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हिंदी हैं हम: मोबाइल पर अनपढ़ भी इस्तेमाल कर रहे हैं अंग्रेजी, व्यवहार में पिछड़ रही हिंदी

हिंदी हैं हम: मोबाइल पर अनपढ़ भी इस्तेमाल कर रहे हैं अंग्रेजी, व्यवहार में पिछड़ रही हिंदी #Hindi #English #Mobile

03-08-2021 02:17:00

हिंदी हैं हम : मोबाइल पर अनपढ़ भी इस्तेमाल कर रहे हैं अंग्रेजी, व्यवहार में पिछड़ रही हिंदी Hindi English Mobile

हिंदी की प्रतिष्ठा तब तक नहीं हो सकती है, जब तक साहित्यिक हिंदी के पीछे ले-देकर पड़ने के बजाय इसे आम आदमी से जोड़ने के

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सांध्यकालीन अध्ययन केंद्र शिमला के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामनाथ मेहता ने कहा कि इस विषय पर एक बड़ी बहस की जरूरत है। आज स्थिति यह है कि हिंदी की एक अधिसूचना निकालने के लिए बहुत माथापच्ची करनी पड़ती है। कोविड के जमाने में ही देख लें कि कितनी अधिसूचनाएं हिंदी में निकालीं गईं और जो आई भी होंगी, वे कितनी समझ में आई होंगी। एक तरफ कहा जाता है कि अंग्रेजी का प्रयोग न करें, हिंदी का करें मगर फिर भी प्रतिष्ठा की भाषा अंग्रेजी बताई जाती है। हिंदी को व्यवसाय, विज्ञान, तकनीकी और कंप्यूटर में लाया जाए। भाषण देने में जो सम्मान नेताओं सेे हिंदी को मिल रहा है, वही सम्मान अगर और जगह भी मिले तो बात बनें।

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हिंदी में बोलने से अगर वोट मिल सकते हैं तो यह सूचना, तकनीक और कंप्यूटर की सहजता से स्वीकार्य भाषा क्यों नहीं बन सकती। हिंदी में किसी को इंसेंटिंव देने की जरूरत नहीं। इसे पैसे, वृत्ति, मान-सम्मान आदि से सहज तरीके से जोड़ा जाना चाहिए। आज तो अनपढ़ व्यक्ति भी अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं। मोबाइल की भाषा भी 90 फीसदी लोगों की अंग्रेजी ही है। भारत का इतना बड़ा जनमानस है। यह हिंदी को क्यों नहीं अपना सकता। जहां इसे मान-सम्मान मिलना चाहिए, वहां नहीं मिल पाता है। इसमें सरकारों की ही नहीं, हम सबकी भी गलती है।

विस्तार प्रयास नहीं किए जाएं। राजभाषा के सम्मान में कवि गोष्ठियां, निबंध, भाषण आदि स्पर्धाएं करवाने से आगे कदम बढ़ाने होंगे। इसे शिक्षा की सृजनात्मक धाराओं में जोड़ना होगा। आज का युग धर्म विज्ञान, सूचना और तकनीकी का है। इन सबसे इसे जोड़े जाने की जरूरत है। अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में सोमवार को हिंदी भाषा के जाने-माने विद्वान प्रोफेसर डॉ. रामनाथ मेहता ने विशेष बातचीत में ये बातें कहीं। headtopics.com

विज्ञापनहिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सांध्यकालीन अध्ययन केंद्र शिमला के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामनाथ मेहता ने कहा कि इस विषय पर एक बड़ी बहस की जरूरत है। आज स्थिति यह है कि हिंदी की एक अधिसूचना निकालने के लिए बहुत माथापच्ची करनी पड़ती है। कोविड के जमाने में ही देख लें कि कितनी अधिसूचनाएं हिंदी में निकालीं गईं और जो आई भी होंगी, वे कितनी समझ में आई होंगी। एक तरफ कहा जाता है कि अंग्रेजी का प्रयोग न करें, हिंदी का करें मगर फिर भी प्रतिष्ठा की भाषा अंग्रेजी बताई जाती है। हिंदी को व्यवसाय, विज्ञान, तकनीकी और कंप्यूटर में लाया जाए। भाषण देने में जो सम्मान नेताओं सेे हिंदी को मिल रहा है, वही सम्मान अगर और जगह भी मिले तो बात बनें।

हिंदी में बोलने से अगर वोट मिल सकते हैं तो यह सूचना, तकनीक और कंप्यूटर की सहजता से स्वीकार्य भाषा क्यों नहीं बन सकती। हिंदी में किसी को इंसेंटिंव देने की जरूरत नहीं। इसे पैसे, वृत्ति, मान-सम्मान आदि से सहज तरीके से जोड़ा जाना चाहिए। आज तो अनपढ़ व्यक्ति भी अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं। मोबाइल की भाषा भी 90 फीसदी लोगों की अंग्रेजी ही है। भारत का इतना बड़ा जनमानस है। यह हिंदी को क्यों नहीं अपना सकता। जहां इसे मान-सम्मान मिलना चाहिए, वहां नहीं मिल पाता है। इसमें सरकारों की ही नहीं, हम सबकी भी गलती है।

