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BBC 100 Women 2020: जानिए कौन भारतीय महिलाएँ हैं लिस्ट में - BBC News हिंदी

साल 2020 की वे महिलाएं जो प्रेरक हैं, प्रभावशाली हैं और दुनिया बदल रही हैं, कौन कौन हैं इस सूची में शामिल.

24-11-2020 10:03:00

शाहीन बाग वाली दादी बिल्कीस बानो को BBC100Women में मिली जगह. देखिए इस लिस्ट में भारत से और कौन-कौन शामिल हुआ?

साल 2020 की वे महिलाएं जो प्रेरक हैं, प्रभावशाली हैं और दुनिया बदल रही हैं, कौन कौन हैं इस सूची में शामिल.

एक घंटा पहलेबीबीसी ने 2020 के लिए दुनिया भर की 100 प्रेरक और प्रभावशाली महिलाओं की अपनी सूची तैयार की है. इस साल चयनित ये 100 महिलाओं की सूची विशेष तौर पर उन लोगों को दर्शा रही है जो इस अशांत वक्त के दौरान बदलाव का नेतृत्व करते हुए फ़र्क ला रही हैं.और एक असामान्य वर्ष में- जब दुनिया भर में अनगिनत महिलाओं ने दूसरों की मदद की खातिर कई त्याग किए हैं- 100 महिलाओं की सूची में एक स्थान उनके सम्मान में खाली रखा गया है.

चीन की घुसपैठ पर कांग्रेस ने PM मोदी से पूछा- डरें मत, साफ बताएं हालात क्या हैं? ऐसा मुस्लिम गांव जहां हर घर का बेटा कर रहा भारत माता की सेवा, सीमा पर तैनाती बीमार लालू प्रसाद यादव की रिहाई की मांग, तेज प्रताप ने जारी किया 'आजादी पत्र'

बीबीसी की वर्ष 2020 की 100 महिलाएंआप नीचे दी गई श्रेणियों के हिसाब से नाम छाँट सकते हैंगुमनाम नायिकाएंपूरी दुनिया मेंबदलाव लाती हुईएक असाधारण वर्ष में जब पूरी दुनिया में अनगिनत महिलाओं ने दूसरों की मदद करने के लिए कुर्बानियां दी हैं, इसीलिए हमने इस लिस्ट की पहली जगह उन महिलाओं के बलिदान और काम के सम्मान में छोड़ दिया है, जिन्होंने बदलाव लाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी

हालांकि, बीबीसी 100 महिलाओं की सूची में दुनिया की हर उस महिला के नाम को शामिल नहीं कर सकता जिन्होंने परिवर्तन लाने में अपना योगदान दिया है. इस सूची को इसलिए तैयार किया गया है, जिससे कि आप उन लोगों के बारे में सोच सकें, जिन्होंने वर्ष 2020 के हर गुज़रते दिन के साथ दुनिया पर कोई न कोई असर छोड़ा है. headtopics.com

लोज़ा अबेरा गेईनोरइथियोपियाफुटबॉल खिलाड़ीLozaAberaलोज़ा अबेरा गेईनोर का जन्म और पालन-पोषण दक्षिणी इथियोपिया के एक छोटे से क़स्बे में हुआ था. उन्होंने इथियोपियाई महिला प्रीमियर लीग के दो सीज़न में हवासा सिटी सॉकर लीग की ओर से फुटबॉल खेला था. इस दौरान वो क्लब की सबसे ज़्यादा गोल करने वाली फुटबॉलर बन गईं

गेईनोर अब एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी हैं और इथियोपिया की महिला फुटबॉल टीम की सदस्य बन गई हैं> दुनिया की हर महिला वो सब कुछ हासिल कर सकती है, जिसे पाने का वो ख़्वाब देखती है या जिसे हासिल करने की वो योजना बनाती है, भले ही उसे कितने भी मुश्किल हालात का सामना क्यों न करना पड़े

हॉउदा अबोउज़रैप गायिकाkhtek.17हॉउदा अबोउज़ या खटेक, मोरक्को की एक रैपर हैं. जो अपने ख़ास अंदाज़ और सुरीले गानों के लिए मशहूर हैंवो महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता के लिए आवाज़ उठाती हैं. मोरक्को का संगीत उद्योग पुरुषों के ज़बरदस्त दबदबे वाला है. ऐसे में हॉउदा अपने संगीत को बदलाव का ज़रिया मानती हैं

> संघर्ष जारी रखिए. नया रचते रहिए. विरोध जताते रहिए. कभी भी पीछे मत हटिए क्योंकि हमारे पास वो सब कुछ है, जिसकी इस दुनिया को ज़रूरत है.क्रिस्टिना अडेनअभियान संचालकchristina.adaneब्रिटेन में गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को स्कूल में मुफ़्त में खाना देने के अभियान के पीछे क्रिस्टिना का ही दिमाग़ था. इस मुहिम को फुटबॉल खिलाड़ी मार्कस रैशफोर्ड का भी समर्थन मिला था headtopics.com

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क्रिस्टिना, 'बाइट बैक' नाम के अभियान के युवा बोर्ड की सह अध्यक्ष हैं. ये अभियान खान-पान के उद्योग में अन्याय के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा है. क्रिस्टिना ने ख़ुद स्कूल में सरकार की ओर से मिलने वाले मुफ़्ते खाने का लाभ लिया है. अब वो चाहती हैं कि ब्रिटेन में कोई भी बच्चा भूखा न रहे.

> आप कभी भी अपने विचारों से समझौता न करें. भीड़ का हिस्सा होने वाली महिलाएँ कोई तब्दीली नहीं ला सकतीं.इसाइवानीसंगीतकारisaivaniisaivइसाइवानी भारत की एक मशहूर गायिका हैं. गाना संगीत, तमिलनाडु में उत्तरी चेन्नई के कामगारों के बीच से उभरी एक ख़ास संगीत विधा है. इसाइवानी ने मर्दों के दबदबे वाले इस क्षेत्र में गीत गाते हुए और शो करते हुए कई बरस बिताए हैं.

अन्य लोकप्रिय पुरुष गायकों के साथ, एक महिला का उसी मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. इसाइवानी ने सदियों पुरानी एक परंपरा को बड़ी कामयाबी के साथ तोड़ा है. आज इसाइवानी के कारण ही दूसरी युवा महिला गाना गायिकाएं आगे आकर अपने हुनर को पेश कर रही हैं.

> वर्ष 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. लेकिन, महिलाओं के लिए दुनिया हर रोज़ बदलती रहती है. महिलाओं ने परिचर्चाओं को बदला है और अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई है. ये सिलसिला आने वाली पीढ़ियों में भी जारी रहेगा.येवोन अकी-सॉयरसियरा लिओनमेयरyakisawyerrमेयर येवोन अकी-सॉयर को सबसे अधिक पहचान उनके तीन वर्ष के ट्रांसफॉर्म फ्रीटाउन प्लान से मिली है. इस योजना का लक्ष्य 11 सेक्टरों को बनाया गया है. इनमें पर्यावरण को हो रहे नुक़सान से निपटना, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करना और इनकेअलावा युवाओं की बेरोज़गारी कम करने के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने जैसे मक़सद शामिल हैं. आज जब जलवायु संकट पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. दुनिया भर में बाढ़ और जंगलों की आग से करोड़ों लोगों की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है. तब मेयर अकी-सॉयर ने फ्रीटाउन के नागरिकों को अगले दो वर्षों में दस लाख पेड़ लगाने के अपने अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है. headtopics.com

#FreetownTheTreeTown अभियान की शुरुआत जनवरी 2020 में हुई थी. उस समय इसके लिए कोई संसाधन भी नहीं थे. लेकिन, अक्टूबर महीने तक इस अभियान के तहत 4 लाख 50 हज़ार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं. बाक़ी के पौधे अगली बारिश के मौसम में लगाए जाएंगे. बाढ़, भूमि क्षरण और पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में पेड़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है

> हम शायद चिड़चिड़ा और असंतुष्ट महसूस करते हैं. लेकिन उसे नकारात्मक बनाने की ज़रूरत नहीं है. हम अपने इस असंतोष को पॉज़िटिव बना सकते हैं. अपनी खीझ की मदद से उस बदलाव को जन्म दे सकते हैं, जो हम चाहते हैं.रीना अख़्तरबांग्लादेशपूर्व सेक्स वर्करकोविड-19 की महामारी के दौरान रीना और उनकी टीम हर हफ़्ते चार सौ लोगों को खाना खिलाया करती थी. इसमें चावल, सब्ज़ियां, अंडे और मांस होता था. वो ढाका की उन सेक्स वर्कर्स को खाना खिलाती थीं, जिनके पास ग्राहक आने बंद हो गए थे. और जिनके पास खाने का कोई और इंतज़ाम नहीं था.

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> लोग हमारे पेशे को गंदा समझते हैं. लेकिन, हम ये धंधा खाना ख़रीदने के लिए करते हैं. मैं ये कोशिश कर रही हूं कि इस पेशे से जुड़ी औरतें भूखी न रहें, और उनके बच्चों को ये काम न करना पड़े.सारा अल-अमीरीसंयुक्त अरब अमीरातआधुनिक तकनीक विभाग की मंत्रीSarahAmiri1

सारा अल अमीरी संयुक्त अरब अमीरात की आधुनिक तकनीक विभाग की मंत्री हैं. वो UAE की अंतरिक्ष एजेंसी की प्रमुख भी हैं. इससे पहले वो संयुक्त अरब अमीरात के मंगल मिशन की वैज्ञानिक प्रमुख और डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर रही थीं.संयुक्त अरब अमीरात का मंगल मिशन किसी अरब देश का दूसरे ग्रह के लिए पहला अभियान होगा. मंगल का चक्कर लगाने वाले ऑर्बिटर का नाम अमाल (अरबी भाषा में उम्मीद) रखा गया है. माना जा रहा है कि ये ऑर्बिटर फरवरी 2021 में मंगल ग्रह पर पहुंचेगा. इस मिशन का मक़सद जलवायु और मौसम के अध्ययन के लिए आंकड़े जुटाना है.

> कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अचानक एकदम रोक दिया है. इससे हमें अपने बारे में सोच-विचार करने और एक बेहतर इंसान बनने का मौक़ा मिला है. हमें लगातार विकास करने के लिए मिलकर कोशिश जारी रखनी होगी. जिससे कि हमारी बेहद नाज़ुक दुनिया को स्थायी बनाया जा सके.

वाद अल-कतीबफिल्म निर्माताwaadalkateabवाद अल कतीब सीरिया की एक कार्यकर्ता, पत्रकार और अवार्ड विजेता फिल्म निर्माता हैं. कतीब ने अलेप्पो शहर के बारे में अपनी न्यूज़ रिपोर्ट के लिए दुनिया में कई पुरस्कार जीते हैं. इनमें प्रतिष्ठित एमी अवार्ड भी शामिल हैं. वर्ष 2020 में उनकी पहली फीचर फिल्म 'समा के लिए' के लिए बेस्ट डॉक्यूमेंट्री का बाफ्टा (BAFTA) अवार्ड जीता था. उन्हें एकेडमी अवार्ड्स में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर के लिए भी नामांकित किया गया था.

वर्ष 2016 में वाद अल-कतीब को गृह युद्ध के चलते अलेप्पो शहर छोड़ना पड़ा था. अब वाद अपने शौहर और दो बेटियों के साथ लंदन में रहती हैं. लंदन में वो चैनल-4 न्यूज़ के लिए काम करती हैं. इसके अलावा वो महिला अधिकारों के लिए एक्शन फॉर समा नाम से एक समूह भी चलाती हैं

> हम तभी हारते हैं, जब हम उम्मीद का दामन छोड़ देते हैं. मैं सभी महिलाओं से, वो दुनिया में जहां कहीं भी हैं, कहना चाहती हूं कि आप अपने विचारों के लिए लड़ाई जारी रखें. ख़्वाब देखने का साहस करें, और सबसे बड़ी बात ये कि कभी भी उम्मीद न छोड़ें.मानसी जोशी

एथलीटjoshimanasi11मानसी एक भारतीय पैरा-एथलीट हैं. वो पैरा बैडमिंटन की मौजूदा विश्व चैंपियन हैं. जून 2020 में बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने उन्हें SL3 सिंगल्स मुक़ाबलों में विश्व की नंबर 2 रैंकिंग पर रखा था. मानसी एक इंजीनियर भी हैं, और बदलाव के लिए काम करती हैं.

मानसी चाहती हैं कि भारत में दिव्यांगता और पैरा स्पोर्ट्स के बारे में लोगों की राय बदले. टाइम पत्रिका ने हाल ही में उन्हें अगली पीढ़ी की नेता के तौर पर अपनी सूची में शामिल किया था. वो टाइम के एशिया एडिशन में भारत में दिव्यांग लोगों के अधिकारों की कार्यकर्ता के तौर पर शामिल की गई थीं.

> ये साल महिलाओं के लिए कई मायनों में बेहद चुनौती भरा रहा है. आप मुश्किलों को अपनी राह के आड़े मत आने दें. हर संभावना को तलाशते रहें. हर दिन कुछ समय अपने आपको भी दें.एड्रियाना एल्बिनीइटलीपैथोलॉजिस्टadrianaalbini1एड्रियाना एल्बिनी IRCCS मल्टीमेडिका की एंजियोजेनेसिस लैबोरेट्री में वैस्कुलर बायोलॉजी विभाग की प्रमुख हैं. वो मल्टीमेडिका फाउंडेशन की भी प्रमुख हैं. इटली की मिलान-बायोकोचा यूनिवर्सिटी में वो जनरल पैथोलॉजी की प्रोफ़ेसर भी हैं. और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ की पूर्व विज़िटिंग साइंटिस्ट हैं

वो अमेरिका के एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में चुनी जाने वाली इटली की पहली महिला हैं. इटली के नेशनल ऑब्ज़र्वेटरी फाउंडेशन ऑन विमेन्स हेल्थ में महिला वैज्ञानिकों के शीर्ष के क्लब की अध्यक्ष के तौर पर एड्रियाना महिला रिसर्चरों को बढ़ावा देने का काम करती हैं. वो फेंसिंग की चैंपियन रह चुकी हैं. 2018 के वेटरन्स वर्ल्ड कप में एड्रियाना ने कांस्य पदक जीता था. और 2015 की यूरोपीय वेटरन्स फेंसिंग प्रतियोगिता में एड्रियाना ने रजत पदक भी जीता था.

> रिसर्चर अपना करियर एक ख़ास रास्ते पर चलते हुए शुरू करते हैं. वैज्ञानिक वहां से अपना रास्ता बनाते हैं, जहां से ऐसा लगता है कि समतल सड़क ख़त्म हो गई है. महिला वैज्ञानिकों को चाहिए कि वो अपने मल्टीटास्किंग वाले काम से, ऐसे नए रास्ते तलाशें जिधर का रुख़ कोई न करता हो.

यूबा अलीमहिला खतना विरोधीUbah_Aliiयूबा अली सोलेस फॉर सोमालीलैंड गर्ल्स नाम के एक फाउंडेशन की सह संस्थापक हैं. ये संस्था, सोमालीलैंड के तमाम समुदायों में प्रचलित महिलाओं के यौन अंगों के खतने यानी FGM (Female Genital Mutilation) की परंपरा को ख़त्म करने के लिए काम कर रही हैं. इसके लिए वो शिक्षा और सशक्तिकरण की मदद ले रही हैं.

यूबा अली लेबनान में अप्रवासी मज़दूरों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष करती हैं. क्योंकि वो बेरूत की अमेरिकन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करती हैं.> वर्ष 2020 में दुनिया काफ़ी बदल गई है. आज पूरी दुनिया की महिलाओं के एकजुट होने की बेहद सख़्त ज़रूरत है. बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा, बलात्कार, खतने और अन्य ज़ुल्मों की शिकार होती हैं. एकजुट होकर महिलाएं अपने लिए इंसाफ़ की मांग कर सकती हैं.

निसरीन अलवानइराक़/ब्रिटेनजन स्वास्थ्य की विशेषज्ञdr2nisreenalwanनिसरीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली एक डॉक्टर और विशेषज्ञ हैं. जो महिलाओं और बच्चों की सेहत और उनकी बेहतरी के क्षेत्र में अनुसंधान करती हैं. उनका रिसर्च ख़ास तौर से इस बारे में है कि किसी महिला के गर्भधारण से पहले और गर्भवती होने के बाद उसकी सेहत को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है जिससे कि लंबी अवधि में चलकर उनका स्वास्थ्य और अच्छा रहे और उनके बच्चों की सेहत अच्छी रहे.

महामारी के दौरान निसरीन ने इस बारे में जागरूकता फैलाने का काम किया कि देशों को इस महामारी की रोकथाम के लिए कैसे उपाय करने चाहिए जिससे कि वो केवल मौत की दर रोकने पर ही न ज़ोर दें, बल्कि इस वायरस से सेहत पर लंबी अवधि के लिए पड़ने वाले दुष्प्रभावों से लोगों को बचाने की भी फिक्र करें.

> वर्ष 2020 के दौरान मैंने तीन और चीज़ें कीं. मैंने अपने मन की बात कही. मैंने बताया कि मुझे किस बात से डर लगता है और मैंने ख़ुद को माफ़ करने का काम भी किया. मैंने तीन चीज़ें अपनी ज़िंदगी से कम भी कीं: इस बात की फिक्र करनी छोड़ दी कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं, ख़ुद को दोष देना बंद कर दिया और ये सोचना बंद कर दिया कि मैं किसी से कमतर हूं.

