अफसरों पर सख्त हुई मोदी सरकार: अचल संपत्ति के मामले में आईएएस-आईपीएस बतायें कहां से और कैसे मिली 'प्रॉपर्टी'

देश में आईएएस अफसरों के पास कितनी अचल संपत्ति है और वह कहां से मिली है, ये जानकारी हर हाल में देनी होगी। इस जानकारी को

Modigovt, Dopt Circulars

03-12-2021 16:08:00

अफसरों पर सख्त हुई मोदी सरकार: अचल संपत्ति के मामले में आईएएस-आईपीएस बतायें कहां से और कैसे मिली 'प्रॉपर्टी' ModiGovt

देश में आईएएस अफसरों के पास कितनी अचल संपत्ति है और वह कहां से मिली है, ये जानकारी हर हाल में देनी होगी। इस जानकारी को

डीओपीटी की एस्टेब्लिशमेंट अफसर एवं अतिरिक्त सचिव दीप्ति उमाशंकर ने केंद्र सरकार के सभी सचिवों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर उक्त जानकारी लेने के लिए कहा है। यदि कोई आईएएस अफसर 60 दिन (31 जनवरी 2022 तक) में यह जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार, अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

1800 आईएएस ने तय समय पर नहीं दिया ब्यौराआईएएस अफसरों से हर बार यह जानकारी मांगी जाती है, लेकिन अनेक अफसर इसे गंभीरता से नहीं लेते। कोई अफसर आधी अधूरी जानकारी देता है, तो कई दूसरे अधिकारी अचल संपत्ति रिटर्न जमा करना जरूरी नहीं समझते। वे नोटिस की भी कोई परवाह नहीं करते। साल 2017 के दौरान कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सामने आया था कि 1800 से अधिक आईएएस ने तय समय पर अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया। इनमें कर्नाटक कैडर के 82, आंध्रप्रदेश के 81, असम 72, पंजाब के 70, मेघालय के 72, उत्तरप्रदेश के 255, राजस्थान के 153, पश्चिम बंगाल के 100 से अधिक आईएएस, बिहार के 74, महाराष्ट्र के 67, मणिपुर-त्रिपुरा के 64 और हिमाचल प्रदेश के 60 आईएएस अधिकारियों ने अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया था। इससे पहले के दो तीन वर्षों में अचल संपत्ति रिटर्न जमा न कराने वाले आईएएस अफसरों की संख्या सालाना लगभग 1500 रही है। केंद्र सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सभी आईएएस अफसरों से उनकी अचल संपत्ति की जानकारी मांगी जाती है। इसके लिए दो माह का समय निर्धारित है।

जानकारी देने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते अफसरडीओपीटी के एक अधिकारी के मुताबिक, आईएएस अधिकारी इस जानकारी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। कुछ तो ऐसे अफसर हैं जो अचल संपत्ति रिटर्न को इस तरह से भरते हैं कि उसमें कुछ समझ ही नहीं आता। परिवार या बाहर के किसी व्यक्ति के नाम पर अधिकारी ने प्रॉपर्टी खरीदी है तो उसमें ठोस साक्ष्यों का अभाव रहता है। 2018 के दौरान अचल संपत्ति रिटर्न जमा कराने के लिए अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा गया। इसके बावजूद अनेक अधिकारियों ने रिटर्न पर गौर नहीं किया। दो हजार से अधिक आईएएस ने अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया था। इस तरह की जानकारी छिपाने में आईपीएस भी पीछे नहीं हैं। अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराने वाले अफसरों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है। उन्हें पदोन्नति और एम्पेनलमेंट से वंचित किया जा सकता है। ऐसे अफसरों की विजिलेंस क्लीयरेंस रोक दी जाती है। अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 16(2) के अनुसार, सभी आईएएस-आईपीएस अफसरों के लिए अपनी अचल संपत्तियों की जानकारी देना अनिवार्य है। अचल संपत्ति रिटर्न जमा न कराने वाला अफसर प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभाग या विदेश में जाने के लिए आवेदन देता है तो वह केस लटक सकता है। headtopics.com

