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corona virus: तीसरी लहर की आशंका और बच्चे

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर परस्पर विरोधी विचार सामने आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को

13-06-2021 04:27:00

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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर परस्पर विरोधी विचार सामने आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को

हालांकि एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का राहत भरा बयान आया कि ‘तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने के संकेत नहीं हैं।’ इसके उलट उत्तराखंड में मात्र 45 दिनों में 18 साल तक के तीन हजार बच्चों में कोरोना फैलने की खबर है। हालांकि कम ही बच्चों को अस्पताल ले जाने की नौबत आई। लेकिन महाराष्ट्र में 99,006 बच्चों के संक्रमित होने के आंकड़े चिंताजनक हैं। इनमें से तीन फीसदी बच्चों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ सकती है। अच्छा है कि प्रधानमंत्री ने तीसरी लहर में गांवों और बच्चों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने चीन से छह हजार ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने की बात कही है, जिनमें से 4,400 का आयात हो चुका है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी तीसरी लहर आने से पहले ही बच्चों को सुरक्षा कवच देने का एलान किया है। बारह साल से कम आयु के बच्चों के परिजनों को बिना पंजीकरण के व एक जून से से 18 से ऊपर वालों को टीका लगाने के आदेश दिए गए हैं।

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सरकारों के दावे और तैयारियां अपनी जगह हैं, पर जमीनी सच्चाई चिंताजनक है। गांव-देहात में पर्याप्त डाक्टर नहीं हैं और बाल विशेषज्ञों की तो भारी कमी है। यह कमी रातोंरात दूर नहीं की जा सकती, क्योंकि पहले से ही ग्रामीणों के लिए प्राथमिक शिक्षा-चिकित्सा की रीढ़ टूटी पड़ी है। कोरोना ने अभिभावकों, डॉक्टरों और सरकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। संकट तो उन बच्चों पर भी आया है, जिन के माता-पिता पहली या दूसरी लहर की भेंट चढ़ चुके हैं। उनके पुनर्वास की समस्या तो है ही, इस बीच बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोहों के भी सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। कोरोना काल में गरीबी बढ़ने के कारण कुछ माता-पिताओं द्वारा अपने बच्चे बेच देने की भी खबरें आई हैं।

बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं, पर 'इच्छाशक्ति’ के अभाव में वंचित वर्ग के बच्चों को राष्ट्र का भविष्य न समझने की भूल अतीत के उदाहरण लिए खड़ी है। बाल कुपोषण, शारीरिक शोषण, अनाथ और गरीब बच्चों की विद्या विहीनता का घोर अंधकार छाया रहा रहा। आज सांविधानिक संस्थाएं बच्चों के मुद्दों का संज्ञान ले रही हैं, तो इसका कारण संविधान में बाल अधिकारों की व्यवस्था है। इसके बावजूद लाखों बच्चे अशिक्षित और दोहरी शिक्षा नीति के तहत गुणकारी शिक्षा हासिल करने में असमर्थ हैं। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनाथ हुए बच्चों को नवोदय विद्यालय में मुफ्त शिक्षा दिलाने की बात कही है। दिल्ली को छोड़ दें, तो बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य-प्रदेश आदि राज्यों में निजीकरण की मार खाए सार्वजनिक स्कूलों, अस्पतालों और बाल संरक्षण संस्थाओं की खस्ता हालत कोरोना काल में मीडिया ने सबके सामने रख दी है। headtopics.com

एक ओर वे अनाथ बच्चे हैं, जिन्होंने पहली और दूसरी लहर में अपने माता-पिता को खोया है, जबकि तीसरी लहर में तो खुद बच्चों के संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। बच्चों के बचाव के लिए नया आयोग, नयी नीति अपनाने की आवश्यकता है। सरकार को आम बच्चों की शिक्षा के लिए खासकर ग्रामीण भारत के राजकीय विद्यालयों को पुनर्जीवित करना होगा और निःशुल्क क्वालिटी एजुकेशन विद्यालय खोलने पड़ेगे। धर्मस्थलों का दान-धन का उपयोग शिक्षा-स्वास्थ्य का बजट बढ़ाने में होना चाहिए। शिक्षा पर निवेश राष्ट्र के विकास के रूप में रिटर्न देगा। अन्यथा सरकार और एनजीओ जो भी कहें, पर यह अनुभव सिद्ध है कि किसी भी अनाथ और गरीब बच्चे को व्यावसायिक मुनाफे वाला स्कूल नहीं पढ़ाएगा, निजी अस्पताल उसे नहीं बचाएगा। आशंका जताई जा रही है कि कोरोना के मारे बच्चे दशकों तक उबर नहीं पाएंगे। जो बचपन गंवाएंगे, वे कैसा जीवन पाएंगे? अच्छी बात यह है कि अस्पतालों में आने वाले बच्चों से अधिक स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट जाने वालों की संख्या बढ़ रही है।

