Pakistan, Taliban, Sufi, Taliban, Suicide Attack, Mazars, Mosques, Terrorist Attack, Attack İn Pakistan, सूफी, तालिबान, आत्मघाती हमले, मस्जिद, आतंकी हमला, मजार, पाकिस्तान में हमले, Columns News İn Hindi, Opinion News İn Hindi, Opinion Hindi News

Pakistan, Taliban

सूफी का तालिबानी बन जाना: मजारों, मस्जिदों में आत्मघाती हमलों का लंबा इतिहास है

लाहौर में सूफी संत की दरगाह पर हुआ हमला पाकिस्तान में चल रहे वहाबी तालिबानी वर्चस्व की जंग की ही एक कड़ी है। वहां सूफी

14.5.2019

लाहौर में सूफी संत सैयद अली बिन उस्मान की दरगाह पर हुआ हमला पाकिस्तान में चल रहे वहाबी तालिबान ी वर्चस्व की जंग की ही एक कड़ी है। ImranKhanPTI PTIofficial pakistan Taliban

लाहौर में सूफी संत की दरगाह पर हुआ हमला पाकिस्तान में चल रहे वहाबी तालिबान ी वर्चस्व की जंग की ही एक कड़ी है। वहां सूफी

आर विक्रम सिंह, पूर्व सैनिक, पूर्व प्रशासक Updated Tue, 14 May 2019 07:31 AM IST आत्मघाती हमला (फाइल फोटो) ख़बर सुनें ख़बर सुनें लाहौर में सूफी संत सैयद अली बिन उस्मान की दरगाह पर हुआ हमला पाकिस्तान में चल रहे वहाबी तालिबानी वर्चस्व की जंग की ही एक कड़ी है। वहां सूफी शिया मजारों, मस्जिदों में आत्मघाती हमलों का लंबा इतिहास है। हमले और भी होंगे, क्योंकि पकिस्तान को पूरी तरह कट्टर इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य अभी बाकी है। कट्टर वहाबी-सलाफी इस्लाम में पीरों, दरगाहों की जगह नहीं है। इस्लाम के आंतरिक वैचारिक संघर्ष में दरगाहों, मजारों पर मत्था टेकना, जियारत करना इस्लाम से बाहर है और कुफ्र की शक्ल लिए हुए है। कल वह समय आएगा, जब तालिबानी सोच सूफियों को भी अहमदियों की तरह इस्लाम से खारिज कर देगी। वहाबी तालिबानी विचारधारा के प्रर्वतकों का उद्देश्य इन्हें इस्लाम से खारिज करना नहीं है। बल्कि वे चाहते है कि ये लोग पुनः अपना पंथ बदलते हुए पीरों, फकीरों को छोड़ उनके कट्टर अनुयायी बनने की राह पर चले आएं। सूफी पंथ, जिसे भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सांस्कृतिक इस्लाम के नाम से भी जाना जाता है, तलवार के बाद इस्लामी धर्म परिवर्तन का सबसे बड़ा कारक बना। सूफी इस्लाम का एक प्राचीन रहस्यवादी पंथ है, जिसने भारत में इस्लामी विचारों के साथ स्थानीय परंपराओं को समन्वित करते हुए धार्मिक विस्तार का कार्य किया है। बौद्ध-हिंदू परंपराओं के भिक्षुओं-साधुओं से मुकाबला करने के लिए संतों के स्थान पर पीरों, मठों के स्थान पर खानकाहों और मंदिरों के स्थान पर मजारों के विकल्प दिए। मंदिरों की परंपराओं, भजन, पूजा-पद्धतियों के स्थान पर मजारों को अपनी श्रद्धा के स्थल के रूप में ढाला। इस प्रकार इस्लाम में धर्म परिवर्तन का काम आसान हुआ। उदाहरण के लिए, कश्मीर में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया सूफी संत बुलबुल शाह के कश्मीरी शासक रिंचेन को इस्लाम में दीक्षित करने के साथ प्रारंभ होती है। सूफी पंथ भारत के अन्य बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में इस्लाम के विस्तार का माध्यम बना। शासक वर्ग तो तलवार के दम पर धर्मांतरित हो रहा था। इस तरह पंजाब और बंगाल के गांवों तथा दक्षिण भारत के तटीय प्रदेशों में इस्लाम का क्षेत्र विस्तार होता गया। उस समय इस्लामी शासकों का जोर विस्तार पर था, वैचारिक शुद्धता पर नहीं। 