एलिज़ाबेथ एनिओनवूइंग्लैंड, ब्रिटेननर्सEAnionwuप्रोफ़ेसर डेम एलिज़ाबेथ एनिओनवू, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्ट लंदन में नर्सिंग की मानद प्रोफ़ेसर हैं. और वो ब्रिटेन की सिकेल सेल सोसाइटी की संरक्षक भी हैंवो सिकेल सेल और थैलेसीमिया की ऐसी पहली नर्स हैं, जिन्होंने जमैका मूल की ब्रिटिश नर्स मैरी सीकोल की प्रतिमा लगाने का अभियान चलाया था. एलिज़ाबेथ कोविड-19 के काले और एशियाई समुदायों पर औसत से अधिक दुष्प्रभाव को उजागर करने वाली प्रमुख हस्तियों में से भी एक रही हैं.

> कभी भी अपने और अन्य महिलाओं के सकारात्मक योगदान को कम करके मत आंकिए.रिद्धिमा पांडेभारतपर्यावरण कार्यकर्तारिद्धिमा पांडे एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने नौ साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन को लेकर क़दम न उठाने पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया था. वर्ष 2019 में 15 अन्य बाल याचिकाकर्ताओं के साथ रिद्धिमा ने संयुक्त राष्ट्र में पांच देशों के ख़िलाफ़ केस दायर किया था.

इन दिनों रिद्धिमा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा ले रही हैं और दूसरे छात्र-छात्रों को हर स्तर पर सशक्त बनाने में मदद कर रही हैं, जिससे कि वो अपने भविष्य और विश्व की जैव विविधता के लिए संघर्ष कर सकें. रिद्धिमा अपने और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं.

> अब समय आ गया है जब हम मज़बूत बनें और एकजुट हों, और ये साबित करें कि मुश्किल वक़्त में हमारे अंदर कितनी शक्ति आ जाती है. अगर कोई महिला कुछ हासिल करने की ठान लेती है, तो फिर उसे कोई नहीं रोक सकता.नदीन अशरफ़अभियान संचालकactuallynadeenनदीन दर्शनशास्त्र की एक छात्रा हैं, जो ये मानती हैं कि सोशल मीडिया को बदलाव का ज़रिया बनाया जा सकता है. वो जानकारी के इस तरह के प्रचार-प्रसार में यक़ीन रखती हैं जिससे कि वो आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सके.

नदीन असॉल्ट पुलिस नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट की संस्थापक हैं. यहां पर मिस्र की महिलाएं यौन शोषण के अपने अनुभव साझा कर सकती हैं. अब मिस्र के महिलावादी आंदोलन के बीच में नदीम एक ऐसी महिला के तौर पर देखी जाती हैं जो सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गई हैं और जो यौन शोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रही हैं.

> मैं ऐसी महिलाओं के बीच पली बढ़ी हूं जिन्होंने बदलाव की कोशिश करते में अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी महिलाओं की आवाज़ बन जाऊंगी. आप जिस बात पर विश्वास करते हैं, उसकी शुरुआत कभी भी की जा सकती है.एरिका बेकरइंजीनियर

EricaJoyएरिका गिटहब में इंजीनियरिंग की निदेशक हैं. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एरिका का करियर 19 साल पहले अलास्का विश्वविद्यालय के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने से शुरू हुआ था. साल 2006 में वे गूगल के साथ जुड़ गईं.माइक्रोसॉफ़्ट में ज्वाइन करने से पहले 2015 में स्लैक और 2017 में पैट्रन से जुड़ी थीं. फिर उनका तबादला GitHub में हुआ. एरिका एटिपिका और हैक द हूड के सलाहकार बोर्डों में शामिल हैं. साथ ही वे Code.org विविधता परिषद, बार्बी ग्लोबल एडवाइजरी काउंसिल बोर्ड, गर्ल डेवलपमेंट के निदेशक मंडल, और ब्लैक गर्ल्स कोड के लिए एक तकनीकी संरक्षक भी रही हैं. एरिका वर्तमान में कैलिफोर्निया के ओकलैंड में रहती हैं.

> साल 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. हम दोबारा निस्वार्थ होने, सेवाभाव और एक दूसरे से जुड़ने का अर्थ सीख रहे हैं. मौजूदा हालात हमें याद दिला रहे हैं कि दुनिया हर किसी के लिए एक बराबरी का मंच नहीं है. मैं दुनिया की सभी औरतों से गुज़ारिश करूंगी कि वे अपनी ताक़त का इस्तेमाल अन्याय, आज़ादी और बराबरी से लड़ने के लिए करें.

डायना बैरेनविदेशी मामलों की संसदीय अवर सचिवdianabarranबैरोनेस डायना बैरेन को वर्ष 2019 में ब्रिटेन की सिविल सोसाइटी मंत्री बनाया गया था. और वो सिविल सोसाइटी ऑफ़िस से जुड़ी नीतियां बनाने के लिए ज़िम्मेदार हैं. वो सेफलाइव्स नाम की राष्ट्रीय कल्याणकारी संस्था की संस्थापक और पूर्व मुख्य अधिशासी अधिकारी है. ये संस्था घरेलू हिंसा और शोषण के ख़िलाफ़ काम करती है. वो न्यू फिलैंथ्रोपी कैपिटल नाम के थिंक टैंक में अनुदान विकास विभाग की प्रमुख भी रह चुकी हैं. उन्होंने 1993 में यूरोप के पहले हेज फंड की स्थापना से पहले एसेट मैनेजमेंट का भी काम किया था.

बैरोनेस डायना बैरेन रॉयल फाउंडेशन ऐंड कॉमिक रिलीफ़ की ट्रस्टी भी हैं और हेनरी स्मिथ चैरिटी की अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी भी संभालती हैं. वर्ष 2007 में उन्हें इंग्लैंड के लिए बीकॉन पुरस्कार भी दिया गया था. घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ उनके योगदान के लिए डायना बैरेन को वर्ष 2011 में MBE से भी नवाज़ा गया था.

> मैं माया एंजेलू की कही बातों के बारे में सोचती हूं, 'लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या कहा था. लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या किया था. लेकिन, आपने लोगों को जो एहसास कराया, उसे वो कभी नहीं भूलेंगे'सिंडी बिशपयूएन वीमैन अंबेसडर, मॉडलcindysirinyaसिंडी बिशप एक अभिनेत्री और टीवी होस्ट हैं जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा ख़त्म करवाने के लिए अभियान चलाती हैं. इस साल उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने एशिया और पैसिफ़क के लिए अपना वीमैन रीजनल गुडविल अंबेसडर नियुक्त किया है ताकि सरकार, समाज और शिक्षा के सहारे लैंगिक बराबरी को प्रोमोट कर पाएं. उन्होंने साल 2018 में #DontTellMeHowToDress आंदोलन शुरु किया था. इस आंदोलन के पीछे थाईलैंड के अधिकारियों का ये सुझाव था कि अगर महिलाएं नए साल के त्योहारों पर यौन उत्पीड़न से बचना चाहती थीं तो वे"सेक्सी" न दिखें.

वे एशिया में लैंगिक बराबरी के लिए काम करने वाली संस्था Dragonfly360 की नोलेज डाइरेक्टर भी हैं. इसी मंच से सुरक्षा, अधिकार और सम्मानपूर्ण संबंधों पर बच्चों के लिए किताबों की एक सिरीज़ लिखी जा रही है.> 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. अब सभी को समान गरिमा और ऐसी आज़ादी के साथ रहना चाहिए जिसका सभी लोग आनंद ले सकें. हमें युवा महिलाओं की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित करना जारी रखना चाहिए

बिल्कीस बानोभारतअभियान संचालकDadiBilkis82 बरस की उम्र में बिल्कीस, उन महिलाओं के एक समूह का हिस्सा बनी थीं, जो देश के एक विवादित नागरिक क़ानून का शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध कर रही थींबिल्कीस बानो, दिल्ली के मुस्लिम बहुल मुहल्ले शाहीन बाग़ में सबसे लंबे समय तक चले धरने का प्रतीक बन गई थीं. भारतीय पत्रकार और लेखिका राना अय्यूब बिल्कीस बानों को 'हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज़' कहती हैं.

> महिलाओं को अपने अंदर इतनी ताक़त का एहसास होना चाहिए कि वो अपने घरों से बाहर निकलें और अपनी आवाज़ बुलंद करें, ख़ास तौर से अन्याय के ख़िलाफ़. अगर महिलाएं अपने घरों से बाहर नहीं निकलेंगी, तो वो अपनी ताक़त दुनिया को कैसे दिखा पाएंगी?मैकिन्ले बस्टनवैज्ञानिक और आविष्कारक

Macinley_Butsonमैकिन्ले बस्टन ने सात बरस की उम्र से ही आविष्कार करने शुरू कर दिए थे. अब बीस साल की उम्र में उन्होंने एक से एक उपकरणों का आविष्कार किया है. इनका मक़सद रेडियोथेरेपी से ब्रेस्ट कैंसर के मरीज़ों के बारे में जानकारी जुटाने में बेहतरी लाना है. और विकासशील समुदायों को पीने का साफ़ पानी उपलब्ध कराना है.

मैकिन्ले बस्टन युवा ऑस्ट्रेलियाइयों के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं. वो लोगों को दिखा रही हैं कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी के ज़रिए वो समुदायों को अपना कैसा योगदान दे सकते हैं.>मैं पूरी दुनिया की महिलाओं से बदलाव लाने की क्षमता के बारे में कहना चाहती हूँ, आप नहीं तो कौन? अभी नहीं, तो कब?

इवलिना कैब्रेराफुटबॉल कोच और मैनेजरevelinacabrera23इवलिना बेहद कमज़ोर तबक़े में पैदा हुई थीं. लेकिन, तमाम कमज़ोरियां और बाधाएं उन्हें फुटबॉल कोच और मैनेजर बनने से नहीं रोक सकीं. इवलिना ने महज़ 27 बरस की उम्र में अर्जेंटीना की महिलाओं की फुटबॉल एसोसिएशन की स्थापना की थी.

इवलिना ने कई फुटबॉल टीमों का गठन किया (इनमें नेत्रहीन महिलाओं की एक फुटबॉल टीम भी शामिल है). उन्होंने क़ैदियों को प्रशिक्षण दिया. समाज के कमज़ोर तबक़ों से आने वाली महिलाओं और लड़कियों को खेल और पढ़ाई में मदद की. वो अर्जेंटीना की पहली महिला फुटबॉल मैनेजरों में से एक हैं. उन्होंने एक आत्मकथा भी लिखी है, जिसमें इवलिना ने समानता के अधिकार के लिए अपने संघर्ष को बयां किया है.

> हमारा भविष्य क्या होगा इसका फ़ैसला हमारी शुरुआत और हमारा जेंडर नहीं कर सकते. ये रास्ता मुश्किल ज़रूर है. लेकिन एकजुट दुनिया के साझा संघर्ष के ज़रिए हम समानता के अधिकार को हासिल करके रहेंगे.वेंडी बीट्रिज़ कैश्स्पल जैकोअल सैल्वाडोरविकलांग अधिकार कार्यकर्ता

wendy_caishpalवेंडी कैश्पल एक उद्यमी हैं, कार्यकर्ता हैं, मोटिवेशनल स्पीकर हैं, विकलांगों और हिंसक संघर्षों के शिकार लोगों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती हैं.वो वुमेन्स इंस्टीट्यूट ऑन लीडरशिप ऐंड डिसएबिलिटी और इंटरनेशनल मोबिलिटी यूएसए में अल सैल्वाडोर की प्रतिनिधि हैं. वो नगर निकाय प्रोजेक्ट अहुआचपन विदाउट बैरियर्स की संस्थापक और निदेशक भी हैं. ये संस्था विकलांगों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण के लिए काम करती है.

> हम जो काम करते हैं, उससे हमें प्यार करना चाहिए. आइए हम सब सामाजिक बदलाव का माध्यम बनें. आइए मिलकर काम करें, संघर्ष करें. कुछ बदलाव लाएं. अगर हर कोई ये लड़ाई लड़ेगा, तो निश्चित रूप से हम बेहतर दुनिया बना सकेंगे.कैरोलिना कैस्ट्रोसंघ की नेताcarocastro79

कैरोलिना वो पहली महिला हैं, जो अर्जेंटाइन इंडस्ट्रियल यूनियन (UIA) के 130 वर्षों के इतिहास में इसके प्रबंधन के पद पर पहुंची हैं. उनकी सक्रियता और संघर्ष ने लैंगिक समानता के एजेंडा को हर दल में बढ़ावा देने का काम किया है. वो भी अर्जेंटीना जैसे देश में जहां सार्वजनिक परिचर्चा का बहुत अधिक ध्रुवीकरण हो चुका है

कैस्ट्रो का परिवार कार के कल पुर्ज़े बनाने वाली एक कंपनी चलाता है. वो इसे चलाने वाली परिवार की तीसरी पीढ़ी की सदस्य हैं. जब कैस्ट्रो ने ये काम संभाला तो उन्होंने शॉप फ्लोर पर महिलाओ को बाज़ार से अधिक वेतन देकर काम पर रखा और लंबे समय से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ा. हाल ही में उन्होंने रोमपिमोस एल क्रिस्टल (वी ब्रोक द ग्लास) नाम से एक किताब प्रकाशित की है. इसमें उन्होंने अर्जेंटीना की 18 महिलाओं से हुई बातचीत का संकलन छापा है. ये वो महिलाएं हैं जिन्होंने कारोबार, कला, राजनीति और विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की हैं.

> समानता के एजेंडे को असाधारण लोग आगे नहीं बढ़ाते, बल्कि हम सब मिलकर ये काम करते हैं. इसमें हर समुदाय, हर जेंडर के लोग शामिल हैं. और हमारी कोशिश रोज़मर्रा के छोटे-छोटे फ़ैसलों से आगे बढ़ती है.एग्नेस चोलोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताchowtingagnesएग्नेस चो हॉन्ग कॉन्ग की एक 23 बरस की लोकतंत्र अधिकार कार्यकर्ता हैं. वो हॉन्ग कॉन्ग के वर्ष 2014 के अम्ब्रेला आंदोलन का प्रमुख चेहरा रही थीं. इस साल वो उन मुट्ठी भर कार्यकर्ताओं में शामिल थीं, जिन्हें बीजिंग प्रशासन के विवादास्पद चीनी सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था. उन पर 'विदेशी ताक़तों से सांठ-गांठ करने' का आरोप लगाया गया था.

हालांकि बाद में एग्नेस को रिहा कर दिया गया था. लेकिन, उनकी गिरफ़्तारी के बाद उनके हक़ में बहुत ज़ोर शोर से आवाज़ उठाई गई थी. एग्नेस केवल 15 साल की उम्र से ही राजनीति में सक्रिय हैं. उनके समर्थकों ने उन्हें, 'मुलान' का उपनाम दिया है. मुलान वो ऐतिहासिक चीनी नायिका है, जिसने अपने परिवार और देश के लिए लड़ाई लड़ी थी.

> किसी महिला के नेता होने से महिला अधिकारों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. हमें सिस्टम में बदलाव लाने की ज़रूरत है और ज़रूरत वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था की है.पैट्रीश क्यूलर्समानव अधिकार कार्यकर्ताOsopePatrisseवो एक कलाकार हैं, संगठनकर्ता हैं, शिक्षक हैं और लोकप्रिय सार्वजनिक वक्ता भी हैं. पैट्रीश क्यूलर्स, लॉस एंजेलेस की रहने वाली हैं. वो ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के वैश्विक नेटवर्क की सह संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं. इसके अलावा वो लॉस एंजेलेस स्थित संगठन डिग्निटी ऐंड पावर नाऊ नाम की ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली संस्था की भी संस्थापक हैं.

इस समय पैट्रीश एरिज़ोना के प्रेस्कॉट कॉलेज ऑफ़ ए न्यू सोशल ऐंड एनवायरमेंटल आर्ट्स प्रैक्टिस MFA कार्यक्रम की फैकल्टी डायरेक्टर हैं. ये कार्यक्रम उन्होंने ख़ुद ही विकसित किया है.> आप अपनी शक्ति को कभी न छोड़ें. अपनी ख़ुशी आप ख़ुद से बनाएं और बदलाव की मांग करें. ये बदलाव सिर्फ़ आपके लिए नहीं, बल्कि उन महिलाओ के लिए भी होना चाहिए, जो आपके बाद इस दुनिया में आएंगी.

त्सित्सी डैंगारेम्बगालेखिका और फिल्म निर्माताefie41209591सित्सी एक मशहूर लेखिका हैं, फिल्म निर्माता हैं और सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने पुरस्कार जीतने वाली वो किताबें लिखी हैं, जिन्हें ज़िम्बाब्वे के साहित्य की शास्त्रीय पुस्तकें कहा जाता है. उनकी फिल्मों को दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया है. इनमें सनडांस फिल्म फेस्टिवल भी शामिल है. वो ज़िम्बाब्वे के हरारे शहर में रहती हैं और अफ्रीका की स्थानीय महिला फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर काम करती हैं.

