कोरोना वायरस से आपके मरने की कितनी आशंका है?

कोरोना वायरस से आपके मरने की कितनी आशंका है?

26.3.2020

कोरोना वायरस से आपके मरने की कितनी आशंका है?

विशेषज्ञों ने अध्ययन के बाद हर 100 कोरोना संक्रमित लोगों में कितनों पर मौत का ख़तरा मंडरा रहा है, इसका आंकड़ा निकाला है.

ये एक्सटर्नल लिंक हैं जो एक नए विंडो में खुलेंगे शेयर पैनल को बंद करें इमेज कॉपीरइट Getty Images ब्रितानी सरकार के वैज्ञानिक सलाहकारों का मानना ​​है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मरने की आशंका केवल 0.5 फीसदी से 1 फीसदी के ही बीच है. कोरोना संक्रमण के मामलों में ये मृत्यु दर कम है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में इस वायरस के कारण मरने वालों की दर 4 फीसदी है. मार्च की 23 तारीख तक ब्रिटेन में ये दर 5 फीसदी तक थी क्योंकि यहां संक्रमण के सभी मामलों की पुष्टि नहीं हुई थी. कोरोना वायरस संक्रमण की सूरत में किसका टेस्ट होना है और किसका नहीं, इसे लेकर सभी देशों के अपने अलग-अलग मानदंड है. इस कारण अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं. साथ ही मृत्यु की दर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक उसकी पहुंच पर भी निर्भर करती है. कोरोना से मेरी जान को कितना ख़तरा है ? जानकारों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से उन लोगों की जान ख़तरा हो सकता है जो बूढ़े हैं और जिन्हें पहले से ही दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हैं. लंदन के इंपीरियल कॉलेज के ताज़ा आकलन के अनुसार 80 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए औसत मृत्यु दर से लगभग 10 गुना अधिक है जबकि 40 से कम उम्र वालों के लिए ये कम है. ब्रिटेन सरकार के मुख्य चिकित्सा सलाहकार, प्रोफेसर क्रिस व्हिट्टी कहते हैं कि भले ही बूढ़ों के लिए ये दर अधिक हैं,"लेकिन अधिकतर बूढ़ों में ये मामूली या मध्यम लक्षणों वाली की बीमारी का कारण बनता है." वो चेतावनी देते हैं कि हमें ये नहीं मानना चाहिए कि इसके संक्रमण से युवाओं को कम ख़तरा है. कई युवा भी इस वायरस के कारण आईसीयू में पहुंच चुके हैं. वो कहते हैं कि कोरोना से ख़तरे को इसे सीधे तौर पर उम्र के साथ जोड़ कर देखना सही नहीं है. पहली बार चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के 44 हज़ार मामलों का विश्लेषण किया गया जिसमें पाया गया कि जिन लोगों को पहले से ही मधुमेह यानी डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल या सांस की बीमारी थी, उनमें मृत्यु की दर कम से कम पांच गुना अधिक थी. ये सभी कारक एक साथ इंसान के शरीर में काम करते हैं. अब तक हमारे पास ये जानकारी नहीं है कि दुनिया अलग-अलग कोने में अलग-अलग प्रकार के लोगों में इस वायरस के कारण किस तरह का ख़तरा है. फिलहाल कोरोना संक्रमितों में मृत्यु दर को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि किन लोगों को इससे अधिक ख़तरा है, लेकिन इससे किसी ख़ास प्रकार के लोगों को कितना और किस तरह का ख़तरा है ये नहीं कहा जा सकता. संक्रमण के मामलों में मृत्यु दर कुल औसत मृत्यु दर नहीं है. वायरस संक्रमण के अधिकतर मामलों में व्यक्ति में मामूली लक्षण देखने को मिलते हैं और इस कारण वो डॉक्टरों के पास पहुंचते ही नहीं. ऐसे में स्पष्ट कहा जा सकता है कि संक्रमण के अधिकतर मामले दर्ज ही नहीं हो पाते. इसी साल मार्च 17 को ब्रिटेन के लिए मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वॉलेंस ने अनुमान लगाया कि देश में कोरोना संक्रमण के क़रीब 55 हज़ार मामले हो सकते हैं, हालांकि अब तक यहां केवल 2,000 मामलों की ही पुष्टि हुई है. कोरोना के कारण हुई मौतों को अगर 2,000 से आप विभाजित करें तो आपको जो मृत्यु दर मिलेगी को उससे कहीं अधिक होगी जब आप मौतों को 55 हज़ार से विभाजित करेंगे. