हांगकांग: एक कानून ने बदल दिया शहर का चाल, चरित्र और चेहरा | DW | 07.12.2021

यहां के निवासियों को डर है कि उनके शहर की विशिष्ट पहचान खो रही है. लोग अपनी बात कहने से बच रहे हैं या फिर अभिव्यक्ति के वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख कर रहे हैं. #HongKong #China

Hongkong, China

07-12-2021 13:02:00

यहां के निवासियों को डर है कि उनके शहर की विशिष्ट पहचान खो रही है. लोग अपनी बात कहने से बच रहे हैं या फिर अभिव्यक्ति के वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख कर रहे हैं. HongKong China

हांगकांग के निवासियों को डर है कि उनके शहर की विशिष्ट पहचान खो रही है क्योंकि चीन आलोचनात्मक विचारों पर नकेल कस रहा है. लोग अपनी बात कहने से बच रहे हैं या फिर अभिव्यक्ति के वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख कर रहे हैं.

नवंबर के अंत में ग्वांगझू में चाइना इंटरनेट मीडिया फोरम 2021 में बोलते हुए, हांगकांग की मुख्य कार्यकारी कैरी लैम ने कहा कि उनकी सरकार ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर और नकेल कसने की योजना के साथ आगे बढ़ेगी. उनका कहना था,"इंटरनेट प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास के साथ, मौजूदा कानून इंटरनेट पर विभिन्न कदाचारों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं हो सकते हैं. मसलन, अन्य लोगों की व्यक्तिगत जानकारी का दुर्भावनापूर्ण प्रकटीकरण, घृणित और भेदभावपूर्ण टिप्पणी या 'फर्जी समाचार' यानी फेक न्यूज.”

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लैम ने मई में"फेक न्यूज" विरोधी कानून लाने की संभावना की घोषणा की थी और सरकार ने हाल ही में इस मुद्दे पर कानूनी अध्ययन शुरू किया है. सरकार साइबर हमलों से बचाव के लिए साइबर सुरक्षा कानून का मसौदा तैयार करने में भी व्यस्त है. कानून इंटरनेट प्रदाताओं को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में भी परिभाषित करेगा, जिससे सरकार के लिए ऑनलाइन सामग्री पर अधिक नियंत्रण करना संभव हो जाएगा.

लैम का ये भाषणा हांगकांग के द्वारा उस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को अपनाने के 18 महीने बाद आया है जिस कानून को बीजिंग के अधिकारियों ने उन्हें सौंपा था. यह कानून अलगाव, तोड़फोड़, आतंकवाद और विदेशी संगठनों के साथ मिलीभगत जैसे कृत्यों के लिए भारी कानूनी दंड निर्धारित करता है. headtopics.com

कानून ने किसी भी लिखित या बोले जाने वाले ऐसे भाषण को भी आपराधिक श्रेणी में डाल दिया है जिसमें हांगकांग के चीन से अलगाव जैसी बात कही गई हो. इस कानून को अपनाने के बाद से ही इसका इस्तेमाल मीडिया आउटलेट्स को बंद करने, लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं पर मुकदमा चलाने और इंटरनेट नियमों को कड़ा करने के लिए किया जा रहा है.

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‘स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए विनाशकारी'स्वतंत्र अभिव्यक्ति की वकालत करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय संगठन आर्टिकल 19 में एशिया डिजिटल प्रोग्राम मैनेजर माइकल कास्टर कहते हैं कि सुरक्षा कानून और प्रस्तावित नया कानून बीजिंग में अधिकारियों द्वारा हांगकांग पर अपने अधिकार को आगे बढ़ाने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक कानून इस बात का भी परीक्षण कर रहे हैं कि वे किस सीमा तक और कितनी मजबूती के साथ नागरिक समाज का गला घोंट सकते हैं.

डीडब्ल्यू से बातचीत में वह कहते हैं,"हम नहीं जानते कि इन कानूनों में क्या है, लेकिन अगर हम पूरे क्षेत्र में समान कानूनों को देखें तो ये स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए विनाशकारी हैं.” कास्टर के अनुसार, हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उपयोग विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों और यहां तक ​​कि फिल्म निर्माताओं पर अधिक नियंत्रण करने के लिए किया गया है.

