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I am sorry Amarinder... राजीव की दोस्ती, राहुल की 'अदावत' और सोनिया की बेबसी की इनसाइड स्टोरी

आई एम सॉरी अमरिंदरः राजीव की दोस्ती, राहुल की 'अदावत' और सोनिया की बेबसी की इनसाइड स्टोरी #CaptainAmarinderSingh #SoniaGandhi

20-09-2021 04:18:00

आई एम सॉरी अमरिंदरः राजीव की दोस्ती, राहुल की 'अदावत' और सोनिया की बेबसी की इनसाइड स्टोरी CaptainAmarinderSingh SoniaGandhi

'I am sorry Amarinder...' अमरिंदर का इस्तीफा स्वीकार करते सोनिया के इन चार शब्दों में दो पीढ़ियों की एक पूरी दास्तां जज्ब है। इसे आप पढ़ेंगे तो अपराधबोध छलकते इन शब्दों को समझ पाएंगे। पिछले कुछ महीनों में 10 जनपथ के बंद दरवाजों के भीतर अमरिंदर पर क्या कसमसाहट चली होगी, उसका एक अंदाजा लगा पाएंगे।कैप्टन अमरिंदर सिंह और गांधी परिवार के बीच दो पीढ़ियों तक चले रिश्ते की इस डोर में कई गांठें हैं। और कई सुलझाई गई गांठों की सिलवटें भी मौजूद हैं। ये गांठें कैसे पड़ीं, यह आप आगे पढ़ेंगे। इस कहानी के दो पार्ट हैं और चार मुख्य किरदार हैं- राजीव, सोनिया, राहुल और खुद अमरिंदर। पहला हिस्सा 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेगे' वाले दो यारों की है। और फिर आगे अदावत की कहानी है। सियासत जिस चीज के लिए बदनाम है, वह भी इसका हिस्सा है। एक दूसरे को मात देने के दांव-पेच इसमें शामिल हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह और गांधी परिवार के बीच दो पीढ़ियों तक चले रिश्ते की इस डोर में कई गांठें हैं। और कई सुलझाई गई गांठों की सिलवटें भी मौजूद हैं। ये गांठें कैसे पड़ीं, यह आप आगे पढ़ेंगे। इस कहानी के दो पार्ट हैं और चार मुख्य किरदार हैं- राजीव, सोनिया, राहुल और खुद अमरिंदर। पहला हिस्सा 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेगे' वाले दो यारों की है। और फिर आगे अदावत की कहानी है। सियासत जिस चीज के लिए बदनाम है, वह भी इसका हिस्सा है। एक दूसरे को मात देने के दांव-पेच इसमें शामिल हैं।

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राजीव, अमरिंदर, दून स्कूल और वो दोस्तीतो यह कहानी पटियाला राजघराने और एक समय देश में सत्ता का पर्याय रहे गांधी परिवार के अलग-अलग मिजाज के दो लड़कों की दोस्ती से शुरू होती है। एक धीर-गंभीर, संकोची। दूसरा राजसी तेवर वाला और जिद का पक्का। पटियाला और दिल्ली से दूर देहरादून के मशहूर दून स्कूल में इन दो लड़कों, राजीव गांधी और अमरिंदर सिंह की दोस्ती परवान चढ़ती है। यह 60 के दशक के आखिरी सालों की बात है। तब राजीव के नाना जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे।

दोस्ती में गर्माहट बढ़ती है। छुट्टियां एक दूसरे के घर में मनाने का सिलसिला चलता है। राजीव दोस्त अमरिंदर को दिल्ली में घर आने का न्योता देते। और स्कूल से इतर भी राहुल के घर यानी पीएम नेहरू के आवास पर यह दोस्ती और मजबूत होती जाती। स्कूल के दिन बीतते हैं। देहरादून से दोनों की राहें जुदा हो जाती हैं। अमरिंदर पहले खडकवासला और फिर दून की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भर्ती हो सेना में चले जाते हैं। और पायलट बनने की ख्वाहिश पाले राजीव आगे की पढ़ाई के लिए लंदन का रुख करते हैं। headtopics.com

