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गंगा-जमुनी तहजीब बनाए रखने की जिम्मेदारी मुसलमानों की भी उतनी ही बनती है जितनी हिंदुओं की

काश मुस्लिम नेतृत्व की कोई ऐसी धारा फूटती जो मुसलमानों को देश की मुख्यधारा गंगा-जमुनी संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द की ओर ले जाती।

09-04-2020 05:38:00

Analysis : गंगा-जमुनी तहजीब बनाए रखने की जिम्मेदारी मुसलमानों की भी उतनी ही बनती है जितनी हिंदुओं की Coronavirus COVID2019india TablighiJamaat NizamuddinMarkaj MaulanaSaad HinduMuslimUnity DrAKVerma9

काश मुस्लिम नेतृत्व की कोई ऐसी धारा फूटती जो मुसलमानों को देश की मुख्यधारा गंगा-जमुनी संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द की ओर ले जाती।

आज जब पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है तब मुस्लिम समाज के एक छोटे समूह तब्लीगी जमात ने उसमें व्यवधान डाला है। इससे मुस्लिम समाज भी चिंतित है। उसे कुशल मुस्लिम नेतृत्व चाहिए, लेकिन अवांछित तत्वों ने मुस्लिम नेतृत्व हथिया लिया है। मुस्लिमों में नेतृत्व को लेकर शुरू से चुनौतियां रही हैं। 1947 में जो विभाजनकारी रेखा हिंदुओं और मुसलमानों के बीच खिंची वह ऐतिहासिक सत्य है।

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भारत में हिंदुओं ने मुसलमानों को अपनाया, किंतु पाक में मुस्लिम हिंदुओं को नहीं अपना सकेजो मुसलमान भारत में रह गए, हिंदू समाज ने उनको अपनत्व दिया, बावजूद इसके कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार होता रहा। आज से 60-70 वर्ष पहले मुस्लिम मित्रों के यहां जाना और उनका हमारे घरों में आना, खाना-पीना-खेलना सामान्य दिनचर्या थी। जब संयुक्त परिवार कम हुए तो हिंदू-मुस्लिम परिवारों में भी आना-जाना कम हो गया। धीरे-धीरे मुस्लिम समाज अपने में सिमटता चला गया और उन मंचों का अभाव भी होता चला गया जहां हिंदू-मुस्लिम मिलन होता था, जहां गंगा-जमुनी संस्कृति फलती-फूलती थी।

यह भी पढ़ेंकांग्रेस के कारण अल्पसंख्यकवाद और मुस्लिम तुष्टीकरण की विषबेल पनपीसमय के साथ मुस्लिम समाज की एकाकी अस्मिता बलवती होती गई और वह मुख्यधारा से कटती चली गई। इसे दो प्रवृत्तियों ने और मजबूत किया। एक, स्वतंत्रता-संग्राम का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस ने गांधीजी की सलाह के विरुद्ध स्वयं को राजनीतिक पार्टी बना दिया और चुनावी स्पर्धा में मुस्लिमों को वोट-बैंक के रूप में देखने लगी। कांग्रेस ने मुसलमानों को आरएसएस और जनसंघ का भय दिखाकर और स्वयं को उनका हितैषी और सेकुलरिज्म का समर्थक बताकर उनकी अल्पसंख्यक अस्मिता को बलवती किया। इसी से अल्पसंख्यकवाद और मुस्लिम तुष्टीकरण की विषबेल पनपी। इसके चलते मुस्लिमों में पीड़ित और वंचित होने का भाव जगा, जिससे उनमें हिंदुओं के प्रति रोष उपजा। अन्य अनेक दल भी उनके हितैषी होने का स्वांग कर उनका राजनीतिक शोषण करते रहे और उन्हें मुख्यधारा में आने से रोकते रहे। दूसरा कारण मुस्लिम नेतृत्व की विफलता रही। स्वतंत्रता के बाद मुस्लिम समाज से कोई नेतृत्व नहीं निकला। जो नेता निकले भी वे कांग्रेस की कृपा से निकले।

