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Amrit Mahotsav: तमाम चुनौतियों को स्वीकार करते हुए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गौरव के पल

#AmritMahotsav | तमाम चुनौतियों को स्वीकार करते हुए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गौरव के पल #Delhi

24-08-2021 10:47:00

AmritMahotsav | तमाम चुनौतियों को स्वीकार करते हुए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गौरव के पल Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तमाम चुनौतियों को स्वीकार करते हुए हमारे विज्ञानियों ने न सिर्फ अंतरिक्ष में भारत को विकसित देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी कई कीर्तिमान बनाए हैं।

देश जब आजाद हुआ था, तो न ही हमारे पास आज की तरह अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने की क्षमता थी और न ही परमाणु तकनीक थी। लेकिन पिछले सात दशकों में भारतीय विज्ञानियों ने अपनी लगन और अथक मेहनत से जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन पर न सिर्फ देशवासी गर्व कर सकते हैं, बल्कि इसने दुनिया को भी दिखा दिया कि इस क्षेत्र में भारत किसी से पीछे रहने वाला नहीं है। आजादी के बाद देश ने साइंस और टेक्नोलाजी के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए। तकनीकी विकास ने आम लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाने की राह तैयार की। इस दौरान भारत ने न सिर्फ उपग्रहों का निर्माण किया, बल्कि चंद्रमा और मंगल पर अपने यान भेजे। परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित किए और परमाणु हथियार बनाने की क्षमता भी हासिल की। मिसाइल के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

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नि:संदेह ये सभी भारतीय विज्ञानियों और प्रौद्योगिकीविदों की शानदार उपलब्धियां हैं। कम्युनिकेशन और इंफार्मेशन टेक्नोलाजी के विकास ने न सिर्फ समय पर मौसम का पूर्वानुमान लगाने और चक्रवातों की पूर्व चेतावनी देने में सक्षम बनाया है, बल्कि इससे जान-माल बचाने में भी खासी मदद मिली है। ये सभी स्वतंत्रता के तुरंत बाद वैज्ञानिक अनुसंधान में किए गए निवेश के परिणाम हैं। शांति स्वरूप भटनागर, होमी जहांगीर भाभा और प्रशांत चंद्र महालनोबिस जैसे विज्ञानियों ने न केवल वैज्ञानिक संस्थानों को स्थापित करने की पहल की, बल्कि नीतियों को आकार देने में भी मदद की। इसी का परिणाम है कि भारत आज इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ खड़ा है।

यह भी पढ़ेंअंतरिक्ष में भारत ने दिखाया कमाल:1960 के दशक के मध्य में जब इंडियन नेशनल कमेटी फार स्पेस रिसर्च के चेयरमैन विक्रम साराभाई ने कम्युनिकेशन, रिमोट सेंसिंग और मौसम की भविष्यवाणी के लिए सैटेलाइट टेक्नोलाजी के इस्तेमाल की कल्पना की, तो बस कुछ ही लोग थे, जिन्हें उन पर भरोसा था। हालांकि तब भारत के पास सैटेलाइट और राकेट बनाने की ऐसी कोई क्षमता भी नहीं थी। वे चाहते थे कि भारत शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करे। इसके एक दशक के भीतर ही भारत ने ऐसी क्षमता विकसित कर ली। headtopics.com

यह भी पढ़ेंसैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट 1 अगस्त, 1975 को शुरू हुआ। इसके बाद भारत ने तत्कालीन सोवियत संघ की मदद से ‘आर्यभट्ट’ सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। आर्यभट्ट के प्रक्षेपण ने भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया, जिनके पास अपना सैटेलाइट था। आर्यभट्ट भारत का पहला उपग्रह था। उसके बाद वर्ष 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष (स्पेस) में कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। अंतरिक्ष में उड़ान के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब उनसे पूछा कि ऊपर अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? इस पर उन्होंने कहा था- ‘सारे जहां से अच्छा’।

यह भी पढ़ेंचंद्रयान मिशन-1:संसाधन और क्षमता सीमित होने के बाद भी भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जो कुछ चुनिंदा देशों के पास थीं। चंद्रयान मिशन-1 ऐसी ही एक कामयाबी है, जिसने देशवासियों को गर्व करने का मौका दिया। भारत सरकार ने नवंबर 2003 में पहली बार इस मिशन के लिए इसरो के प्रस्ताव चंद्रयान-1 को मंजूरी दी थी। इसके करीब पांच साल बाद ही 22 अक्टूबर, 2008 को चंद्रयान-1 का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस मिशन की सफलता मील का पत्थर साबित हुई। चंद्रयान-1 को पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल यानी पीएसएलवी-सी 11 राकेट के जरिए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से लांच किया गया। यह मिशन पृथ्वी की कक्षा से परे भारत का पहला चंद्र यान मिशन था। इससे दुनियाभर में भारत की साख बढ़ी। इसके साथ ही भारतीय वैज्ञानिकों का मनोबल भी बढ़ा।