निशाना बनाएगी। जबकि दूसरे अनुमान के मुताबिक, तीसरी लहर का बच्चों पर अधिक असर नहीं होगा। तीसरी लहर के बारे में अतिवादी सोच हमें या तो लापरवाह बना देगी या अवसाद में डाल देगी। इस बीच, बारहवीं की परीक्षा निरस्त कर बच्चों की जीवन सुरक्षा को प्रमुखता देने से संबंधित सरकार का सराहनीय फैसला आया है। हमें अपने संतुलित विवेक के साथ महामारी से निपटना है। ऐसे समय में हमें बुद्ध की करुणा-सम्यक दृष्टि संबल देती है। बुद्ध ने कहा था, ‘अप्प दीपो भवः।’ बच्चों के बचाव हेतु हर भारतीय को अपना दीपक स्वयं बनना होगा, ताकि किसी नन्हें दीपक की ‘लौ’ बुझ न जाए। वर्ना अंधेरा हमारे राष्ट्र के बच्चे रूपी भविष्य तक फैल जाएगा। अतः आसन्न संकट की आशंका के मद्देनजर बचाव की तैयारी में जुट जाना ही विवेक संगत है। न्यायालयों ने बार-बार सरकारों को चेतावनी दी है और सरकारों ने प्रोटोकॉल जारी किए हैं। डॉक्टरों की सलाहें और विशेषज्ञों की चेतावनियों को गंभीरता से अमल में लाना नागरिकों का कर्तव्य है।

विज्ञापनहालांकि एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का राहत भरा बयान आया कि ‘तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने के संकेत नहीं हैं।’ इसके उलट उत्तराखंड में मात्र 45 दिनों में 18 साल तक के तीन हजार बच्चों में कोरोना फैलने की खबर है। हालांकि कम ही बच्चों को अस्पताल ले जाने की नौबत आई। लेकिन महाराष्ट्र में 99,006 बच्चों के संक्रमित होने के आंकड़े चिंताजनक हैं। इनमें से तीन फीसदी बच्चों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ सकती है। अच्छा है कि प्रधानमंत्री ने तीसरी लहर में गांवों और बच्चों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने चीन से छह हजार ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने की बात कही है, जिनमें से 4,400 का आयात हो चुका है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी तीसरी लहर आने से पहले ही बच्चों को सुरक्षा कवच देने का एलान किया है। बारह साल से कम आयु के बच्चों के परिजनों को बिना पंजीकरण के व एक जून से से 18 से ऊपर वालों को टीका लगाने के आदेश दिए गए हैं।

सरकारों के दावे और तैयारियां अपनी जगह हैं, पर जमीनी सच्चाई चिंताजनक है। गांव-देहात में पर्याप्त डाक्टर नहीं हैं और बाल विशेषज्ञों की तो भारी कमी है। यह कमी रातोंरात दूर नहीं की जा सकती, क्योंकि पहले से ही ग्रामीणों के लिए प्राथमिक शिक्षा-चिकित्सा की रीढ़ टूटी पड़ी है। कोरोना ने अभिभावकों, डॉक्टरों और सरकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। संकट तो उन बच्चों पर भी आया है, जिन के माता-पिता पहली या दूसरी लहर की भेंट चढ़ चुके हैं। उनके पुनर्वास की समस्या तो है ही, इस बीच बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोहों के भी सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। कोरोना काल में गरीबी बढ़ने के कारण कुछ माता-पिताओं द्वारा अपने बच्चे बेच देने की भी खबरें आई हैं। headtopics.com

दैनिक भास्कर ने 700 करोड़ की आय छिपाई, वित्त मंत्रालय का दावा: आज की बड़ी ख़बरें - BBC Hindi LIVE: 'मन की बात' में बोले पीएम मोदी- 15 अगस्त को भारतवासी मिलकर गाएं राष्ट्रगान, उसे रिकॉर्ड भी करें दैनिक भास्कर पर IT रेड: दैनिक भास्कर समूह में आयकर की जांच तीसरे दिन भी जारी रही, कार्रवाई के बीच ही विभाग ने जारी कर दिया बयान

बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं, पर 'इच्छाशक्ति’ के अभाव में वंचित वर्ग के बच्चों को राष्ट्र का भविष्य न समझने की भूल अतीत के उदाहरण लिए खड़ी है। बाल कुपोषण, शारीरिक शोषण, अनाथ और गरीब बच्चों की विद्या विहीनता का घोर अंधकार छाया रहा रहा। आज सांविधानिक संस्थाएं बच्चों के मुद्दों का संज्ञान ले रही हैं, तो इसका कारण संविधान में बाल अधिकारों की व्यवस्था है। इसके बावजूद लाखों बच्चे अशिक्षित और दोहरी शिक्षा नीति के तहत गुणकारी शिक्षा हासिल करने में असमर्थ हैं। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनाथ हुए बच्चों को नवोदय विद्यालय में मुफ्त शिक्षा दिलाने की बात कही है। दिल्ली को छोड़ दें, तो बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य-प्रदेश आदि राज्यों में निजीकरण की मार खाए सार्वजनिक स्कूलों, अस्पतालों और बाल संरक्षण संस्थाओं की खस्ता हालत कोरोना काल में मीडिया ने सबके सामने रख दी है।

एक ओर वे अनाथ बच्चे हैं, जिन्होंने पहली और दूसरी लहर में अपने माता-पिता को खोया है, जबकि तीसरी लहर में तो खुद बच्चों के संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। बच्चों के बचाव के लिए नया आयोग, नयी नीति अपनाने की आवश्यकता है। सरकार को आम बच्चों की शिक्षा के लिए खासकर ग्रामीण भारत के राजकीय विद्यालयों को पुनर्जीवित करना होगा और निःशुल्क क्वालिटी एजुकेशन विद्यालय खोलने पड़ेगे। धर्मस्थलों का दान-धन का उपयोग शिक्षा-स्वास्थ्य का बजट बढ़ाने में होना चाहिए। शिक्षा पर निवेश राष्ट्र के विकास के रूप में रिटर्न देगा। अन्यथा सरकार और एनजीओ जो भी कहें, पर यह अनुभव सिद्ध है कि किसी भी अनाथ और गरीब बच्चे को व्यावसायिक मुनाफे वाला स्कूल नहीं पढ़ाएगा, निजी अस्पताल उसे नहीं बचाएगा। आशंका जताई जा रही है कि कोरोना के मारे बच्चे दशकों तक उबर नहीं पाएंगे। जो बचपन गंवाएंगे, वे कैसा जीवन पाएंगे? अच्छी बात यह है कि अस्पतालों में आने वाले बच्चों से अधिक स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट जाने वालों की संख्या बढ़ रही है।

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Population Control Policy: विकासवादी सोच या ध्रुवीकरण की राजनीति, देखें 10 तक

आबादी ज्यादा तो जनता के लिए जरूरी संसाधनों का बंटवारा सभी को बराबरी और जरूरत मुताबिक मिल पाना कठिन होता है. 130 करोड़ से ज्यादा आबादा वाला देश भारत. जहां की जनसंख्या चुनावी भाषणों में देश की ताकत के रूप में प्रदर्शित की जाती है. उसी देश में आबादी को नियंत्रित करने की पॉलिसी का ड्राफ्ट जब चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में आता है तो विकास के लिए आवश्यक जनसंख्या नियंत्रण नीति राजनीति में फंस जाती है. विकासवादी सोच के मुकाबले ध्रुवीकरण और अपना अपना धर्म, अपनी आबादी आबादी की चिंता के विवाद में ज्यादा उलझी नजर आती है. देखें वीडियो.

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बोले- हमें कोरोना की तीसरी लहर का डर, चल रही तैयारीदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को डिजिटल पत्रकार वार्ता के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले महीने आई लहर देश के अंदर कोरोना की दूसरी लहर थी लेकिन दिल्ली के अंदर यह चौथी लहर थी। ArvindKejriwal एक साल से विधानसभा में ' बस क्यू शैल्टर' बनवाने के लिए द्वारका विधायक vinaymishra_aap जी के कार्यलय में लेटर पर लेटर दे रहा हूँ लेकिन 'बस क्यू शैल्टर' नही बने 2020 में विधायक जी ने कहाँ अभी बजट नही है और जैसे ही 21-22 का बजट आया मैसेज का जवाब तक नही देते ArvindKejriwal ArvindKejriwal तैयारी 😂😂 ArvindKejriwal