यह भी पढ़ेंमुस्लिम देश की मुख्यधारा में नहीं आ सकेचार नवंबर, 1947 को दिल्ली में मुस्लिमों को संबोधित करते हुए मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कहा था, ‘वे शपथ लें कि यह देश हमारा है और इसके भविष्य का निर्णय तब तक अपूर्ण रहेगा जब तक हम उसमें शिरकत नहीं करेंगे।’ दुर्भाग्य की बात है कि मौलाना आजाद और उनके सरीखे रफी अहमद किदवई की मृत्यु के बाद उनकी जगह लाए गए हाफिज इब्राहिम और एमसी छागला मुस्लिम समाज को अपेक्षित राजनीतिक नेतृत्व न दे सके। 1961 में जबलपुर और 1964 में जमशेदपुर एवं राउरकेला में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद जब अब्दुल हमीद को मरणोपरांत सर्वोच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र दिया गया तो पुन: मुस्लिमों के मुख्यधारा में आने की आशा जगी, लेकिन अनेक मुस्लिम नेता वैसा रवैया न अख्तियार कर सके जैसी वक्त की मांग थी।

सांप्रदायिक सौहार्द में विभाजक तत्वमुस्लिमों की नई पीढ़ी अपने को भारतीय मानती थी। बरेलवी हों या देवबंदी, वे भारत के प्राचीन इतिहास में अपने पूर्वजों को तलाशने लगे, लेकिन फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, उर्दू और मुस्लिम पर्सनल लॉ मुस्लिम अस्मिता के नए प्रतीक बन गए। 1971 के बांग्लादेश युद्ध से भी हिंदू-मुस्लिम अलगाव उभरा। इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल में जब आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी नेताओं को जेलों में बंद किया गया तो दोनों समुदायों के पास आने की आस जगी। संपूर्ण-क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश बाबू के सुझाव पर आरएसएस ने मुसलमानों के लिए अपने द्वार खोलने का आश्वासन भी दिया, पर 1979-80 में ईरान में अयातुल्ला खोमैनी की क्रांति से भारत में इस्लामिक-उफान सा आ गया। कश्मीर तो हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द में विभाजक तत्व रहा, अन्य मुद्दे जैसे शाहबानो, राममंदिर, गोधरा-कांड और गुजरात दंगे भी उसे हवा देते रहे। 1992 में बाबरी ढांचा ढहाए जाने से भी हालात बदले।

सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मुसलमानों को सही बौद्धिक नेतृत्व नहीं मिलासांप्रदायिक सौहार्द के लिए मुसलमानों को सही बौद्धिक नेतृत्व भी नहीं मिला। अपवादों को छोड़, मुस्लिम विद्वान मुस्लिम-केंद्रित अध्ययन-शोध में लीन रहकर यह प्रमाणित करते रहे कि मुस्लिम उपेक्षित और असुरक्षित हैं। सांप्रदायिक दंगों में वे मुस्लिमों के प्रति पुलिस की सख्ती को रेखांकित करते, लेकिन यह सत्य छिपाते रहे कि पुलिस को ऐसा करना क्यों पड़ता है?

राजनीतिक लाभ के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण का प्रयासअधिकतर दल राजनीतिक लाभ के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण का प्रयास करते हैं और हिंदुओं की असुरक्षा और संवेदनाओं की घोर उपेक्षा करते हैं। मुस्लिम विद्वान भी मुसलमानों को यह नहीं समझा सके कि उनका भी हिंदुओं के प्रति कुछ फर्ज बनता है और गंगा-जमुनी तहजीब बनाए रखने की जिम्मेदारी उनकी भी उतनी ही है जितनी हिंदुओं की। मुस्लिम विश्वविद्यालय भी हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के संवाहक नहीं बन सके, जबकि हिंदू-मुस्लिम विद्वानों में बेहद प्रेम है। इसी की आड़ लेकर कट्टरपंथी धर्मगुरुओं ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से नेतृत्व छीन लिया।

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तब्लीगी जमात के मौलाना साद जैसे तत्व मुसलमानों को शर्मसार करते हैं कट्टरपंथी धर्मगुरु ‘पैन-इस्लामिज्म’ को लक्ष्य करते हैं, इसलिए उनकी तकरीरों में मुस्लिम-अस्मिता को मजबूत करने का प्रयत्न होता है, न कि मुसलमानों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने का। इसी कारण तब्लीगी जमात के मौलाना साद जैसे तत्व मुसलमानों को शर्मसार करते हैं और सूफी किस्म के धर्मगुरुओं के सांप्रदायिक-सौहार्द के प्रयासों पर पानी फेरते हैं।

