Re, Ias Ritika Jindal, Shoolini Temple, Himachal Pradesh

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हिमाचल: मंदिर में महिलाओं के यज्ञ करने पर था बैन, IAS रितिका ने बदलवाई परंपरा, सोशल मीडिया पर छाईं

रूढ़िवादिता के नाम पर महिलाओं से भेदभाव को आईएएस रितिका जिंदल ने गंभीरता से लिया #RE

27-10-2020 02:30:00

रूढ़िवादिता के नाम पर महिलाओं से भेदभाव को आईएएस रितिका जिंदल ने गंभीरता से लिया RE

परम्पराओं का हवाला देते हुए कहा गया कि मंदिर में महिलाओं को आने की अनुमति है लेकिन यज्ञ करने की नहीं, उसमें सिर्फ पुरुष ही हिस्सा ले सकते हैं.

स्टोरी हाइलाइट्समहिला आईएएस की सोशल मीडिया पर हो रही तारीफकौन हैं आईएएस रितिका जिंदल, जिनके हो रहे चर्चेहिमाचल के मंदिर में महिलाओं से हो रहा था भेदभावनारी और पुरुषों के समान अधिकारों की हमारे देश में लाख दुहाई दी जाती है. बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं होने के जोर-शोर से कसीदे पढ़े जाते हैं, लेकिन हकीकत में कितना फर्क है, यह इस बार दुर्गा अष्टमी पर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में देखने को मिला. यहां शूलिनी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है. शनिवार को हवन यज्ञ में जब महिला आईएएस अधिकारी रितिका जिंदल ने हिस्सा लेना चाहा तो मंदिर के संचालकों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

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परम्पराओं का हवाला देते हुए कहा गया कि मंदिर में महिलाओं को आने की अनुमति है, लेकिन यज्ञ करने की नहीं. उसमें सिर्फ पुरुष ही हिस्सा ले सकते हैं. कार्यकारी तहसीलदार होने के नाते मंदिर क्षेत्र रितिका जिंदल के कार्यक्षेत्र में आता है.महिला IAS ने सिखाया नारी समानता का पाठ

रूढ़िवादिता के नाम पर महिलाओं से भेदभाव को आईएएस रितिका जिंदल ने गंभीरता से लिया. आखिर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा से जुड़ी उन जैसी अधिकारी के साथ ये व्यवहार हो सकता है तो आम महिलाओं के साथ कैसा होता होगा. जब पंडितों और मंदिर से जुड़े अन्य लोगों ने उन्हें हवन में हिस्सा लेने से रोका तो आईएएस अधिकारी ने उन्हें समानता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि उन्हें बरसों से चली आ रही परम्परा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा. आईएएस अधिकारी ने फिर हवन में हिस्सा भी लिया.

हैरानी की बात है कि अष्टमी के दिन हम कन्या पूजन करते हैं, महिलाओं के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है. रूढ़ियों और परम्पराओं को ढाल बनाया जाता है.रितिका जिंदल के मुताबिक वह सुबह मंदिर में व्यवस्थाओं का जायजा लेने गई थीं. मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और पूजा करने पर कोई रोक नहीं है. रितिका जिंदल ने बताया, “मंदिर में उस वक्त हवन चल रहा था, मैंने वहां मौजूद लोगों से हवन में भाग लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया. उनका कहना था कि मंदिर में महिलाओं को हवन में बैठने की अनुमति नहीं है.”

“मैं अधिकारी बाद में हूं, महिला पहले”यह सुनकर और ऐसी मानसिकता को जानकर आईएएस अधिकारी को धक्का लगा. उन्होंने सोचा कि नारी समानता को अगर हकीकत में बदलना है तो ऐसी विचारधारा बदलने की आवश्यकता है और इसे वे तभी बदल सकती हैं, जब वे इस रूढ़िवादी सोच का खुद विरोध करें. रितिका जिंदल ने कहा, “मैं अधिकारी बाद में हूं, पहले महिला हूं. इसीलिए वे नारी समानता के हक में आगे आईं, यह अधिकार हर महिला को मिलना चाहिए.”

रितिका जिंदल ने कहा, “एक लड़की या महिला को हवन में हिस्सा नहीं लेने देना तार्किक नहीं है. इसका कोई तुक नहीं है. उन्होंने मुझे बताया कि ऐसा बरसों से होता आ रहा है. इस पर मैंने उनसे कहा कि हम आंखें मूंद कर किसी बात का इसीलिए समर्थन नहीं कर सकते कि वो बरसों से चलता आ रहा है. हमारा संविधान समान अधिकार देता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी यह सुनिश्चित किया है.”

