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gujarat police: कमलेश तिवारी हत्याकांड: आरोपियों को पकड़ने का फुल क्रेडिट लेना चाहती थी गुजरात पुलिस? - did gujarat police tried to take full credit of arresting murder accused of kamlesh tiwari | Navbharat Times

कमलेश तिवारी हत्याकांड: आरोपियों को पकड़ने का फुल क्रेडिट लेना चाहती थी गुजरात पुलिस? #kamlesh

25.10.2019

कमलेश तिवारी हत्याकांड : आरोपियों को पकड़ने का फुल क्रेडिट लेना चाहती थी गुजरात पुलिस ? kamlesh

Lucknow Samachar: कमलेश तिवारी की हत्या के मुख्य आरोपियों को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब कहा जा रहा है कि आरोपियों की लोकेशन मिल जाने के बाद गुजरात पुलिस ने यूपी पुलिस का फोन उठाना ही बंद कर दिया था।

गुजरात पुलिस और यूपी पुलिस मिलकर काम कर रही थी। गुजरात एटीएस के एक बड़े अधिकारी से यूपी पुलिस का संपर्क टूटते ही उन्हें हत्यारोपियों की लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, गुजरात एटीएस के उस अधिकारी से लगातार यूपी पुलिस को हत्यारोपियों के संबंध में लीड मिल रही थी। हत्यारोपितयों की लोकेशान और उनके इरादे के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां लगातार गुजरात एटीएस यूपी पुलिस को दे रही थी। सूत्रों का कहना है कि गुजरात एटीएएस के अधिकारी ने 22 अक्टूबर को बात करना बंद कर दिया था।वारदात के बाद हत्यारोपी बरेली, पलिया, गौरीफंटा इलाके में बचने के लिए घूम रहे थे। नेपाल पहुंचना उनका लक्ष्य था। कमलेश तिवारी हत्याकांड: 2018 में लखनऊ आया था हत्यारोपित मोइनुद्दीन आखिर में गुजरात पुलिस ने यूपी पुलिस को नहीं दी जानकारी सूत्रों के मुताबिक, यह जानकारी गुजरात एटीएस के पास थी। एटीएस चाहती थी कि हत्यारोपी नेपाल न जाकर वापस आ जाएं। लिहाजा जब तक हत्यारोपी यूपी में रहे गुजरात एटीएस यूपी पुलिस को जानकारियां देती रही।उन इनपुट के आधार पर यूपी पुलिस भी काम कर रही थी। यूपी पुलिस के पास भी अपने इनपुट थे। यूपी पुलिस बरेली में हत्यारोपियों का डॉक्टर के पास इलाज करवाने वाले मुफ्ती समेत अन्य मददगारों तक पहुंच गई। इस बीच गुजरात एटीएस परिवार पर नजरबंदी जैसा माहौल बनाकर हत्यारोपितों अशफाक और मोइनुद्दीन पर सरेंडर करने का दबाव बना रही थी। अशफाक की पत्नी और पिता के जरिए इमोशनल काउंसलिंग करवाने में गुजरात एटीएस जुटी हुई थी। 22 अक्टूबर को जैसे ही एटीएस के अधिकारी ने पूरे मामले में अपनी ग्रिप बना ली, यूपी पुलिस के अधिकारियों का फोन उठाना बंद कर दिया। इससे यूपी पुलिस काफी परेशान हो गई क्योंकि उन्हें हत्यारोपियों की लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। कमलेश तिवारी के हत्यारों की मदद करने वाले मुफ्ती अली काजमी को जेल भेजा गया फुल क्रेडिट लेना चाहती थी गुजरात एटीएस? हत्यारोपी अजमेर होते हुए एक माल वाहक वाहन से गुजरात के लिए निकले थे। इसकी भनक लगने पर गुजरात एटीएस के अधिकारी ने 22 अक्टूबर को यूपी पुलिस के आलाधिकारियों का फोन उठाना बंद कर दिया। यूपी पुलिस रणनीति ही बना रही थी कि गुजरात एटीएस ने शाम को गुजरात-राजस्थान बॉर्डर शामलाजी पर हत्यारोपियों को उतार लिया। यूपी पुलिस को इस बात की भनक ही नहीं लगने दी। यूपी पुलिस के अधिकारी जिस समय रणनीति तैयार कर रहे थे, उस दौरान न्यूज चैनलों पर गुजरात एटीएस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से उन्हें पता चला कि दोनों हत्यारोपितों को पकड़ लिया गया है। हत्या मामले में यूपी पुलिस ने घटनास्थल के आस-पास की सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल गुजरात एटीएस को दे दी थी। गुजरात एटीएस ने घटनास्थल से मिले सूरत के धरती ब्रैंड के मिठाई के डिब्बे के आधार पर तीन साजिशकर्ताओं को घटना के दिन ही पकड़ लिया था। उनसे पूछताछ कर कई जानकारियां हासिल की गईं। नागपुर से वारदात के मास्टरमाइंड को भी पकड़ लिया। यह सभी जानकारियां गुजरात एटीएस ने यूपी पुलिस को 19 अक्टूबर को फोन पर बता दी थीं। सूत्रों के मुताबिक, गुजरात एटीएस प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी में थी कि इससे पहले ही यूपी पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। इससे गुजरात एटीएस का मन खट्टा हो गया। गुजरात एटीएस पूरी तरह से प्रयास कर रही थी कि किसी तरह हत्यारोपियों तक वह पहले पहुंच जाए। Web Title did gujarat police tried to take full credit of arresting murder accused of kamlesh tiwari ( और पढो: NBT Hindi News

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कमलेश तिवारी हत्याकांड: बड़े शातिर थे आरोपी, ट्रेन में छोड़ा दिया मोबाइल, शहर-शहर दौड़ती रही पुलिसलखनऊ. हिंदू समाज पार्टी (Hindu Samaj Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड ( Kamlesh Tiwari Murder Case) के आरोपी शेख अशफाक हुसैन और पठान मोईनुद्दीन अहमद चार दिनों तक यूपी पुलिस (UP Police), एटीएस और एसटीएफ को बड़े ही शातिराना तरीके से चकमा दे रहे थे. हत्या के बाद शहर-शहर घूम रहे कातिल की लास्ट लोकेशन अंबाला में मिली थी. जिसके बाद पुलिस को उनके बाघा बॉर्डर से पाकिस्तान भागने की आशंका हुई. लेकिन गिरफ़्तारी के बाद दोनों ने खुलासा किया कि वे अंबाला गए ही नहीं थे. पुलिस को चकमा देने के लिए उन्होंने ट्रेन में ही मोबाइल छोड़ दिया था. Kamlesh tiwari murder case accused leave mobile phone in tran to mislead up police upat | uttar-pradesh News in Hindi - हिंदी न्यूज़, समाचार, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी भाई अपराधियों के चेहरे पर कपड़ा क्यों ढका हुआ है 😂😂 AAROPI KOUN HAIN WO ASALI PAKADE JAIYE I want to tell you that Pawan Son Suresh Chandra has been posted in the office of DVVNL Firozabad for the last nearly 11 years. Which has not been transferred yet, which is against the government rule.

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