मुस्लिमों का राजनीतिक नेतृत्व हथियाने के लिए आपराधिक किस्म के लोगों को किया प्रोत्साहितराजनीति में अपराधियों के बढ़ते प्रभाव और मुस्लिमों को वोट-बैंक की तरह देखने के कारण दलों ने स्थानीय स्तर पर मुस्लिमों का राजनीतिक नेतृत्व हथियाने के लिए आपराधिक किस्म के लोगों को प्रोत्साहित किया है। इस प्रकार राजनीतिक, बौद्धिक, धार्मिक और सामाजिक मुस्लिम नेतृत्व के अभाव ने न केवल मुस्लिम अस्मिता, वरन सांप्रदायिक विद्वेष और राष्ट्र-विरोध को भी बलवती किया है। काश मुस्लिम नेतृत्व की कोई ऐसी धारा फूटती जो मुसलमानों को देश की मुख्यधारा, गंगा-जमुनी संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द की ओर ले जाती।

( लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्स के निदेशक हैं ) और पढो: Dainik jagran »

DrAKVerma9 बार बार आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात करने वाली कांग्रेस ने आजतक तब्लीगी जमातियों पर प्रतिबंध लगाने की बात आखिर एकबार भी क्यो नही की DrAKVerma9 आजकल यूपी पुलिस लगातार एकतरफा कार्यवाही कर रही है संभलकर पोस्ट करें वरना दैनिक जागरण सांप्रदायिक तनाव बढ़ने के आरोप में आप सबको भी जेल जाना पड़ेगा।

DrAKVerma9 श्रीमान ये गंगा युमना तहजीब क्या है कृपया इसकी व्यख्या करके बताये आखिर कब तक इन शब्दों का घालमेल करते रहेंगे DrAKVerma9 Jo galt kari ga, usi sja milni cahiya, koi vi top khan ho DrAKVerma9 नहीं उनके मज़हब मे ये हराम है anantvijay DrAKVerma9 देश कोरोना से कम इन जैसे जाहिलों से ज्यादा परेशान है। हर मुद्दे में हिन्दू ही अत्याचारी और साम्प्रदायिक दिखते है इनको। पता नही आप मृत्यु पश्चात खुद को जलाना पसंद करेंगे या दफनाना। बताइएगा जरूर। जयसियाराम। 🙏

DrAKVerma9 This Ganga-Jamuna tehjeeb has already fucked this country to it's core. It's high time that we get rid of it. DrAKVerma9 Bilkul sahi pehli baar media sach bolti dikhi hai DrAKVerma9 जी नहीं, गंगा-यमुना तहजीब को निभाना केवल हिन्दुओं का दायित्व है। मुसलमानों को गज़वा-ए-हिन्द करना है, हिन्दुओं की बहू-बेटी को छीन कर अपना हरम में रखना है, मन्दिर व मुर्तिया तोड़ना है, हिन्दुओं को मुसलमान बनना है, पाच पत्नियाँ से पच्चीस बच्चे पैदा करने हैं ।

RajeevKSachan DrAKVerma9 दिल जीत लिया 'देनिक जागरण' ने वो लिखा जो करोडो लोगो के दिल मे था, आपकी हिम्मत भरी रिपोर्टिंग की बज़ह से ही, 20 साल से अधिक समय से आपको पढ़ रहा हू। धन्यवाद, DrAKVerma9 नही चाहिए गंगा जमुना मिलन मोमिन से और अब हिन्दुओ का बलात्कार , नरंसहार नही करवानी है । कश्मीर, बाग्लादेश, पाकिस्तान, केरल, भीमड़ी, मुंब्रा, अफगानिस्तान में क्या किया जो नेताओं को सगम करवानी है बो अपने माँ, बहनो को इनके करीब छोड़ दे। सगम का मतलब मालूम हो जायेगा। AshwiniBJP

DrAKVerma9 बेशक DrAKVerma9 बहुत सही , इसमें मुस्लिम समाज की सर्वधर्म समभाव की मानसिकता के साथ बड़े पैमाने पर पहल होना चाहिए। DrAKVerma9 मुस्‍लिम राजनीति का सटीक और प्रासंगिक विश्‍लेषण। मुसलमानों में कुशल नेतृत्‍व की कमी हमेशा से रही है। इसी का नतीजा देश विभाजन के रूप में सामने आया। आजादी के बाद हिंदू समाज ने मुसलमानों को अपना लिया लेकिन बहुसंख्‍यक मुसलमानों ने गजवा-ए-हिंद का ख्‍वाब देखना नहीं छोड़ा।