भारत में टीवी की शुरुआत:टीवी ने लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। भारत में टीवी की शुरुआत 15 सितंबर, 1959 को हुई थी, मगर भारत में 25 अप्रैल, 1982 को पहली बार टीवी पर रंगीन प्रसारण शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत तब के मद्रास (आज के चेन्नई) से हुई थी। टीवी पर रंगीन प्रसारण के बाद दूरदर्शन का क्रेज काफी बढ़ गया था। कलर टीवी एक समय स्टेटस सिंबल बन गया था। भारत ने नवंबर 1982 में एशियाई खेलों की मेजबानी की और तब भारत में खेलों का रंगीन प्रसारण किया गया। उसके बाद 1980 के दशक को दूरदर्शन का युग कहा जाता है। आज हम स्मार्ट टीवी तक पहुंच गए हैं।

यह भी पढ़ेंमोबाइल फोन का सफर:आज मोबाइल लोगों के लिए जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। आज देश में 50 करोड़ से अधिक लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मोबाइल क्रांति की शुरुआत भारत में 31 जुलाई, 1995 को हुई थी। 31 जुलाई, 1995 को बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने पहली बार मोबाइल से तत्कालीन केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम को फोन किया था। इसके बाद भारत तेजी से मोबाइल क्रांति की ओर आगे बढ़ा। उस समय आउटगोइंग काल के साथ ही इनकमिंग काल के भी पैसे लगते थे। आज भारत स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के मामले में अग्रणी देशों के साथ खड़ा है। headtopics.com

नगालैंड में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के दौरान कई ग्रामीण मारे गए, एक जवान की भी मौत : सूत्र ‘मेरे पति बेगुनाह थे, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हमें इंसाफ़ दें’ - BBC News हिंदी ईरान के सैनिक और तालिबान सरहद पर क्यों भिड़े? - BBC News हिंदी

यह भी पढ़ेंपरमाणु शक्ति बना भारत:परमाणु शक्ति संपन्न होना किसी भी देश के लिए गौरव की बात होती है। वह दिन आया 18 मई,1974 को, जब भारत ने दुनिया को हैरान करते हुए पोखरण में पहली बार परमाणु परीक्षण किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे नाम दिया ‘बुद्ध मुस्कुराए’ यानी स्माइलिंग बुद्धा। यह पहला मौका था, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के अलावा किसी और देश ने परमाणु परीक्षण करने का साहस किया था। इसके बाद वर्ष 1998 में पोखरण में दूसरे परमाणु परीक्षण के बाद भारत ने स्वयं को परमाणु क्षमता संपन्न देश घोषित कर दिया।

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महर्षि वाल्मीकि को तालिबान के जैसा बताने पर शायर मुनव्वर राणा के खिलाफ गुना में FIRएमपी बीजेपी की एससी सेल के सचिव सुनील मालवीय का आरोप है कि मुनव्वर राणा ने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबानियों से कर के दलित समाज का अपमान किया है और हिंदू आस्था को चोट पहुंचाई है। क्यों वाल्मीकि के बारे बहुत ख़राब लगता है। तुम हत्या करो तो धर्म और दूसरा करे तो अधर्म। वाह रे हरामखोर!!

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मध्यप्रदेश: उज्जैन में चार लोगों पर रासुका, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के मामले में कार्रवाईघटना के बाद लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया है। इसमें काटछांट किए गए वीडियो वायरल This is not enough... those who are not like to be a indian better let them to go Afganistan... but don't get noise inside our country... enough is enough

अफगानी शरणार्थियों को दूसरे देशों में भेजने के लिए कमर्शियल फ्लाइट्स पर विचार कर रहा अमेरिकाअफगानिस्तान संकट के बीच अमेरिका का बाइडेन प्रशासन अफगान शरणार्थियों को उनके देश से सैन्य विमानों द्वारा निकाले जाने के बाद ट्रांसपोर्टेशन में सहायता के लिए कमर्शियल विमान और चालक दल उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है. 157 Islamic countries are there ,Do,nt take risk ,India are suffering with muslim Rohingaa ,

इस फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिषेक बच्चन को लगी चोट, अस्पताल में है भर्तीबॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। बीती रात अमिताभ बच्चन और श्वेता बच्चन उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि अभिषेक बच्चन हाथ में हुए फैक्चर के कारण अस्पताल भर्ती है।