वीडियो देखें04:34हांगकांग की छतों पर उग रही है गाजर मूलीवह कहते हैं,"यह वास्तव में सार्वजनिक डोमेन से किसी भी चीज को हटाने का एक संपूर्ण प्रयास रहा है जो कि स्वीकृत राजनीतिक वास्तविकता के बाहर एक कहानी का हिस्सा है जिसे बीजिंग द्वारा तैयार किया जा रहा है. मुझे लगता है कि यह निश्चित रूप से एक संकेत है कि आने वाले दिन काले दिन सरीखे हैं.” headtopics.com

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हांगकांग के रहने वाले 33 वर्षीय जॉन की मानें तो वह पहले से ही इन ‘काले दिनों' में जी रहे हैं. कानून पारित होने के 18 महीनों में शहर की स्थिति कैसे बदल गई है, इस बारे में बात करते हुए उन्होंने ‘अवसादकारी' और ‘निराशाजनक' शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कार्यकर्ताओं पर लगातार मुकदमा चलाने और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए कहा कि लोगों का मौजूदा व्यवस्था से विश्वास उठ गया है.

गिरफ्तारी और जेल का भयजॉन कहते हैं,"हालांकि अभी भी ऑनलाइन या सार्वजनिक स्थानों पर महत्वपूर्ण चर्चाएं होती हैं लेकिन इनमें से अधिकतर वार्तालाप बहुत कोडेड यानी कूट भाषा में हो गए हैं. मतलब, लोग उन चीजों को संदर्भित करने के लिए बहुत सूक्ष्म रूपकों का उपयोग करते हैं जिन्हें वे नापसंद करते हैं या जिससे वे असहमत होते हैं.” खुद जॉन निवेदन करते हैं कि उनका नाम सिर्फ इतना ही लिखा जाए क्योंकि पूरा नाम लिखे जाने पर दंडित होने का भय है.

कास्टर का मानना ​​​​है कि जॉन जैसे लोग हांगकांग में राजनीति पर बात करने या यहां तक ​​​​कि बात करने से भी डरते हैं और इसका एक कारण यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत, यह स्पष्ट नहीं है कि किस तरह के भाषण, कार्यों या अभिव्यक्ति से गिरफ्तारी हो सकती है और किस अपराध में आजीवन कारावास हो सकता है.

तस्वीरेंः नए कानून के असरहांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनपहला दिनविवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हांगकांग में लागू हो चुका है. शहर की मुख्य कार्यकारी कैरी लैम ने प्रेस वार्ता में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की प्रतियां जारी कीं. आलोचकों का कहना है कि इस तरह का कड़ा कानून चीन की मुख्य भूमि पर भी नहीं है. headtopics.com

हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनवर्षगांठएक जुलाई को हांगकांग को ब्रिटेन द्वारा चीन को सौंपे जाने की वर्षगांठ भी होती है. कैरी लैम ने अधिकारियों और अतिथियों के साथ हांगकांग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन की स्थापना की 23वी वर्षगांठ भी मनाई.

हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनविरोधहांगकांग की सड़कों पर लोकतांत्रिक प्रदर्शनकारियों ने नए कानून के विरोध में रैली निकाली. हजारों लोग रैली में शामिल हुए और"अंत तक प्रतिरोध" और"हांगकांग आजादी" जैसे नारे लगाए.

हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानून"न्याय के लिए"प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें जेल जाने का डर है लेकिन न्याय की की खातिर विरोध करना जरूरी है.हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनचेतावनी

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस के दंगा रोकने वाले दल ने सड़कों पर गश्त लगाई, लेकिन विरोध रैली फिर भी निकाली गई.हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनपहली गिरफ्तारियांरैली में लोगों ने विरोध के कई बैनर भी लहराए. एक व्यक्ति, जिसके पास हांगकांग की आजादी का एक झंडा था, नए सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार होने वाला पहला व्यक्ति बन गया.

हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानून"राजद्रोह"पुलिस ने जगह जगह लोगों को रोकने के लिए घेराबंदी की थी. नारे लगाते और बैनर लहराते प्रदर्शनकारियों को पहली बार नए कानून के तहत पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी गई. उन्हें कहा गया कि उन पर 'राजद्रोह' के साजिश के लिए कार्रवाई हो सकती है.

हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानूनदमनपुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की. जमा लोगों को तीतर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया गया.हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानून

पुलिस बनाम प्रदर्शनकारीप्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हांगकांग पुलिस को काफी आलोचना झेलनी पड़ी है. इस तरह के दृश्य हांगकांग में पिछले साल हुए प्रदर्शनों के दौरान भी देखने को मिले थे.हांगकांग में क्या गुल खिला रहा है चीन का नया कानून

पत्रकारों पर हमलारैली के दौरान पुलिस ने पत्रकारों को भी नहीं बख्शा और उनके खिलाफ पेप्पर स्प्रे का इस्तेमाल किया.कास्टर कहते हैं,"कानून के साथ ही यह समस्या है. यह अस्पष्ट और व्यापक है और इसका प्रभावी रूप से ऐसा कुछ भी मतलब हो सकता है जो राज्य चाहता है.” अक्टूबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हांगकांग में मीडिया और इंटरनेट स्वतंत्रता पर कानून के प्रभाव को लिखते हुए फ्रीडम हाउस ने कहा कि कानून ने ‘हांगकांग को एक सत्तावादी प्रणाली की ओर तेजी से बदल दिया है जिसमें नागरिक अधिकारों के भविष्य के संदर्भ में गंभीर निहितार्थ हैं.'

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि हांगकांग में स्वतंत्रता का क्षरण हुआ है, फिर भी इस क्षेत्र को चीन की मुख्य भूमि के किसी भी शहर की तुलना में अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है क्योंकि यहां कुछ स्वतंत्र मीडिया आउटलेट हैं और एक खुला इंटरनेट भी है जहां कुछ साइटें जरूर अवरुद्ध हैं. चीन की मुख्य भूमि के विपरीत, रिपोर्ट में कहा गया है,"फेसबुक, ट्विटर और अन्य अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों तक हांगकांग में न केवल पहुंचा जा सकता है बल्कि वे अभी भी यहां उपयोग किए जाने वाले कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं.”

हांगकांग के लिए बदल रही पहचानजॉन ने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि कैसे इन कानूनों ने शहर के चरित्र को बदल दिया है, क्योंकि व्हाट्सएप या सार्वजनिक स्थानों पर इन्क्रिप्टेड मेसेजिंग ऐप पर सेल्फ-सेंसरशिप जरूरत बन जाती है. यहां के कई निवासियों को लगता है कि कला, फिल्मों, उपन्यासों, अकादमिक बहस और राजनीतिक संवाद के रूप में महत्वपूर्ण भाषण जैसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस शहर के 75 लाख लोगों की पहचान को परिभाषित करते थे.

जॉन कहते हैं,"बहुत से लोग मानते हैं कि हांगकांग अब महज एक और चीनी शहर बनने की राह पर है और वह विशिष्ट पहचान जो कभी हांगकांग को चीन के बाकी हिस्सों से अलग करती थी, अब मिट गई है.” रेबेका एक अन्य स्थानीय निवासी हैं जो अपने शहर के परिवर्तन पर शोक व्यक्त करती हैं. वह युवा हैं और अभी उनकी उम्र बीस साल के आस पास है. वह खुद को लोकतंत्र समर्थक समुदाय का हिस्सा मानती हैं.

देखिए, चीन के पांच सिर दर्दचीन के पांच सिर दर्दशिनचियांगचीन का पश्चिमी प्रांत शिनचियांग अक्सर सुर्खियों में रहता है. चीन पर आरोप लगते हैं कि वह इस इलाके में रहने वाले अल्पसंख्यक उइगुर मुसलमानों पर कई तरह की पाबंदियां लगता है. इन लोगों का कहना है कि चीन उन्हें धार्मिक और राजनीतिक तौर पर प्रताड़ित करता है. हालांकि चीन ऐसे आरोपों से इनकार करता है.