देखें:आजतक LIVE TVआखिर बदलनी पड़ी परम्पराआईएएस अधिकारी ने हवन में हिस्सा लेने पर जोर दिया तो फिर पुजारियों और मंदिर के अन्य लोगों ने विरोध नहीं किया.रितिका जिंदल ने कहा, मैंने उनसे कहा कि जो वो कर रहे थे वो गलत था, इसलिए मैंने हवन की सारी रस्मों में हिस्सा लिया. इसका ये मतलब नहीं कि आप लोगों ने मुझे हवन में बैठने के लिए इसलिए अनुमति दी कि मैं मंदिर की ऑफिस इंचार्ज हूं. सभी महिलाओं और लड़कियों को आज से हवन में बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए.

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आईएएस अधिकारी ने कहा कि भगवान की पूजा हर एक का अधिकार है और किसी भी नागरिक को लैंगिक, जातिगत या किसी भी अन्य कारण की वजह से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए. रितिका जिंदल ने महिलाओं से अपील की कि वे आगे बढ़ कर ऐसी रूढ़िवादी और पितृसत्ता वाली सोच का विरोध करें.

डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स (IAS) के ट्विटर हैंडल @DCsofIndia से ट्वीट में रितिका जिंदल के इस कदम की तारीफ की गई है. ट्वीट में कहा गया है कि युवा आईएएस अधिकारी रितिका जिंदल को सैल्यूट कि उन्होने सोलन हिमाचल प्रदेश के शूलिनी देवी के मंदिर में हवन में हिस्सा लेकर युग पुरानी संकीर्ण परम्परा को तोड़ा. उन्होंने पुजारियों और अन्य को समानता का पाठ भी पढ़ाया. इस साहसी अधिकारी ने दशहरे की सही भावना हमें दिखाई.

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इस साल नवंबर में इतनी सर्दी पड़ रही है, जो बीते कई साल में नहीं पड़ी. दिल्ली में 17 साल का रिकॉर्ड टूट गया. वहीं पहाड़ों पर भी दिसंबर वाली बर्फबारी नवंबर में ही हो रही है. जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से कई अहम रास्ते बंद हो गए हैं. पहाड़ों पर नवंबर में ही दिसंबर वाली बर्फबारी हो रही. सफेद आफत ने इस बार नवंबर की शुरुआत में ही दस्तक दे दी. आम लोगों के लिए समय से पहले हुई बर्फबारी जहां परेशानी का सबब है, वहीं मौसम वैज्ञानिकों को भी थोड़ी हैरानी हो रही है. मगर इन सबके बीच चौंकाने वाला बात ये भी है कि कुछ इलाकों में नवंबर में ही दूसरी और तीसरी बार बर्फबारी हो रही है जबकि आम तौर पर यहां दिसंबर में ही बर्फबारी होती है. देखें विशेष, चित्रा त्रिपाठी के साथ.

२/२.. IAS रितीका जिन्दल जी से मैं बड़े ही विनम्र भाव से निवेदन करता हूं कि १२३४ सालों से मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में जाकर नमाज़ अदा करने नहीं दिया जा रहा हैं। बस एक कोशिश उन दबी हुई महिलाओं के लिए मस्जिदों के दरवाजे खोल दे। ........३/३.. १/१... काम और नाम तो बहुत ही अच्छा किया है मैडम साहिबां ने और खुशी भी है कि वह होमहवन में हिस्सा ले पाई। वह हिंदू ही है जो खुद को तोड़ मरोड़ ने के लिए तैयार होते हैं और सही बात अगर समझाई जाए तो बदलाव भी कर लेते हैं। .....२/२

हिन्दू धर्म के अपने कुछ नियम होते है , कौन किस हवन में आहुति दे सकता है कौन नही ।। संविधान तो अभी का लिखा हुआ है , हिन्दू धर्म तो सनातन से है । मनुष्य की उत्पत्ति से चल रहा है । संविधान और किसी धर्म के बारे में भी तो कुछ कहता होगा न । She should learn why some temples do not allow women even to enter the temple premises. IAS does not make you omniscient, or pandit. Equality of genders is not achieved by destroying ancient Vedic traditions.Not a good example for ladies

Ab ye paath jara muslims and christians ko bhi pada dena. Agle hi deen alag tarah ki headline dekhne ko milegi WTH is this. This activism is going beyond control now. Why all the activism for sanatan dharma only? Does this IAS does't know that repecting religious belief of people is part of their duty until it's not immoral? Hope Himachal Pradesh govt take action on this officer.

ब्रेकिंग न्यूज़ :- देश भर के मुस्लिम महिलाओं को आईएएस रितिका जिंदल का इंतेज़ार! हिमाचल प्रदेश के मंदिर में पुजारियों को भेद्बभाव का पथ पढ़ने वाली अफसर पे अब मुस्लिम महिलाये आशा की नजर से देख रही है की उनकी समस्याओ को भी गंभीरता से देखे। A big salute to brave and courageous officer madam Jindal God bless you.

