एंटीबायोटिक की बिक्री हुई कम, क्या कम बीमार पड़ रहे लोग?

कोरोना का असर: एंटीबायोटिक की बिक्री हुई कम, क्या कम बीमार पड़ रहे लोग?

23-05-2020 19:43:00

कोरोना का असर: एंटीबायोटिक की बिक्री हुई कम, क्या कम बीमार पड़ रहे लोग?

लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई में एंटीबायोटिक दवाएं कम ख़रीदी गई हैं. क्या है इसकी वजहें?

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटGetty Imagesलॉकडाउन का असर दवाइयों की आपूर्ति पर भले ही ना पड़ा हो लेकिन दवाइयों की बिक्री इससे ज़रूर प्रभावित हुई है.कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में एंटीबायोटिक समेत कई और दवाओं की बिक्री में कमी आई है. लोग अब पहले की तरह एंटीबायोटिक दवाएं नहीं ख़रीद रहे हैं.

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इंडियन फार्मासिस्ट असोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भूपेंद्र कुमार बताते हैं कि पहले के मुक़ाबले दवाओं की बिक्री में कमी देखी गई है. ये कमी अप्रैल और मई महीने में आई है. ख़ासतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री कम हुई है.भूप्रेंद कुमार ने बताया, “हमें बाज़ार से फीडबैक मिला है कि लोग अब छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाएं कम ख़रीद रहे हैं. ऑगमेंटीन, सेफोरॉक्सिम और सेफिक्ज़िम जैसे एंटीबायोटिक दवाओं कि बिक्री कम हुई है. इसके अलावा माइग्रेन, डायबिटीज़ और दौरे जैसी बीमारियों के लिए ली जाने वाली दवाएं भी कम बिक रही हैं. पेन किलर की ख़रीद भी कम हुई है.”

क्या हैं कारणबैक्टीरिया को मारने वाली दवाइयों को एंटीबायोटिक कहते हैं. एंटीबायोटिक अलग-अलग इंफेक्शन के इलाज में काम आती है.एंटीबायोटिक की बिक्री कम होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. लेकिन इसके दो बड़े कारण हैं एक तो ये कि लॉकडाउन में अस्पताल में ओपीडी और निजी क्लिनिक का कम खुलना और दूसरा छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाएं ना लेना.

भूपेंद्र कुमार बताते हैं कि पहले लोग सर्दी, जुकाम, खांसी जैसी बीमारियों के लिए क्लिनिक पर चले जाया करते थे लेकिन लॉकडाउन में क्लिनिक ही बंद हैं. ऐसे में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं. फिर लोग कोरोना वायरस के डर से खुद भी डॉक्टर के पास जाने से बच रहे हैं. वो केमिस्ट से भी दवाएं नहीं ले रहे बल्कि छोटी-मोटी बीमारियां घरेलू उपायों से या अपने आप ठीक होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

कम बीमार पड़ रहे लोगइमेज कॉपीरइटGetty Imagesफोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर एवं हेड डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि इस दौरान ये भी देखने को मिल रहा है कि लोग कम बीमार पड़ रहे हैं. इसकी वजह है साफ़-सफ़ाई का ज़्यादा ध्यान रखना.वह कहते हैं, “पश्चिमी देशों में संक्रामक रोग बहुत कम होते हैं. उसकी सबसे बड़ी वजह है साफ़-सफ़ाई. अब भारत में भी लोग कोरोना वायरस के कारण स्वच्छता का ज़्यादा ध्यान रख रहे हैं. जिसके कारण उन्हें इंफेक्शन कम हो रहा है. गंदे हाथों से खाना खाने से ये इंफेक्शन शरीर में पहुंच जाता है लेकिन कोविड19 के चलते लोग बार-बार हाथ धो रहे हैं या सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में हम ना सिर्फ़ कोरोना वायरस को रोक रहे हैं बल्कि दूसरी बीमारियों को भी रोक रहे हैं.”

डॉक्टर प्रवीण लोगों के कम बीमारी होने के पीछे कुछ और कारण भी बताते हैं-- लोग अभी बाहर नहीं जा रहे हैं. इसके चलते वो दूसरों के संपर्क में कम आ रहे हैं. ऐसे में ड्रॉपलेट्स के ज़रिए होने वाले इंफेक्शन जैसे ज़ुकाम, वायरल फीवर और फ्लू आदि से लोग बच हुए हैं.

