवान कुछ न कुछ तो बन ही सकता है फिर आरक्षण की जरुरत नहीं। जेसे सरकार खिलाड़ियों के लिए सहूलियतें देती है वेसे ही पिछ्डो को सहूलियतें दे और आरक्षण खत्म करें।

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पाक: मंदिर में तोड़फोड़ के विरोध में हिंदुओं ने किया प्रदर्शन, लगे जय श्रीराम के नारेपाकिस्तान के रहीमयारखान के खानपुर में पाकिस्तानी हिंदुओं ने बीते दिन भोग शरीफ में भीड़ द्वारा गणेश मंदिर तोड़े जाने और आग लगाने के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया.

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