20वीं सदी में आकर सऊदी अरब और ईरान के तेल के धन ने इस वैचारिक शुद्धता के अभियान को हवा दी। अब फोकस उस जेहाद पर है, जिसे दुनिया इस्लामी आतंकवाद के रूप में जानती है। इस्लाम के विस्तार में अपना प्रारंभिक योगदान दे चुकने के बाद सूफी विचारधारा भी इनके धर्मयुद्ध का लक्ष्य बन चुकी है। यह एक प्रकार से धर्म परिवर्तन का दूसरा अभियान है। इसके परिणामस्वरूप हम देख रहे हैं कि भारत में वहाबी-सलाफी विचारधारा के समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जाकिर नाइक आदि कट्टरवादियों ने सूफियों को अपना विरोधी घोषित किया है। सूफियों का सलाफी हो जाना नए धर्म परिवर्तन जैसा है। सूफी इस्लाम को मानने वालों को आतंकित करते हुए बमों के धमाकों के अभियान से सूफी लक्षित होंगे और उनमें अपने पंथ बदलने का संदेश चला जाएगा। दूसरा, यह कि हिंदुत्व के पुनर्जागरण पर इन आतंकी घटनाओं का ठीकरा फोड़कर इससे पल्ला झाड़ना भी आसान हो जाएगा। कश्मीर में इस्लाम का विस्तार सुल्तानों की तलवार और सूफियों के धर्म प्रचार द्वारा किया गया था। पिछले कश्मीर भ्रमण में एक कश्मीरी बुद्धजीवी ने स्वीकार किया कि सूफी परंपरा के कश्मीर को अब पुनः पंथ परिवर्तन की स्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। लाल देद और शेख नरूद्दीन को, जिनकी शिक्षाओं से कश्मीरियत का ताना-बाना बना था, आज कोई पूछने वाला नहीं हैं। मजारों, खानकाहों, पीरों-फकीरों का सूफी संप्रदाय आज रक्षात्मक स्थिति में आ गया है। मजहब की वैचारिक शुद्धता का यह अभियान, मानने वालों को उनकी जमीन से काटकर वैश्विक वर्चस्व और कट्टरवाद की सोच से जोड़ता है। भारतीय मूल के नोबल पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल ने अपनी पुस्तक बियांड बिलीफ : एमंग कन्वर्टेड पीपल में कहा है, 'धर्म परिवर्तित व्यक्ति की विश्वदृष्टि बदल जाती है। उनका इतिहास बदल जाता है, वह अपने इतिहास को खुद खारिज कर देता है, उसे वह सब छोड़ना पड़ता है, जो पहले उसका अपना रहा था।' लेकिन भारत में धर्म परिवर्तन के बहुत बाद तक भी भारतीय मुस्लिम समाज अपनी मूल संस्कृति से जुड़ा रहा। जुड़ाव के इसी दर्शन ने इस्लाम को प्रभावित कर सूफी इस्लाम की सांस्कृतिक विचारधारा को जन्म दिया है, जो हमारे यहां सनातन धर्म और इस्लाम के बीच से गुजरती दिखती है। कट्टरपंथियों का लक्ष्य इस जमीनी जुड़ाव को भी पूरी तरह से खत्म करना है। अतः सूफी पंथ का समापन ही उनका लक्ष्य बन जाता है और सूफी फकीरों के स्थान, मजारें आंतकी हमलों के लक्ष्य बन रहे हैं। वे कट्टरता को उस स्तर तक ले जाना चाहते हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व के मुस्लिम समाज को एक खलीफा, एक झंडा एवं एक किताब के नीचे लाया जा सके। इस देश के नागरिकों को इस्लामी जगत में हो रहे इस वैचारिक परिवर्तन को समझना जरूरी है, जो आतंकवाद में परिणत हो रहा है। विचारों का यह टकराव भारतीय उपमहाद्वीप में विशेष रूप से होगा। गैर-मुस्लिम देशों में भारत में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी का निवास है। यहां का सांस्कृतिक इस्लाम कट्टरवादी वैश्विक इस्लाम की राह में सबसे बड़ी बाधा भी है। हम अपने देश में समानता, सांस्कृतिक तथा सामाजिक समरसता का लक्ष्य लेकर चले हैं। एक इस्लाम है पीरों-फकीरों का और दूसरा है जाकिर नाइक जैसे जेहादियों का। सदियों पहले आक्रांता हाथ में तलवारें लेकर आए थे, आज कहीं कोई तलवार नहीं है। हमारे अल्पसंख्यक समाज को अब अपने विवेक से