दोस्त की जिद और फौजी नेता बन जाता हैसाल 1977। देश में आपातकाल के ठीक बाद का वक्त। अब तक देश में सियासत कई करवटें बदल चुकी है। गांधी परिवार भी काफी उतार-चढ़ाव देख चुका है। अमरिंदर सेना में पारी पूरी कर लौट चुके हैं।अब दोस्ती का दूसरा अध्याय शुरू होता है। राजीव फौज से लौटे अपने जिगरी दोस्त को राजनीति में आने का आमंत्रण देते हैं। एक तरह से जिद करते हैं। अमरिंदर मान जाते हैं और कांग्रेस जॉइन करते हैं। 1977 के लोकसभा चुनाव में वह पटियाला से कद्दावर अकाली नेता गुरुचरण सिंह तोहरा के खिलाफ लड़ते हैं, पर आपातकाल की इंदिरा विरोधी हवा में तिनके की तरह उड़ जाते हैं। लेकिन जल्द ही तीन साल बाद इसी सीट से 1980 में वह पहली सियासी जीत का स्वाद चख संसद पहुंचते हैं।

रिश्तों में पहली गांठ पड़ ही जाती हैऔर फिर इस यारी को वही रोग लगता है, जिसके लिए दोस्ती और सियासत को अलग रखने की हिदायत दी जाती है। रिश्ते में पहली गांठ पड़ती है। सात साल बाद ही 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में अमरिंदर सांसदी के साथ कांग्रेस से रिश्ता तोड़ देते हैं। वे अकालियों से जुड़ते हैं। 1991 में अकाली दल पंथिक पार्टी बनाते हैं और असफलता के बेहद बुरे दौर से गुजरते हैं।

इस दौरान दोस्त भी बिछड़ जाता है। 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो जाती है। इसके बाद कहानी का पार्ट-2 शुरू होता है। सियासी तबाही के मुहाने पर बैठे अमरिंदर कांग्रेस में वापसी करते हैं। रिश्तों में पड़ी इस गांठ को खोलने का काम सोनिया करती हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र से महज 856 वोट पाने वाले अमरिंदर 1998 में अपनी पार्टी अकाली दल (पंथिक) का कांग्रेस में विलय कर देते हैं। और कांग्रेस में उनकी दूसरी पारी शुरू होती है।

कैप्टन का बढ़ता कद और असहज होते रिश्तेअमरिंदर1999 में पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाते हैं। पंजाब में अमरिंदर का कद बढ़ता चला जाता है। दूसरी ओर 10 जनपथ के अंदर उनको लेकर अविश्वास की जड़ें गहरी होने लगती हैं। अमरिंदर पंजाब में कांग्रेस का पर्याय बनने लगते हैं। इस कहानी में अब चौथे किरदार की एंट्री होती है। headtopics.com

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2004 में राहुल गांधी की कांग्रेस में औपचारिक आमद होती है और अगले कुछ सालों में उनकी भूमिका बढ़ती चली जाती है। वे पार्टी के उपाध्यक्ष बनते हैं। अमरिंदर और राहुल के रिश्तों में एक अजीब सी असहजता पनपने लगती है। और 2015 के आते-आते यह चरम पर पहुंच जाती है।

​दून के वे दिन... अमरिंदर अंकल के साथ राहुल की आउटिंगऊपर लगा फोटो नया है। लेकिन उन पुराने दिनों का सीन कुछ यही रहा होगा। अमरिंदर और राहुल के रिश्ते की कहानी भी देहरादून के उसी दून स्कूल से शुरू होती है, जहां उनके और राजीव की दोस्ती परवान चढ़ी थी। संयोग से राजीव और अमरिंदर के बेटे राहुल और रनिंदर दून स्कूल में साथ पढ़ते हैं।

अमरिंदर अक्सर अपने बेटे से मिलने दून स्कूल जाया करते। अमरिंदर की जीवनी 'कैप्टन अमरिंदर सिंहः द पीपल्स महाराजा' में खुशवंत सिंह इसका जिक्र करते हुए लिखते हैं, 'अमरिंदर जब भी अनपे बेटे रनिंदर से मिलने दून स्कूल आते, तो साथ में राहुल को भी आउटिंग के लिए लेकर जाया करते थे।' हालांकि यह अलग बात है कि ये यादें दोनों की रिश्तों में कभी ज्यादा मिठास नहीं घोल पाईं।

