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UAPA and Sedition Law: आवाजों को दबाने के लिए UAPA और राजद्रोह कानून का हो रहा इस्तेमाल, SC के पूर्व जजों का हमला

आवाजों को दबाने के लिए UAPA और राजद्रोह कानून का हो रहा इस्तेमाल, SC के पूर्व जजों का सरकार पर हमला via @NavbharatTimes

24-07-2021 23:26:00

आवाजों को दबाने के लिए UAPA और राजद्रोह कानून का हो रहा इस्तेमाल, SC के पूर्व जजों का सरकार पर हमला via NavbharatTimes

Sedition law and UAPA misused: चार पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि असहमति और सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाने के लिए आमतौर पर राजद्रोह और यूएपीए कानूनों का दुरुपयोग किया जाता है।

हाइलाइट्स'असहमति के खिलाफ एक हथियार बन गए हैं ये कानून'राजद्रोह केस में बरी होने वालों को मिले मुआवजा-सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजराजद्रोह केस में बरी होने वालों को मिले मुआवजा-पूर्व जजनई दिल्लीसुप्रीम कोर्ट के चार पूर्व न्यायाधीशों ने राजद्रोह कानून और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानि यूएपीए को रद्द करने की हिमायत करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। चार पूर्व न्यायाधीशों ने शनिवार को कहा कि असहमति और सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाने के लिए आमतौर पर इन कानूनों का दुरुपयोग किया जाता है। यूएपीए के तहत आरोपी 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत का जिक्र करते हुए, चार पूर्व न्यायाधीशों में एक, आफताब आलम ने कहा, 'यूएपीए ने हमें दोनों मोर्चों पर नाकाम कर दिया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक स्वतंत्रता है।'

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न्यायमूर्ति आलम और पूर्व न्यायाधीश दीपक गुप्ता, मदन बी लोकुर और गोपाल गौड़ा ने "लोकतंत्र, असहमति और कठोर कानून - क्या यूएपीए और राजद्रोह कानून को कानून की किताबों में जगह देनी चाहिए?" विषय पर एक परिचर्चा को संबोधित किया।'राजद्रोह केस में बरी होने वालों को मिले मुआवजा'

जहां न्यायमूर्ति आलम ने कहा कि ऐसे मामलों में मुकदमे की प्रक्रिया कई लोगों के लिए सजा बन जाती है, वहीं न्यायमूर्ति लोकुर का विचार था कि इन मामलों फंसाए गए और बाद में बरी होने वालों के लिए मुआवजे की व्यवस्था होनी चाहिए।'असहमति के खिलाफ एक हथियार बन गए हैं ये कानून' headtopics.com

इसी विचार से सहमति व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में इन कठोर कानूनों का कोई स्थान नहीं है। न्यायमूर्ति गौड़ा ने राय व्यक्त की कि ये कानून अब असहमति के खिलाफ एक हथियार बन गए हैं और उन्हें रद्द करने की जरूरत है।'मामले रहते हैं लंबित..प्रोसेस ही बन रहा सजा'

न्यायमूर्ति आलम ने कहा, “यूएपीए की आलोचनाओं में से एक यह है कि इसमें दोषसिद्धि की दर बहुत कम है लेकिन मामले के लंबित रहने की दर ज्यादा है। यह, वह प्रक्रिया है जो सजा बन जाती है।’’आंकड़े क्या कहते हैं?राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि 2019 में अदालतों में यूएपीए के तहत दर्ज 2,361 मुकदमे लंबित थे, जिनमें से 113 मुकदमों का निस्तारण कर दिया और सिर्फ 33 में दोषसिद्धि हुई, 64 मामलों में आरोपी बरी हो गये और 16 मामलों में आरोपी आरोप मुक्त हो गये। उन्होंने कहा दोषसिद्धी दर 29.2 प्रतिशत है।

98 पर्सेंट से ज्यादा लंबित मामलेपूर्व न्यायाधीश ने कहा, “अगर दर्ज मामलों या गिरफ्तार लोगों की संख्या से तुलना की जाए तो दोषसिद्धि की दर घटकर दो प्रतिशत रह जाती है और लंबित मामलों की दर बढ़कर 98 प्रतिशत हो जाती है।”'राजद्रोह कानून और यूएपीए जल्द से जल्द हो खत्म'