निर्णय लेना है। यह निर्णय भारतीय मुसलमानों को ही नहीं, भारत की सांस्कृतिक समरसता के पक्षधर समस्त नागरिकों को भी लेना है। किसी सूफी का तालिबानी बन जाना इस्लाम का आंतरिक मामला नहीं रहा। भारतीय समाज को इस्लामी जगत में हो रही इस उठापटक से तटस्थ नहीं रहना है, क्योंकि इससे देश के भविष्य का मार्ग प्रभावित होता है। हमें तो उस विचाराधारा का साथ देना है, जो सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय सोच के साथ खड़ी होती हो। लाहौर में सूफी संत सैयद अली बिन उस्मान की दरगाह पर हुआ हमला पाकिस्तान में चल रहे वहाबी तालिबानी वर्चस्व की जंग की ही एक कड़ी है। वहां सूफी शिया मजारों, मस्जिदों में आत्मघाती हमलों का लंबा इतिहास है। हमले और भी होंगे, क्योंकि पकिस्तान को पूरी तरह कट्टर इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य अभी बाकी है। कट्टर वहाबी-सलाफी इस्लाम में पीरों, दरगाहों की जगह नहीं है। विज्ञापन इस्लाम के आंतरिक वैचारिक संघर्ष में दरगाहों, मजारों पर मत्था टेकना, जियारत करना इस्लाम से बाहर है और कुफ्र की शक्ल लिए हुए है। कल वह समय आएगा, जब तालिबानी सोच सूफियों को भी अहमदियों की तरह इस्लाम से खारिज कर देगी। वहाबी तालिबानी विचारधारा के प्रर्वतकों का उद्देश्य इन्हें इस्लाम से खारिज करना नहीं है। बल्कि वे चाहते है कि ये लोग पुनः अपना पंथ बदलते हुए पीरों, फकीरों को छोड़ उनके कट्टर अनुयायी बनने की राह पर चले आएं। सूफी पंथ, जिसे भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सांस्कृतिक इस्लाम के नाम से भी जाना जाता है, तलवार के बाद इस्लामी धर्म परिवर्तन का सबसे बड़ा कारक बना। सूफी इस्लाम का एक प्राचीन रहस्यवादी पंथ है, जिसने भारत में इस्लामी विचारों के साथ स्थानीय परंपराओं को समन्वित करते हुए धार्मिक विस्तार का कार्य किया है। बौद्ध-हिंदू परंपराओं के भिक्षुओं-साधुओं से मुकाबला करने के लिए संतों के स्थान पर पीरों, मठों के स्थान पर खानकाहों और मंदिरों के स्थान पर मजारों के विकल्प दिए। मंदिरों की परंपराओं, भजन, पूजा-पद्धतियों के स्थान पर मजारों को अपनी श्रद्धा के स्थल के रूप में ढाला। इस प्रकार इस्लाम में धर्म परिवर्तन का काम आसान हुआ। उदाहरण के लिए, कश्मीर में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया सूफी संत बुलबुल शाह के कश्मीरी शासक रिंचेन को इस्लाम में दीक्षित करने के साथ प्रारंभ होती है। सूफी पंथ भारत के अन्य बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में इस्लाम के विस्तार का माध्यम बना। शासक वर्ग तो तलवार के दम पर धर्मांतरित हो रहा था। इस तरह पंजाब और बंगाल के गांवों तथा दक्षिण भारत के तटीय प्रदेशों में इस्लाम का क्षेत्र विस्तार होता गया। उस समय इस्लामी शासकों का जोर विस्तार पर था, वैचारिक शुद्धता पर नहीं। 20वीं सदी में आकर सऊदी अरब और ईरान के तेल के धन ने इस वैचारिक शुद्धता के अभियान को हवा दी। अब फोकस उस जेहाद पर है, जिसे दुनिया इस्लामी आतंकवाद के रूप में जानती है। इस्लाम के विस्तार में अपना प्रारंभिक योगदान दे चुकने के बाद सूफी विचारधारा भी इनके धर्मयुद्ध का लक्ष्य बन चुकी है। यह एक प्रकार से धर्म परिवर्तन का दूसरा अभियान है। इसके परिणामस्वरूप हम देख रहे हैं कि भारत में वहाबी-सलाफी विचारधारा के समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जाकिर नाइक आदि कट्टरवादियों ने सूफियों को अपना