इस साल जिम्बाब्वे में नागरिक आंदोलनों का दौर देखा गया है. प्रदर्शनकारियों का आरोप रहा है कि ज़िम्बाब्वे की सरकार भ्रष्ट है और प्रशासन अच्छे से नहीं चला रही है. सित्सी उन प्रदर्शनकारियों में शामिल रही हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिया गया था. उन पर हिंसा करने और कोरोना संबंधी पाबंदियां तोड़ने के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि बाद में सित्सी को ज़मानत पर छोड़ दिया गया था. सित्सी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को ग़लत ठहराया है. उनके साथी लेखक ये सभी आरोप वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

> बदलाव से घबराएं नहीं. इसे ऐसा परिवर्तन बनाएं जो आपके लिए भी सहज हो.शनि ढांडाविकलांग कार्यकर्ताshanidhandaशनि ढांडा एक पुरस्कार विजेता विकलांगता विशेषज्ञ और सामाजिक उद्यमी हैं. उन्हें ब्रिटेन की सबसे प्रभावशाली विकलांग लोगों में गिना जाता है. शनि ने डाइवर्सेबिलिटी कार्ड इनिशिएटिव, एशियन वुमन फेस्टिवल और एशियन डिसएबिलिटी नेटवर्क की स्थापना की और अभी भी इनका नेतृत्व कर रही हैं.

परिवर्तन के लिए काम करने वाले इन सभी मंचों का एक ही मक़सद है, उन समुदायो का सशक्तिकरण, जिनकी समाज में नुमाइंदगी बेहद कम है.> अब जबकि दुनिया एक महामारी से उबरने की कोशिश कर रही है, तो ये हमारी साझा ज़िम्मेदारी है कि हम सबके लिए एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य का निर्माण करें.

नाओमी डिक्सनमुख्य कार्यकारीsoldier_in_slipनाओमी ने अपनी पेशेवर ज़िंदगी को उन यहूदी महिलाओं और बच्चों का सहयोग करने के नाम कर दिया है, जो घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं. वो यहूदी समुदाय के बीच जागरूकता फैलाने का काम करती हैं. जिससे कि वो लोग घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ आज और आने वाले समय में आवाज़ बुलंद कर सकें.

ज्यूइश वुमेन्स ऐड की सीईओ के तौर पर नाओमी हर संप्रदाय की महिलाओं के साथ काम करने में ख़ुशी महसूस करती हैं. वो समुदायों और धार्मिक नेताओं को इस बात के लिए शिक्षित करती हैं कि वो ऐसे विश्व की रचना करें, जहां महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की हिंसा की स्वीकार्यता न हो.

> 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. हमने अपने अंदर एक अलग तरह के लचीलेपन का निर्माण कर लिया है. इससे हम दूसरों की भी मदद कर सकते हैं.कैरेन डोल्वाअन्वेषकkdolvaकैरेन डोल्वा नो आइसोलेशन नाम की संस्था की सह-संस्थापक और सीईओ हैं. ये ओस्लो स्थित एक स्टार्ट अप है, जिसकी स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी. इसका मक़सद वार्म टेक्नोलॉजी और जानकारी के माध्यम से लोगों को एक साथ लाना है.

आज की तारीख़ तक कैरेन की कंपनी ने दो उत्पादों का निर्माण किया है. AV1 एक टेलीप्रेज़ेंस अवतार है जो बच्चों और युवा वयस्कों के बीच लंबी अवधि के एकाकीपन की समस्या को दूर करने में मदद करता है. और KOMP जो एक बटन से चलने वाला संचार उपकरण है, जिसे ख़ास तौर से बुज़ुर्गों के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है.

> हम कोविड-19 का बहाना लेकर अपने संघर्ष को नहीं रोक सकते हैं. बल्कि ये महामारी तो हमारे लिए एक चेतावनी की तरह है. सबसे कमज़ोर तबक़े के लोगों पर ऐसी आपदाओं का सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐसे में, हमें इस समय का इस्तेमाल करके बदलाव के लिए काम करना चाहिए और उन लोगों की हिफ़ाज़त करनी चाहिए, जिन पर जोखिम का ख़तरा अधिक है.

इलवाद एल्मनशांतिवादी कार्यकर्ताilwadelmanइल्वाद एल्मन एक युवा महिला लीडर हैं जो सोमालिया में शांति प्रक्रिया की अगुवाई करने वालों में से एक हैं. वो संघर्ष समाप्त करने और संघर्षरत समुदायों को एकजुट करने के मामले में विश्व नेता मानी जाती हैं.केवल 20 बरस की उम्र में इल्वाद ने सोमालिया के पहले रेप क्राइसिस सेंटर की स्थापना की थी. पिछले एक दशक में इल्वाद अपने देश में शांति स्थापना के लिए ज़ोर-शोर से काम कर रही हैं. इसके लिए उन्होंने हिंसक संघर्ष के शिकार हर तबक़े और ख़ास तौर से महिलाओं और लड़कियों को शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है.

> इस महामारी ने दुनिया को हमदर्दी का फौरी सबक़ सिखाया है. हमने देखा है कि ऐसे बहुत से क्षेत्रों में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, जहां दूसरे लोग नाकाम रहे हैं. नेतृत्व के मामले में महिलाओ को दूसरे विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि अब वो बुनियादी प्राथमिकता बन चुकी हैं.

जियोंग इउन-क्योंगदक्षिण कोरियाकेडीसीए कमिश्नरडॉक्टर जियोंग इउन-क्योंग को वायरस की शिकारी कहा जाता है. वो कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ दक्षिण कोरिया के अभियान की अगुवा मानी जाती हैंकोरिया के डिज़ीज़ कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन एजेंसी (KDCA) की मौजूदा कमिश्नर के तौर पर, और इससे पहले KDCA की पहली महिला प्रमुख के तौर पर, डॉक्टर जिओंग को अपनी पारदर्शिता और सहज स्वभाव के लिए जाना जाता है. बहुत शांतिपूर्ण ढंग से महामारी के बारे में उनकी रोज़ की प्रेस कांफ्रेंस की बहुत तारीफ़ हुई थी.

> मैं सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की दिल से तारीफ़ करती हूं, जिन्होने महामारी से मुक़ाबले के लिए ख़ुद को समर्पित किया. मैं दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए अपनी ओर से पूरी ताक़त लगाऊंगी. इसके लिए मैं महामारी से मुक़ाबले के लिए आवश्यक क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाऊंगी.

फैंग फैंगचीनलेखिकाफैंग फैंग जिनका असली नाम वैंग फैंग है, वो चीन की एक पुरस्कार विजेता लेखिका हैं. फैंग ने 100 से ज़्यादा किताबें लिखी हैं. इस साल उन्होंने वुहान में हुई घटनाओं को दर्ज करना शुरू किया था, जहां कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे पहले फैला था. उनकी डायरी के ज़रिए चीन के करोड़ों लोगों को वुहान के हालात की झलक मिली थी. वैंग फैंग ने वुहान में रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से लेकर ज़बरदस्ती अलग थलग रखे गए लोगों की मनोवैज्ञानिक चुनौतियों के बारे में लिखा था.

> आप अपनी स्वतंत्र पहचान बनाएंसोमाया फ़ारुक़ीअफ़ग़ानिस्तानरोबोटिक्स की टीम लीडरFaruqiSomayaजब सोमाया के अपने सूबे हेरात में कोविड-19 के पहले केस का पता चला था, तब वो और उनकी सिर्फ़ महिलाओं वाली रोबोटिक्स टीम, 'द अफ़ग़ान ड्रीमर्स' ने एक ऐसे वेंटिलेटर के आविष्कार की कोशिश शुरू की, जिससे कोरोना वायरस के मरीज़ों का इलाज किया जा सके.

अब सोमाया और उनकी टीम अपने वेंटिलेटर के डिज़ाइन को देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने पेश करने की योजना बना रही हैं. अगर उनके प्रोटोटाइप को मंज़ूरी मिल जाती है, तो फिर इसे दूर दराज़ के अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा सकेगा. सोमाया का जन्म वर्ष 2002 में हुआ था. वो इतनी कम उम्र में ही कई अवार्ड जीत चुकी हैं. इसमें अमेरिका में फर्स्ट ग्लोबल चैलेंज में साहसिक उपलब्धि का सिल्वर मेडल भी शामिल है. इसके अलावा उन्होंने वर्ल्ड समिट में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का बेनेफिटिंग ह्यूमैनिटी अवार्ड, रॉ साइंस फिल्म फेस्टिवल में द जैनेट इवी-ड्यूएनसिंग के परमिशन टू ड्रीम अवार्ड और एस्टोनिया में होने वाले यूरोप के सबसे बड़े रोबोटिक्स फेस्टिवल, रोबोटेक्स में आंत्रेप्रेन्योरशिप चैलेंज जैसे पुरस्कार जीते हैं.

> हमारे भविष्य की कुंजी वो शिक्षा है, जो हम आज अपनी लड़कियों और लड़कों को दे रहे हैं. हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चे को शिक्षा हासिल हो, और उन्हें उनके ख़्वाब पूरे करने के लिए हर ज़रूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.एलीन फ्लिनरिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड

सीनेटरLove1solidarityएलीन फ्लिन ने इस साल तब इतिहास रचा था, जब वो आयरलैंड के घूमंतु समुदाय की पहली प्रतिनिधि के तौर पर आयरलैंड की संसद के ऊपरी सदन में पहुंचीं थीं.अब वो अपनी भूमिका का इस्तेमाल करके आयरलैंड के घूमंतु समुदाय और अन्य कमज़ोर समुदायों की मदद कर रही हैं. उनकी महत्वाकांक्षा है कि वो आयरलैंड गणराज्य में हेट क्राइम यानी नफ़रत भरे अपराधों के ख़िलाफ़ क़ानून बनवाएं.

> एक दूसरे का ख़याल रखें, एक दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं. कभी भी दूसरी महिला को नीचे न धकेलें. किसी और का दीपक बुझाने से आपकी चमक नहीं बढ़ेगी. जब हम मिलकर खड़े होते हैं, तो हमारी मिली-जुली लौ से दुनिया और अधिक रौशन हो सकती है.जेन फ़ोंडाअमेरिकाअभिनेत्री

जेन फ़ोंडा ऑन स्क्रीन प्रदर्शन के लिए दो बार अकादमी यानी आस्कर अवार्ड जीत चुकी हैं. वे क्लूट, कमिंग होम, ऑन गोल्डेन पोंड और 9 टू 5 जैसी आइकनिक फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी हैं. इन दिनों वे नेटफ्लिक्स की हिट सिरीज़ ग्रेस और फ्रैंकी में काम कर रही हैं.वहीं पर्दे के पीछे जेन फ़ोंडा सामाजिक मुद्दों, महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन जैसे मुद्दों पर लगातार, पिछले 50 सालों से अपनी आवाज़ बुलंद करती रही हैं. हाल ही में उन्होंने ग्रीनपीस अमेरिका के साथ मिलकर फायर ड्रिल फ्राइडे का अभियान शुरू किया है जो जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर साप्ताहिक गतिविधियों से लोगों को जागरुक करने के साथ साथ विरोध प्रदर्शन का आयोजन भी करता है.

> वैज्ञानिकों के अनुमान की तुलना में पृथ्वी तेज़ी से गर्म हो रही है. मानव समुदाय के सामने अस्तित्व का संकट है. इसका सामूहिक हल तलाशना होगा. महिलाएं इसे समझती हैं. महिलाएं ये भी समझती हैं कि हम सब एकदूसरे पर निर्भर हैं. वे जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रही हैं लेकिन हमें समस्या के समाधान की ओर भी ले जा रही हैं, उन्हें ऐसा करने दें.

किरण गांधीगायिकाmadamegandhiकिरण गांधी, मैडम गांधी के नाम से कार्यक्रम पेश करती हैं. वे संगीतकार और गायिका हैं, कलाकार और कार्यकर्ता भी हैं. उनका मकसद महिलाओं की आज़ादी के लिए आवाज़ उठाना है. वे घूम-घूमकर अलग जगहों पर अपने शो करती रही हैं.इससे पहले किरण गांधी माहवारी के दौरान 'रिसते खून' के साथ लंदन मैराथन में शामिल हुई थीं, जिससे कि वो माहवारी को लेकर बुरी सोच को बदल सकें.

> चूंकि हम में से बहुत से लोगों को अपने कारोबार को घर से चलाने के लिए बदलाव करने पड़े थे. इससे बच्चों की देखभाल को लेकर हमारे नज़रिए में बदलाव आया है. हमारे अंदर वो शक्ति है जिससे हम व्यवस्था में परिवर्तन करके उसे अपने लिए सुगम बना सकें.लॉरेन गार्डनर

वैज्ञानिकTexasDownUnderलॉरेन गार्डनर ने उस टीम की अगुवाई की थी, जिसने दुनिया भर में कोविड-19 के मामलों के आंकड़े जुटाने वाला कोविड ट्रैकर बनाया था. आज ये ट्रैकर, दुनिया भर में कोविड-19 के संक्रमण के आंकड़ों का सबसे प्रामाणिक स्रोत माना जाता है. इसका इस्तेमाल सरकारें करती हैं, संक्रामक रोग पर रिसर्च करने वाले करते हैं और पूरी दुनिया के मीडिया संस्थान भी करते हैं.

> किसी की इजाज़त मिलने का इंतज़ार न करें. आप ख़ुद बैठकर अपना काम शुरू कर दें.एलिशिया गार्ज़ाअमेरिकामानव अधिकार कार्यकर्ताAliciaGarzaएलिशिया गार्ज़ा एक संगठनकर्ता हैं, राजनीतिक रणनीतिकार हैं और 'द पर्पज़ ऑफ़ पावर: हाऊ वी कम टुगेदर व्हेन वी फाल अपार्ट' किताब की लेखिका हैं.

वो ब्लैक फ्यूचर्स लैब और ब्लैक टू द फ्यूचर एक्शन फंड की प्रमुख हैं. ब्लैक लाइव्स मैटर और ब्लैक लाइव्स मैटर ग्लोबल नेटवर्क की सह संस्थापक हैं. एलिशिया, नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स एलायंस की रणनीतिक निदेशक और साझेदार हैं. वो सुपरमैजोरिटी की सह-संस्थापक हैं और लेडी डोंट टेक नो पॉडकास्ट की होस्ट भी हैं.

> अपने पांव ज़मीन पर रखते हुए आसमान की ओर देखो. तुम्हारी निगाह इनाम पर होनी चाहिए.इमान ग़ालिब अल-हमलीयमनमाइक्रोग्रिड मैनेजरइमान दस महिलाओं का एक समूह चलाती हैं, जिसने सौर ऊर्जा के माइक्रोग्रिड की स्थापना की है. जिसकी मदद से स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति की जा सकी है. उनकी ये माइक्रोग्रिड, यमन में तबाही लाने वाले गृह युद्ध के मोर्चे से महज़ बीस मील दूर स्थित है.

ये माइक्रोग्रिड, संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यक्रम के तहत स्थापित की गई तीन माइक्रोग्रिड में से एक है. जिसे यमन के उन इलाक़ों में स्थापित किया गया है, जो बिजली की देश मुख्य ग्रिड से अलग हैं. ये इकलौती माइक्रोग्रिड है, जिसका संचालन महिलाएं करती हैं. शुरुआत में इमान की टीम का का ये कहकर मज़ाक़ उड़ाया गया था कि वो मर्दों के काम कर रही हैं. तब से अब तक उन्होंने लंबा सफर तय किया है. अब उनका सम्मान किया जाता है. इसके साथ साथ ये महिलाएं अपने लिए टिकाऊ आमदनी का इंतज़ाम भी कर सकी हैं, और एक नया पेशेवर हुनर भी उन्होंने सीखा है.

> यमन की सभी लड़कियों के लिए मेरा एक ही संदेश है कि वो अपने ख़्वाब पूरे करें.उन्हें पूरे आत्मविश्वास के साथ कोशिश करनी चाहिए. अपनी ज़िंदगी में वो जिन चुनौतियों का सामना करती हैं, उन्हीं का इस्तेमाल करके उन्हें अपने सपने पूरे करने चाहिए.सारा गिल्बर्ट

ब्रिटेनवैज्ञानिकजैसे ही चीन के वैज्ञानिकों ने नए कोरोना वायरस की जेनेटिक संरचना को प्रकाशित किया था, वैसे ही ऑक्सफोर्ड में सारा और उनकी टीम इस काम में जुट गई थी. उसके बाद से अब तक सारा और उनकी टीम ने कोविड-19 की एक वैक्सीन का निर्माण किया है, जो क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण से गुज़र रही है.

सारा को माइक्रोबायोलॉजी, बायो केमिस्ट्री, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और वैक्सीनोलॉजी का प्रशिक्षण मिला है. वो नई बीमारियों के लिए वैक्सीन बनाने का काम वर्ष 2014 से करती आ रही हैं.> हम इतने लचीले हो सकते हैं कि इस साल का सफर तय कर सकें. अब समय इस बात का आ गया है कि हमारे लिए जो महत्वपूर्ण है, हम उस पर ही अपना ध्यान केंद्रित करें. जैसे कि, स्वास्थ्य, शिक्षा, और दूसरों के साथ अच्छे संबंध.