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ब्रिटेन में अब तक कोरोना संक्रमण के 6,600 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और यहां इस कारण अब तक 335 मौतें हुई हैं. कोरोना के पुष्टि हुए मामलों में मृत्यु दर सही मायनों में हो रही मृत्यु दर नहीं हो सकती. इसका एक बड़ा कारण ये है कि अधिकतर मामले दर्ज होते ही नहीं है और इस कारण वो मामले कितने गंभीर हैं ये भी पता नहीं चल पाता. लेकिन ये ग़लत भी हो सकता है, क्योंकि जो फिलहाल कोरोना से संक्रमित हैं और जिनकी जान को ख़तरा है उनको ध्यान में न रखकर मृत्यु दर आंकने से ये कम आ सकता है. इमेज कॉपीरइट अलग-अलग देशों में क्यों है अलग-अलग मृत्यु दर? इंपीरियल कॉलेज द्वारा किए एक शोध के अनुसार , संक्रमण के मामूली से मामूली लक्षणों को पहचानने में अलग-अलग देशों की अलग-अलग काबिलियत हो सकती है. वायरस के टेस्ट के लिए अलग-अलग देश अलग-अलग तरीके इस्तेमाल में लाते हैं. टेस्ट करने की उनकी क्षमता भी अलग होती है और टेस्टिंग के उनके मानदंड भी. ये सभी बातें वक्त के साथ बदलती भी रहती हैं. शुरू के दिनों में ब्रिटेन सरकार प्रतिदिन 10,000 टेस्ट कर रही थी. आने वाले चार सप्ताह में सरकार इसे बढ़ा कर रोज़ाना 25,000 टेस्ट करने की योजना बना रही है. मौजूदा वक्त में मुख्य रूप में यहां अस्पतालों में ही लोगों के टेस्ट हो रहे हैं. इमेज कॉपीरइट Getty Images जर्मनी के पास एक दिन में करीब 20,000 लोगों के टेस्टिंग की क्षमता है और जिन लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण दिखते हैं वो उनका भी टेस्ट करता है. इस कारण वहां अब तक जितने मामले दर्ज किए गए हैं उनमें गंभीर मामले और मामूली संक्रमण के मामलों के आंकड़ों को स्पष्ट तौर पर समझा जा सकता है. जर्मनी में कोरोना की पुष्टि हुए मामलों में मृत्यु की दर करीब 0.5 फीसदी है और ये पूरे यूरोप में सबसे कम है. लेकिन जैसे-जैसे नए संक्रमण के गंभीर मामले आएंगे ये आंकड़ा बदल जाएगा. आपके रोग की पहचान और उसका इलाज इस बात पर भी निर्भर करता है कि किस तरह का इलाज उपलब्ध है और क्या स्वास्थ्य सेवा वो इलाज करने में सक्षम है. और ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप महामारी के किस स्टेज पर हैं. अगर किसी देश की स्वास्थ्य सेवा के पास अचानक क्षमता से अधिक संख्या में ऐसे मरीज़ आ जाते हैं जिन्हें आईसीयू में रखे जाने की ज़रूरत है, और वहां मृत्यु दर का बढ़ना लाज़मी है. इमेज कॉपीरइट Getty Images मृत्यु दर का सही आकलन कैसे होता है? वैज्ञानिक मौजूद सभी साक्ष्यों को एक साथ रख कर देखते हैं और मृत्यु दर के बारे में एक तस्वीर बनाने की कोशिश करते हैं. उदाहरण के तौर पर, मामूली लक्षण वाले मामलों के अनुपात का आकलन करने के लिए वो छोटे समूहों पर नज़र रखते हैं, उनसे संबंधित सभी तथ्य जुटाते हैं, जैसे एक विमान में सवार सभी लोगों का समूह. लेकिन इस तरह के आकलन में छोटा सा सबूत भी पूरी तस्वीर बदल सकता है. और ये भी हो सकता है कि वो सबूत भी वक्त के साथ बदल जाए. यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट एंज्लिया में मेडिसिन के प्रोफ़ेसर पॉल हंटर बताते हैं कि मौत की दर नीचे भी जा सकती है और ऊपर भी. वो कहते हैं,"ईबोला के मामले में लोग इस बीमारी से निपटने के तरीके सीख गए और मृत्यु दर नीचे आ गई. लेकिन ये बढ़ भी सकती है. अगर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली ही ख़त्म हो गई तो हम मृत्यु दर में उछाल देख सकते हैं." इसीलिए वैज्ञानिक मृत्यु दर को लेकर एक निचली और ऊंची दर बताते हैं और साथ ही एक आकलन भी बताते हैं जो उस वक्त का बेहतर आकलन होता है. और पढो: BBC News Hindi