विरोधी घोषित किया है। सूफियों का सलाफी हो जाना नए धर्म परिवर्तन जैसा है। सूफी इस्लाम को मानने वालों को आतंकित करते हुए बमों के धमाकों के अभियान से सूफी लक्षित होंगे और उनमें अपने पंथ बदलने का संदेश चला जाएगा। दूसरा, यह कि हिंदुत्व के पुनर्जागरण पर इन आतंकी घटनाओं का ठीकरा फोड़कर इससे पल्ला झाड़ना भी आसान हो जाएगा। कश्मीर में इस्लाम का विस्तार सुल्तानों की तलवार और सूफियों के धर्म प्रचार द्वारा किया गया था। पिछले कश्मीर भ्रमण में एक कश्मीरी बुद्धजीवी ने स्वीकार किया कि सूफी परंपरा के कश्मीर को अब पुनः पंथ परिवर्तन की स्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। लाल देद और शेख नरूद्दीन को, जिनकी शिक्षाओं से कश्मीरियत का ताना-बाना बना था, आज कोई पूछने वाला नहीं हैं। मजारों, खानकाहों, पीरों-फकीरों का सूफी संप्रदाय आज रक्षात्मक स्थिति में आ गया है। मजहब की वैचारिक शुद्धता का यह अभियान, मानने वालों को उनकी जमीन से काटकर वैश्विक वर्चस्व और कट्टरवाद की सोच से जोड़ता है। भारतीय मूल के नोबल पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल ने अपनी पुस्तक बियांड बिलीफ : एमंग कन्वर्टेड पीपल में कहा है, 'धर्म परिवर्तित व्यक्ति की विश्वदृष्टि बदल जाती है। उनका इतिहास बदल जाता है, वह अपने इतिहास को खुद खारिज कर देता है, उसे वह सब छोड़ना पड़ता है, जो पहले उसका अपना रहा था।' लेकिन भारत में धर्म परिवर्तन के बहुत बाद तक भी भारतीय मुस्लिम समाज अपनी मूल संस्कृति से जुड़ा रहा। जुड़ाव के इसी दर्शन ने इस्लाम को प्रभावित कर सूफी इस्लाम की सांस्कृतिक विचारधारा को जन्म दिया है, जो हमारे यहां सनातन धर्म और इस्लाम के बीच से गुजरती दिखती है। कट्टरपंथियों का लक्ष्य इस जमीनी जुड़ाव को भी पूरी तरह से खत्म करना है। अतः सूफी पंथ का समापन ही उनका लक्ष्य बन जाता है और सूफी फकीरों के स्थान, मजारें आंतकी हमलों के लक्ष्य बन रहे हैं। वे कट्टरता को उस स्तर तक ले जाना चाहते हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व के मुस्लिम समाज को एक खलीफा, एक झंडा एवं एक किताब के नीचे लाया जा सके। इस देश के नागरिकों को इस्लामी जगत में हो रहे इस वैचारिक परिवर्तन को समझना जरूरी है, जो आतंकवाद में परिणत हो रहा है। विचारों का यह टकराव भारतीय उपमहाद्वीप में विशेष रूप से होगा। गैर-मुस्लिम देशों में भारत में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी का निवास है। यहां का सांस्कृतिक इस्लाम कट्टरवादी वैश्विक इस्लाम की राह में सबसे बड़ी बाधा भी है। हम अपने देश में समानता, सांस्कृतिक तथा सामाजिक समरसता का लक्ष्य लेकर चले हैं। एक इस्लाम है पीरों-फकीरों का और दूसरा है जाकिर नाइक जैसे जेहादियों का। सदियों पहले आक्रांता हाथ में तलवारें लेकर आए थे, आज कहीं कोई तलवार नहीं है। हमारे अल्पसंख्यक समाज को अब अपने विवेक से निर्णय लेना है। यह निर्णय भारतीय मुसलमानों को ही नहीं, भारत की सांस्कृतिक समरसता के पक्षधर समस्त नागरिकों को भी लेना है। किसी सूफी का तालिबानी बन जाना इस्लाम का आंतरिक मामला नहीं रहा। भारतीय समाज को इस्लामी जगत में हो रही इस उठापटक से तटस्थ नहीं रहना है, क्योंकि इससे देश के भविष्य का मार्ग प्रभावित होता है। हमें तो उस विचाराधारा का साथ देना है, जो सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय सोच के साथ खड़ी होती हो। विज्ञापन और पढो: Amar Ujala