मैगी गोब्रानकॉप्टिक नर्सstephenschildrenusमामा मैगी गोब्रान ने अपनी ज़िंदगी, मिस्र के समाज में हाशिए पर पड़े बच्चों के लिए समर्पित कर दी है. एक आरामदेह ज़िंदगी और शानदार अकादेमिक करियर को त्याग कर मैगी गोब्रान ने अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन बच्चों की देख-भाल में लगा दिया है. वो उन बच्चों के पैर धोती हैं और उनकी आंखों में देखते हुए उन्हें एहसास दिलाती हैं कि वो बहुत महत्वपूर्ण हैं.

वर्ष 1989 से ही मामा मैगी और उनकी टीम ने सैकड़ों और हज़ारों बच्चों की ज़िंदगी बदलने का एक व्यापक नज़रिया अपनाया है. उन्हें मनोवैज्ञानिक मदद, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सबसे बड़ी बात सम्मान दिया है.> जब आप अपने आप से मेल बिठा लेते हैं, तो आप ज़मीन और जन्नत दोनों से तालमेल बना लेते हैं.

रेबेका ग्यूमीवकीलRebecaGyumiरेबेका ग्यूमी एमसिछाना इनिशिएटिव नाम के एक स्थानीय एनजीओ की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं. ये संस्था लड़कियों के अधिकारों के लिए काम करती है. रेबेका लैंगिक समानता की वकालत करती हैं और उनके पास युवाओं के संवाद करने, महिला आंदोलन चलाने और राष्ट्रीय से लेकर ज़मीनी स्तर तक लोगों की आवाज़ बुलंद करने का लंबा अनुभव है.

वर्ष 2019 में एमसिछाना इनिशिएटिव ने तंज़ानिया के कोर्ट ऑफ़ अपील में एक बड़ा मुक़दमा जीता था. अदालत ने अपने फ़ैसले में बाल विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया था और लड़कियों की शादी करने की क़ानूनी उम्र बढ़ाकर 18 वर्ष तय कर दी थी.> जब चलना मुश्किल होता है तभी कुछ बहादुर लोग आगे बढ़ते हैं. हमें संघर्ष जारी रखने का वादा करना है, अपनी यात्रा जारी रखनी है. जब तक महिलाएँ बराबरी हासिल नहीं कर लेंती तक हमें अपनी आवाज़ उठाते रहना चाहिए.

डेटा हेडमैनडार्ट्स चैंपियनdeta132डेटा ने रॉयल मेल में क़रीब 22 साल तक नाइट शिफ्ट में काम किया था. उन्होंने 215 डार्ट खिताब जीते हैं. जो पूरे खेल में सबसे ज़्यादा टाइटिल जीतने के मामले में दूसरी पायदान है. उनके आगे सिर्फ़ फिल टेलर हैं. डेटा हेडमैन डार्ट गेम के 341 फाइनल मुक़ाबलों में शामिल हो चुकी हैं, जो डार्ट्स के इतिहास में सबसे अधिक बार फाइनल खेलने का रिकॉर्ड है. डेटा वर्ष 1973 में इंग्लैंड आई थीं और वो अभी इंग्लैंड डार्ट्स की कप्तान हैं.

डेटा हार्ट्स ऑफ़ डार्ट्स नाम की चैरिटी संस्था और इंग्लैंड के यूथ डार्ट्स की राजदूत हैं. वो वर्ल्ड डार्ट्स फेडरेशन के बोर्ड की बैठकों में इसके प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होती हैं. वो वर्ल्ड रैंकिंग में 11 बार नंबर एक पर रह चुकी हैं. और इंग्लैंड की महिला टीम में सबसे ज़्यादा गेम खेलने के मामले में दूसरे नंबर पर हैं.

> मैं सभी महिलाओं से अपील करूंगी कि:आप अपने ख़्वाबों को साकार करने की कोशिश करें. कभी हार न मानें. उम्र, लैंगिकता, और नस्ल से हार जीत तय नहीं होती. आप इस दुनिया में बस एक बार के लिए आए हैं. आपको चाहिए कि आप इसका ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठा लें. #Believe

मुयस्सर अब्दुलएहेेद हेंंदनचीन के घुलजा (चीनी भाषा में यिनिंग) से निष्कासित वीगर महिलालेखिकाhendan_hiyalमुयस्सर अब्दुलएहेद जो अपने उप-नाम हेंदन के नाम से ज़्यादा जानी जाती हैं. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करते हुए, एक कवयित्री और लेखिका के तौर पर अपनी ख़ास पहचान बनाई है. जब उन्होंने पब्लिक हेल्थ में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की, तब तक उन्होंने तय कर लिया था कि वो अपने लेखन पर ध्यान देंगी. वर्ष 2013 में तुर्की में बसने के बाद से हेंदन ने अयहन एजुकेशन नाम के संगठन की स्थापना की है, जो अपने देश से बाहर बसे वीगरों के बीच में वीगर भाषा के प्रचार प्रसार और शिक्षण का काम करता है. मुयस्सर अभी इस्तांबुल में रहती हैं.

हेंदन का हालिया लेखन कार्य उनकी मातृभूमि के संकट पर केंद्रित है. उनका पहला उपन्यास खै़र-ख़ोश-क़ुयश (सूरज को अलविदा) कल्पना पर आधारित पहला उपन्यास है, जो वीगर क्षेत्र में बने नज़रबंदी शिविरों पर केंद्रित है.> बच्चे हमेशा ही किसी देश की उम्मीद होते हैं. ये तालीम ही है जो उस उम्मीद को हक़ीक़त में तब्दील कर सकती है.

उयेदू इकपे-एटिमफिल्म निर्माताuyaieduउयेदू इकपे-एटिम एक महिलावादी फिल्म निर्माता, निर्देशक और LGBTQ समुदाय के लिए संघर्ष करने वाली कार्यकर्ता हैं. उन्होंने अपने आपको नाइजीरिया के कमज़ोर समुदायों की कहानियां सुनाने के काम में समर्पित कर दिया है.उनकी फिल्म 'इफ' का नाइजीरिया की योरुबा भाषा में मतलब 'प्रेम' होता है. ये फिल्म नाइजीरिया की दो लेस्बियन महिलाओं की कहानी है, जो अपने देश की समलैंगिक विरोधी कठोर हक़ीक़तों का सामना करते हुए अपने रिश्तों को जीती हैं और ज़िंदगी में आगे बढ़ती हैं. जब इस फिल्म को रिलीज़ करने का एलान हुआ था, तो नाइजीरिया की सरकार ने इसे सेंसर करने की चेतावनी दी थी. क्योंकि नाइजीरिया में समलैंगिकता आज भी विवादित विषय है.

> महिलाओ, अपने हक़ के लिए संघर्ष जारी रखो. और अपनी कहानियां सुनाना कभी बंद मत करना. ख़ास तौर से उन लोगों के क़िस्से, जिनकी आवाज़ उनसे छीन ली गई है.मिहो इमादाशराब बनाने की उस्तादfukuchoMihoजापान में चावल से शराब बनाने का धंधा यानी साके-ब्र्यूइंग कई सदियों से मर्दों के दबदबे वाला रहा है. जापान के शराब कारखानों में महिलाओं के क़दम रखने तक पर पाबंदी हुआ करती थी.

जब उनके ख़ानदानी शराब कारखाने के प्रमुख पुरुष शराब निर्माता रिटायर हो गए, तो मिहो ने ख़ुद को इस काम के लिए प्रशिक्षित करने और शराब निर्माण करने का फ़ैसला किया. वो जापान की गिनी-चुनी महिला शराब निर्माताओं में से एक हैं. जापान में इस समय कम से कम 20 साके ब्रुअरियाँ महिलाएँ चला रही हैं.

> अगर आप कोई ऐसा काम हासिल कर सकते हैं, जिसके लिए आप अपना पूरा जीवन समर्पित कर दें, तो आप ख़ुद को उस काम में डुबो दें. अगर आप अपने चुने हुए पेशे को सम्मान और ईमानदारी से करेंगे, तो आप अपना लक्ष्य हासिल करने की सही दिशा में आगे बढ़ेंगे.नदीन कादानफ्रांस

लेखिका/चित्रकारnadinekaadanसीरिया की रहने वाली नदीन कादान, आठ बरस की उम्र से ही कहानियां लिख रही हैं और उनका चित्रांकन कर रही हैं. किताबों में अपनी और अपने जैसे बच्चों की नुमाइंदगी से वे असंतुष्ट थीं. उसके बाद ही उन्होंने ऐसी कहानियां लिखने का फ़ैसला किया जिसमें हर बच्चा अपने आप को देख सके.

ख़ुद की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेते हुए और अरब दुनिया की संस्कृति के बारे में पढ़ने की ख़्वाहिश के चलते, नदीन की कहानियों में ख़ास ज़रूरतों वाले बच्चों और मध्य पूर्व के संघर्ष का अक्सर ज़िक्र मिल जाता है.> वो हिंसक संघर्ष हो या फिर कोविड-19, महिलाएं ही शांति की दूत और शांति का पैग़ाम लाने वाली नेता के तौर पर सामने आती हैं. इसके बावजूद, ऐसा लगता है कि हमारी पूरी व्यवस्था को महिलाओं के ख़िलाफ़ बनाया गया है. इस व्यवस्था को नए सिरे से ढालने का संघर्ष तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक महिलाएं पूरी तरह से अपने आप को अभिव्यक्त करने में सफल नहीं हो जातीं.

मुलेंगा काप्वेप्वेकलाकार और क्यूरेटरmulengakapwepweमुलेंगा एमपुंडू काप्वेप्वे, अपने देश की विमेन्स हिस्ट्री म्यूज़ियम की सह-संस्थापक हैं. वर्ष 2020 में इस म्यूज़ियम की इस बात के लिए तारीफ़ हुई थी कि इसने देश में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया था. मुलेंगा ने ज़ाम्बिया की राजधानी लुसाका में बच्चों के लिए कई पुस्तकालयों का भी निर्माण किया है.

मुलेंगा वर्ष 2004 से 2007 तक ज़ाम्बिया की नेशनल आर्ट्स काउंसिल की अध्यक्ष रही थीं. उन्होंने नृत्य, लेखन, संगीत और संस्कृति से जुड़ी कई संगठनों में संरक्षक की भूमिका भी निभाई है.> बदलाव को अपने लिए अवसर बना लेंजेमिमा कारियुकीकेन्याडॉक्टरjasminemimzडॉक्टर जेमिमा कारियुकी प्रिवेंटिव मेडिसिन को लेकर बहुत उत्साहित रहती हैं. ख़ास तौर से मां और बच्चे की सेहत से जुड़े इलाज के लिए. वो पीस क्लब की संस्थापक हैं, जिसे वर्ष 2007 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के हालात से निपटने के लिए बनाया गया था. इसके अलावा वो पब्लिक हेल्थ क्लब की भी संस्थापक हैं (जो गर्भाशय के कैंसर की रोकथाम के अभियान से जुड़ा हुआ है).

डॉक्टर जेमिमा ने प्रसूति विज्ञान और महिलाओं के रोग के बारे में पढ़ाई की है. उन्होंने ये नोटिस किया था कि गर्भवती महिलाओं के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में भारी कमी आई है. लेकिन, कोविड-19 की महामारी के दौरान समस्याएं बढ़ गईं. ख़ास तौर से जब देश में कर्फ्यू लगाया गया था. डॉक्टर जेमिमा को एहसास हुआ कि चूंकि परिवहन के साधन कम चल रहे हैं, इसीलिए लोगों को अस्पताल तक पहुंचने में दिक़्क़त हो रही है. इसके बाद उन्होंने इस समस्या का ऐसे समाधान निकाला कि लाइसेंसशुदा वाहनों में महिलाओं को उनके घर से अस्पताल लाने का काम शुरू किया गया. इसके बाद ही उन्होंने व्हील्स फॉर लाइफ नाम की एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की.

> इस महामारी ने सभी लोगों पर असर डाला है. आप अकेले नहीं हैं. भले ही आपको रोज़ अकेले होने का ख़याल परेशान करता हो. लेकिन हर दिन आपके नए फ़ैसले लेने का भी होता है. आप किसी की मदद करने में हिचकिचाएं नहीं. हो सकता है कि आप किसी की ज़रूरतें पूरी करने के काम आ जाएं.

गुलसुम कावसामाजिक न्याय कार्यकर्ताgulsumkavगुलसुम काव तुर्की की एक डॉक्टर, विद्वान और वी विल स्टॉप फेमिसाइड नाम की संस्था की संस्थापक हैं. पिछले वर्ष महिलाओं की हत्या की दर बढ़ने और इस्तांबुल कन्वेंशन में संशोधन करने को लेकर संसद में हुई बहस की तुर्की में काफ़ी आलोचना हुई है.

गुलसुम, तुर्की में महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाने के लिए लगातार काम करती रही हैं. वो ऐसे कई परिवारों की आवाज़ बनी हैं, जिन्होंने अपनी रिश्तेदारों को महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा में खो दिया.> आज प्रतिकार की आवाज़ बन रही महिलाएं अपने लिए समानता और स्वतंत्रता चाहती हैं. महामारी ने समाज की उस असमानता को उजागर कर दिया है, जिसका तजुर्बा महिलाओं को रोज़ होता है. इससे पता चलता है कि इन महिलाओं के सामने बदलाव की कोशिश करने के सिवा कोई और चारा है नहीं.

जैकी केकवयित्रीJackieKayPoetजैकी के स्कॉटलैंड की कवयित्री हैं. वो नाटककार और उपन्यासकार भी हैं. उन्होंने अपनी आत्मकथा रेड डस्ट रोड में अपने जैविक मां-बाप की पहचान के अपने संघर्ष के बारे में लिखा है. जैकी अपनी आत्मकथा को, अपने गोद लेने वाले गोरे अभिभावकों को लिखा गया 'प्रेम पत्र' कहती हैं. वर्ष 2016 में उन्हें स्कॉटलैंड के राष्ट्रीय कवि स्कॉट्स की उपाधि से नवाज़ा गया था.

जैकी, स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति हैं. उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं. वर्ष 2020 में जैकी को साहित्य की सेवा के लिए CBE से नवाज़ा गया था.> हमे उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए. इस साल पूरी दुनिया में हुए विरोध प्रदर्शनों ने मेरे अंदर भविष्य को लेकर एक अजीब सी उम्मीद जगा दी है.

साल्साबिला ख़ैरुन्निसांइंडोनेशियापर्यावरण कार्यकर्ताjaga_rimbaसाल्साबिला, जकार्ता की रहने वाली एक 17 बरस की छात्रा हैं. हर शुक्रवार को वो पर्यावरण और वन मंत्रालय के सामने जंगलों की कटाई के ख़िलाफ़ अपने स्कूल के बच्चों की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन आयोजित करती हैं.

साल्साबिला ने पंद्रह साल की उम्र में ही युवाओं के नेतृत्व वाले एक आंदोलन जागा रिम्बा की शुरुआत की थी. वनों के संरक्षण के अलावा ये संगठन आदिवासी समुदाय के सदस्यों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष करता है. वो लोग जो किनीपैन के जंगलों में अपने पुश्तैनी घर गंवा रहे हैं. किनीपैन के जंगल कालीमंतन के आख़िरी बचे हुए वर्षा वन हैं.

> इस महामारी ने हमें सामूहिक रूप से जागरूक बनाया है. हमें एहसास कराया है कि हम सब एक मर्दवादी, पूंजीवादी समाज का हिस्सा हैं. जिसका मक़सद केवल मुनाफ़ा कमाना है. अब समय आ गया है कि हम एकजुट हो जाएं और एक हरित और न्यायोचित समाज के लिए मिलकर काम करें.माहिरा ख़ान

पाकिस्तानअभिनेत्रीmahirahkhanमाहिरा ख़ान कोई सामान्य अभिनेत्री नहीं हैं. वो यौन हिंसा के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त तरीक़े से आवाज़ बुलंद करने के लिए जानी जाती हैं. माहिरा ने त्वचा को गोरा बनाने का दावा करने वाली क्रीम का विज्ञापन करने से इनकार कर दिया था. इसके अलावा वो नस्लवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष का भी समर्थन करती हैं. माहिरा ख़ान अपने देश पाकिस्तान में, सामाजिक मुद्दों पर बदलाव लाने के लिए फ़िल्मों और टीवी की मदद लेना चाहती है.

माहिरा, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार के उच्चायोग में पाकिस्तान की राष्ट्रीय गुडविल एंबेसडर हैं. वो पाकिस्तान में मौजूद अफ़ग़ान शरणार्थियों के मुद्दे भी उठाती रही हैं. वो दर्शकों के बीच भी काफ़ी लोकप्रिय रही हैं. माहिरा ने वर्ष 2006 में एमटीवी पर वीडियो जॉकी (VJ) के रूप में अपना करियर शुरू किया था. वो अपने 11 बरस के बेटे के प्रति समर्पित मां भी हैं.

> आप उन मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करें, जो आपके लिए अहम हैं. तभी आप बदलाव ला सकेंगे.एंजेलिक़ किड्जोसंगीतकारangeliquekidjoएंजेलिक़ किडजो, चार बार ग्रैमी अवार्ड जीत चुकी हैं. वो अंतरराष्ट्रीय संगीत की दुनिया की सबसे महान कलाकारों में से एक हैं. उन्होंने पश्चिमी अफ्रीका के बेनिन में अपने बचपन में देखी परंपराओं को अमेरिकी फंक और जैज़ व R&B संगीत से मिलाकर धुनों का नया मेल तैयार किया है. इसके अलावा उनके संगीत पर यूरोप और लैटिन अमरीका की छाप भी दिखती है.