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31 जनवरी 2022 तक ऑनलाइन भरना होगा ब्यौराडीओपीटी द्वारा अब यह जानकारी ऑनलाइन मांगी जाती है। इस बार अचल संपत्तियों की जानकारी देने के लिए अंतिम तिथि 31 जनवरी 2022 तय की गई है। डीओपीटी की वह साइट 31 जनवरी को अपने आप बंद हो जाएगी। जो अधिकारी इस तारीख तक अपनी अचल संपत्ति की जानकारी नहीं देंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार, कार्रवाई होगी। आईएएस अधिकारी को अचल संपत्तियों के बारे में सारी जानकारी देनी होगी। मसलन, वह संपत्ति कहां है। जिला, सब डिवीजन और गांव के नाम का भी उल्लेख करना होगा। आवासीय भूमि और अन्य भवनों का पूर्ण ब्यौरा देना पड़ेगा। उस प्रॉपर्टी का वर्तमान में कितना मूल्य है, ये भी बताना होगा। यदि संपत्ति अपने स्वयं के नाम पर नहीं है तो ये जानकारी देना अनिवार्य है कि वह प्रॉपर्टी किसके नाम पर है। सरकारी अधिकारी का उस व्यक्ति से क्या संबंध है। संपत्ति कैसे अर्जित की गई है, क्या वह नकद खरीदी गई है, पट्टे पर ली है, उत्तराधिकार में मिली है, उपहार अथवा किसी दूसरे स्रोत से मिली है, ये जानकारी देना अनिवार्य है। अचल संपत्ति से वार्षिक आय कितनी हो रही है, ये भी बताना पड़ेगा।

विस्तार लेकर मोदी सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। केंद्र एवं राज्यों में कार्यरत सभी आईएएस अधिकारियों को वह 'स्रोत' भी बताना पड़ेगा, जिसके जरिए उसके परिवार के किसी सदस्य ने वह प्रॉपर्टी ली है। अगर किसी अधिकारी ने परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति के नाम पर कोई अचल संपत्ति ली है तो उसका ब्यौरा भी देना अनिवार्य है।

विज्ञापनडीओपीटी की एस्टेब्लिशमेंट अफसर एवं अतिरिक्त सचिव दीप्ति उमाशंकर ने केंद्र सरकार के सभी सचिवों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर उक्त जानकारी लेने के लिए कहा है। यदि कोई आईएएस अफसर 60 दिन (31 जनवरी 2022 तक) में यह जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार, अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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1800 आईएएस ने तय समय पर नहीं दिया ब्यौराआईएएस अफसरों से हर बार यह जानकारी मांगी जाती है, लेकिन अनेक अफसर इसे गंभीरता से नहीं लेते। कोई अफसर आधी अधूरी जानकारी देता है, तो कई दूसरे अधिकारी अचल संपत्ति रिटर्न जमा करना जरूरी नहीं समझते। वे नोटिस की भी कोई परवाह नहीं करते। साल 2017 के दौरान कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सामने आया था कि 1800 से अधिक आईएएस ने तय समय पर अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया। इनमें कर्नाटक कैडर के 82, आंध्रप्रदेश के 81, असम 72, पंजाब के 70, मेघालय के 72, उत्तरप्रदेश के 255, राजस्थान के 153, पश्चिम बंगाल के 100 से अधिक आईएएस, बिहार के 74, महाराष्ट्र के 67, मणिपुर-त्रिपुरा के 64 और हिमाचल प्रदेश के 60 आईएएस अधिकारियों ने अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया था। इससे पहले के दो तीन वर्षों में अचल संपत्ति रिटर्न जमा न कराने वाले आईएएस अफसरों की संख्या सालाना लगभग 1500 रही है। केंद्र सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सभी आईएएस अफसरों से उनकी अचल संपत्ति की जानकारी मांगी जाती है। इसके लिए दो माह का समय निर्धारित है। headtopics.com