कार्टून: अबकी बार... दीवार के पार



पाँच दिन झारखंड में क्या करेंगे डॉ. मोहन भागवत?

CAA प्रदर्शनकारियों की मौत पर बोले CM योगी- 'अगर कोई मरने के लिए आ रहा है तो...'



राज्यसभा में विपक्ष और होने जा रहा कमज़ोर?

राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे नृत्यगोपाल, नृपेंद्र मिश्रा को निर्माण समिति की कमान



आज तक @aajtak

पीएम मोदी के लोकसभा में जोरदार भाषण के दौरान ZEE NEWS रहा नंबर-1



ImranKhanPTI PTIofficial पाकिस्तान खत्म समझो out of control इस मुल्क का क्या होगा सारी दुनिया चिंतित ImranKhanPTI PTIofficial ISIS may involve in this mishaps. ISIS is not a Islamic organisation but it's a Israeli establishment formed to badname Islam. ImranKhanPTI PTIofficial

राजतिलक: छठे चरण के मतदान में पश्चिम बंगाल आगे, पिछड़ा उत्तर प्रदेश West Bengal registers massive voter turnout in sixth phase - Rajtilak AajTakलोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण में दिल्ली सहित 7 राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर आज मतदान पूरा हो गया है. इसमें केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, हर्षवर्धन और मेनका गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की किस्मत का फैसला होगा. छठे चरण में उत्तर प्रदेश की 14, हरियाणा की 10, बिहार और मध्य प्रदेश की 8-8, दिल्ली की सात और झारखंड की चार सीटों पर वोटिंग के बाद उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है. चुनाव आयोग के मुताबिक लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 63.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. आयोग के रात 8.50 बजे तक आए आंकड़ों के अनुसार बिहार में 59.29, हरियाणा में 66.69, मध्य प्रदेश में 64.22, उत्तर प्रदेश में 54.29, पश्चिम बंगाल में 80.35, झारखंड में 64.50 और दिल्ली में 58.93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है.चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर gauravbh anjanaomkashyap पिछले 24 घंटे में बंगाल में- हिंदू लड़कियों की साड़ियां खीची गई। हिंदुओं की गाड़ियों व घरों में घुस के तोड़फोड़ की गई। 3 हिंदुओं को जिहादियों ने मार डाला, 1का हाथ काट दिया - ABP गायब - aajtak गायब - बिंदी_गैंग गायब - अवार्ड_वापसी गायब - बालीवुड योद्धा गायब MeraVoteModiKo gauravbh anjanaomkashyap Congrats MI to win the VIVO IPL 2019 TROPHY gauravbh anjanaomkashyap Rahul rahul Didi didi