पहले अफ्रीकी मूल के लोगों की ज़िंदगियों के बारे में जानकारी जुटाते हुए उन्होंने टाकिंग हेड्स के एल्बम रिमेन इन लाइट के नाम से प्रस्तुति तैयार की थी. अब फ्रांसीसी-बेनिन मूल की एंजेलिक़ मशहूर आयकन सेलिया क्रुज़ की पिछली पीढ़ियों के अफ्रीकी संबंधों की तलाश में जुटी हैं. सेलिया क्रूज़, क्यूबा में पैदा हुई थीं. उन्हें क्वीन ऑफ़ साल्सा कहा जाता है. एंजेलिक़ यूनिसेफ़ की एम्बेसेडर भी हैं और बच्चों के हक़ के लिए आवाज़ उठाती रही हैं. वो अपनी कल्याणकारी संस्था बैटोंगा के ज़रिए अफ्रीका में छोटी लड़कियों को पढ़ाई करने में मदद करती हैं.

> हमें एक दूसरे का ख़याल रखने का काम मिल-जुल कर करते रहना होगा. आइए हम मिलकर एक दूसरे के संरक्षक बने रहें. ये एकजुटता समाज के हर वर्ग, हर जाति और लैंगिक समुदाय के बीच होनी चाहिए.चू किम डुकआर्किटेक्टkim_duc_आर्किटेक्ट किम डुक वियतनाम के बच्चों को खेलने के अधिकार को बढ़ावा देने को अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है. थिंक प्लेग्राउंड की सह-संस्थापक और निदेशक के तौर पर किम डुक ने देश के अन्य साझेदार समुदायों के साथ मिल कर पूरे वियतनाम में रिसाइकिल की गई चीज़ों से 180 खेल के मैदान तैयार किए हैं.

अभी किम डुक वियतनाम की राजधानी हनोई के नेशनल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के लिए थेरेपी खेल के मैदान तैयार करने का काम कर रही हैं. वो हनोई में पहला लो-कार्बन खेल का मैदान बनाने के लिए काम कर रही हैं.> हमेशा खिलंदड़ बने रहिए. काम में भी और ज़िंदगी में भी. इसे अपनी प्रेरणा का अंतर्निहित स्रोत बना लीजिए. आपको क्या करना है, आप ख़ुश रहने के लिए क्या करते हैं? दिल से लगातार सीखते रहने से ही आप मुश्किलों से पार पा सकते हैं. अपनी उम्मीदें ज़िंदा रखते हैं.

सफा कुमारवनस्पति विषाणु वैज्ञानिकICARDAपौधों की वायरस विशेषज्ञ के तौर पर डॉक्टर सफा कुमारी उन महामारियों का समाधान खोजती हैं, जो फ़सलों को तबाह करती हैं. ऐसे बीजों की खोज करके जिनसे सीरिया में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, सफा कुमारी ने उन बीजों को अलेप्पो से सुरक्षित निकालने के लिए अपनी ज़िंदगी तक दांव पर लगा दी थी.

डॉक्टर सफा ने वायरस से लड़ने वाले पौधों की क़िस्मों की तलाश में कई बरस बिताए हैं. इनमें फाबा बीन नाम का पौधा भी है, जो फबा नेक्रोटिक यलो वायरस (FBNYV) प्रतिरोधी है.> वर्ष 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. अब इस साल पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए जो टीम बनी है, उसकी चुनौती उसका जेंडर नहीं बल्कि क्षमता है. महिलाओं को इस बात का विश्वास होना चाहिए कि उनका योगदान पुरुषों से कम नहीं है.

इश्तर लखानीकार्यकर्ताIshtarLakhaniइश्तर लखानी एक महिलावादी कार्यकर्ता हैं और वो ख़ुद को परेशानी खड़ी करने वाली कहती हैं. दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली इश्तर, पूरी दुनिया में सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले संगठनों, आंदोलनों और नेटवर्क के साथ मिलकर काम करती हैं. उन्हें समर्थन मुहैया कराती हैं जिससे कि मानव अधिकारों की वकालत के लिए उन्हें मज़बूती प्रदान कर सकें.

इस साल उन्होंने वैक्सीन को मुक्त करो अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. इस अभियान की शुरुआत सेंटर फॉर आर्टिस्टिक एक्टिविज़्म फ़ॉर एसेंशियल मेडिसिन (UAEM) ने की थी. अब वो दूसरे लोगों के साथ मिलकर सिर्फ़ एक लक्ष्य के लिए काम कर रही हैं. वो ये है कि दुनिया में हर इंसान को कोविड-19 की वैक्सीन उचित दर पर मिले और दुकानों तक जाकर इसे आसानी से ख़रीदा जा सके.

> उठा-पटक के ये लम्हे इस बात का अवसर भी हैं कि हम पूरी तरह से विविधता वाली अलग दुनिया का निर्माण कर सकें. न कि एक ऐसी व्यवस्था को ही दुरुस्त करने का काम करने में जुटे रहें जिसे हमारी दिमाग़ी ख़ुशी को ध्यान में रख कर बनाया ही नहीं गया था.क्लाउडिया लोपेज़

कोलंबियामेयरClaudiaLopezक्लाउडिया लोपेज़, कोलंबिया की राजधानी और देश के सबसे बड़े शहर बोगोटा की पहली महिला मेयर हैं.क्लाउडिया एक अध्यापक की बेटी हैं. वो एलायंज़ा वर्डे (हरित गठबंधन) पार्टी की ओर से वर्ष 2014 से 2018 के दौरान सीनेटर भी रही हैं. क्लाउडिया ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक बेहद लोकप्रिय अभियान चलाया था, जिसे एक करोड़ 16 लाख वोट मिले थे. इस अभियान के तहत जो सुझाव दिए गए थे उन्हें क़रीब 99 प्रतिशत लोगों का समर्थन हासिल था, जो कोलंबिया के इतिहास में एक रिकॉर्ड है

> मैं दुनिया भर की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि, रुको मत. पिछली सदी में जो सामाजिक क्रांति शुरू हुई थी वो अब रुकने वाली नहीं है. जो बदलाव हो रहे हैं उनका एहसास हम अपनी सार्वजनिक और निजी ज़िंदगी में भी महसूस करेंगे.जोसिना मशेलसामाजिक न्याय कार्यकर्ता

JosinaZMachelजोसिना ज़ेड मशेल मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाली एक अनुभवी कार्यकर्ता हैं. वो सामाजिक कार्य करने वालों के ख़ानदान में ही पैदा हुई थीं. वो अपनी ज़िंदगी में महिला अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए बहुत अधिक जज़्बाती हैं.जोसिना के पास लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनमिक्स और पॉलिटिकल साइंस (LSE) से मास्टर ऑफ़ साइंस (MSc) की डिग्री है. उन्होंने अपनी ज़िंदगी में घरेलू हिंसा को भुगता है. इसीलिए जोसिना ने अपने निजी कटु अनुभवों को ताक़त बनाकर कुहलुका आंदोलन शुरू किया है. इस संगठन के माध्यम से महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा को लेकर सामाजिक बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है. जिससे कि दक्षिणी अफ्रीका के तमाम समुदायों में हिंसा के शिकार हुए लोगों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाए जा सकें.

> महिलाओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ का अब तक आकलन नहीं किया जा सका है. लेकिन हमारी मज़बूती ये साहस देती है कि हम मां, बहन, पत्नी, नेता और उद्योंगो के अगुवा की वो भूमिकाएं निभाते रहें, जिनकी दुनिया को ज़रूरत है.साना मैरिनफिनलैंड की प्रधानमंत्रीMarinSanna

साना मैरिन, फिनलैंड की प्रधानमंत्री हैं. वो फिनलैंड की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं. वो जिस गठबंधन सरकार का नेतृत्व करती हैं, उसका गठन चार ऐसे दलों को मिलाकर किया गया है, जिन सबकी बागडोर महिलाओं के हाथ में है: मारिया ओहिसालो (ग्रीन लीग), ली एंडरसन (लेफ्ट गठबंधन), एना-माहा हेनरिक्सन (स्वीडिश पीपुल्स पार्टी) और एन्निका सारिक्को (सेंटर पार्टी)

फिनलैंड ने जिस तरह से अपने यहां कोविड-19 महामारी से निपटने की कोशिश की है, उसकी पूरी दुनिया में तारीफ़ हुई है. नवंबर 2020 तक, यूरोपीय देशों में फिनलैंड सबसे कम संक्रमण दर वाले देशों में से एक है.> महिला नेताओं के तौर हम ये दिखा सकते हैं कि हम भी इस वायरस से लड़ सकते हैं और इसके साथ साथ जलवायु परिवर्तन का भी मुक़ाबला कर सकते हैं, शिक्षा में निवेश कर सकते हैं, और समाज को न्यायोचित बनाने के लिए ज़रूरी सुधार भी कर सकते हैं

हयात मिर्शदकार्यकर्ताHayatMirshadहयात एक पत्रकार हैं, महिलावादी और मानववादी कार्यकर्ता भी हैं. वो लेबनान के पहले महिलावादी संगठन फी-मेल की सह-संस्थापक भी हैं. हयात एक ज़िद्दी और न झुकने वाली महिला हैं. उनका मिशन लड़कियों और महिलाओं की पहुंच न्याय, सूचना, संरक्षण और मानव अधिकारों तक बनाना है.

हयात अपने संदेश को तमाम मंचों के माध्यम से लगातार दूसरों तक पहुंचाने में जुटी हुई हैं. वो देशव्यापी मार्च का आयोजन करती हैं, और भ्रष्ट व पुरुषवादी हुकूमत को चुनौती देने के लिए देश की जनता को एकजुट करते हुए परिवर्तन की मांग करती हैं> चुनौतियों और झटकों के बावजूद, मानवता के इतिहास में महिलाओं ने पुरुषवादी सत्ता को चुनौती दी है, उसका मुक़ाबला किया है. एकजुटता, बहनापे और प्यार के ज़रिए हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे. एक न्यायोचित और पुरुषों व महिलाओं की बराबरी वाले भविष्य के लिए हम अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे.

बुलेल्वा एमकुटुकानागायिका/गीत लेखिकाzaharasaबुलेल्वा एमकुटुकाना को उनके स्टेज वाले नाम ज़हारा के रूप में अधिक जाना-पहचाना जाता है. वो दक्षिण अफ्रीका के बहुत ग़रीब परिवार से ताल्लुक़ रखने वाली हैं. उन्होंने स्कूल में समूह गीत गाते हुए गायिकी के प्रति अपने लगाव को महसूस किया. उन्होंने गाने का अपना करियर गलियों में गाने से शुरू किया था. लेकिन, 2011 में ज़हारा ने जब अपना पहला एल्बम जारी किया तो उसने केवल तीन हफ़्तों में डबल प्लेटिनम कामयाबी हासिल कर ली.

गायिका-गीतकार ज़हारा पर पुरस्कारों की बरसात हो चुकी है. इस समय वो संगीत उद्योग में अपने करियर की ज़बरदस्त सफलता के दौर से गुज़र रही हैं. पर, ज़हारा ने अपने मंच का इस्तेमाल दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं से हो रही हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए भी किया है. ज़हारा बताया कि वो ख़ुद भी हिंसा की शिकार हो चुकी हैं.

> मुश्किल वक़्त में प्रार्थना ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है. प्रार्थना को कोई नहीं हरा सकता है.लूसी मोनाहनउत्तरी आयरलैंडअभियान संचालकलूसी मोनाहन ने अपनी पहचान छुपाए रखने के अधिकार को छोड़ने का फ़ैसला किया. जिससे कि वो ये बता सकें कि उत्तरी आयरलैंड की पुलिस और अभियोजकों ने उस समय उनके साथ कैसा बर्ताव किया था, जब वर्ष 2015 में उन्होंने अपने साथ बलात्कार की शिकायत की थी. पुलिस ने शुरू में तो लूसी से कहा कि, उसके पास इस बात के सुबूत हैं कि वो अपने बलात्कारियों के साथ 'छेड़ छाड़' कर रही थीं और इस बात की संभावना बहुत कम है कि इस मामले में आरोपियों को सज़ा होगी.

लूसी ने अधिकारियों को उनकी नाकामी के लिए कोर्ट में चुनौती दी, और इसका नतीजा ये हुआ कि यौन हमलों के शिकार होने वालों से बर्ताव में बदलाव आया. लूसी अब बलात्कार पीड़ितों की मदद करती हैं. वर्ष 2019 में उन्होने जज गिलेन की समीक्षा में शिरकत की थी. इस समीक्षा के बाद क़ानून में बदलाव के 250 से अधिक सुझाव दिए गए थे.

> उन्होंने कहा कि मैं ऐसा नहीं कर सकती. लेकिन मैंने फिर भी करके दिखा दिया. आप भी ऐसा कर सकते हैं.डूश नामवेज़ी नलबांबालोकतांत्रिक गणराज्य कॉन्गोपत्रकारडूश नामवेज़ी नलबांबा, कॉन्गो की एक मल्टीमीडिया पत्रकार और उवेज़ो अफ्रीका इनिशिएटिव की संस्थापक हैं. ये एक गैर सरकारी संगठन है, जो पत्रकारिता, रोज़गार के प्रशिक्षण और सामाजिक उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण का काम करता है.

डूश नामवेज़ी माहवारी से जुड़ी कुरीतियों के ख़िलाफ़ संघर्ष करती हैं. इसके लिए वो कॉन्गो गणराज्य की छात्राओं और महिलाओं को यौन शिक्षा देती हैं> आइए हम लड़कियों और महिलाओं की ऐसी पीढ़ी बन जाएं, जो परिवर्तन का सामना करती हैं, जो हमेशा अपनी रोज़मर्रा की चुनौतियों का समाधान तलाश लेती हैं, और जो हमेशा ये कहती हैं:कुछ भी असंभव नहीं है.

वनेसा नकाटेजलवायु संबंधी कार्यकर्ताvanessa_vash23 बरस की वनीसा नकाटे जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वाली कार्यकर्ता हैं. वो अफ्रीका स्थित राइज़ अप मूवमेंट की संस्थापक हैं. वो अफ्रीका में दिख रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को उजागर करने के लिए पूरी दुनिया में अभियान चलाती हैं. उनका ज़ोर ख़ास तौर से इस बात पर होता है कि, किस तरह जलवायु का संकट ग़रीबी, संघर्ष और लैंगिक असमानता को बढ़ावा दे रहा है.

जनवरी 2020 में एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने ग्रेटा थनबर्ग और अन्य यूरोपीय जलवायु संबंधी कार्यकर्ताओं के विश्व आर्थिक मंच में शामिल होने वाली तस्वीर से वनेसा नकाटे का चेहरा काट दिया था. इसके बाद वनेसा नकाटे ने जलवायु परिवर्तन के वैश्विक आंदोलनों में नस्लवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई. एसोसिएटेड प्रेस ने बाद में उस तस्वीर में वनेसा का भी चेहरा जोड़ दिया था. एपी ने ये सफाई तो दी कि उसने किसी बदनीयती से वनेसा की तस्वीर नहीं काटी-छांटी थी. लेकिन, समाचार एजेंसी ने अपनी इस करतूत के लिए माफ़ी भी नहीं मांगी. 27 जनवरी 2020 को एसोसिएटेड प्रेस की कार्यकारी संपादक सैली बज़बी ने अपने निजी ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके एपी की ओर से माफ़ी मांगी थी.

> लॉकडाउन और जलवायु संकट से अक्सर महिलाओं को ही सबसे ज़्यादा मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं. लेकिन, समाधान भी हम ही हैं: महिलाओं को शिक्षित करके और उन्हें सशक्त बनाने से कार्बन का उत्सर्जन घट जाएगा, हम आपदा से ज़्यादा मज़बूती से मुक़ाबला कर सकेंगे, और भविष्य के लिए जलवायु संबंधी नेतृत्व भी तैयार कर सकेंगे.

एथेलरेडा नकिमुली-मपुंगूमानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञethelmpunguडॉक्टर एथेल नकिमुलू-मपुंगू, युगांडा की मकेरेरे यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं. वो मानसिक आरोग्य की थेरेपी को अपने देश की संस्कृति के हिसाब से ढालने की कोशिश करती हैं. ख़ास तौर से उन लोगों के लिए जो HIV और अवसाद के शिकार हैं.

डॉक्टर एथेल नकिमुलू-मपुंगू समूह में इलाज करने में मददगार बेहद सस्ती थेरेपी ईजाद की है. जिसे कोई आम स्वास्थ्यकर्मी भी दे सकता है. इस थेरेपी पर रिसर्च ने दिखाया है कि इससे अवसाद के लक्षणों में नाटकीय ढंग से कमी लायी जा सकती है, और अवसाद के शिकार लोगों को वायरस निरोधक दवा लेने के लिए मनाया जा सकता है.