जानकारी देने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते अफसरडीओपीटी के एक अधिकारी के मुताबिक, आईएएस अधिकारी इस जानकारी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते। कुछ तो ऐसे अफसर हैं जो अचल संपत्ति रिटर्न को इस तरह से भरते हैं कि उसमें कुछ समझ ही नहीं आता। परिवार या बाहर के किसी व्यक्ति के नाम पर अधिकारी ने प्रॉपर्टी खरीदी है तो उसमें ठोस साक्ष्यों का अभाव रहता है। 2018 के दौरान अचल संपत्ति रिटर्न जमा कराने के लिए अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा गया। इसके बावजूद अनेक अधिकारियों ने रिटर्न पर गौर नहीं किया। दो हजार से अधिक आईएएस ने अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराया था। इस तरह की जानकारी छिपाने में आईपीएस भी पीछे नहीं हैं। अचल संपत्ति रिटर्न जमा नहीं कराने वाले अफसरों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है। उन्हें पदोन्नति और एम्पेनलमेंट से वंचित किया जा सकता है। ऐसे अफसरों की विजिलेंस क्लीयरेंस रोक दी जाती है। अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 16(2) के अनुसार, सभी आईएएस-आईपीएस अफसरों के लिए अपनी अचल संपत्तियों की जानकारी देना अनिवार्य है। अचल संपत्ति रिटर्न जमा न कराने वाला अफसर प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभाग या विदेश में जाने के लिए आवेदन देता है तो वह केस लटक सकता है।

31 जनवरी 2022 तक ऑनलाइन भरना होगा ब्यौराडीओपीटी द्वारा अब यह जानकारी ऑनलाइन मांगी जाती है। इस बार अचल संपत्तियों की जानकारी देने के लिए अंतिम तिथि 31 जनवरी 2022 तय की गई है। डीओपीटी की वह साइट 31 जनवरी को अपने आप बंद हो जाएगी। जो अधिकारी इस तारीख तक अपनी अचल संपत्ति की जानकारी नहीं देंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार, कार्रवाई होगी। आईएएस अधिकारी को अचल संपत्तियों के बारे में सारी जानकारी देनी होगी। मसलन, वह संपत्ति कहां है। जिला, सब डिवीजन और गांव के नाम का भी उल्लेख करना होगा। आवासीय भूमि और अन्य भवनों का पूर्ण ब्यौरा देना पड़ेगा। उस प्रॉपर्टी का वर्तमान में कितना मूल्य है, ये भी बताना होगा। यदि संपत्ति अपने स्वयं के नाम पर नहीं है तो ये जानकारी देना अनिवार्य है कि वह प्रॉपर्टी किसके नाम पर है। सरकारी अधिकारी का उस व्यक्ति से क्या संबंध है। संपत्ति कैसे अर्जित की गई है, क्या वह नकद खरीदी गई है, पट्टे पर ली है, उत्तराधिकार में मिली है, उपहार अथवा किसी दूसरे स्रोत से मिली है, ये जानकारी देना अनिवार्य है। अचल संपत्ति से वार्षिक आय कितनी हो रही है, ये भी बताना पड़ेगा।

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शत्रु पर विजय का 'गोल्डन जुबली' संदेश! देखिए #Khabardar Sweta Singh के साथ| #ATLivestream और पढो >>

That's the reason we love Modi 💖💖 अबकी बार 300 पार ✌✌ नेताओं की प्रॉपर्टी कैसे मिली ये भी तो पूछिए। पहले PM केयर फन्ड का तो हिसाब दे चंदाचोर ठीक वैसे जैसे अंबानी, अडानी की बढ़ी आपकी मेहरबानी से.... after 7 years you are asking. you told them to all manipulation on these 7 years n now showing public you are strict. WoW salesman.