चीन के पांच सिर दर्दतिब्बतचीन का कहना है कि इस इलाके पर सदियों से उसकी संप्रभुता रही है. लेकिन इस इलाके में रहने वाले बहुत से लोग निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को अपना नेता मानते हैं. दलाई लामा को उनके अनुयायी जीवित भगवान का दर्जा देते हैं. लेकिन चीन उन्हें एक अलगाववादी मानता है.

चीन के पांच सिर दर्दसिछुआनचीन का सिछुआन प्रांत हाल के सालों में कई बार तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं के आत्मदाहों को लेकर सुर्खियों में रहा है. चीनी शासन के विरोध में 2011 के बाद से वहां 100 से ज्यादा लोग आत्मदाह कर चुके हैं. ऐसे लोग अधिक धार्मिक आजादी के साथ साथ दलाई लामा की वापसी की भी मांग करते हैं. दलाई लामा अपने लाखों समर्थकों के साथ भारत में शरण लिए हुए हैं.

चीन के पांच सिर दर्दहांगकांगलोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के कारण हांगकांग अकसर सुर्खियों में रहता है. 1997 तक ब्रिटेन के अधीन रहने वाले हांगकांग में"एक देश एक व्यवस्था" के तहत शासन हो रहा है. लेकिन अक्सर इसके खिलाफ आवाजें उठती रहती हैं. 1997 में ब्रिटेन से हुए समझौते के तहत चीन इस बात पर सहमत हुआ था कि वह 50 साल तक हांगकांग के सामाजिक और आर्थिक ताने बाने में बदलाव नहीं करेगा. हांगकांग की अपनी अलग मुद्रा और अलग झंडा है.

चीन के पांच सिर दर्दताइवानताइवान 1950 से पूरी तरह एक स्वतंत्र द्वीपीय देश बना हुआ है, लेकिन चीन उसे अपना एक अलग हुआ हिस्सा मानता है और उसके मुताबिक ताइवान को एक दिन चीन का हिस्सा बन जाना है. चीन इसके लिए ताकत का इस्तेमाल करने की बात कहने से भी नहीं हिचकता है. लेकिन अमेरिका ताइवान का अहम दोस्त और रक्षक है.

इन दिनों जब वह अपने शहर की सड़कों पर चलती हैं तो वह इस बात से दुखी होती हैं कि सब कुछ एक जैसा और साफ-सुथरा कैसे दिखता है और कैसे सड़कों पर तेजी से सरकारी विज्ञापनों द्वारा हांगकांग को ‘एशिया का विश्व शहर' कहा जाता है. डीडब्ल्यू से बातचीत में वह कहती हैं,"इन सबके जरिए सरकार हमें यह समझाने की कोशिश कर रही है कि हांगकांग में सब कुछ अभी भी वैसा ही है और हम अभी भी एशिया के 'विश्व शहर' हैं.”

बातचीत के दौरान रेबेका भी अपना सिर्फ पहला नाम ही छापने का अनुरोध करती हैं. इसकी वजह वह कुछ इस तरह बताती हैं,"हांगकांग में निराशा का कारण यह है कि हर कोई जानता है कि सब कुछ बदल गया है.” खतरे के बावजूद, रेबेका ने जोर देकर कहा कि आलोचनात्मक बहसें अभी भी हो रही हैं, लेकिन इन बहसों ने नए रूप ले लिए हैं जो उतनी खुलकर नहीं होती हैं. रेबेका ने खुद हाल ही में एक थिएटर प्रोडक्शन में भाग लिया था जिसमें हांगकांग पर हमला करने वाले एक प्रेत को दिखाया गया था.

वह कहती हैं,"लोग उसे देखकर हंस पड़े. यह एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन यह हांगकांग के बारे में है.”रिपोर्टः ओले टैंगन

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