आप मेरे लिए लड़ेंगे अमरिंदर? सोनिया का वह फोन और कैप्टन का सिक्सरपंजाब में 2007 और 2012 की लगातार हार के बाद कैप्टन बैकफुट पर थे। 2013 में प्रताप सिंह बाजवा पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए जाते हैं। इसके साथ ही गांधी परिवार और कैप्टन के रिश्तों में कड़वाहट घुलने लगती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर रिश्तों पर जमी बर्फ पिछलने की कोशिश दिखती है, लेकिन यह भी सियासी ही निकली। खुशवंत सिंह किताब में इसका जिक्र करते हैं। दिल्ली से चंडीगढ़ लौट रहे कैप्टन जब पानीपत ही पहुंचे तो उनके फोन की घंटी बजती है। फोन सोनिया गांधी का होता। 'क्या आप मेरे लिए लड़ेंगे अमरिंदर?' सोनिया के शब्द गुजारिश लिए हुए होते हैं। सोनिया के बाद अमरिंदर को प्रियंका का फोन जाता हैं- 'अंकल, मैं चाहती हूं आप अमृतसर से चुनाव लड़ें।' और इस दोस्ती में राजीव काल की गर्माहट महसूस की जाने लगती है। headtopics.com

और जेटली को हरा अमरिंदर बाजी पलट देते हैंपंजाब में दो चुनावों में खराब प्रदर्शन के दाग को धोने का यह बड़ा मौका अमरिंदर हाथ से जाने नहीं देते। वह जीवन का सबसे बड़ा दांव खेलने का फैसला कर लेते हैं। यह जानते हुए कि कांग्रेस और अकालियों के किले अमृतसर में हार उनकी सियासी करियर तबाह कर सकता है। 28 मार्च 2014 को अमृतसर पहुंचने पर कांग्रेस में उनका भव्य स्वागत होता है। और फिर वह होता है, जिस करिश्मे की उम्मीद शायद सोनिया-राहुल भी कम कर रहे होंगे। बीजेपी के कद्दावर नेता अरुण जेटली को कैप्टन हरा देते हैं। रातोंरात कैप्टन का कद कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही उनके तेवर भी। पंजाब में वापसी की उनकी छटपटाहट अब सोनिया-राहुल की मुश्किल बढ़ाने लगती है।

ये आपके पापा के दोस्त हैं राहुल... सोनिया की राहुल को नसीहत2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अमरिंदर और बाजवा के बीच संग्राम का सीन कमोबेश कुछ वैसा ही हो जाता, जैसा इन दिनों अमरिंदर और सिद्धू के बीच है। पंजाब पाने के लिए अमरिंदर हर दांव चलते हैं। नवंबर 2014 में पहली बार वह राहुल की काबिलियत पर सीधा सवाल उठाते हुए बगावत का बिगुल फूंकते हैं। वह वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने का आरोप जड़ते हैं। एक तरह से कैप्टन और गांधी परिवार के बीच शीतयुद्ध चल पड़ता है। इस दौरान सोनिया तो फिर भी नरम रहती हैं, लेकिन राहुल से उनके रिश्ते बिगड़ते चले जाते हैं।

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खुशवंत सिंह लिखते हैं, 'सोनिया गांधी पंजाब में अमरिंदर की वापसी पर एक हद तक सहमत थीं, लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल बाजवा के हाथ से कमान लेने को कतई तैयार नहीं थे।' 2015 में राहुल और अमरिंदर के बीच कड़वाहट किस कदर बढ़ चुकी थी किताब में खुशवंत सिंह इसका खुलासा करते हुए कहते हैं, 'सितंबर 2015 में 10 जनपथ पर पंजाब की कलह को दूर करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। इसमें राहुल ने अमरिंदर को वैसा सम्मान नहीं दिया, जैसा एक वरिष्ठ नेता को दिया जाना चाहिए। बैठक के दौरान सोनिया को हस्तक्षेप कर राहुल को बताया पड़ा कि वह अपने पिता के दोस्त से बात कर रहे हैं। इसके बाद ही राहुल चुप बैठे।'

कैप्टन अमरिंदर का राहुल को टका सा जवाबइस बर्ताव से अमरिंदर इस कदर खफा थे कि उन्होंने राहुल को सीधे निशाने पर लेना शुरू कर दिया। कैप्टन ने कांग्रेस अपाध्यक्ष को जमीनी हकीकत जानने की नसीहत दी और नई पार्टी बनाने की धमकी तक दे डाली। हाइकमान पर दवाब बढ़ाने के लिए वह बीच-बीच में बीजेपी से नजदीकी दिखाने के दांव भी चलते हैं। पंजाब में बढ़ती कलह को दूर करने के लिए एक महीने बाद अक्टूबर 2015 की बैठक में राहुल और कैप्टन फिर आमने सामने थे।