न्यायमूर्ति आलम के साथ सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति गुप्ता ने राजद्रोह कानून और यूएपीए के दुरुपयोग को लेकर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि इसे समय के साथ और कठोर बनाया गया है और इसे जल्द से जल्द रद्द कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में असहमति जरूरी है और सख्त कानूनों का कोई स्थान नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, असहमति और सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाने के लिए कानूनों का दुरुपयोग किया गया है।” headtopics.com

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'क्या भारत एक पुलिस राज्य बन गया है'यूएपीए के आरोपी स्टेन स्वामी की मौत और मणिपुर में गाय का गोबर कोविड-19 का इलाज नहीं है कहने पर, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि 'क्या भारत एक पुलिस राज्य बन गया है'।

'विशेष सुरक्षा कानूनों में बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत'इस बीच, न्यायमूर्ति लोकुर ने सुझाव दिया कि एकमात्र उपाय जवाबदेही और उन लोगों के लिए मुआवजा है जो लंबी अवधि की कैद के बाद बरी हो जाते हैं। न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि विशेष सुरक्षा कानूनों में बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत है।

फ्रीडम ऑफ स्पीच को कुचलने के लिए UAPA का इस्तेमाल-प्रशांत भूषणवरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने वेबिनार में कहा कि यूएपीए और राजद्रोह कानून का इस्तेमाल असहमति को दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए किया जा रहा है और यह विचार करने का समय आ गया है कि क्या वे संविधान के अनुरूप हैं। इस परिचर्चा का आयोजन ‘कैंपन फॉर ज्यूडिशल अकाउंटिबिलिटी एंड रिफोर्म्स (सीजेएआर) और ‘ह्ममून राइट्स डिफेंडर्स अलर्ट’ (एचआरडीए) ने किया था।

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गुजरात में सियासी भूचाल, कौन होगा अगला मुख्यमंत्री? देखें दंगल में बड़ी बहस

गुजरात में शनिवार को बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. विजय रुपाणी (Vijay Rupani) ने मुख्यमंत्री (Chief Minister) के पद से इस्तीफा (Resign) दे दिया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी आलाकमान को आभार प्रकट किया. कुछ देर पहले ही रुपाणी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात करते हुए उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. गुजरात के मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी के इस्तीफा देने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? देखें दंगल में बड़ी बहस.

Jumla party apni nakamiyo ko shupane k liye isi ka sahara leti h jo sach bolta h use pareshaan kiya jata h

उत्तराखंड चुनाव: BJP का मोदी कार्ड, कांग्रेस का युवा चेहरा और AAP का कर्नल पर दांव!एक तरफ बीजेपी अपने तमाम बड़े चेहरों की रैलियां करवाने जा रही है तो वहीं कांग्रेस भी इस बार युवा चेहरों पर भरोसा जता रही है. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी इस राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने को तैयार दिख रही है.

भारत और वैदिक विज्ञान: भारत का प्राचीन कृषि विज्ञान और कृषि वैज्ञानिक पाराशरभारत और वैदिक विज्ञान: भारत का प्राचीन कृषि विज्ञान और कृषि वैज्ञानिक पाराशर VedicScience Agriculture IndianAgriculture AKTU_Lucknow के ऑनलाइन exams में जमकर नकल हो रही है। आप मीडिया वाले इस मुद्दे को क्यों नही उठा रहे है?

एनकाउंटर का खौफ, जब शामली में हाथ उठाकर थाने पहुंचे हत्या और बलवा के अपराधीजिस शामली जिले में कभी अपराधियों के डर से लोग अपने घरों से पलायन को मजबूर होते थे, आज उसी शामली के एक थाने में हत्या, बलवा और अन्य जघन्य अपराधों में शामिल लोग हाथ ऊपर कर सरेंडर के लिए पहुंचे। पश्चिम यूपी के इस जिले में अपराधियों के खिलाफ चले पुलिस के अभियानों का व्यापक असर देखने को मिला है। शनिवार को सरेंडर के इस वीडियो को यहां एसपी सुकीर्ति माधव मिश्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया। ये ख़ौफ़ अच्छा लगा।कानून का राज दिख रहा है। चुनाव 2022 के पहले होमगार्ड्स एक्ट 1962-63 में संशोधन करके जवानों को स्थाई करने का कष्ट करें होमगार्ड्स_को_नियमित_करो CMOfficeUP UPGovt ANI ChiefSecyUP yadavakhilesh priyankagandhi SanjayAzadSln BJP4UP samajwadiparty AamAadmiParty S55 ye sab police walo ke kale karnamo ki wajah se hai

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