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छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल को गिरफ्तार किया गया है। रायपुर पुलिस ने विवादित बयान देने के सिलसिले में यह गिरफ्तारी की है। उधर उत्तर प्रदेश में आज बड़ी सियासी हलचल हो रही है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath), बीएसपी सुप्रीम मायावती (Mayawati) और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) एक साथ ऐक्टिव हैं। आज हरियाणा के करनाल में किसानों की महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) है। इसको देखते हुए प्रशासन ने करनाल समेत 5 जिलों में इंटरनेट सेवा को बंद (Internet Ban) कर दिया और करनाल में धारा-144 लागू कर दिया है। अफगानिस्तान (Afghanistan) में सरकार बनाने जा रहे तालिबान ने चीन और पाकिस्तान के साथ CPEC परियोजना (CPEC Project) में शामिल होने की इच्छा जताई है। तमाम ब्रेकिंग न्यूज (Breaking News) और ताजा खबरें (Latest News in Hindi) आपको सबसे पहले नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर मिलेंगी। तो बने रहिए हमारे साथ...

दोष हमारा है न कि मोबाइल का... मोबाइल ने तो हिन्दी में अभिव्यक्ति को और आसान ही किया है...

#eRUPI :ई-रुपी क्या है, जिसे पीएम मोदी लॉन्च करने वाले हैं - BBC News हिंदीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को ई-रुपी को लॉन्च करने जा रहे हैं. डिज़िटल भुगतान प्रणाली की दिशा में इसे एक अहम क़दम माना जा रहा है. पता नहीं लेकिन साब जो भी स्कीम आजतक लंच किए है कोई भी जनता के हित में नहीं आया है। बीबीसी जेहादी की तो जल गई होगी

टोक्यो ओलंपिक : मेडल जीत कमलप्रीत कौर रच सकती हैं इतिहास - BBC News हिंदीकमलप्रीत कौर ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए डिस्कस थ्रो के फ़ाइनल में जगह बनाई है.अभी तक किसी भारतीय महिला खिलाड़ी ने एथलेटिक्स में मेडल नहीं जीता है. आज शाम साढ़े चार बजे उनका इवेंट है. बेईमानी के बाद भी भारत ने ब्रिटिश को हराया । बेईमान पत्रकारिता । कोई कार्टून नहीं । बीबीसी चुप । टोक्यो ओलंपिक में झूठ वाला भी खेल शामिल होता तो साहब बोरी भर के ले कर आ जाते आजकल दोनों साहब झूठ यूपी जाकर बोलते हैं😀😀😀

आप जासूस कमाल के हैं, राजा कैसे बन गए?- रवीश का मोदी सरकार पर तंजपेगासस स्पाईवेयर से पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनेताओं की जासूसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पांच अगस्त को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

नीतीश कुमार हैं प्रधानमंत्री मैटेरियल, उपेंद्र कुशवाहा के बयान से बिहार में राजनीतिक हलचलBihar News: उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि स्वभाविक रूप से नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल कहा ही जाना चाहिए। ये कौन कहता है कि वो पीएम मैटेरियल नहीं हैं। कुशवाहा अकेले नहीं है जिन्होंने ऐसी बात कही है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी पिछले दिनों नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताया था। दिनेश चंद्र यादव को जदयू संसदीय दल का नेता बनानी चाहिए, वर्तमान में जदयू के सबसे पुराने सांसद वही हैं कुशवाहा जी प्रधान मंत्री देश का होता है, प्रदेश में मुख्य मंत्री होता है। अपने मैटेरियल की पुन: जांच कर लें। कभी स्वार्थ से बाहर मोदी तरह ही सो देखा नही और वैदिक सनातन ठगने की क्षमता मे सामान बिहार मे मिलता नही!

लंबे सफर के दौरान थकान नहीं आराम देती हैं ये SUV, बड़े बूट स्पेस के साथ मिलते हैं शानदार फीचर्सअगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं और लंबे सफर जाते रहते हैं तो आपको कुछ चीज़ों को ध्यान में रखकर कार को खरीदना चाहिये। ताकि बाद में आपको पछतावा न हो। इस लेख के जरिये हम आपको बता रहे हैं वो कारें जो कम बजट पर देती हैं शानदार सफर।

नॉर्थ ईस्ट डायरी: जासूसी की संभावित सूची में पूर्वोत्तर के नेताओं के नाम के क्या मायने हैंवीडियो: इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में पेगासस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सामने आई संभावित सर्विलांस की लिस्ट में असम और नगालैंड के नेता तथा मणिपुर के लेखक का नंबर मिलने और असम-मिज़ोरम सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.