> अपने मानसिक स्वास्थ्य को अपनी प्राथमिकता बना लें और अपनी शक्ति को दोबारा हासिल कर लें.नांदरमहिलावादी कार्यकर्ताNandarMMRनांदर एक महिलावादी वकील, अनुवादक, क़िस्साग़ो और दो पॉडकास्ट: फेमिनिस्ट टाक्स और जी-टॉव ज़गर वाइन की रचनाकार हैं. उन्होंने पर्पल फेमिनिस्ट ग्रुप की स्थापना की है और यांगून में द वजाइना मोनोलॉग्स की सह-निर्देशिका हैं.

उत्तरी म्यांमार के शान सूबे के एक गांव में पली बढ़ी नांदर ने उन्हीं मुसीबतों का सामना किया है, जिसका कोई भी आम महिला अपनी ज़िंदगी में तब करती है, जब वो म्यांमार में पारिवारिक और सामुदायिक जीवन के पारंपरिक मूल्यों को चुनौती देती है. अब नांदर अपने पॉडकास्ट के ज़रिए वर्जित विषयों, जैसे कि माहवारी और गर्भपात पर चर्चा करती हैं.

> मेरी तमन्ना है कि असमानता मिटाने के इस अभियान में और अधिक लोग शामिल होते, जिससे कि हम ऐसी दुनिया में रह पाते जहां हमारा सम्मान होता और एक इंसान के तौर पर हमारी अहमियत भी समझी जाती. हम आपस में मिलकर एक बेहतर और न्यायोचित दुनिया बना सकते हैं.वर्नेटा एम ने मॉबर्ली

अमेरिकापर्यावरणवादी कार्यकर्तावर्नेटा मॉबर्ली एक पत्नी, मां, दादी और दोस्त हैं.पिछले कई वर्षों से वर्नेटा अपने बुज़ुर्गों से जानकारी जुटा कर, फिर अपने ज्ञान और हुनर को इनुपियट समुदाय की अगली पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं. वर्नेटा का जुनून धरती मां को बचाना है.

> मांओ:अपना ख़याल रखो. अपने पूर्वजों की जानकारी को हासिल करने की कोशिश करती रहो. हम सब जुड़े हुए हैं. हमारे अंदर वही गुण और जुनून जिससे हम अपने बच्चों को बढ़ने में मदद कर सकते हैं. अगर दुनिया में उठा-पटक भी मची हुई है, तो उसका भी समाधान तलाशो.नेमोंटे नेनक्विमो

वाओरानी नेताnemonte.nenquimoनेमोंटे नेनक्विमो एक आदिवासी महिला हैं, जो अमेज़न के वर्षावनों में अपने पुरखों के इलाक़ों, अपनी संस्कृति और रहन-सहन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.नेमोंटे आदिवासी समुदाय के नेतृत्व वाले अलाभकारी संगठन सीबो एलायंस की सह संस्थापक हैं. वो पास्टाज़ा प्रांत के वाओरानी संगठन की पहली महिला अध्यक्ष हैं. टाइम मैग़ज़ीन की दुनिया के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों में नेमोंटे का नाम भी शामिल किया गया है.

> एक महिला के तौर पर हमारे पास इस ख़तरनाक दौर में भी एक रास्ता बनाने के लिए ज़रूरी शक्ति है, ख़ास तौर से जब हमारे ग्रह और मानवता का अस्तित्व ख़तरे में हो. अब समय आ गया है कि सभी महिलाएं एकजुट हो जाएं.सानिया निश्तरपाकिस्तानवैश्विक स्वास्थ्य नेत्रीSaniaNishtar

डॉक्टर सानिया निश्तर वैश्विक स्वास्थ्य और टिकाऊ विकास की लीडर हैं. वर्ष 2018 से वो परिवर्तन लाने वाले एहसास ग़रीबी उन्मूलन अभियान को चला रही हैं. इस अभियान ने पाकिस्तान के लाखों लोगों को मोबाइल बैंकिंग और बचत खातों की सुविधा व अन्य बुनियादी संसाधन उपलब्ध करा कर उनकी ज़िंदगियां बेहतर बनाई हैं.

डॉक्टर सानिया निश्तर, ग़रीबी उन्मूलन और सामाजिक संरक्षण पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की विशेष सहायक हैं. उन्होंने पाकिस्तान को कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए ज़रूरी शुरुआती क़दम उठाकर जनता के सशक्तिकरण का काम किया है.> कोविड-19 के नाटकीय प्रभाव ने हमें पीढ़ियों में एक बार मिलने वाला मौक़ा मुहैया कराया है, जब हम एक समान विश्व का निर्माण कर सकते हैं, और ग़रीबी, असमानता व जलवायु संकट की चुनौतियों को ख़त्म कर सकते हैं. इस अभियान के लिए महिलाओं को भी सशक्त बना कर बराबरी का भागीदार बनाना ज़रूरी है.

फिलिस ओमिडोकेन्यापर्यावरणवादी कार्यकर्ताPhyllis_Omidoफिलिस ओमिडो सेंटर फॉर जस्टिस गवर्नेंस ऐंड एनवायरमेंटल एक्शन (CJGEA) की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं. ये संस्था, समाज के कमज़ोर तबक़ों और केन्या के शोषणवादी उद्योगों के शिकार लोगों के लिए पर्यावरण संबंधी और सामाजिक-आर्थिक अधिकारों के लिए संघर्ष करती है. वर्ष 2015 में फिलिस ने गोल्डमैन एनवायरमेंटल प्राइज़ जीता था, जिसे 'ग्रीन नोबल' कहा जाता है. इस पुरस्कार के ज़रिए, ओविनो उहुरू में सीसा पिघलाने वाले कारखाने को बंद कराने में फिलिस के योगदान को सराहा गया था.

जून 2020 में फिलिस ने ओविनो उहुरू समुदाय के लिए 1.3 अरब डॉलर केन्याई शिलिंग के मुआवज़े का मुक़दमा जीता था. इसके अलावा उन्होंने अपनी संस्था CJGEA के लिए 70 करोड़ शिलिंग के मुआवज़े का केस भी जीता था. अदालत ने आदेश दिया था कि फिलिस को मुक़दमा लगने में लगे ख़र्च का भी भुगतान किया जाए. इस मामले में अभी केन्या के राष्ट्रीय पर्यावरण प्रबंधन प्राधिकरण में अपील की सुनवाई चल रही है.

> जैसे पूरी दुनिया की महिलाओं को तमाम मुश्किलों के बीच अपने वाजिब हक़ के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ रहा है, उसी तरह प्रकृति भी पर्यावरण के इस संकट के बीच से ख़ुद में नई जान डालने का संघर्ष कर रही है. एक महिला ही क़ुदरत की मुश्किलों को समझ सकती है.

लालेह ओस्मानीकार्यकर्ताlaleh_osmanyअफ़ग़ानिस्तान में एक महिला का नाम सार्वजनिक रूप से लेने पर नाक-भौं सिकोड़ी जाती है. किसी के जन्म प्रमाण पत्र में केवल पिता का नाम ही लिखा जाता है. जब कोई महिला शादी करती है, तो शादी के आमंत्रण पत्र में महिला का नाम नहीं छापा जाता. जब कोई महिला बीमार होती है, तो दवा के पर्चों पर भी उसका नाम नहीं होता, और जब अफ़ग़ानिस्तान में किसी महिला की मौत हो जाती है, तो न तो उसका नाम मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज किया जाता है और न ही उसकी क़ब्र के पत्थर पर नाम लिखा जाता है.

महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकार से वंचित किए जाने से खीझ कर, लालेह ओस्मानी ने व्हेयरइज़मायनेम अभियान की शुरुआत की थी. तीन साल के संघर्ष के बाद, वर्ष 2020 में जाकर अफ़ग़ान सरकार राष्ट्रीय पहचान पत्रों और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्रों में महिलाओं का नाम भी लिखने को राज़ी हुई.

> इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए कोशिश करने की ज़िम्मेदारी सबकी है. बदलाव लाना मुश्किल होता है, लेकिन असंभव नहीं. आप इस बात की मिसाल उन महिलाओं में देख सकते हैं, जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान जैसे बेहद रुढ़िवादी देश में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए संघर्ष किया है.

लोर्ना प्रेंडरगास्टऑस्ट्रेलियाडिमेंशिया रिसर्चरवर्ष 2019 में लोर्ना प्रेंडरगास्ट ने उस समय पूरी दुनिया में सुर्ख़ियां बटोरी थीं, जब उन्होंने 90 साल की उम्र में मेलबर्न यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की थी. उन्होंने बढ़ती उम्र के बारे में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की थी. लोर्ना ने अपनी इस डिग्री को अपने स्वर्गीय पति को समर्पित किया था, जिनके साथ उन्होंने 64 बरस की वैवाहिक ज़िंदगी बिताई थी और जो ख़ुद याददाश्त चली जाने के शिकार हुए थे.

एक रिसर्चर के तौर पर लोर्ना ने याददाश्त खोने वाले मरीज़ की ज़रूरतों के प्रति समझ बढ़ाने का काम किया है. जिससे कि उनकी ज़िंदगी और उनका ख़याल रखने वालों से संबंध को बेहतर बनाया जा सके.> आपकी उम्र जो भी हो, आप युवा हों या बुड्ढे हो गए हों, आप दुनिया में बदलाव ला सकते हैं.

ओक्साना पुश्किनारूसी संसद की सदस्यopushkinaओक्साना पुश्किना रूस की संसद के सदन स्टेट ड्यूमा में परिवार, महिलाओं और बच्चों के मसले पर बनी कमेटी की उपाध्यक्ष हैं.वर्ष 2018 में जब कई दर्जन महिला पत्रकारों ने स्टेट डयूमा की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के अध्यक्ष लियोनिद स्लटस्की पर यौन शोषण के आरोप लगाए, तो ओक्साना इकलौती संसद सदस्य थीं, जिन्होंने आगे आकर उन महिला पत्रकारों का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था.

> वर्ष 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. लेकिन, तकलीफ़ और संकट के अलावा मैंने जो एक और बात सीखी है, वो ये है कि चुनौतियों के आगे हमेशा इंसान के सबसे बेहतरीन गुण देखने को मिलते हैं.सिबेल रेसीब्राज़ीलअध्यापिकासिबेल एक रिटायर्ड प्राध्यापिका हैं, जिन्होंने साओ पाउलो में प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों को नस्लीय समानता की पढ़ाई कराने में अग्रणी कार्य किया है.

सिबेल ने अपने स्कूल प्रबंधन के सभी काम-काज की समीक्षा की, जिससे कि स्कूल के सभी कर्मचारियों के काम करने के लिए समावेशी माहौल बनाया जा सके, फिर चाहे वो किसी भी नस्ल, लिंग या पद के हों.> इस साल ने हमारे ऊपर एक बहुत पुराना बोझ डाल दिया है. ये समाज की उन प्रतिबद्धताओं का है, जिसका उसे वादा करना चाहिए, ताकि बदलाव लाया जा सके. मुझे उम्मीद है कि हमने वर्ष 2021 में बदलाव लाने वाली ऊर्जा को अपने अंदर इकट्ठा कर लिया है.

सुज़ाना रफालीपोषण विशेषज्ञsusanaraffalliसुज़ाना एक मानववादी कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के 22 बरस दुनिया भर में आने वाली आपदाओं से जूझते हुए और लोगों की मदद करते हुए बिताए हैं. उन्होंने कैरिटास डे वेनेज़ुएला की एक ऐसा उपकरण स्थापित करने में मदद की है, जो वास्तविक समय में वेनेज़ुएला के बच्चों पर पड़ रहे आपदा के दुष्प्रभावों को तब बताने में सफल हुआ, जब वेनेज़ुएला इस बात से ही इनकार कर रहा था कि कोई संकट है. सुज़ाना ने स्लम में रहने वाले बच्चों को पोषक खाना उपलब्ध कराने वाले केंद्रों का एक नेटवर्क भी स्थापित किया है.

वर्ष 2020 में महामारी के दौरान, सुज़ाना ने कम आमदनी वाले नागरिकों, एचआईवी ग्रस्त महिलाओं और युवा क़ैदियों के लिए खाने पीने की सेवाओं का संचालन किया था. स्केलिंग अप न्यूट्रिशन मूवमेंट के साथ काम करते हुए सुज़ाना ने मध्य अमेरिका में महामारी से निपटने के सरकारी अभियानों में पोषण को भी मुख्यधारा में लाने का काम किया है.

> सबसे पहले आप अपना ख़याल रखें और वहां से ख़ुद को आज़ाद करने की शुरुआत करें. इससे लॉकडाउन का शानदार उपयोग हो सकेगा.सपना रोका मगरनेपालश्मशान तकनीकी विशेज्ञक़रीब तीन महीने तक बेघर रहने के बाद सपना, नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचीं. वहां वो ऐसे संगठन के साथ जुड़ गईं, जो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करता है.

जिन लोगों की मौत कोविड-19 से हुई है, उनके शवों का अंतिम संस्कार की ज़िम्मेदारी, सख़्ती से नेपाल की सेना के हवाले कर दी गई है. सपना का संगठन सड़कों, गलियों और मुर्दाघरों में पड़ी लावारिस लाशों को उठाता है और उन्हें पोस्ट मॉर्टम के लिए अस्पताल ले जाता है. अगर फिर भी लाश पर 35 दिनों तक कोई दावा नहीं करता, तो फिर उनका संगठन लाश को श्मशान ले जाता है और दागबत्ती परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करता है. हिंदू परंपरा में आम तौर पर ये ज़िम्मेदारी बेटा निभाता है.

> पूरी दुनिया में बेघर और छोड़ दिए गए लोग हैं. वो लोग जो सड़कों पर मर जाते हैं, उन्हें भी उचित रूप से अंतिम संस्कार का अधिकार है. मैं ये काम केवल समाज सेवा के लिए नहीं करती, बल्कि अपने ज़हनी सुकून के लिए भी करती हूं.पार्डिस साबेतीईरानकम्प्यूटेशनल आनुवंशिकीविद्

PardisSabetiपार्डिस साबेती हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, एमआईटी और हार्वर्ड के ब्रॉड इंस्टीट्यूट और हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट में प्रोफ़ेसर हैं. उन्होंने पश्चिम अफ्रीका में मानव और माइक्रोबियल जीनोमिक्स, सूचना सिद्धांत और ग्रामीण संक्रामक रोग निगरानी और शिक्षा प्रयासों में योगदान दिया है.

वर्ष 2014 में साबेती इबोला से जंग लड़ने वाली उस टीम का हिस्सा थीं जिसे टाइम मैगज़ीन ने 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' चुना था. उसी अंक में पत्रिका ने उन्हें '100 सबसे प्रभावशाली' लोगों की सूची में भी शामिल किया था. वह शैक्षिक वीडियो श्रृंखला 'अगेंस्ट ऑल ऑड्स' की मेज़बान हैं, और रॉक बैंड 'थाउज़ेंड डेज़' की प्रमुख गायिका भी हैं.

> बेहतर दुनिया की जंग में अपनी सभी चुनौतियों को सहनशीलता, एकजुटता और बाक़ी अच्छे लोगों की हंसी के सहारे पार पाना, हमारी कामयाबी की कुंजी होगी.फेबफी सेत्यावतीकार्यकर्ताFebfisetyawatiफेबफी सेत्यावती उनटुकटेमन.आईडी नाम के संगठन की संस्थापिका हैं, जो कमज़ोर लोगों की मदद करता है-ख़ास तौर से उन बीमार लोगों की, जिनके पास पैसों की कमी है और जो कोविड-19 महामारी के शिकार हैं. फेबफी और उनकी टीम मुहल्लों की गलियों में फॉक्सवैगन कैम्परवैन में घूमती रहती है, लोगों को मुफ़्त इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है, जो आम तौर पर बहुत महंगी है. इसके अलावा उनकी टीम विद्यार्थियों को मोबाइल पुस्तकालय की सुविधा भी मुहैया कराती है, जिससे कि वो अपना काम जारी रख सकें. अब फेबफी की टीम उन इलाक़ों में ट्रांसमीटर से सिग्नल उपलब्ध कराने में जुटी है, जहां इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं है.

उनके बेटे अकारा हैयकल की मौत मोबियस सिंड्रोम से हो गई थी. ये एक रेयर दिमाग़ी बीमारी है. बेटे की मौत से ही फेबफी को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिली.> वर्ष 2020 में दुनिया बहुत बदल गई है. हमें भी इस बदलती दुनिया के हिसाब से ख़ुद में बदलाव लाने चाहिए. हमारे लिए बेहतर ये होगा कि हम शिकायतों का अंबार लगाने के बजाय, थोड़ा थोड़ा वो काम भी करें, जो उपयोगी है.

रूथ शेडीपेरूपुरातत्व वैज्ञानिकरूथ शेडी ने पुरातत्व और मानव विज्ञान में डॉक्टरेट हासिल की है. वो सैन मार्कोस विश्वविद्यालय में फैकल्टी ऑफ़ सोशल साइंसेज़ की उपाध्यक्ष हैं. इसके अलावा वो कराल पुरातत्व स्थल में हो रहे तमाम अनुसंधानों की निदेशक भी हैं.रूथ के पास पेरू के विश्वविद्यालयों से मिली पांच मानद उपाधियां हैं. वर्ष 2018 में उन्होंने लॉरियल-यूनेस्को नेशनल प्राइज़ फ़ॉर वुमेन इन साइंस का पुरस्कार भी जीता था. उन्हें पेरू गणराज्य की कांग्रेस या संसद की ओर से मेडल ऑफ ऑनर से भी नवाज़ा गया था.

