Agriculture, Farmers, कीटनाशक, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, कृषि, किसान, पर्यावरण

Agriculture, Farmers

कीटनाशकों के दुष्चक्र से कैसे मिलेगी निजात? | DW | 27.02.2020

लोकसभा में अगले कुछ दिनों में पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2020 पेश किया जा सकता है. कीटनाशकों से फसल की बरबादी पर भारीभरकम मुआवजे के अलावा देश के अन्नदाताओं के लिए इस बिल में ऐसा क्या है जिसे अभूतपूर्व कहा जा सके?

27-02-2020 15:12:00

लोकसभा में अगले कुछ दिनों में पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2020 पेश किया जा सकता है. कीटनाशक ों से फसल की बरबादी पर भारीभरकम मुआवजे के अलावा देश के अन्नदाताओं के लिए इस बिल में ऐसा क्या है जिसे अभूतपूर्व कहा जा सके? agriculture farmers

लोकसभा में अगले कुछ दिनों में पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2020 पेश किया जा सकता है. कीटनाशक ों से फसल की बरबादी पर भारीभरकम मुआवजे के अलावा देश के अन्नदाताओं के लिए इस बिल में ऐसा क्या है जिसे अभूतपूर्व कहा जा सके?

डायरेक्ट डेबिट ट्रांसफर (डीडीटी) के जरिए किसानों को सीधा उनके खाते में ये मुआवजा मिलेगा. बताया गया है कि इस कॉरपस फंड के लिए पंजीकृत पेस्टिसाइड निर्माता कंपनियों, केंद्र और राज्य सरकारें 60:20:20 के अनुपात में धनराशि जमा करेंगे. प्रतिबंधित पेस्टिसाइड के इस्तेमाल पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और तीन से पांच साल की जेल का प्रावधान भी किया गया है. अभी यह जुर्माना दो हजार रुपये और तीन साल की जेल का है.

सचिन पायलट की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली मोदी-शाह को क्लीनचिट ना देने वाले अशोक लवासा कौन सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जाँच हो, रिया चक्रवर्ती की मांग

बिल में एक केंद्रीय बोर्ड का गठन भी प्रस्तावित है जिसमें केंद्र और राज्यों के विशेषज्ञों के अलावा किसानों के प्रतिनिधि शामिल होंगें. पेस्टिसाइड के इस्तेमाल को रेगुलेट करने की प्रक्रिया में भी आमूलचूल बदलाव किए गए हैं. पंजीकरण और प्रतिबंध की व्यवस्था होगी और सेल्स, पैकेजिंग, लेबलिंग, मूल्य तय करने, भंडारण, वितरण और विज्ञापनों में तथ्यपूर्ण जानकारी जैसे मुद्दों का विशेष ख्याल रखा जाएगा. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय एक वेबपोर्टल भी बनाएगा जिसमें पेस्टिसाइडों के उपयोग, क्षमता, कमजोरियों, जोखिम और उनके विकल्पों आदि के बारे में सभी भाषाओं में जानकारी मुहैया करायी जाएगी.

मुआवजे आदि से जुड़ी शिकायतों के निवारण के लिए भी पोर्टल का उपयोग किया जाएगा. प्रतिबंधित पेस्टिसाइड की लिस्ट को अपडेट करने का काम भी कृषि मंत्रालय की मदद के साथ किया जाएगा. खबरों के मुताबिक इस समय बाजार में 40 से 75 प्रतिबंधित उत्पाद बिक रहे हो सकते हैं. बिल में न सिर्फ इनकी रोकथाम बल्कि कई पेस्टिसाइड रसायनों के आयात को भी बैन करने की व्यवस्था की गई है.

अपनी रूपरेखा और तैयारी में बिल के प्रावधान महत्त्वपूर्ण लगते हैं और सदाशयता भी नजर आती है लेकिन एक व्यापक कार्ययोजना और क्रियान्वयन मशीनरी के अभाव में बिल कितना सार्थक होगा, इस पर सवाल हैं. भारत में कृषि बड़े पैमाने पर रसायनों पर निर्भर है और इसमें कीटनाशक भी हैं जिनका इस्तेमाल मनुष्य हो या जानवर सबके स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव छोड़ता है. इसके अतिरिक्त जैव विविधता और पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी किसी से छिपा नहीं है. जानकार इसे एक धीमे जहर की तरह मानते हैं.

भारत में कीटनाशकों के अलावा फन्जिसाइड (फफूंदनाशक) और हर्बिसाइड (तृणनाशक) जैसे रसायन भी इस्तेमाल किए जाते हैं. इनका इस्तेमाल कीटनाशकों की तुलना में कम है. अमेरिका, जापान और चीन के बाद पूरी दुनिया में कीटनाशकों का चौथा सबसे बड़ा निर्माता देश भारत को ही बताया जाता है और कीटनाशकों के निर्यात में उसका नंबर 13वां है. भारत में कृषि-रसायन का एक बहुत बड़ा उद्योग है.