- पिछले करीब दो महीनों से हम घर का खाना खा रहे हैं. बाहर का या सड़क किनारे मिलने वाला खाना भी हममें इंफेक्शन का कारण बनता है. ज़्यादा तला-भुना, मसालेदार खाने से दूसरी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं.- आजकल लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं. कोविड19 से सुरक्षा के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है इसलिए लोग अपने खान-पान में सुधार करके इसका प्रयास कर रहे हैं. इससे भी बीमारियां कम पकड़ रही हैं.

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- लॉकडाउन के कारण देश में वायु प्रदूषण कम हुआ है. प्रदूषण के कारण ज़ुकाम, खांसी, गले में खराबी जैसी बीमारियां सामान्य थीं. इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है. प्रदूषण कम होने से ये इंफेक्शन कम हो गए हैं.- आजकल लोग काम पर नहीं जा रहे और इसलिए खांसी, जुकाम जैसी छोटी बीमारियों को ठीक होने का समय दे पा रहे हैं. काम पर जाना हो तो तुरंत दवाई खाकर खुद को ठीक करना होता है लेकिन अब वो ऐसा नहीं कर रहे हैं.

डॉक्टर कहते हैं कि लोगों के लाइफ़स्टाइल में आया ये बदलाव एक सकारात्मक संकेत भी है. अगर वो साफ-सफाई, स्वच्छ खाने को अपनी आदत बना लेते हैं तो कई बीमारियों से निजात मिल जाएगी.दवाओं की ऑनलाइनख़रीदइमेज कॉपीरइटGetty Imagesएंटीबायोटिक के अलावा दूसरी दवाइयों की कम बिक्री की बात करें तो भूपेंद्र कुमार इसके पीछे ऑनलाइन खरीद को वजह मानते हैं. उनका कहना है कि लॉकडाउन में लोग केमिस्ट की बजाएं ऑनलाइन दवाइयां ज़्यादा मंगा रहे हैं.

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नही .....बस मूड नही दवा खाने का । Normal infected persons are not treated in a regular way by their family doctors- the probable reason for decline in use of antibiotics कियू की निजी अस्पताल खुल नहीं रहे हैं Private Doctors Clinics are responsible for the same. 😊 सब घर पर रहे है तो बीमार कंहा से पड़ेंगे,

बीबीसी कभी कभी लगता है। तू भी 21वे रोजे के सिबाईया तारे के इंतजार में ही तो खबर नहीं लिख देता 😂😂😂 Kar lo baat.....reee bhaiya ghr ka bna khana kha ae gaa to bimaar kha hoga......👈 डॉक्टर्स प्रसाद की तरह antibiotic लिखते है जहा काम paracetamol से हो सकता है वहा भी कोई न कोई antibiotic चिपका देते है अब ओ लिख नही पा रहे है सो लोग ले नही पा रहे है

आपका का क्या विचार है लोग ज्यादा बीमार पड़े।।अब लोग सजग और सतर्क हो गया हैं।। Comment your result below मैं fortis_hospital के Dr प्रवीण गुप्ता से थोड़ा इत्तेफ़ाक़ रखता हूं। असल में जो डाटा आना चाहिए कि कितने लोग इस परिस्थिति में मारे गए जो Covid के शिकार नहीं हुए वह अकड़ा शायद चौकाने वाला होगा। दवा की शॉर्टेज, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में प्राइवेट डॉक्टरों का ना बैठना भी हैं

बीमारी कम नहीं हुए, डॉक्टर का धंधा बंध हे। लोग डर गए के घर पर मर जायेंगे लेकिन जूठे पॉजिटिव केस के शिकार न होंगे। Log jabe medical me ja rahe tab normal cold aur fever ke liye bhi prescriptions ki mang kar rahe hai es liye lagta he bikri kam hui hai Bimaaron ko dekhne ke liye doctors hi nahin uplabdh hain. Bahut se doctor corona ke dar se marijon ko dekhne se katrate hain. Aur corona ke dar se marij doctor ke paas ja bhi nahin rahe hain. Log gharon mein bimaar baithe hain.