राहुल ने अमरिंदर से सवाल किया, 'मैंने सुना है कैप्टन साहब कि आप अलग पार्टी बना रहे हैं?' इस पर अमरिंदर का जवाब था, 'आपके जो सुना है, बिल्कुल सही है। अगर मैं आपके खांचे में फिट नहीं बैठता हूं, तो मुझे विकल्प तलाशने होंगे। मैं पंजाब में रहता हूं और अकालियों ने इसे बर्बाद कर दिया है। अगर आपके पास मेरे लिए कोई प्लान नहीं है, तो मुझे अलग रास्ता चुनना होगा।' राहुल ने इस पर हिदायत देते हुए कहा- 'अगर आपने यह कदम उठाया तो हम दोनों को नुकसान होगा।' अमरिंदर ने भी तल्खी के साथ जवाब दिया था, 'चाहे ऐसा ही हो।'

तब कैप्टन की जिद के आगे कांग्रेस को झुकना पड़ा था और वह भी 10 साल बाद पंजाब में कांग्रेस की वापसी भी करा लाए थे। और पढो: NBT Hindi News »

10तक: सियासत के लिए भी नमक की तरह इस्तेमाल होते हैं किसान!

देश की सियासत में किसान नमक की तरह इस्तेमाल होता है. जरूरत के हिसाब से सियासी दल उसका इस्तेमाल अपने हित के हिसाब से करते हैं. लखीमपुर खीरी का ही उदाहरण लीजिए जहां पहुंचने के लिए विपक्षी दलों में आज होड़ मच गई. मुश्किल में फंसी जनता का हाल जानना हर दल का फर्ज और हक दोनों है लेकिन जनता को कब कितना भाव दिया जाएगा ये चुनाव पर निर्भर करता है. यूपी में चुनाव है तो सभी दलों को किसानों की चिंता है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी लखीमपुर खीरी आने को तैयार हैं, लेकिन उनके ही राज्य में पिछले 5 महीनों से आदिवासी किसान आंदोलन कर रहे हैं, उनकी सुध लेने का न तो मुख्यमंत्री को वक्त मिला है और न ही उनकी पार्टी के नेतृत्व ने उनके लिए आवाज उठाई है. देखें 10तक.

बिहार के पूर्व विधायक के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, 68 लाख की संपत्ति जब्तजानकारी के लिए बता दें कि ददन सिंह पर भी कई अपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं. यूपी और बिहार में अलग-अलग मामलों में उनके खिलाफ कई केस दर्ज हैं. इस बार ईडी ने अपनी कार्रवाई उन पांच FIR के आधार पर की है जो यूपी और बिहार में दर्ज की गई थीं.

हैदराबाद के निज़ाम थे दुनिया के सबसे अमीर और कंजूस शख़्स - BBC News हिंदीनिज़ाम को टाइम पत्रिका ने दुनिया का सबसे अमीर शख़्स घोषित किया था. लेकिन उनकी कंजूसी के भी बहुत से किस्से मशहूर थे. उन्होंने हैदराबाद को भारत से अलग रखने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया था. लेकिन हसरत अधूरी रही. Ameer ban na hai to Kanjoos hona hoga. शिक्षक_ट्रांसफर_पोर्टल_चालू_करो ChouhanShivraj JM_Scindia Indersinghsjp माननीय प्रार्थना है कि जो शिक्षक सिफारिश और राजनीतिक पकड़ के अभाव में स्वैच्छिक/म्युचुअल ट्रांसफर से वंचित रह गये हैं उनके लिये मानवीय आधार,समदर्शी बनकर पुनः ट्रांसफर पोर्टल चालू करने की कृपा करें Hritik Roshan

पीएम मोदी गोवा के हेल्थकेयर वर्कर्स और कोविड वैक्सीन के लाभार्थियों से कर रहे बातचीतप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा के हेल्थकेयर वर्कर्स और कोविड वैक्सीन के लाभार्थियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत कर रहे हैं। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि हमने कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ को 100 प्रतिशत पूरा कर दिया है। सीधा प्रसारण करेंगी। narendramodi फ़क़ीरमिया ने काफी पहले अपनी नाकामयाबी कुबूल किया उस वक्त$= 60₹ था आज 74 है इसकी आबरू कितनी गिरी वो समझने की बात है और आगे कितनी गिराएगा उसका पता उसको खुद को भी नही है narendramodi भाईओ और बहेनो वोह दुनिया भर की फेंके फेकता है मगर आसमान छूती महँगाई के बारे में कुछ बोलता ही नही चुनाव के वक्त वोट देने पर याद रखे साथ मे भी यह जरूर याद रखे कोरोना काल में हरेक को अपने हाल पर छोड़कर यह अपने आपको सुरक्षित रखने झोला उठाकर अंडर ग्राउंड हो गया था....

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