स्वास्थ्य ढांचे में पर्याप्त सुधार के बिना संक्रमण की तीसरी लहर से मुश्किल होगा मुकाबलाविशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 60 फीसद जनसंख्या को टीके लगा देने के बाद महामारी नियंत्रित रहेगी। आठ करोड़ की जनसंख्या वाले मध्य प्रदेश में एक करोड़ से कुछ अधिक लोगों को ही अब तक वैक्सीन का पहला डोज लगा हैं। UPSSSC_PET_रद्द_करो PET को रद्द करना, 22 लंबित भर्तियां हैं जो कि 2016 से लटकी हुई हैं, पहले उनको पूरा किया जाए और नियुक्ति दी जाए और 55,000 पदों पर विज्ञापन जल्द निकाला जाए, यह हमारी मांग है।AwasthiAwanishK aksharmaBharat PMOIndia RSSorg suryapsingh_IAS navneetsehgal3

कोरोना की दूसरी लहर में झेली ऑक्सीजन की किल्लत, अब दिल्ली के अस्पताल बन रहे 'आत्मनिर्भर'दिल्ली सरकार ने 9 अस्पतालों में 22 नए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट किए हैं. इन प्लांट्स की संयुक्त क्षमता 17 मीट्रिक टन है और अब तक दिल्ली में ऑक्सीजन के कुल 27 प्लांट शुरू किए जा चुके हैं. PankajJainClick After one week your reporter should have fact-check whether the oxygen plants are really working or false propaganda by AAP government.

कोरोना की दूसरी लहर में 719 चिकित्सकों की गई जान, बिहार ने खोए सबसे ज्यादा डॉक्टरआईएमए के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में देशभर के 719 डॉक्टर्स की मौत हुई है. इन 719 में 111 डॉक्टर्स अकेले बिहार के हैं. दिल्ली में 109, यूपी में 79, पश्चिम बंगाल में 63 और राजस्थान में 43 चिकित्सकों की मौत हुई है. snehamordani IMA को एक आंकड़ा येभी जारी करना चाहिए के कितने हस्पतालों ने ओर कितने डाक्टरों ने बीस लाख से ज्यादा के बिल कोरॉना मरीजों से वसूले ओर उन मरीजों में से कितने जिंदा बचे।

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी: केजरीवाल ने कहा- ब्रिटेन में 45% आबादी के वैक्सीनेशन के बाद भी केस बढ़े; हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकतेदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को वास्तविक करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की यह लहर बहुत खतरनाक थी। इस बार ज्यादा लोग बीमार पड़े, लेकिन हम सब लोगों ने मिलकर इसका मुकाबला किया। अब देशभर में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा है। यह काल्पनिक बात नहीं है, बल्कि वास्तविकता है। हमें तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी करनी होगी। | Delhi CM Arvind Kejriwal, Delhi CM, Arvind Kejriwal, Delhi Coronavirus Vaccination Third Wave, Delhi CM Arvind Kejriwal ArvindKejriwal Lekin modi srkar ko tho isme bhi glti dikhege dekna bhiyo Kul milakar modi srkar ka jana ty h q bhiyo केवल जिह्वा कर्म, असीमित विज्ञापन, कोरी प्रेस वार्ता, बिना काम के मासिक अनुदान, हाथ पर हाथ रखकर बैठने का पर्यायवाची ही है ArvindKejriwal तो कर ना.. काहे tv पर आकर बक बक करता है bsdk

Corona की दूसरी लहर पड़ी कमजोर, 24 घंटे में करीब 84 हजार नए मरीजबीते 70 दिनों के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा कोरोना संक्रमण, 24 घंटे में करीब 84 हजार नए मरीज. कोरोना से मौत का आंकड़ा अभी भी बढ़ा रहा चिंता, 24 घंटे में 4 हजार से ज्यादा मरीजों ने तोड़ा दम. उत्तराखंड के चमोली में भारी बारिश के चलते सड़क पर गिरा पहाड़ का मलबा, बद्रीनाथ हाइवे पर यातायात ठप. वैक्सीन के लिए जागरुकता मिशन से जुड़े वरुण शर्मा, सतीश कौशिक और गुलशन ग्रोवर, लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की. देखें 10 मिनट 50 खबरें. promote_aku_btech_exam online_aku_btech_exam NitishKumar ndtv BiharEducation_ IYCBihar pappuyadavjapl EduMinOfIndia yadavtejashwi ZeeBiharNews ABVPVoice AISA_Bihar VijayKChy narendramodi PMOIndia CNNnews18 DainikBhaskar JagranNews INCIndia RahulGandhi