> महिलाओं को उन गतिविधियों में भी शामिल होना चाहिए जिनसे बदलाव को बढ़ावा मिलता है. उन्हें एक ऐसे समाज का निर्माण करने में योगदान देना चाहिए, जहां सभी इंसान एक दूसरे के साथ सौहार्द्र से और प्रकृति से संतुलन बना कर रह सकें.पनुसाया सिथिजिरावत्तनाकूथाईलैंड

विद्यार्थी कार्यकर्ताइस साल पूरे थाइलैंड में लोकतंत्र के समर्थन में ज़ोरदार प्रदर्शन हुए हैं. और 22 बरस की पनुसाया जैसे विद्यार्थी ही इस आंदोलन के केंद्र में हैं. पनुसाया और दूसरे कार्यकर्ताओं को इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण गिरफ़्तार कर लिया गया था. लेकिन, बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

पनुसाया की गिरफ़्तारी का वीडियो लाइवस्ट्रीम किया गया था. इसमें सादी वर्दी में चार पुलिस अधिकारी उन्हें एक होटल के कमरे से टांग कर ले जाते दिख रहे हैं. फिर उन्हें व्हीलचेयर पर बैठा दिया जाता है और पुलिस की गाड़ी तक ले जाया जाता है. पनुसाया ने अपने ऊपर लगे देशद्रोह समेत अन्य सभी आरोपों को ग़लत बताया है.

इस साल अगस्त में वो छात्रों की एक रैली में स्टेज पर गईं और वहां अब बहुत मशहूर हो चुके दस मुद्दों वाले घोषणा पत्र को पढ़ा. इसमें उन्होंने थाईलैंड की राजशाही से कहा कि वो राजनीति में दख़लंदाज़ी न करे. पनुसाया के इस क़दम से थाईलैंड के एक बड़े तबक़े को सदमा सा लग गया था. क्योंकि, थाईलैंड दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है, जहां पर शाही परिवार के ख़िलाफ़ कुछ भी कहने को अपराध मानने का क़ानून लागू है. थाईलैंड में राजा, रानी, गद्दी के वारिस या शाही एजेंट की आलोचना करने वालो को पंद्रह वर्षों तक की क़ैद की सज़ा हो सकती है.

> हर शख़्स में दुनिया बदलने का माद्दा है. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं या आप कौन हैं. बस आप ख़ुद पर यक़ीन रखिए और अपनी ज़िंदगी को किसी काम लायक़ बनाइए.नसरीन सोतौदेहईरानमानव अधिकार कार्यकर्तानसरीन सोतौदेह ईरान की एक वकील हैं, जो ईरान में क़ानून के राज और राजनीतिक क़ैदियों, विपक्षी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं. वो क़ैद की लंबी सज़ा से अस्थायी तौर पर रिहा होकर बाहर हैं. उन्हें ये सज़ा ज़बरदस्त आलोचना की शिकार ईरान की न्यायिक व्यवस्था के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए मिली है.

अपने क़ैद में होने और परिवार को लगातार धमकियां मिलने के बावजूद नसरीन ने अपने बाग़ी तेवर कम नहीं किए हैं और वो क़ानून के राज के लिए लगातार आवाज़ बुलंद कर रही हैं.> ईरान में हिजाब पहनना अनिवार्य है-और अगर वो ये आधा मीटर कपड़ा हमारे ऊपर थोप सकते हैं, तो वो हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं.

कैथी सुलिवानवैज्ञानिक/ अंतरिक्षयात्रीAstroKDSकैथी सुलिवान वैज्ञानिक, अंतरिक्ष यात्री, लेखिका और एक एक्जीक्यूटिव हैं. वे उन पहली छह महिलाओं में शामिल थीं जो 1978 में नासा की अंतरिक्ष यात्री कॉर्प के लिए चुनी गई थीं. इसके बाद अंतरिक्ष में चहलक़दमी करने वालीं पहली अमेरिकी महिला बनने की उपलब्धि भी उन्होंने हासिल की.

समुद्र के सबसे निचले हिस्से पर गोताखोरी करने वाली पहली महिला की उपलब्धि भी कैथी ने हासिल की थी. स्पेस फ्लाइट और गहरे समुद्र में गोताखोरी के मिश्रण के चलते कैथी को 'मोस्ट वर्टिकल पर्सन इन द वर्ल्ड' का टाइटिल भी हासिल हुआ है.> 2020 में दुनिया काफ़ी बदल गई है. इसने हमें यह याद दिलाया कि इस ग्रह पर लोगों का जीवन कैसे एक दूसरे पर निर्भर है और हमें यह भी बताता कि हमें वास्तव में किन चीज़ों की ज़रूरत है और हमें किसका ध्यान रखना चाहिए.

रीमा सुल्ताना रीमूबांग्लादेशअध्यापिकाSultanaRimuरीमा सुल्ताना रीमू, बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार में यंग वुमेन लीडर्स फॉर पीस की सदस्य हैं. ये कार्यक्रम, ग्लोबल नेटवर्क ऑफ विमेन पीसबिल्डर्स का एक हिस्सा है, जिसका मक़सद संघर्ष प्रभावित देशों की युवा महिलाओं को नेतृत्व करने और शांति स्थापना करने में सहयोग करता है.

रीमा ने रोहिंग्या शरणार्थी संकट के दौरान अपने समुदाय के बीच लैंगिकता पर आधारित मानवीय सहयोग के लिए प्रेरणा का काम किया. वो रोहिंग्या शरणार्थियों और उन महिलाओं व लड़कियों के लिए लैंगिक रूप से संवेदनशील, उम्र के हिसाब से साक्षरता और अंक गणना की कक्षाएं चलाती हैं, जिन्हें आम तौर पर शिक्षा उपलब्ध नहीं है. रीमा रेडियो प्रसारण और नाटकों के मंचन के माध्यम से लोगों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्तावों के प्रति जागरूकता फैलाती हैं. ख़ास तौर से जो प्रस्ताव उनके समुदाय की महिलाओं और शांति व सुरक्षा से जुड़े हैं.

> मैंने ठान लिया है कि मैं बांग्लादेश में लैंगिक समानता को लाकर ही रहूंगी. मैं मानती हूं कि महिलाएं और लड़कियां अपने अधिकारों के लिए लड़ने की ताक़त रखती हैं. हम ज़रूर कामयाब होंगे.लिया टीट्रांसजेंडर मॉडलleatऐसे मॉडल गिने चुने ही होंगे जिनको पहली नौकरी गिवेंची जैसे ब्रैंड के साथ मिली हो लेकिन लिया टी उनमें एक हैं. वे दस साल से भी ज़्यादा समय से मॉडलिंग में हैं. इस सफ़र में वह मैरी क्लेयर, ग्राज़िया और वोग जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में नज़र आ चुकी हैं.

2016 में लिया ओलंपिक उद्घाटन समारोह में भाग लेने वाली खुले तौर पर पहली ट्रांसजेंडर बनीं. वह ट्रांसजेंडर एडवोकेसी के क्षेत्र की पॉप कल्चर आइकन हैं, वह एलजीबीटी समूह के लोगों के ख़िलाफ़ होने वाले भेदभाव के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रही हैं, वह समाज से इस पर ध्यान देने की अपील करती आयी हैं. अपने करियर में अब तक वह दूसरों को अपनी तरह सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती रही हैं.

> दुनिया हर पल बदल रही है और हम लगातार गतिशील है- लेकिन महिलाएं अकेले नहीं चल सकती हैं.अना तिजूसंगीतकारanatijouxअना तिजू चिली मूल की हिप हॉप आंदोलनकारी हैं. वे अपने गीतों में नारीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे अपने गीतों में सामाजिक और सांस्कृतिक कमियों को दर्शाती हैं. उनके माता पिता चिली में आगेस्तो पिनोशे की तानाशाही के दौरान निर्वासन में चले गए थे, इसका असर अना के करियर पर नज़र आता है. वह सामाजिक और रानजीतिक मुद्दों के प्रति कहीं ज़्यादा संवेदनशील हैं.

उन्होंने 2014 के अपने एलबम वेंगो में पितृसत्ता गाने के ज़रिए महिला अधिकारों के समर्थन और लैंगिक हिंसा का विरोध को रेखांकित किया था. असमानता और उत्पीड़न के ख़िलाफ़ दुनिया भर के प्रदर्शनों में तिजू शामिल होती रहती हैं.> 2020 ने हमारी अर्थव्यवस्था के खोखलेपन को ज़ाहिर कर दिया है, इस खोखलेपन के सामने हमारे पास आपसी संबंधों की मजबूती है. इसलिए हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे मूल्य कहां और कहां से हमें मजबूती मिलती है.

ओपल टोमेटीमानवाधिकार कार्यकर्ताopalayoओपल टोमेटी पुरस्कार प्राप्त मानवाधिकार कार्यकर्ता और ब्लैक लाइव्स मैट की तीन महिला सह-संस्थापकों में एक हैं. इसके अलावा वह न्यू मीडिया और एडवोकेसी हब डायसपोरा राइजिंग की संस्थापिका भी हैं.नाइजीरिया मूल के प्रवासी परिवार में अमेरिका में जन्मीं ओपल ने कई देशों में पिछले 20 सालों से मानवाधिकार के मुद्दे पर काम कर रही हैं.

> वास्तविक तौर पर लोगों का जागरण हुआ है. हम सब जानते हैं कि अब अन्याय से नज़र फेरना ग़लत है. मैं हर किसी को साहसी, प्रतिबद्ध और अपने समुदाय से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती हूं.स्वियातलाना तिखानोवस्कायाबेलारूसनेताTsihanouskayaस्वियातलाना तिखानोवस्काया बेलारूस में राष्ट्रपति पद की पूर्व उम्मीदवार रही हैं. उन्होंने नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट का नेतृत्व किया था. अगस्त, 2020 में राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने शानदार जीत हासिल की लेकिन इसके बाद देश भर में उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए और उन पर बड़े पैमाने पर मतगणना के दौरान धांधली करने के आरोप लगे.

चुनाव के कुछ ही समय बाद अपने बच्चों की सुरक्षा के डर से स्वियातलाना बेलारूस से लिथुआनिया चली गईं. वे निर्वासित होते हुए भी डेमोक्रेटिक मूवमेंट का नेतृत्व कर रही हैं.> जो आपको कमजोर कहे उस शख़्स पर कभी नहीं विश्वास करें, एक भी सेकेंड के लिए नहीं. अमूमन हमें इसका एहसास नहीं होता है कि हम कितने मजबूत हैं.

यूलिया त्स्वेतकोवारूसकार्यकर्तायूूलिया त्स्वेतकोवा का जन्म रूस के पूर्वी हिस्से के दूरदराज वाले हिस्से के छोटे से अद्यौगिक इलाके में हुआ था. वहां उन्होंने कला, नृत्य और निर्देशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने थिएटरों और सामुदायिक सेंटरों पर महिलाओं के अधिकार, एलजीबीटी अधिकार, सैन्य विरोध और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाना शुरू किया.

2019 में उन पर पोर्नोग्राफ़ी से जुड़ी सामाग्रियों के वितरण का आरोप लगा और 'एलजीबीटी प्रोपगैंडा' को लेकर तीन मामले दर्ज हुए. फ़िलहाल महिलाओं के शारीरिक अंगों से जुड़े अपने रेखांकन को आनलाइन शेयर करने के लिए छह साल की सजा भुगत रही हैं. रूस की मानवाधिकार संगठनों ने उन्हें राजनीतिक कैदी माना है. हालांकि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करती हैं.

> कभी दुर्व्यवहार सहन नहीं करना चाहिए- चाहे वह सरकार या फिर पार्टनर या फिर समाज की ओर से क्यों ना किया जा रहा हो. आप मज़बूत हैं और आपमें दुनिया बदलने की ताक़त है. समय कितना भी मुश्किल क्यों ना हो लेकिन अच्छे दिनों की कल्पना और संघर्ष जारी रखना चाहिए.

अरूसी उंडाकैंपेनरbrujasdelmarमैैक्सिको में लैंगिक भेदभाव के चलते महिलाओं की हत्या के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में अरूसी और उनका नारीवादी समूह ब्रुजास डेल मार (समुद्र की डायन) महिलाओं की आवाज़ बनकर उभरा है.इस साल नौ मार्च को अरुसी और उनके साथियों ने इन हत्याओं के विरोध में महिलाओं को देशव्यापी हड़ताल करने के लिए प्रेरित किया. इस हड़ताल में शामिल महिलाओं ने सारे काम काज और अपनी गतिविधियों को बंद रखा और घर पर रहकर अपना समर्थन दिया.

> इस वक्त कई सारे नारे और स्लोगन हैं- नारीवादी क्रांति होगी या फिर नारीवादी भविष्य होगा. लेकिन भविष्य अब आ चुका है. हमें बहादुरी से आगे बढ़ते रहना होगा. ‌अनास्तासिया वोलकोवायूक्रेनउद्यमीFluroSatडॉ. अनास्तासिया वोलकोवा एक उद्यमी हैं जो कृषि के क्षेत्र में नए तौर तरीकों से काम कर रही हैं. वे खाद्य सुरक्षा के लिए विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं.

2016 में उन्होंने फ्लूरोसैट कंपनी की स्थापना की. यह कंपनी किसानों का उत्पादन बढ़ाने के लिए ड्रोन और सैटेलाइट के ज़रिए आंकड़े एकत्रित करती है. आंकड़ों की गणना और विश्लेषण और दूसरे तौर तरीकों से कंपनी किसानों की मदद करती है.> दुनिया में आप जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसके लिए पहले खुद को बदलना पड़ता है. मुझे उम्मीद है कि हम सब लोग मिलकर अपने अपने तरीकों से मौजूदा स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए साकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

कोचाकोर्न वोराखोमथाईलैंडलैंडस्केप आर्किटेक्टkotch_voraakhomकोचाकोर्न वोराखोम खुद को 'बदमाश शहरी थाई लैंड स्केप आर्किटेक्ट' बताती हैं. उन्होंने बैंकाक शहर के टूटे फूटे फुटपॉथ को अलग करने का काम शुरू किया और उसके बाद तरह तरह के आइडिया पर काम करने की शुरुआत हुई.

अब वह सार्वजनिक स्थलों के उत्पादक उपयोग के लिए काम करती हैं और जलवायु परिवर्तन की समस्या का सामना करने के लिए महानगर में पार्क जैसी सुविधाओं को विकसित कर रही हैं.> जब आपका पूर शहर डूब रहा हो तो आपसे बेहतर आर्किटेक्ट क्या करेंगे? हम और विकास के पीछे भागें उससे पहले हमें जलवायु परिवर्तन की समस्या पर सोचने की ज़रूरत है. लेकिन ना तो कोई समुदाय, ना देश और ना ही क्षेत्र ऐसा कर रहा है. जबकि हमें एकजुट होकर इस पर सोचने की ज़रूरत है. यह पृथ्वी हमारी दुनिया है, हमारा घर है. इसके संकट को कम करने का एक ही रास्ता है, हमें इसके लिए काम करना होगा.

स्यूजई वाइल्सवैज्ञानिकSiouxsieWस्यूजई वाइल्स एक वैज्ञानिक और जन स्वास्थ्य संचार विशेषज्ञ हैं. कोरोना महामारी के समय में न्यूज़ीलैंड में उनकी भूमिका बेहद अहम रही.स्यूजई ने कार्टूनिस्ट टॉबी मॉरिस के सहयोग से लोगों को कोविड-19 से जुड़े विज्ञान के बारे में बताया. इन दोनों का संयुक्त काम काम बेहद सराहा गया, जिसमें एक 'फ्लैटन द कर्व' विजुएलाइजेशन तो काफ़ी लोकप्रिय हुआ. इसका कई भाषाओं में अनुवाद हुआ. सरकारों ने इस विजुएलाइजेशन के ज़रिए आमलोगों को बताया कि लॉकडाउन कैसे काम करता है.

स्यूजई वाइल्स आकलैंड यूनिवर्सिटी की बायोल्यूम्निसेंट सुपरबग्स लैब की प्रमुख भी हैं. यहां स्यूजई और उनकी टीम बैक्टिरिया को अंधेरे में चमकने के लिए बाध्य करती है ताकि यह समझा जा सके वे किस तरह से हमें बीमार बनाती हैं और नई दवाईयों की खोज हो.> जिन देशों में लोगों ने एकजुट होकर महामारी के ख़िलाफ़ एक दूसरे का सफलतापूर्वक बचाव किया है, उन देशों ने यह दिखाया है कि बड़ी चुनौतियों का सामना सहानुभूति और सामूहिकता से किया जा सकता है.

एलिन विलियम्सवेल्स, यूकेडिसएबिलिटी ब्लागरmyblurredworldएलिन एक लेखिका और विकलांगता की पैरोकार हैं, जिन्होंने 16 साल की उम्र से अपने ब्लॉग में 'माई ब्लर्ड वर्ल्ड' में मायलजिक इंसेफेलाइटिस (एमई) और रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (एक आंख की लगातार कम होती रोशनी) के अपने अनुभव साझा किए हैं.

