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किसान आंदोलन : सड़क पर लगी संसद में 'कृषि मंत्री' को देना पड़ा इस्तीफा, नए कानूनों पर घिर गए थे

जंतर-मंतर पर दूसरे दिन 200 किसान प्रतिनिधियों की संसद में जमकर हंगामा हुआ।

24-07-2021 02:50:00

किसान आंदोलन : सड़क पर लगी संसद में 'कृषि मंत्री' को देना पड़ा इस्तीफा, नए कानूनों पर घिर गए थे FarmersProtest KisanSansad Parliament

जंतर-मंतर पर दूसरे दिन 200 किसान प्रतिनिधियों की संसद में जमकर हंगामा हुआ।

इस दौरान किसान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के कानून को सिरे से खारिज कर दिया। किसानों ने केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के बयानों की भी आलोचना की है। आखिर में शाम को किसान संसद का सत्र सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सोमवार की किसान संसद में सिर्फ महिलाएं हिस्सा बनेंगी। 200 महिला किसान प्रतिनिधियों पर सत्र के संचालन से लेकर हर गतिविधि तक की जिम्मेेदारी होगी।

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सिंघु बॉर्डर से जंतर-मंतर पहुंचे किसानों की करीब 11.20 बजे संसद लगी। सत्र की शुरुआत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के साथ कृषि कानूनों पर पक्ष रखने के लिए अपने बीच से कृषि मंत्री का भी चुनाव किया। किसानों ने जैसे ही दोगुनी आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी कानूनों पर सवाल उठाए, कृषि मंत्री को इसका जवाब नहीं देते बन रहा था। पूरे सत्र में वह किसानों के सवालों से घिरे रहे। इससे नाराजगी जाहिर करते हुए किसानों ने नारेबाजी की। पहला सत्र इसी माहौल में चलता रहा।

लंच ब्रेक के बाद करीब 2:30 बजे शुरू हुए दूसरे सत्र में भी हालात नहीं बदले। किसान प्रतिनिधि अपने सवालों का माकूल जवाब न मिलने की बात करते हुए हंगामा करते दिखे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बार-बार समझाने के बाद भी शोरगुुल नहीं थमा। इस सबके बीच सवालों से घिरे मंत्री जवाब नहीं दे सके और पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह किसानों के सामने निरुत्तर हैं। इसके बाद सभी सदस्यों ने तालियां बजाते हुए अपनी जीत पर खुशियां जताई। इसके बाद ही किसानों की संसद की कार्यवाही हो सकी। दिन के आखिरी और तीसरे सत्र में भी मंडी कानून पर चर्चा हुई। आखिर में करीब 5 बजे किसान संसद का सत्र सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। headtopics.com

एक दिन भी नहीं बचा सके अपना पदपंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रवनीत सिंह बराड़ ने कहा कि एक दिन के लिए किसान संसद में मंत्री बनाए जाने पर बेहद खुश हुए, लेकिन सदस्यों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। सदस्य बार-बार दोहरा रहे थे कि न तो उनकी आय दोगुना हुई है और न ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कोई कानून बनाया। मंडी कानूनों पर भी सदस्यों ने असहमती जताई और मंत्री से इस्तीफे की मांग पर अड़ गए।

90 फीसदी सदस्य करते रहे विरोधसत्र के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने बताया कि मंडी कानूनों पर बिल लाएंगे। सदस्यों की तरफ से लगातार इसका विरोध किया जा रहा है। सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, लेकिन मंडी कानून पर बहस छिड़ते ही सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इससे किसान संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई। सत्र के दौरान 90 फीसदी सदस्यों ने कानून पर एतराज जताया। तीन अलग-अलग सत्रों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी छह सदस्यों को सौंपी गई थी।

विस्तार सरकार के पैरोकार के तौर पर बतौर कृषि मंत्री चुने गए किसान नेता रवनीत सिंह बराड़ विपक्ष के सवालों से घिरे रहे। जवाब देने में नाकाम रहने पर आखिर में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उधर, लगातार दूसरे दिन किसान संसद में मंडी कानून पर चर्चा जारी रही।

विज्ञापनइस दौरान किसान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के कानून को सिरे से खारिज कर दिया। किसानों ने केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के बयानों की भी आलोचना की है। आखिर में शाम को किसान संसद का सत्र सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सोमवार की किसान संसद में सिर्फ महिलाएं हिस्सा बनेंगी। 200 महिला किसान प्रतिनिधियों पर सत्र के संचालन से लेकर हर गतिविधि तक की जिम्मेेदारी होगी। headtopics.com

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लंच ब्रेक के बाद करीब 2:30 बजे शुरू हुए दूसरे सत्र में भी हालात नहीं बदले। किसान प्रतिनिधि अपने सवालों का माकूल जवाब न मिलने की बात करते हुए हंगामा करते दिखे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बार-बार समझाने के बाद भी शोरगुुल नहीं थमा। इस सबके बीच सवालों से घिरे मंत्री जवाब नहीं दे सके और पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह किसानों के सामने निरुत्तर हैं। इसके बाद सभी सदस्यों ने तालियां बजाते हुए अपनी जीत पर खुशियां जताई। इसके बाद ही किसानों की संसद की कार्यवाही हो सकी। दिन के आखिरी और तीसरे सत्र में भी मंडी कानून पर चर्चा हुई। आखिर में करीब 5 बजे किसान संसद का सत्र सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

एक दिन भी नहीं बचा सके अपना पदपंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रवनीत सिंह बराड़ ने कहा कि एक दिन के लिए किसान संसद में मंत्री बनाए जाने पर बेहद खुश हुए, लेकिन सदस्यों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। सदस्य बार-बार दोहरा रहे थे कि न तो उनकी आय दोगुना हुई है और न ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कोई कानून बनाया। मंडी कानूनों पर भी सदस्यों ने असहमती जताई और मंत्री से इस्तीफे की मांग पर अड़ गए।

90 फीसदी सदस्य करते रहे विरोधसत्र के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने बताया कि मंडी कानूनों पर बिल लाएंगे। सदस्यों की तरफ से लगातार इसका विरोध किया जा रहा है। सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, लेकिन मंडी कानून पर बहस छिड़ते ही सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इससे किसान संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई। सत्र के दौरान 90 फीसदी सदस्यों ने कानून पर एतराज जताया। तीन अलग-अलग सत्रों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी छह सदस्यों को सौंपी गई थी। headtopics.com

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दिल्ली में 6 महीने बाद फिर किसानों की एंट्री: दिल्ली सरकार ने किसानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत दी, 19 दिन तक रोज 200 किसान लगाएंगे किसान संसद26 जनवरी को दिल्ली में उग्र प्रदर्शन के बावजूद दिल्ली सरकार ने किसानों को एंट्री की इजाजत दे दी है। यह परमिशन 22 जुलाई से लेकर 9 अगस्त तक है। प्रदर्शन का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने शर्तों के साथ प्रदर्शन की मंजूरी दी है। | Farmer Protest ( Kisan Andolan ) | Delhi Authority Gives Permission To Protest At Jantar Mantar, Kisan Sansad , Kisan Andolan , Farmer Protest DelhiPolice nstomar ArvindKejriwal यह किसान अंदोलन देशके लिए घातल है।

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