PAK की दिल जीतने की कोशिश, रमजान में रूहअफजा देने की पेशकश की - Business AajTakबीते कुछ महीनों में भारत और पाकिस्‍तान के बीच रिश्‍तों में तनाव बरकरार है. इस बीच कई ऐसे मौके आए हैं जब पाकिस्‍तान की ओर से भारत Not required... You drink we have own drinks MamataOfficial Ke gundo ke bare main batate nahi hain chale hai Roohafza ki bate karne.... aroonpurie Ki patrakarita ke maap dand क्यों बाबा रामदेव जी का रूहअफजा है ना

पाकिस्तान: लाहौर की सूफ़ी दरगाह के पास धमाका, तीन की मौतपाकिस्तान में लाहौर की सूफ़ी दरगाह दाता दरबार के पास धमाका. अब तक तीन लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है. 😭😭😭😭😭😭😭😭😂😂😂😂😂😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣 Pakistan & Dhamaka are synonyms.

पाकिस्तान: लाहौर की सूफ़ी दरगाह के पास धमाका, छह की मौतपाकिस्तान में लाहौर की सूफ़ी दरगाह दाता दरबार के पास धमाका. अब तक छह लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है.

खबरदार: छठे चरण के मतदान में दिग्गजों की अग्निपरीक्षा Khabardar: Big leaders will be tested in 6th phase of voting - khabardar AajTakकल लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण के लिये 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान होना है. उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर, बिहार की 8 सीटों पर, मध्यप्रदेश की 8 सीट, पश्चिम बंगाल में 8 सीट, झारखंड की 4 सीट, दिल्ली की सभी 7 सीट और हरियाणा की सभी 10 सीटों पर छठे चरण का मतदान होना है. कल के चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. एक तरफ आजमगढ़ में अखिलेश यादव और भोजपुरी सुपरस्टार निरहुआ आमने सामने हैं तो वहीं, भोपाल में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से दो-दो हाथ करेंगी आतंकवाद के आरोपों में घिरी बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, तो वहीं उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मनोज तिवारी और शीला दीक्षित में सीधी टक्कर है. किन दिग्गजों की कल के मतदान में है अग्निपरीक्षा, इसी पर होगा आज विश्लेषण.चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर chitraaum मीडिया का आलम ये है कि 30 साल पहले राजीव गांधी छुट्टी मनाने गए थे या नहीं, ये पता करने में लगी है। जज लोया को किसने मारा? काला धन क्यों नही आया? 4 जजो ने लाइव कॉन्फ्रेंस क्यो की? मोदी इतना झूठ क्यो बोलते हैं ? इन सब पर मीडिया चुप है। chitraaum ये चुनाव कुछ खास है तभी तो इतना उथल पुथल हो गया इसके पहले किसी चुनाव में नहीं हुआ chitraaum भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर जी जीत रही हैं