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Phle aap maro baad me hamara dekha jayega Bbc का पूरा नाम(bada bc)☺️☺️☺️☺️☺️ Abe yar jine ka bhe sanka bata do sirf negative news or logo ko darane ka kam BBCsarika This is right... good job bbc👍👍👍 पहले ये बताओ BBC कब बंद/खत्म होगा ! पूरी दुनिया खतरे में है, तुझे मजाक सूझ रही है (खतरे में अंग्रेज भी है) सबसे बेहूदा- बेबकूफी वाला न्यूज होता है बीबीसी का

50%। Humra to pata nahi tum apna dekho मध्यम वर्ग तक के परिवारों के लिए एक तरफ खाई है, दूसरी तरफ कुंआ। ज्यादातर लोगों की आर्थिक स्थिति मरने के कगार पर ही है क्योंकि कि लोगों के धंधे चौपट पड़े हैं और अपनी मासिक आय का50%से ज्यादा भाग सरकार को टैक्सके रूपमें देतेहैं। आग के5से6 महीनोंतक क्यालोग अपनेपरिवारको भूखामरने देंगे

R u crezy ? News chennal शून्य पता है हमको तुझे लॉक डाउन पसंद नहीं आ रहा है तुम लोगो चाहते हो खूब पब्लिक मरे और फिर मोदी बदनाम हो और कांग्रेस को सत्ता मिले कांग्रेस और चाइना का षड्यंत्र अच्छा है पर सफल नहीं होगा

न्यूयॉर्क के गवर्नर का कहना है कि 'सोशल डिस्‍टेंसिंग' से धीमा पड़ रहा है कोरोना वायरसभारत के प्रधानमंत्री भी साफ कह चुके हैं कि इस वायरस से बचने का एक ही इलाज है और वो है सोशल डिस्‍टेंसिंग जहां अब न्यूयॉर्क के गवर्नर ने कह दिया है कि इससे वायरस का प्रकोप कम हो रहा सामाजिक दूरी ही इसका एकमात्र इलाज है,फिर भी लोग समझ नहीं रहे है। देश मे अभी भी कुछ गधे किस्म के इंसान बिना वजह के बाहर घूम रहे है Corona virus BJP party ke netavo se nikala hain Ye bhagvan RAM aur sita ke tasker Hain Esi liye hanta virus aaya History main ajad satru ko Pitru hanta khaha jata thha Bhagvan RAM (pita) Sita ki hatya karne ke karan Hanta virus Jiska name ajad satru Aur Narendra Modi Yogi hain

