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अरविंद केजरीवाल ही नहीं, अयोध्या को लेकर इन राजनीतिक पार्टियों का भी हो चुका है विरोध...

विरोध के बाद भी राजनीतिक दलों के लिए अयोध्या क्यों है खास? #UttarPradesh #RE

26-10-2021 04:00:00

विरोध के बाद भी राजनीतिक दलों के लिए अयोध्या क्यों है खास? UttarPradesh RE

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) 26 अक्टूबर को अयोध्या ( Ayodhya ) में हनुमानगढ़ी और रामलला का दर्शन करेंगे. लेकिन सोमवार को अयोध्या में उनकी कई होर्डिंग पर कालिख पोत दी गई. इससे पहले भी अयोध्या को लेकर कई राजनीतिक पार्टियों का विरोध किया जा चुका है.

स्टोरी हाइलाइट्सविरोध के बाद भी राजनीतिक दलों के लिए अयोध्या क्यों है खास?अरविंद केजरीवाल की होर्डिंग पर पोती गई कालिखअयोध्या (Ayodhya) मौजूदा समय में ऐसा हॉट केक है जिसे हर कोई चखना चाहता है. इसलिए अयोध्या आंदोलन से फर्श से अर्श पर पहुंची बीजेपी (BJP) जहां इसे अपने गढ़ में अपने लिए चुनौती की तरह ले रही है तो वहीं अयोध्या से संकेत देकर यूपी का चुनावी सफर शुरू करने वाली राजनीतिक पार्टियां यह दलील देती हैं कि राम और अयोध्या पर सिर्फ बीजेपी का कॉपीराइट नहीं है. इसी चुनावी आरोप-प्रत्यारोप के बीच साधु-संतों का विरोध भी अहम हो जाता है जो कह रहे हैं कि कल तक जिनके लिए अयोध्या अछूत थी आज उन्हें भी अयोध्या और राम की याद आ गई है.

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दरअसल, आम आदमी पार्टी अयोध्या से फुल चुनावी मोड में आना चाहती है, लेकिन इसका जमकर विरोध किया जा रहा है. सीएम अरविंद केजरीवाल 26 अक्टूबर को अयोध्या में हनुमानगढ़ी और रामलला का दर्शन पूजन करेंगे, लेकिन रविवार को अयोध्या के संतों द्वारा उनकी यात्रा का विरोध करने के बाद सोमवार को अयोध्या की उनकी कई होर्डिंग पर कालिख पोत दी गई है.

आरोप है कि उन्होंने हमेशा अयोध्या और श्री राम का विरोध किया और अब जब भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर बन रहा है तो वह चुनावी लाभ लेने के लिए अयोध्या आ रहे हैं. इससे पहले वो कहां थे ?इसके पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया 13 सितंबर को राज्य सभा सदस्य संजय सिंह के साथ अयोध्या में आ चुके हैं. उन्होंने हनुमानगढ़ी और रामजन्म भूमि में दर्शन के बाद कहा था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली और देश में जो भी काम कर पा रहे हैं वो भगवान राम की कृपा और संतों के आशीर्वाद से ही कर पा रहे हैं. उन्होंने संतों से विजयी भव का आशीर्वाद भी लिया था. हालांकि उस समय भी अयोध्या के कई बड़े संतों ने मनीष सिसोदिया की इस पूरी यात्रा को राजनैतिक लाभ लेने की यात्रा बताकर विरोध किया था. headtopics.com

बसपा का हुआ था विरोधबहुजन समाज पार्टी ने 23 जुलाई को अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन के जरिये जो शुरुआत की थी उसमें अब कई अन्य पार्टियां भी जुड़ गई है. बसपा नेता और राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्रा ने ना सिर्फ पार्टी पदाधिकारियों के साथ हनुमान गढ़ी और रामजन्म भूमि जाकर रामलला के दर्शन किए थे. बल्कि सरयू आरती में शामिल होने के बाद मंत्रोच्चार के बीच 100 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक भी किया था. इसके बाद सतीश मिश्रा ने यहां तक कह दिया था कि अगर बीजेपी सोचती है कि राम सिर्फ उनके हैं, तो यह उसकी संकीर्ण सोच है. हम रोज सुबह उठकर भगवान राम की पूजा करते हैं. भगवान राम सबके हैं.

उस समय भी अयोध्या के साधु-संतों ने बसपा के अयोध्या और ब्राह्मण प्रेम पर विरोध करते हुए सवाल खड़ा किया था कि जो हमेशा राम और ब्राह्मण विरोधी रहे उनको अचानक अयोध्या कैसे याद आ गयी. इसी के बाद यह सवाल भी खड़ा हुआ था कि बदलते नारों के बीच क्या 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा का चेहरा भी बदलने वाला है और यह रणनीति उन्हें कितना फायदा पहुंचा सकती है.

असदुद्दीन ओवैसी का भी हुआ था विरोधअसदुद्दीन ओवैसी भी 2022 के यूपी चुनाव को लेकर अपनी जमीन तैयार करने के लिए अयोध्या आ चुके हैं. अयोध्या जनपद की पांच विधानसभा सीट में से रुदौली विधानसभा में सितंबर के पहले सप्ताह में रैली कर चुके हैं. उनके चुनावी होर्डिंग में अयोध्या की जगह फैजाबाद लिखा था इसलिए नाम को लेकर जमकर सियासी महाभारत भी हुई थी.

बाबरी मस्जिद के पूर्व मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने तो विरोध में ये तक कह दिया था कि ओवैसी जैसे लोगों की अयोध्या में कोई जरूरत नहीं है और हिंदुस्तान के मुसलमानों को ओवैसी से सावधान रहना चाहिए. इसी तरह साधु-संतों ने कहा कि औवेसी ने जानबूझकर अयोध्या की जगह फैजाबाद लिखवाया. क्योंकि अयोध्या उनको चुभती है. headtopics.com

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इतिहास में पहली बार ट्रेन से चला प्याज: 220 टन लाल प्याज किसान व्यापारियों ने सीधे असम भेजा, 1836km का सफर करेगा

राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब यहां होने वाली प्याज को ट्रेन से किसी दूसरे राज्य में भेजा गया है। पहली बार अलवर की प्याज रेल से असम भेजा गया है। पूरे प्रदेश में इससे पहले कभी भी प्याज को मालगाड़ी से ट्रांसपोर्ट नहीं किया गया। किसान रेल के जरिए किसानों की उपज को भेजने की उत्तर पश्चिम रेलवे ने यह शुरुआत की है। | उत्तर पश्चिम रेलवे के क्षेत्र में किसान रेल की अलवर से शुरूआत, 220 टन प्याज अलवर से असम भेजी

यही केजरीवाल का बयान था दिल्ली में बाहरी यूपी-बिहार के लोग मुफ्त इलाज कराने चले आते हैं जिससे दिल्ली अस्पताल की समस्या बढ़ती है और आज अयोध्या में वोट के लालच में फ्री दर्शन की बात करते हैं, बेशर्मी का हद है, राम मंदिर में इनकी क्या भूमिका रही है। बिरोधात्मक। शर्मनाक ArvindKejriwal AamAadmiParty सूर्य अर्ध्य [ छठ व्रत ] के प्रति मन में उत्पन्न हो आयी उदासीनता अभी तक समाप्त हो पायी है या नहीं। या फिर सत्ता गंवाकर ही संभलना है, तो हठधर्मिता पर कायम रहें।

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