बस इसी जुनून के साथ किसी मस्ज़िद में जाकर मौलाना मौलवी के साथ नमाज़ अदा करके मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करना चाहिए IAS रितिका जिंदल को, पर हिन्दू धर्म को चुनौती देना आज एक शौख बन गया है चर्चा में आने के लिए,

यूपी: युवक ने जीभ काटकर मंदिर में चढ़ा दी, पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करायायूपी के बांदा जिले में बबेरू कोतवाली क्षेत्र के भाटी गांव में एक युवक ने कथित रूप से अपनी जीभ काट कर मंदिर में चढ़ा दी।

दिल्ली की इन महिलाओं ने आपदा को अवसर में बदला, किया ये कामइन महिलाओं ने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर ना केवल एक बड़ा स्टार्टअप खड़ा कर लिया, बल्कि कोरोना काल में उनके बनाए फेवरट फूड और डिसेज की बहुत डिमांड भी है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और सोनीपत तक फूड डिलीवरी पहुंच रही है.

फैक्ट चेक: मंदिर में तोड़फोड़ की ये तस्वीर ऑस्ट्रेलिया की है, पंजाब की नहींसोशल मीडिया पर एक तस्वीर के जरिए दावा किया जा रहा है कि पंजाब में एक रामलीला आयोजन पर हमला हुआ है. तस्वीर में एक बड़े कमरे में पूजा सामग्री और भगवानों की तस्वीरों को जमीन पर अस्त-व्यस्त हालत में देखा जा सकता है. arjundeodia ye news room toh tera hai😆🖕🖕 arjundeodia Dalle log arjundeodia Khud fake news dene wale antifake news bata rhe h .waese 27 oct ko raat 8 bje maafi mangni h suna h ?

अष्टमी पर अपने पैतृक गांव पहुंचे NSA अजीत डोभाल, ज्वाल्पा देवी के मंदिर में की पूजाअजीत डोभाल नवरात्रि के मौके पर अपनी कुल देवी के दर्शन के लिए अपने परिवार के साथ पौड़ी गढ़वाल में पैतृक गांव घीड़ी पहुंचे. एनएसए बनने के बाद पहली बार नवरात्रि की पूजा के दौरान अजीत डोभाल अपने पैतृक गांव घीड़ी पहुंचे. manjeetnegilive विजय दशमी बौद्धों का पवित्र त्यौहार है। “अशोक विजयदशमी” सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध में विजयी होने के दसवें दिन तक मनाये जाने के कारण इसे अशोक विजयदशमी कहते हैं। इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। manjeetnegilive 27 को थूक के चटने का दिन है manjeetnegilive नवरात्रि के नवमी को जिस सोच के साथ कन्याओं का पूजन की अपने लड़को को बताए की कन्याओं का पूजन करना हमारा परंपरा नहीं, कर्तव्य है।यदि किसी बच्ची/महिला के साथ कुछ गलत हो जाता है तो उसका समर्थन करें, उसे चुप करा कर न बैठाएं। सिर्फ एक दिन का दिखावटी कन्या-पूजन से पूण्य नहीं मिलता।

बिहार चुनाव में चिराग पासवान का वादा, बनाएंगे भव्य सीता मंदिरबिहार चुनाव में जिसे बीजेपी वोटकटवा पार्टी बता रही है, उस पार्टी ने अब बिहार में सीता के मंदिर के मुद्दा उठा दिया है. घोषणा पत्र में भव्य मंदिर का वादा करने के बाद चिराग पासवान ने मां सीता की भूमि सीतामढ़ी पहुंच कर आज अपने प्रण को दोहराया. विजयदशमी पर चिराग मां सीता के मंदिर गए और पूजा-अर्चना की. विजयादशमी के मौके पर चिराग ने अपने प्रण को फिर से दोहराया और माता सीता की पूजा की. देखिए वीडियो. मंदिर और पाकिस्तान फिर आ गया बिहार चुनाव में Koi nhi bhai itne bde bhakt ho to opposition mei reh ke chanda ikhtha krke bnva lena जब तक दवाई नही, तब तक ढिलाई नही ! लेकिन जहां जहां चुनाव है वहाँ अप्लाई नही !! 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔 करोना_जागरूक_अभियान coronavirusindia

अयोध्या में राम मंदिर की तर्ज पर चिराग पासवान ने बिहार में सीता मंदिर बनवाने का वादा कियाबिहार विधानसभा चुनाव राउंडअप: महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ऊर्जाविहीन हो चुके हैं. उनकी पकाऊ, थकाऊ, उबाऊ, बासी और घिसी-पिट्टी बातों से जनता पक चुकी है. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने महागठबंधन को विकास विरोधी क़रार देते हुए कहा कि राजद के स्वभाव में ही अराजकता है. माता सीता के जितने मन्दिर बनवाना हो बनवाएं साथ मे शिक्षा का मंदिर स्वास्थ्य का मंदिर भी बनवाने की बात करें..... चुनावी वादे है ,, वादों का किया ,,,, जुमले बेचारे चिराग को अब कोई मंदिर ही बचा सकता है...