00 वर्तमान हाहाकर मनुष्य की मृत्यु पर विजय पाने की कोशिश की असफलता अधिक है जिसे मानव समाज अपनी आर्थिक प्रगति के बल पर पाना चाहता है किंतु जीवन और मृत्युंजय के उचित सामंजस्य के लिए प्रकृति के भी नियम समझना ज़रूरी है। At this moment stay safe by keeping PhysicalDistancing be social कोरोना से तो नही मरेंगे लेकिन यहा अंदर अकेले दम घुट के एक दिन जरूर मरेंगे 25 दिन कर्फ्यू हाल बेहाल जीना मुश्किल

अगर बाहर निकला तो 3 मिनट 24 सेकंड में 😂 मेरी बता रहा हूँ 🙏 Lesser than getting killed by Isis शर्म आती है ऐसे मीडिया पर shameonBBC aajtak ndtv AmarUjalaNews JagranNews ZeeNews htTweets Did your reporter asked this question to prince Charles? What was his response? Should publish the complete news

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कोरोना वायरस: पहली बार देश में बनी कोरोना जांच किट, एक से 100 लोगों की जांचकोरोना वायरस: पहली बार देश में बनी कोरोना जांच किट MoHFW_INDIA Lockdown21 ChineseVirus19 COVID2019 StopTheSpreadOfCorona CoronavirusLockdown 21daysLockdown CurfewInIndia lockdownindia StayHomeIndia

बहुत अच्छा जानकारी।दिया आप ने गजब चुतियापा है आपको ये फायदा जरूर हो। Dear NDTV, YE ARTICLE LIKHNE WALA KITNA PADHA LIKHA HAI. KYA YE VIROLOGIST HAI DATA SE MAT KHELO . YE BAAT PRINCE SAHAB KO BATAO.. BBC के पत्रकारों को पता है कोरोना हाथ मिलाने से फैलता है, तलवा चाटने से नहीं। गजब की भाषा का प्रयोग करते है बीबीसी वाले...

Bilkul nhi aaj v marnna hai .Calvin marenge Not accepting from BBC such thoughts May God save you from this epidemic. अपने प्रिंस की चिंता करो ठीक उतनी ही जितनी तुमलोगो की मोदी विरोध से,तुम लोग मोदी विरोध में इतने विक्षिप्त हो गए हो कि अपनी माँ ,बहन,बेटी को भी बेच दी रहे हो यहाँ तक जो पेट मे आ। जा रहा है उसका भी सौदा करले रहे हो,और ये बात देश का हर नागरिक जान गया है,बस तुम भड़वे आपस मे एक दूसरे की वाह वाह करते हो थू है

DNA ANALYSIS: भारत ने ठाना है, कोरोना वायरस को दूसरे चरण में हराना हैहमारे देश में देशभक्त तो सब बनते हैं सब ये भी कहते हैं कि मैं देश के लिए कुछ भी कर सकता हूं. लेकिन आज आपको ये बड़ी बड़ी बातें छोड़कर देश के लिए सच में कुछ करना होगा और आपको अगले 21 दिनों तक अपने घर में रहना होगा. sudhirchaudhary Yes sir sudhirchaudhary But government aane wale 2 month electricity and water bill bhi na le.Normal condition baad m chahe ek saath le le sudhirchaudhary Yes sir or hum pure desh ki janta modi ji ke saath hai

इटली स्पेन और अपने युवराज से पूछो। हमारे यहाँ की चिंता मत करो। हमें चिंता और चिता दोनों से निपटना आता है। अंग्रेजों की खैर नहीं पर फिर भी हम सभी हिन्दुस्तानी यूरोप वासीयों के लिए इस दुख की घड़ी में साथ हैं। अतः हे बीबीसी अपना ये दुष्ट नीति लेकर भारत से बाहर जाओ हम तो सेवा करते हैं मरने का कोई गम नहीं, प्रिंस चार्ल्स जैसा आदमी मरता है हम नहीं।