रिसर्च ऐंड मार्केट्स नामक एक डाटाबेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में भारत का कीटनाशक बाजार करीब 20 करोड़ रुपये का था. 2024 तक इसके तीस करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है. अक्टूबर 2019 तक भारत में कुल 292 कीटनाशक पंजीकृत थे. सबसे ज्यादा कीटनाशक महाराष्ट्र में इस्तेमाल होता है. इसके बाद यूपी, पंजाब और हरियाणा का नंबर आता है. प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल के हिसाब से देखें तो सबसे आगे पंजाब है, फिर हरियाणा और महाराष्ट्र. जानकारों के मुताबिक कीटनाशकों के इस्तेमाल में इधर काफी तेजी आई है. ये ट्रेंड 2009-10 के बाद से ज्यादा देखा गया है.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंभूमि पर अधिकारदेश में कृषि भूमि के मालिकाना हक को लेकर विवाद सबसे बड़ा है. असमान भूमि वितरण के खिलाफ किसान कई बार आवाज उठाते रहे हैं. जमीनों का एक बड़ा हिस्सा बड़े किसानों, महाजनों और साहूकारों के पास है जिस पर छोटे किसान काम करते हैं. ऐसे में अगर फसल अच्छी नहीं होती तो छोटे किसान कर्ज में डूब जाते हैं.

राजस्‍थान में सियासी संकट के बीच मजबूत होते जा रहे CM गहलोत, नजर सचिन पायलट के अगले कदम पर मोहम्मद अली जिन्ना के जीवन के आख़िरी 60 दिन पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती नाबालिग से रेप, आरोपी गार्ड गिरफ़्तार

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंफसल पर सही मूल्यकिसानों की एक बड़ी समस्या यह भी है कि उन्हें फसल पर सही मूल्य नहीं मिलता. वहीं किसानों को अपना माल बेचने के तमाम कागजी कार्यवाही भी पूरी करनी पड़ती है. मसलन कोई किसान सरकारी केंद्र पर किसी उत्पाद को बेचना चाहे तो उसे गांव के अधिकारी से एक कागज चाहिए होगा.ऐसे में कई बार कम पढ़े-लिखे किसान औने-पौने दामों पर अपना माल बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंअच्छे बीजअच्छी फसल के लिए अच्छे बीजों का होना बेहद जरूरी है. लेकिन सही वितरण तंत्र न होने के चलते छोटे किसानों की पहुंच में ये महंगे और अच्छे बीज नहीं होते हैं. इसके चलते इन्हें कोई लाभ नहीं मिलता और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंसिंचाई व्यवस्थाभारत में मॉनसून की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. इसके बावजूद देश के तमाम हिस्सों में सिंचाई व्यवस्था की उन्नत तकनीकों का प्रसार नहीं हो सका है. उदाहरण के लिए पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में सिंचाई के अच्छे इंतजाम है लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जहां कृषि, मॉनसून पर निर्भर है. इसके इतर भूमिगत जल के गिरते स्तर ने भी लोगों की समस्याओं में इजाफा किया है.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंमिट्टी का क्षरणतमाम मानवीय कारणों से इतर कुछ प्राकृतिक कारण भी किसानों और कृषि क्षेत्र की परेशानी को बढ़ा देते हैं. दरअसल उपजाऊ जमीन के बड़े इलाकों पर हवा और पानी के चलते मिट्टी का क्षरण होता है. इसके चलते मिट्टी अपनी मूल क्षमता को खो देती है और इसका असर फसल पर पड़ता है.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंमशीनीकरण का अभावकृषि क्षेत्र में अब मशीनों का प्रयोग होने लगा है लेकिन अब भी कुछ इलाके ऐसे हैं जहां एक बड़ा काम अब भी किसान स्वयं करते हैं. वे कृषि में पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. खासकर ऐसे मामले छोटे और सीमांत किसानों के साथ अधिक देखने को मिलते हैं. इसका असर भी कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और लागत पर साफ नजर आता है.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंभंडारण सुविधाओं का अभावभारत के ग्रामीण इलाकों में अच्छे भंडारण की सुविधाओं की कमी है. ऐसे में किसानों पर जल्द से जल्द फसल का सौदा करने का दबाव होता है और कई बार किसान औने-पौने दामों में फसल का सौदा कर लेते हैं. भंडारण सुविधाओं को लेकर न्यायालय ने भी कई बार केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार भी लगाई है लेकिन जमीनी हालात अब तक बहुत नहीं बदले हैं.