वे अपने अनुभवों के बारे में ईमानदार और खुले लेख लिखती हैं. अपनी सलाह से सब कुछ साझा करते हुए अपनी स्थितियों के भावनात्मक प्रभाव के साथ सामाजिक बाधाओं का सामना करती हैं. एलिन फैशन उद्योग में पहुंच को बढ़ावा देने का महत्व रखती हैं. इन सब के बीच वे जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद में अपने शब्दों में सकारात्मकता का एक धागा बुनती है और अपने जैसे दूसरों लोगों को संदेश देती हैं कि वे अकेले नहीं हैं.

> एक आउटलेट खोजें जो आपको अपनी रचनात्मकता, ऊर्जा, विचार, दर्द और खुशी को चैनल करने की अनुमति दे. सकारात्मकता को लाने वाली हर चीज़ गले लगाओ. आप किसी ऐसी चीज के लायक हैं पूरी तरह से आपकी है.एलिस वॉन्गडिसएबिलिटी कार्यकर्ताSFdirewolfऐलिस ज़मीनी स्तर पर विकलांग लोगों को अपनी कहानियों को रिकॉर्ड करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले डिसएबिलिटी विजिबिलिटी प्रोजेक्ट की संस्थापक हैं.

इस साल एलिस ने एक नई पुस्तक 'डिसएबिलिटी विजिबिलिटी: फर्स्ट-पर्सन स्टोरीज़ टू द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी' प्रकाशित की.> 2020 में में दुनिया बहुत बदल गई है, और मैं नहीं चाहती की अब दोबारा हालात पहले की तरह 'नॉर्मल' हों.लियो यी-सिनसिंगापुर

डॉक्टरडॉ लियो यी-सिन सिंगापुर के अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फ़ॉर इनफ़ेक्शन्स' चलाती हैं. इस सेंटर पर संचारी रोगों से निपटने की ज़िम्मेदारी है.कोविड -19 के खिलाफ देश की लड़ाई में सबसे आगे होने के साथ-साथ, उन्होंने दशकों तक सिंगापुर में एचआईवी केयर को बेहतर बनाने और कई महामारियों के दौरान नेतृत्व प्रदान करती रही हैं. वे अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता और अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण में संतुलन बनाए रखती हैं.

> कोविड-19 ने सबकी ज़िंदगी बदल दी है. लेकिन इसने अब तक महिलाओं के नेतृत्व करने की क्षमता को नहीं बदला है. इस वायरस से जो फ्रंटलाइन की जंग लड़ी जा रही है उसमें महिलाएं प्रमुख हैं. और वे अपने काम को साहस, दृढ़ता और मज़बूती से अंजाम दे रही हैं.मिशेल येओ

एक्टरmichelleyeoh_officialमिशेल येओ हॉन्ग कॉन्ग की मार्शल आर्ट्स फ़िल्मों के मर्दों की दुनिया में अपने स्टंट खुद करते हुए आगे बढ़ी हैं. हॉलीवुड में उनकी शुरूआत बॉन्ड फ़िल्म 'टूमॉरो नेवर डाइज़' के साथ हुई थी. वे चुनींदा एशियाई एक्टरों में से हैं जिनका अमेरिका में लंबा और कामयाब करियर रहा है.

हॉलीवुड में 30 साल बिताने के बाद मिशेल को अब बड़े रोल मिल रहे हैं. वे एवेटार फ़िल्म्स के अलावा मार्वेल के पहले एशियाई सुपरहीरो शांग-ची वाली फ़िल्म में भी दिखेंगी. मिशेल अक्सर हॉलीवुड में एशियाई प्रतिनिधित्व कम होने की बात करती हैं. वे संयुक्त राष्ट्र की गुडविल अंबेसेडर भी हैं और साल 2030 तक दुनिया से ग़रीबी हटाने की ओर काम कर रही हैं,

> कोविड -19 का असर सब पर पड़ा है लेकिन महिलाएं इसका खामियाजा भुगत रही हैं. याद रखें: हम अकेले नहीं हैं. यदि हम अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, तो हमें एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए. एक सपोर्ट नेटवर्क की ज़रुरत अब पहले से कहीं अधिक है.>आयशा येसुफ़ुकार्यकर्ता

AishaYesufuआयशा येसुफ़ु एक नाइजीरिया कार्यकर्ता हैं जो अपने देश में बेहतर सरकार की मांग करती हैं.आयशा चरमपंथी समूह बोको हराम द्वारा नाइजीरिया के चिबोक के एक स्कूल से, 200 से अधिक लड़कियों के 2014 में अपहरण के जवाब में गठित समूह, ब्रिंग बैक अवर गर्ल्स अभियान की सह-संयोजक हैं. आयशा EndSARS विरोध प्रदर्शनों में भी एक प्रमुख भागीदार थीं. इन प्रदर्शनों में नाइजीरियाई पुलिस बल से अधिक जवाबदेही की मांग के लिए लोग सड़कों उतरे थे. उनकी मांग थी कि विवादास्पद स्पेशल एंटी रॉबरी स्क्वाड (SARS) को भंग किया जाए. इस स्क्वाड पर हत्या, बलात्कार और लूटपाट के आरोप लगते रहे हैं.

> महिलाओं को मेरी यही सलाह है कि वे दुनिया में अपने लिए बिना झिझके जगह बनाएं. महिलाओं को समाज में अपने लिए कुछ मांगने की ज़रुरत नहीं है, उन्हें अपनी जगह खुद बनानी चाहिए.गुलनाज़ ज़ुज़बाएबाडिसएबिलिटी कार्यकर्ताgulnazzhuzbaevaकिर्गिस्तान में 5,000 से अधिक दृष्टि बाधित लोग रहते हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज उनकी पहुंच से दूर हैं. किर्गिज़ फेडरेशन ऑफ़ द ब्लाइंड की संस्थापक गुलनाज़ ज़ुज़बाएवा, ब्रेल में इन कागज़ात को उपलब्ध कराने और दृष्टि बाधित लोगों तक पहुंचाने की दिशा में अथक प्रयास कर रही हैं.

उनकी टीम नेत्रहीन लोगों को नौकरी पाने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए एक कार्यक्रम चलाती है. 2020 में कार्यक्रम पूरा करने वाले 22 वयस्कों में से छह सफलतापूर्वक नौकरी कर रहे हैं और दो को विश्वविद्यालय में दाखिला मिल गया है.> जीवन चुनौतियों से भरा है. जो भी चुनौती आती है उसका डटकर सामना करें.

वापस ऊपर चलेंइस सूची में शामिल हैं- सना मारिन, जो फिनलैंड में महिलाओं के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की प्रधानमंत्री हैं; जेन फोंडा, जो पर्यावरण कार्यकर्ता और अभिनेत्री हैं; और सारा गिलबर्ट, जो ऑक्सफ़ोर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीन रिसर्च टीम की प्रमुख हैं. अन्य लोगों में वो लेखिका हैं जिन्होंने वुहान में लॉकडाउन के दौरान वहां के जीवन पर डॉक्यूमेंट तैयार किए हैं और एक गायिका-गीतकार जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के विषय पर बोलती हैं.

इन 100 महिलाओं का कैसे चयन किया गया?बीबीसी की 100 वूमन टीम ने खुद के और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस नेटवर्क की लैंग्वेज टीमों के सुझाए कई नामों में से एक शॉर्टलिस्ट तैयार किया. हम ऐसी महिलाओं की तलाश में थे जो बीते 12 महीनों में या तो सुर्खियों में रहीं या फिर ख़बरों को प्रभावित किया हो.

साथ ही जिनके पास प्रेरणा देने वाली कहानियाँ हैं, जिन्होंने कुछ महत्वपूर्ण हासिल किया या अपने समाज को प्रभावित किया हो लेकिन ज़रूरी नहीं है कि उनके काम को लेकर ख़बर बनी हो.छोड़कर और ये भी पढ़ें आगे बढ़ें और पढो: BBC News Hindi »

10तक: राज्य सरकारों ने किये थे मरने वाले Corona वॉरियर्स के लिए मुआवजे का ऐलान, क्या हुए वो वादे?

कोरोना से बचाने की वैक्सीन आ गई, लेकिन कोरोना जब चरम पर था, तब मौत के संक्रमण से देश को बचाने में अपने प्राण गंवाने वाले देश के सैकड़ों कोरोना वॉरियर्स के परिवार को अब भी सरकारी मदद के लिए तरसाया जा रहा है. कोरोना योद्धा यानी वो डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी जिन्होंने कोरोना के बेहद कठिन वक्त में अपनी जान की बाजी लगाकर देशवासियों की रक्षा की. उन्हीं को कोरोना वॉरियर्स बताकर कई राज्य सरकारों ने जान जाने पर लाखों रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया. फिर क्या हुआ? देखें 10तक.

कोरोना औरतों को ले जाएगा पीछे? BBC100Women Ab Nautanki wale btynge ki Kya krna h..... Tu to hai hi Pakistani dalla BBC news.😡🖕 Librandu BBC. Assalamu aleykum good morning soch achchi ha so proceed Dani daniels Bilkis dadi Jo feminism Ke against ho 😎 उन सभी औरतोके नाम जो मदोॅकी वासनाकी शिकार हुई है.और सेक्स वकॅर जो अगर ना हो तो ओरते घरोमे भी सुरक्षित न रहे.

मेरी माता जी को 🙏🙏🙏BBC Mai apni ma ko jagah dena chahu ga... Charampanthi mahilaao ko yogitabhayana also deserves a spot, she relentlessly works for females safety and issues associated with atrocities against women. Apni Maa ko aur har insaan ko apni Maa ko he karna cahiye yeh no say us Maa ki mahanta ko kam mat karo

Nirmala Sitharaman लोग सुसाइड कर रहे हैं और अगर नवंबर महीने के लास्ट तक फ्लाइट से शुरू नहीं हुई सऊदी अरब के लिए तो अपने रब की कसम मैं भी सुसाइड कर लूंगा क्योंकि इस वक्त इस हालात से मैं गुजर रहा हूं मुझे ही मालूम हैjawaidworld7 HardeepSPuri airindiain resumeflightsIND_KSA यशोदा वेन मोदी। त्याग की जिंदा मुरत।

नौकरी पेशा में सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं हर काम में महिलाओं को ही प्राथमिकता दी जाती है पुरुषों को दरकिनार कर दिया जाता है। महिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी है पर पुरुषों को दरकिनार करना भी हल नहीं है। Hima das and Dooti Chand Bilkis bano Rakhi Sawant Meri maa My vote for Nirbhaya's Mother Asha Devi and her Lawyer Seemasamridhi

Maa सुश्री सीमा वर्मा मुहिम एक रुपया बिलासपुर छत्तीसगढ़ मेरी तरफ से एक नाम richaanirudh All ladies Licypriya Kangujam NeetiGoel2 इनको जगह मिलनी चाहिए। Sonia Gandhi . फुलन देवी और डाकू हसीना को रिद्धिमा पांडे पर्यावरण कार्यकर्त्ता भारत PragyaLive को रखना चाहता हूँ, उन्होँने पूरी जान लगा दी थी एक लड़की के लिये, और SunitaDaga को रखना चाहता हूँ

Aimim विधायक ने जब मांगी हिंदुस्तान की जगह भारत बोलकर शपथ लेने की इजाज़त pushpampc13 Sudha Murty W/o N R Narayanmurty अपनी वाली को ! भारतीय सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ व प्रसिद्ध वकील सुश्री सीमा समृद्धि जी Seemasamridhi 'Mother' Rakhi Sawant... 🤣🤣🤣 nsitharaman or smritiirani Ko.. शायद लिस्ट में जगह मिल जाने से कुछ काम कर ले..

No. 1 तो बिलकीस दादी को ही मिलना चाहिए। 1 सफुरा जर्गर &2 कविता कृषनन सावित्री बाई फुले Meri maa Countable हों तो बताए, भारत में कई महान महिलायें हुई हैं। किसी एक को बोलना बाकी का अपमान करने के समान है। आज क्या महिला दिवस है ? बवला गए लगते हो आज वालों Koi toh hamaari sune 😢😢😢😢 please save our job ,,, badi mushkil se mili hai oopar se 8 month hogaya berozgaar bait ke😢😢😢😢abhi or nai hoga SupportPoonam jawaidworld7 airindiain Saudi_Gazette PMOIndia GACA_Saudi narendramodi aajtak SonuSood

Koi toh hamaari sune 😢😢😢😢 please save our job ,,, badi mushkil se mili hai oopar se 8 month hogaya berozgaar bait ke😢😢😢😢abhi or nai hoga SupportPoonam jawaidworld7 airindiain Saudi_Gazette PMOIndia GACA_Saudi narendramodi aajtak SonuSood PragyaLive जिस बहादुरी से मैडम ने रिपोर्टिंग की थी PragyaLive

priyanka BBC100Women Rani laxmi baai सोनिया गांधी। महारानी लक्ष्मीबाई 🙏🇮🇳🙏 Nation First 🥇🙏 🙏🇮🇳🙏 WE🇮🇳S !🙏🇮🇳🙏 🙏 Saach Mei! 🙏 🤖🙏🌎 ❄🇮🇳🙏 Abhi Tak 🔊 Koi 🙏 Support Nahie 🙏 THOSE R DREAMS 🙏 🙏 Which Dont Let🙏 🙏 US SLEEP 🙏 🙏🇮🇳🏅🎖🏅🇮🇳🙏 🙏 SIR 🙏KALAM🙏 🙏Thanks ➕ Regards Vipul Kumar Shukla🙏 🙏🇮🇳👋🌊👆👍🙏

Priti Patel Safur jargar Mother Teresa अच्छा किया बीबीसी। उन्होंने 100 दिनों से अधिक समय तक अवैध रूप से सड़क को अवरुद्ध किया और आपने उन्हें सम्मानित किया। किस आधार पर दुनिया को आँखे हैं लेकिन भारत की आखों का चश्मा सरकार द्वारा तोड़ डाला गया है। Hope अभी भी जिंदा है। CAA नागरिकतासंशोधनएक्ट पूर्णतःसंवैधानिक व मानवीयहै,उसमे मुस्लिमों की नागरिकताछीनने का सवालहीनहीं,मुस्लिम शब्दतक प्रयोगनहीं उसमें,केवल पड़ोसीदेशों के अतिपीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकतादेने के प्रावधानहैं।मुस्लिमों को झूठीबातों से भड़काकर अपराध कियेकराएगए narendramodi सरकार भी...

संसद से पास बिल विवादित कैसे हो गया चमचे चमचो_भारत_छोड़ो TheDeepak2020In deepakkandwaluk SapanPandeyIND पूँछता है भारत दोगले बीबीसी से.... 1986 में अपने पति से गुजारा भत्ता माँगने वाली शाहबानो को बीबीसी ने उस समय यह गौरव क्यों नहीं दिया था CONGRATULATIONS TO ALL ! anti hindu channel fck bbc Bilikis dadi shaheenbagh

बिरयानी बहुत खाई थी इसने👍 फिर तैयार रहे खाने को क्योंकि nrc_npr आने वाला है👍 Sabrimala Women's Entry ❓ Women's not Enter in Indian 🇮🇳 Temple UN देशद्रोही मीडिया का काम ही यही है ..... देशविरोधी तत्वों को बढ़ावा देना ये कोई नयी बात थोड़ी है लिब्रंडू,नक्सली,जिहादी के ही नाम होंगे. BBC चोर है 🌵🌵🌵 Tum salo anti hindu media jo hindusthan ko todega usi ko aage le jaoge ye to sb jante hai.. sale britishers apni media apne desh tk rkho ab time aa gya hai tumko bhi yha se bhgaane ka.. wait n watch

शाहिनबाग के लिस्ट में शामिल होने वाले हर व्यक्ति देश द्रोही है |इन सभी का लिस्ट देखने कि जरूरत नहीं है ऐसे लोगों दूरी रखने में ही भलाई है CAA में विवाद क्या था , ये तो बताए बीबीसी 31/12/14 तक के हिन्दू ,जैन, शिख और ईसाइयों को जिन्हें धार्मिक प्रताड़ना के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को छोड़ कर देश मे आना पड़ा था । इसमें क्या विवादित है ?1990 को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से निकला गया था इस पर रिपोर्ट

सीधा लिखोना की देशद्रोहियों की लिस्ट में जगा मिली। BoycottIslam Boycottislamicatankwad Congratulations dadi jaan🥰🥰🥰🥰🥰 तुम जलते रहोगे आग की तरह, और हम खिलते रहेंगे गुलाब की तरह। BBC100Women BBC news देशद्रोही न्यूज चैनल है, जो जेहादी दादी को लिस्ट में शामिल किया है। Kya kar logo apne list me shamil kar ke. Kisi ko iski koi parwaah nhi. Faltu ka drama hai ye aur kuchh nhi.

बड़ी मेहरबान इंटरनेशनल मिडिया वारी जा रही इस दादी पर। महीने भर पुरानी ख़बर को दुबारा तड़का लगाकर छापने के पीछे क्या कारण है नया क्या है इसमें? Delhi ki Nusarat bhi rakh lo. Firing ki hai aaj Bbc has no business to support misdirected prejudice in India against issue purely internal. एंकर बना ले दादी को ब्रिटेन में।

Left-wing ideology bbc अरे चु....या कहा था इतने दिनो तक गांज़ा पी रखा था क्या जियो दादी जिंदाबाद ❤️🌺 सड़क किनारे कितनी बूढ़ी औरते बैठी रहती है BBC को वो नही दिखता Congratulations Congratulations