लोक डाउन और इस महामारी में बोहत से डॉक्टर दूसरी बीमारी पे धियान और इलाज नही कर रहे है सिर्फ कोरोना ही पे सबकी नजर है यदि आदमी बाहर का खाएगा नहीं,मास्क पहनेगा , हात को दिन में साफ करता रहेगा,,साफ माहौल वातावरण में रहेगा तो बीमार कहा से पड़ेगा,इस बीमारी में इंसान को बहुत कुछ सीखा दिया है Log starak rehna seekh rahe hain.. prblms ho rahi still ghrelu upay se khud ko immune bna kr rakhna seekh rahe nd abv oll humans ne jo pollution se earth ka systm upset kia tha wo kafi had tak waps se reset hona start hua. Bahr ka unhygene khana bnd hai to frk to pdega..

जब 1000 cases थे तब साहेब ने थाली बजवाया, अब 1 lakh cases है तो ढोल बजवाना बनता है. बीबीसी वाले तो सारे के सारे कुत्ते कि मौत मारे जायेंगे देख लेना..साथ में तुम अब्राहमिक मजहब वालों का अंत निकट आ चुका है और अब सनातन युग शुरू हो रहा है फुट डालने से पहले एक बात याद रखना सनातन एक वृक्ष है और सिक्ख,हिन्दू,जैन, बुद्ध सब उसकी शाखाएं.अब तुम्हारा अंत निकट है अब्राहमिकों

यह क्या बात की यह bbc भी नाम का bbc रह गया, डंग की कोई न्यूज़ नही।।।। एंटीबायोटिक और बुखार की दवाइयां दुकान वाले नही दे रहे bimar to ho rahe hain lekin sabko covid19 bata rahe hain log darr bhi rahe hain k kahin corona bata kar isolation me na daal de aam sardi khansi aur bukhar ki to jaise koi izzat hi nhi rahi

Log mar rahehain apne gjaro me...shamshan aur karbristan jakar register check karlo aakde khid saari sthiti saaf kardenge....Suger, hypertension, stroke, heartattack etc. Log ab ashwagandha,giloy aur kadha le rahe hai BBC HINDI Ke Liye Wakai Koi Asia Ko Puri Tarah Jananewala Editor Nahi Mila, Jo Yeh Log Congress Aur NDTV Ke Jaal Mein Fass Gaye

लोग अपने खानपान का खूब ख्याल रख रहे हैं। छोटी से छोटी स्वास्थ्य संबंधी समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। Doctor tak log pahunch nahi pa rahe hai pls help and donate to bring smatreatment for smawariors of curesmaindia. GlobalFund tatatrusts rarediseasesind HRDMinistry SKyriakidesEU ttindia timesofindia RNTata2000 smaspace EveryLifeOrg AbilisF ANI pls help us to get smatreatment in india

Mera manna hai Log ab families k saath time spend kr rhe hain... Gharo me reh rahe hain... To bimaar bhi km pad rahe hain 🙃😋 निजी अस्पताल के ओ पी डी बंद होने के कारण दवा कौन लिखेगा? लॉकडॉउन में वाहनों का शहर में ना चलना, केमिकल इंडस्ट्रीज़ बंद होने से वायु एवं जल कम से कम प्रदूषित हुआ। मनुष्य का घरों में रहना यानी किसी भी प्रदूषित चीज़ के संपर्क में ना होना एवं महामारी में सतर्कता यह शारीरिक स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक साबित हुई है। मानसिक तनाव का क्या ?

Dawa nhi le rhen log k corona smjh kr quarantine na kr lia jaye Na pesa he na medical shop Jine ki aarzoo me mare ja rahe hain log Marne ki aarzoo liye jiye ja rahe hain hum Doctors ne clinic band kiy hue h. Private doctor ka clinic bhi to band hai 😁 Doctors forcefully written the antibiotics medicines Nahi esa nahi.. kyunki esa isliye hai kyunki jo neighborhood me clinic hote hai wo closed hai .. jabse lockdown hue h.

dar gaye hai log प्राईवेट डाक्टर लोग करुना के डर से इलाज नही कर रहे, मजबूरन जनता देसी नुस्खे अजमा के ठीक हो रही है No...the prescription rates are lowered...the doctors are running low in business. कोरोना के आगे सारी बीमारियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। Nahi Dava kharidane ke paise nahi hai lockdown me

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