इनसे अपना घर तो सम्हाला जाता नहीं । बीबीसी द्वारा नेगेटिव खबरे फ़ैलाने के लिए ख़ास कर इंडिया के सम्बन्ध में, में आज इस चेंनल को unfollow कर रहा हूँ । कृपया इस मुहिम का हिस्सा बने । unfollowBBC abpnewshindi narendramodi aajtak पता नहीं पर तुम्हारे प्रश्न से यह ज्ञात होता है की तुम्हारा सम्वंध कोरोना वायरस से अवस्य है और इसे वैश्विक समुदाय में फेलाने में भी तुम्हारा सहयोग है।

क्यों डरा रहो हो। Faltu me bbc ke patrakaro pitwane ke liye kar rahe ho kya तुम कितने बेवकूफ हो यार bbc वाले। महामारी से बचने के जतन और कोरोना से बचाव की आशंका की बजाय मरने की आशंका के बारे में बताकर पब्लिक को डरा रहे हो।। Thanks BBC ऐसे सवाल करके काफी मनोबल बढ़ा दिया🙏 दुनियां मे जितनी मौतें हुई है उतनी अकेले यहाँ हो सकती है ।हमारे पास कोई ससांधन नही इस बीमारी से लड़ने के लिए ।

१५ लाख देने का झांसा देने वाले संकट के समय में १५ ₹ का मास्क भी नहीं बांट सके।

स्मार्टफोन से कोरोना वायरस फैलने का है खतरा, तो ऐसे करें डिवाइस की सफाईस्मार्टफोन से कोरोना वायरस फैलने का है खतरा, तो ऐसे करें डिवाइस की सफाई लड़ेंगे_कोरोना_से LadengeCoronaSe IndiaFightsCorona coronavirus

Jitni possibility aapki hai utni mare bhi hai.. प्रिंस चार्ल्स की तबीयत कैसी है? विक्टोरिया की जांच के नमूने आ गए अगर हम भारतवंशी अपने प्रधान सेवक की बात नहीं मानेंगे तो मरना तय है सावधानी ही सुरक्षा है घर में ही रह कर अपनी समझदारी का परिचय दें और सुरक्षित रहें BBC ne subah subah hagna shuru kar diya.. जितनी ग्रह मंत्री की आशंका उतनी हमारी

Aapke marne ki kitni asanka hain ye bata dijiye bas

कोरोना वायरस: 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' से निपटने के लिए कितना तैयार है भारतकोरोना वायरस के मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं. क्या भारत के अस्पताल ऐसी स्थिति से निपटने में सक्षम हैं? Indian government has DEPLOYED 'special task force' to give 3rd degree abuse to CORONO VIRUS. मुझे तो नहीं लगता कि कम्युनिटी ट्रांसफर के लिए भारत किसी भी तरह से तैयार है क्योंकि जिससमय देश में स्वास्थ्य सेवाओंपर कार्य होना चाहिए था उस समय हम धार्मिक मुद्दों उलझे हुए थे।

कोरोना वायरस से 2700 मौतें, अब दूसरा इटली बन रहा है स्पेन - Coronavirus AajTakकोरोना वायरस यूरोप में इटली के बाद अब स्पेन को अपना नया गढ़ बनाता जा रहा है. स्पेन में कोरोना वायरस के 40,000 मामले सामने आ चुके वही गलती जो इटली ने की स्पेन ने भी की Need to learn us ,STAY AT HOME 21daysLockdown श्री narendramodi जी, AmitShahOffice जी, drharshvardhan जी, यह आपदा भयावह है अब वक्त आ गया है जब चीन अमेरिका ईरान के पर भरोसा ना करते हुए इटली स्पेन फ्रांस की हालत से सीख लेने का कभी कभी माता पिता का कड़क होना ही बच्चों के लिए लाभकारी होता है।



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26 मार्च 2020, गुरुवार समाचार

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