DrAKVerma9 यही कारण है कि मुसलमानों में अवांछित नेतृत्‍व को पनपने की उर्वर जमीन मिली। यही मनोवृत्‍ति समय के साथ मुसलमानों में एकाकी अस्‍मिता को बढ़ावा दिया। कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति ने इस एकाकी अस्‍मिता को खाद-पानी देकर बड़ा किया। DrAKVerma9 इसी वोट बैंक की राजनीति ने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मुसलमानों के बीच सही बौद्धिक नेतृत्व विकसित नहीं होने दिया और आगे चलकर बौद्धिक नेतृत्‍व की जगह आपराधिक किस्‍म के लोगों ने ले लिया। आज भी वही हो रहा है। मौत बांटते तबलीगी जमात पर अधिकांश मुसलमान खामोशी अख्‍तियार किए हुए हैं।

DrAKVerma9 गंगा जमुना तहजीब हक़ीक़त से दूर हो गई है। वो तो ऐसे लोगो की ज़ागीर हो गई है। DrAKVerma9 Sahi kaha chaplus media. Tabhi hindu Muslim nafrat ka jahar hamesa failate rahte ho. DrAKVerma9 गंगा भी हिन्दू की , जमुना भी हिन्दू की। तहजीब वाले पाकिस्तान जाए। DrAKVerma9 गंगा जमुना दोनों हिदुओं से संबधित है। भारत के 90% मुस्लिम अरबी कल्चर फोलो करते हैं, इसलिऐ हिदीं-अरबी तहजीब बोलिऐ।

DrAKVerma9 देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता, आपसी सौहार्द्र, आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने और देश का विकास तथा संविधान की रक्षा यह टोटल जिम्मेदारी केवल हिन्दुओं की है? DrAKVerma9 शांतिप्रिय और सहयोगियों सरीखे लोगों की मदद से ही संभव है। विद्रोहियों से नहीं। DrAKVerma9 दोगले मीडिया वालों इनकी तो कोई जिम्मेदारी ही नही है। अनावश्यक क्यों चिल्ला रहे हो..

DrAKVerma9 इसमें सबसे ज्यादा मीडिया ही जबाब देही है DrAKVerma9 Kon si ganga jamuni tahjib kya ye faltu ki tahjiv banayi hui hai logo ne kisne banayi ye tahjiv DrAKVerma9 सबसे बड़ी जिम्मेदारी मीडिया की है जिसमें वह असफल है

इंदौर : हिंदू महिला के अंतिम संस्कार में मुस्लिमों ने की मदद, कमलनाथ ने कहा- यह गंगा-जमुनी सभ्यता की मिसालइंदौर : हिंदू महिला के अंतिम संस्कार में मुस्लिमों ने की मदद, कमलनाथ ने कहा- यह गंगा-जमुनी सभ्यता की मिसाल Coronaindia Coronavirus Pandemic OfficeOfKNath OfficeOfKNath Corona failane mein madad kar rahe hai buslim wo bhi Ganga- Jamuni sabhyata ki misaal hai OfficeOfKNath Kamal Nath ji ache Muslim ne fir nizamuddin Pai kyu chup hai much kyu bandh hai Ganga jamuna tejeeb Kaha gayi fir OfficeOfKNath गंगा नदी को महाकाल सर पर धारण किए! यमुना नदी के तट पर लीलाऐ की! ये नेता लोगन किस बात की गंगा जमुनी तहजीब का रोना रो रहे हैं 😷😷😷

कोरोना वायरस, फ़ेक न्यूज़ और ग़रीब मुसलमानों की मुसीबततब्लीग़ी जमात के मरकज़ से वायरस फैलने की ख़बर आने के बाद से आम मुसलमानों पर कई हमले हुए हैं. Bbc news to ekdam chewttiya news channel hai . Thooo मीडिया_वायरस ही फैलाता है Who's the responsible?

बड़ी सफलताः देश की इस कंपनी ने तैयार की कोरोना वायरस की एंटीबॉडी किट - Coronavirus AajTakपूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है. इस महामारी की वजह से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं कई लोगों की जान भी जा चुकी है. इस Aapki news TV par kuch aur hoti hai aur Twitter par kuch aur.. एक बात तो पक्की है की सबसे पहले अगर कोई कोरोना का टीका बनाएगा तो वो भारत ही बनाएगा क्योंकि दुनिया कोरोना के आगे घुटने टेक चुकी है औऱ विश्वगुरू भारत से ही दुनिया के तमाम देश कोरोना की दवा मांग रहे हैं, वर्तमान में कोरोना से लड़ने की किसी के पास असरदार दवा नहीं है।

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