Beijing Winter Olympics: चीन को एक और झटका, कनाडा ने भी किया शीतकालीन ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार का एलान

जस्टिन ट्रूडो ने आगे कहा कि हम ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले अपने खिलाड़ियों का पूरा समर्थन करेंगे।

Canada, China

08-12-2021 22:35:00

Beijing Winter Olympics : चीन को एक और झटका, कनाडा ने भी किया शीतकालीन ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार का एलान Canada China BeijingOlympic America Australia

जस्टिन ट्रूडो ने आगे कहा कि हम ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले अपने खिलाड़ियों का पूरा समर्थन करेंगे।

कनाडा से पहले मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया और इससे पहले अमेरिका भी बीजिंग में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक के बहिष्कार का एलान कर चुके हैं। इसके पीछे चीन के शिनजियांग प्रांत में उईगर मुस्लिमों पर अत्याचर और अन्य कई मानवाधिकार उल्लंघनों का हवाला दिया गया है। दोनों देशों ने ओलंपिक में भाग ले रहे अपने खिलाड़ियों को अपना समर्थन दिया है, लेकिन अपने किसी भी राजनयिक को न भेजने का फैसला किया है।

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कई और देश कर सकते हैं बहिष्कारबीजिंग में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक में केवल दो महीने शेष हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के अलावा ब्रिटेन भी खेलों के बहिष्कार पर विचार कर सकता है। इन देशों द्वारा यह कदम अपने एथलीटों को प्रतिस्पर्धा करने से रोके बिना विश्व मंच पर चीन को एक कड़ा संदेश भेजने की कोशिश मानी जा रही है।

पहले भी हो चुका है बहिष्कारइससे पहले भी कई बार ओलंपिक खेलों ने विभिन्न देशों द्वारा बहिष्कार या कम देशों की भागीदारी को झेला है। वर्ष में 1956 (मेलबर्न), 1964 (टोक्यो), 1976 (मॉन्ट्रियल), 1980 (मॉस्को), 1984 (लॉस एंजिल्स) और 1988 (सियोल) में युद्ध, आक्रमण और रंगभेद जैसे कारणों से विभिन्न देशों ने ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया था। headtopics.com

मानवाधिकार समूह ने किया स्वागतचीन में मानवाधिकार निगरानी समूह की निदेशक सोफी रिचर्डसन ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे उइगर और अन्य अल्पसंख्य समुदायों को लक्षित मानवता के खिलाफ चीनी सरकार के अपराधों को चुनौती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। बता दें, बीजिंग ने इस्लामी चरमपंथ कम करने के मकसद से इन शिविरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों का नाम दिया है।

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चीन बौखलाया, कहा- पहाड़ नदी का रास्ता नहीं रोक सकताअमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीजिंग ओलंपिक खेलों के राजनयिक बहिष्कार के फैसले से चीन बौखला उठा है। उसने कहा, दुनिया में कोई भी पहाड़ नदी को समुद्र में बहने से नहीं रोक सकता है। ऑस्ट्रेलिया में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, चीन-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों की मौजूदा दुर्दशा की जिम्मेदारी पूरी तरह से ऑस्ट्रेलियाई पक्ष पर है। यह फैसला दोनों देशों में सुधार की उम्मीदों के एकदम उलट है।

विस्तारबीजिंग में 2022 में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक से पहले चीन को एकऔर झटका लगा है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब कनाडा ने भी चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों के राजनयिक बहिष्कार का एलान किया है। बुधवार को कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इसकी जानकारी दी।

विज्ञापनकनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि चीन में लगातार हो रहे मानवाधिकार के उल्लंघन से कनाडा काफी चिंतित है। इसके विरोध में हम बीजिंग में आयोजित होने वाले शीतकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में किसी भी राजनयिक प्रतिनिधि को नहीं भेजेंगे। Canada remains deeply disturbed by reports of human rights violations in China. As a result, we won’t be sending diplomatic representatives to Beijing for the Olympic and Paralympic Winter Games. We’ll continue to support our athletes who work hard to compete on the world stage. headtopics.com

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— Justin Trudeau (@JustinTrudeau)December 8, 2021अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी कर चुके हैं एलानकनाडा से पहले मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया और इससे पहले अमेरिका भी बीजिंग में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक के बहिष्कार का एलान कर चुके हैं। इसके पीछे चीन के शिनजियांग प्रांत में उईगर मुस्लिमों पर अत्याचर और अन्य कई मानवाधिकार उल्लंघनों का हवाला दिया गया है। दोनों देशों ने ओलंपिक में भाग ले रहे अपने खिलाड़ियों को अपना समर्थन दिया है, लेकिन अपने किसी भी राजनयिक को न भेजने का फैसला किया है।

कई और देश कर सकते हैं बहिष्कारबीजिंग में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक में केवल दो महीने शेष हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के अलावा ब्रिटेन भी खेलों के बहिष्कार पर विचार कर सकता है। इन देशों द्वारा यह कदम अपने एथलीटों को प्रतिस्पर्धा करने से रोके बिना विश्व मंच पर चीन को एक कड़ा संदेश भेजने की कोशिश मानी जा रही है।

पहले भी हो चुका है बहिष्कारइससे पहले भी कई बार ओलंपिक खेलों ने विभिन्न देशों द्वारा बहिष्कार या कम देशों की भागीदारी को झेला है। वर्ष में 1956 (मेलबर्न), 1964 (टोक्यो), 1976 (मॉन्ट्रियल), 1980 (मॉस्को), 1984 (लॉस एंजिल्स) और 1988 (सियोल) में युद्ध, आक्रमण और रंगभेद जैसे कारणों से विभिन्न देशों ने ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया था।

मानवाधिकार समूह ने किया स्वागतचीन में मानवाधिकार निगरानी समूह की निदेशक सोफी रिचर्डसन ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे उइगर और अन्य अल्पसंख्य समुदायों को लक्षित मानवता के खिलाफ चीनी सरकार के अपराधों को चुनौती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। बता दें, बीजिंग ने इस्लामी चरमपंथ कम करने के मकसद से इन शिविरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों का नाम दिया है। headtopics.com

चीन बौखलाया, कहा- पहाड़ नदी का रास्ता नहीं रोक सकताअमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीजिंग ओलंपिक खेलों के राजनयिक बहिष्कार के फैसले से चीन बौखला उठा है। उसने कहा, दुनिया में कोई भी पहाड़ नदी को समुद्र में बहने से नहीं रोक सकता है। ऑस्ट्रेलिया में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, चीन-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों की मौजूदा दुर्दशा की जिम्मेदारी पूरी तरह से ऑस्ट्रेलियाई पक्ष पर है। यह फैसला दोनों देशों में सुधार की उम्मीदों के एकदम उलट है।

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