चाबहार रेलवे परियोजना से बाहर नहीं हुआ भारत, ईरान ने दी सफाई सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया की गृहमंत्री अमित शाह से गुहार, केस की CBI जांच हो Starting of human clinical trials of potential Covid-19 vaccine ZyCoV-D an important milestone for AtmaNirbhar Bharat: Dr Harsh Vardhan

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंपरिवहन भी एक बाधाभारतीय कृषि की तरक्की में एक बड़ी बाधा अच्छी परिवहन व्यवस्था की कमी भी है. आज भी देश के कई गांव और केंद्र ऐसे हैं जो बाजारों और शहरों से नहीं जुड़े हैं. वहीं कुछ सड़कों पर मौसम का भी खासा प्रभाव पड़ता है. ऐसे में, किसान स्थानीय बाजारों में ही कम मूल्य पर सामान बेच देते हैं. कृषि क्षेत्र को इस समस्या से उबारने के लिए बड़ी धनराशि के साथ-साथ मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता भी चाहिए.

ये हैं भारतीय किसानों की मूल समस्याएंपूंजी की कमीसभी क्षेत्रों की तरह कृषि को भी पनपने के लिए पूंजी की आवश्यकता है. तकनीकी विस्तार ने पूंजी की इस आवश्यकता को और बढ़ा दिया है. लेकिन इस क्षेत्र में पूंजी की कमी बनी हुई है. छोटे किसान महाजनों, व्यापारियों से ऊंची दरों पर कर्ज लेते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में किसानों ने बैंकों से भी कर्ज लेना शुरू किया है. लेेकिन हालात बहुत नहीं बदले हैं.

रिपोर्ट: अपूर्वा अग्रवालनए बिल में किसानों और उनके पशुओं के स्वास्थ्य की देखरेख और मेडिकल परामर्श आदि का प्रावधान भी होना चाहिए. जैव विविधता पर पड़ने वाले असर को दूर करने के प्रावधान भी जरूरी हैं. सबसे अहम तो यह है कि कीटनाशकों के कम से कम इस्तेमाल को प्रेरित किया जाए. बिल को रासायनकि कीटनाशकों के अलावा गैर सिंथेटिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के बारे में भी सोचना चाहिए. टिकाऊ खेती के लिए टिकाऊ संसाधनों और अभ्यासों की जरूरत है.

आज जैविक खेती को बढ़ावा बेशक दिया जा रहा है, बाकायदा अभियान के स्तर पर यह काम हो रहा है और ऑर्गनिक उत्पादों का एक विशाल समांतर बाजार भी खड़ा हो गया है जो अपेक्षाकृत महंगा, सीमित और आम उपभोक्ताओं की खरीदारी रेंज से आमतौर पर बाहर है. जरूरत इस बात की है कि जैविक खाद्य सामग्रियों को आमफहम बनाया जाए और किसानों के लिए ऐसे बीज और उपज का ऐसा पर्यावरण मुहैया कराया जाए जहां उन्हें ज्यादा से ज्यादा उत्पादन और ज्यादा से ज्यादा मुनाफे के झांसे में आने को विवश न होना पड़े. बीजों की गुणवत्ता से समझौता न करने की मानसिकता भी बनानी होगी.

पर्यावरणवादी और कृषि मामलों के जानकार नए कानून में राज्यों को और अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की भी जरूरत बताते हैं क्योंकि खेती से जुड़ी भौगोलिक और भूगर्भीय और पर्यावरणीय जरूरतों और मिट्टी की संरचनाओं को राज्य और उनकी मशीनरी ही बेहतर समझ सकती है. खाद्य सुरक्षा कानून के साथ भी इस प्रस्तावित कानून का सही समन्वय बनाया जाना जरूरी है. किसानों को और अधिक जागरूक बनाने के लिए लेबलिंग को बेहतर करना तो एक उपाय है ही, इसके अलावा तकनीकी मदद के लिए ग्रामीण इलाकों में घुमंतू कैंप या स्थायी सेवा केंद्र भी लगाए जा सकते हैं.

हर चीज की जानकारी पोर्टल पर डालकर यह मान लेना कि सूचना का विस्तार हो गया, सही नहीं होगा क्योंकि अभी भी भारत की एक बड़ी ग्रामीण आबादी डिजिटल तौर पर साक्षर नहीं कही जा सकती है. एक बड़ा डिजिटल विभाजन अभी भी कायम है. इन सब जरूरतों के बीच बुनियादी चिंता यही है कि कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े दुष्चक्र को निर्णायक रूप से कैसे तोड़ा जाए.