पूरी दुनिया में आटोमेशन हुआ।रसोई गैस जी एसटी वगैरह..क्या आय से अधिक संपत्ति जांच मोदीजी के आदेश पर आश्रित है? बहुत सराहनीय निर्णय होगा केंद्र सरकार का उन भ्रष्ट नौकरशाह के ऊपर जिन्होंने सपा Congressऔर बसपा के राज्यकाल में भ्रष्टाचार से अनगिनत लैंड प्रॉपर्टी फ़्लैट बंगले UP में और मेट्रोपालिटिन शहर में ख़रीदे।सरकार इनको ज़ब्त करे और आम जनता को reasonable rates में दे।

लगे हाथ नेताओं की भी जांच हो तो सोने पे सुहागा होगा। देश राज्य सभी अफसरों से पूछो अचल.चल संपत्ति के बारे में। 😀😀😀 और नेताओं पर हमदर्द हुई मोदी सरकार

मुजफ्फरपुर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में गड़बड़ी, 65 में से 15 लोगों की निकालनी पड़ी आंखजानकारी के लिए बता दें कि बीते 22 नवंबर को मुजफ्फरपुर के आई हॉस्पिटल में 65 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था. जिसमें ज्यादातर लोगों की आंखों में इंफेक्शन हो गया.

आदरणीय प्रधानमंत्री जी अफसरो के साथ अपने मंत्रियो सांसदो की चल अचल सम्पत्तियों के विवरण पर सख़्ती कबतक news24tvchannel DainikBhaskar the_hindu myogiadityanath BBCHindi ttindia ndtvindia puneetsinghlive AamAadmiParty SanjayAzadSln Aamitabh2 INCIndia नेता क्यों नहीं बताएं। राजनेताओं और पार्टियों पर भी यही नियम लगा दो। बहुत पैसा मिलेगा ।

Netao se punchhtey ganth fat jati hai माo मुख्यमंत्रीmyogiadityanathजी से निवेदन है की 11दिसंबर2021 को पीआरडी स्थापना दिवस है❗ 1948 से पीआरडी जवान प्रदेश की सेवा करते आ रहे हैं अब युवाकल्याण से अलग कर 365दिन रोजगार का आशीर्वाद दीजिये❗🙏 45000_UPPRD 🇮🇳 पीआरडी_को_365_दिन_कार्य_दें !

स्टडी में खुलासा, डेल्टा की तुलना में ओमीक्रोन में दोबारा इंफेक्शन की संभावना तीन गुना ज़्यादा!आंकड़ों के आधार पर पता चला कि ओमिक्रोन पहले हुए संक्रमण से मिली प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता रखता है। 27 नवंबर तक कोविड पॉज़ीटिव पाए गए 2.8 मिलियन रोगियों में से 35670 को दोबारा संक्रमण हुआ था क्योंकि वे 90 दिनों में ही दोबारा कोविड पॉज़ीटिव हो गए थे।

भास्कर एक्सप्लेनर: देश में ओमिक्रॉन की एंट्री के बीच राजस्थान में 1 महीने में 257% केस बढ़े, MP में 5 दिन में 90 मामलेकोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन भारत में भी पहुंच गया है। देश में ओमिक्रॉन से संक्रमित 2 मरीज कर्नाटक में पाए गए हैं। इसके साथ ही महज एक हफ्ते के अंदर ही ओमिक्रॉन दुनिया के 25 देशों में फैल चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओमिक्रॉन की जानकारी देने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में कोरोना के मामले तेजी से घट रहे हैं। हालांकि अगर हम कुछ प्रमुख राज्यों के पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, ... | State Wise Coronavirus Update In India Today, State Wise Coronavirus Death In India महाराष्ट्र उन राज्यों में से है, जहां नए केसेज की रफ्तार बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा रही है। 1 दिसंबर को राज्य में 767 नए केस मिले जिसमें सबसे ज्यादा 112 मुंबई और 101 पुणे में मिले। राज्य में फिलहाल 7,391 एक्टिव केसेज हैं। Welcome, thank you for contacting me, I will get back to you shortly. फिर भी राज्य में राजनीतिक रैलीज आयोजित करने का क्या औचित्य?

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