और पढो: DW Hindi »

दिल्ली हिंसा के बाद लोगों के दिलों से खौफ निकालने में जुटी दिल्ली पुलिसदिल्ली हिंसा के बाद लोगों के दिलों से खौफ निकालने में जुटी दिल्ली पुलिस DelhiPolice DelhiHighCourt DelhiRiots2020 DelhiPolice Kaash ye sab pehle kiya hota..😒 🤣🤣 दल्ली पुलिस जो ख़ुद ख़ौफ़ फैला रही है! DelhiPolice Khof mt nikalo un musalmano ko nikalo jo istrah ki patharbazi krke jhud ko sabit kr dete h ki hum pakistani h

जेल में अकेलेपन से तनाव में हैं लालू यादव, AIIMS में भी नहीं करवाना चाहते इलाजचारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता और रिम्स में इलाजरत आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव पर आज मेडिकल टीम ने फैसला लिया है कि नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर से सलाह लेने के बाद लालू यादव के एम्स जाने पर फैसला लिया जाएगा. वहीं, दूसरी ओर लालू ने अपने डॉक्टर से आग्रह किया है कि उन्हें एम्स नहीं भेजा जाए. laluprasadrjd राबड़ी देवी को भी भेज दें वह भी तो बेल पर ही हैं laluprasadrjd तनाव दूर करने के लिए कुछ नाच गाने का इंतजाम होना चाहिए? laluprasadrjd Marna do sala ko isna konsa desh ka bhala keya choor ha sala jai hind

भड़काऊ भाषण के आरोप में सोनिया-राहुल के खिलाफ याचिका, HC में सुनवाई कलदिल्ली में हुई हिंसा के बाद भड़काऊ भाषण पर एक्शन लेने के लिए कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं. इस बीच सीनियर एडवोकेट चेतन शर्मा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी पर हेट स्पीच का आरोप लगाया है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी. twtpoonam mewatisanjoo वाह क्या कानुन बना दिया है देश मे जिसने हेट स्पीच देकर दंगा करवा दिया उसके लिए कोई कार्यवाही नही और सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी पर कैस ही हो गया twtpoonam mewatisanjoo उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ये वही बात हो गयी twtpoonam mewatisanjoo CAA ke main villain 🤬🤬🤬🤬

लॉन्च से पहले Oppo Reno 3 Pro के कैमरा सेंसर से जुड़ी डिटेल्स आई सामने\nupcoming smartphones 2020 in india: Oppo Reno 3 Pro Camera की मिली जानकारी। oppo smartphone के बारे में जानें।

19 साल से आतंकी की तलाश में केके मेनन, रोमांच से भरा Special Ops ट्रेलरआतंकी अरे इण्डिया टुडे ग्रुप के आजतक ने आतंकी कैसे कह दिया वो तो भटके हुए लोग होते हैं है न ..माफ़ कीजिए पर लिबरल गैंग तो यही कहते हैं

महागठबंधन से नीतीश की नजदीकी के बीच NDA नेताओं ने तेजस्वी यादव से पूछे चुभते सवालबीजेपी विधायक तारकिशोर प्रसाद ने तेजस्वी यादव से सवाल पूछा है कि तेजस्वी जी, महागठबंधन से अलग होने के पहले नीतीश जी ने आपसे सवाल पूछा था, आप पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उसकी सच्चाई क्या है. | bihar News in Hindi - हिंदी न्यूज़, समाचार, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी नीतीश जी के साथ तेजस्वी का जाना ठीक नही है। Nitish bin pendi ka lota hai

ईरान में फिर रहस्यमयी घटना, बुशेहर बंदरगाह पर सात जहाज़ों में लगी आग सचिन पायलट बोले- मैं बीजेपी में शामिल होने नहीं जा रहा बिल गेट्स, जेफ़ बेज़ोस, एलन मस्क समेत कई ट्विटर अकाउंट हुए हैक मध्य प्रदेश, क्या है पुलिस की बर्बरता और दलित दंपति के ज़हर खाने का मामला? गोपालगंजः 29 दिन भी नहीं चला 264 करोड़ का पुल, नीतीश ने किया था उद्घाटन राजस्थान के 'जादूगर' का मायाजाल, पायलट न घर के रहे न घाट के कोरोना वायरस: बेघरों को 'वाहे गुरु जी की रोटियों' का सहारा सचिन पायलट ने बीजेपी में जाने से किया इनकार लेकिन स्पीकर ने थमाया नोटिस बिटक्वाइन है क्या? जिसके लिए हैक किये गए नामी लोगों के ट्विटर अकाउंट कांग्रेस का बवंडर सिंधिया और सचिन तक थमेगा या सब उड़ा ले जाएगा? कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन में अमरीका को मिली एक अहम कामयाबी - BBC Hindi