मतदान के दिन राहुल गांधी का अमेठी न पहुंचना बना चर्चा का विषय, पांचवें चरण के चुनाव की 10 बड़ी बातेंलोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में 63.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अब तक के सभी चरणों में सबसे कम है. चुनाव आयोग ने यह आंकड़ा जारी किया है. आयोग के मतदाता एंड्रॉयड एप्लिकेशन के अनुसार, सोमवार को रात के 9 बजे तक मतदान 63.5 प्रतिशत रहा. इस चुनाव में अब तक मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. पहले चरण में 69.50 फीसदी मतदान हुआ था, जो अब तक के पांच चरण में सबसे अधिक है. दूसरे चरण में मतदान 69.44 प्रतिशत हुआ था, तीसरे चरण में 68.40 और चौथे चरण में 65.51 प्रतिशत मतदान हुआ था. वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने यहां संवाददाताओं से कहा कि 2014 की तुलना में पहले चार चरणों (सोमवार के पांचवें चरण को छोड़कर) में 7.85 करोड़ अधिक मतदाता हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले चार चरणों की तुलना में इसके पहले चार चरणों में छह करोड़ अधिक मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया. सक्सेना ने बताया कि झारखंड, राजस्थान, जम्मू कश्मीर और पश्चिम बंगाल में मतदान बाधित करने की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर सभी जगह मतदान शांतिपूर्ण रहा. उन्होंने बताया कि पांचवें चरण में उत्तर प्रदेश और बिहार में मतदान का स्तर पिछले चुनाव की तुलना में बढ़ा है. Jab wo apna mat delhi me dete hai to amethi kya karne jate. Aur rahul gandhi ki haryana aur delhi m rally honi thi. Agar rahul amethi me hote to smriti ji bolti ki rahul ne booth capturing karai hai. स्मृती इरानी फिरभी कहरही है राहुल ने बुथ क्याप्चर किया । अब बताइए बात किसका सच माने जनता । श्री राधे,राहुल के मतदान के दिन अमेठी में न आने की वजह जो भी रही हो ,एक सच यह भी है कि उन्हें अमेठी जन पर पूरा विश्वास है दुसरा वह चाहते होंगे कि अमेठी जन खुले मन से निर्णय ले/ वोट कर अपने जन प्रतिनिधि का चुनाव करे,लेकिन तंगदिल और हल्की सोच को इतना कहां समझ आता है...

लोकसभा चुनाव 2019 : क्या तस्वीर हुई साफ? छठे चरण के मतदान की 11 बड़ी बातेंलोकसभा चुनाव के छठे चरण में रविवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा उम्मीदवार भारती घोष पर हमला किया गया और उत्तरप्रदेश में भगवा दल के एक विधायक ने एक चुनाव अधिकारी की कथित तौर पर पिटाई की. इस चरण में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और छह राज्यों की 59 सीटों पर 63 फीसदी से अधिक वोट पड़े. इस चरण में उत्तरप्रदेश में 14 सीटों, हरियाणा की दस सीटों, बिहार, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल में आठ - आठ सीटों, झारखंड में चार सीटों और दिल्ली में सात सीटों पर वोट डाले गए. दिल्ली में वोट डालने वाली प्रमुख हस्तियों में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शामिल हैं. आज के मतदान के साथ ही 543 लोकसभा क्षेत्रों में से करीब 89 फीसदी सीटों पर चुनाव संपन्न हो गए जबकि शेष 59 सीटों पर 19 मई को चुनाव होंगे. चुनाव आयोग ने विभिन्न राज्यों और दिल्ली में 63.48 फीसदी मतदान की घोषणा की, वहीं पश्चिम बंगाल में 80 फीसदी से अधिक वोट पड़े जबकि राष्ट्रीय राजधानी में महज 60.21 फीसदी मतदान हुआ. 2014 में यह 63.37 प्रतिशत था. चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान प्रतिशत रात नौ बजे दर्ज किया गया. यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और इसमें वृद्धि हो सकती है क्योंकि कुछ स्थानों पर मतदान चल रहा है. खास बात यह है कि अब सिर्फ अंतिम चरण का चुनाव ही बचा है लेकिन अभी तक कोई भी दावे से नहीं कह सकता है कि केंद्र में किसकी सरकार बनने वाली है. हालांकि नेताओं को अपने-अपने दावे जरूर हैं. चुनाव की स्थिति स्पष्ट है बोया पेड़ बाबुल का तो आम कहां से खाए जो जग दी आपने वही तो जग लौट आई

राजतिलक: छठे चरण के चुनाव में कौन बचा पाएगा सियासी वर्चस्व? Rajtilak: Who will taste the victory in Sixth phase? - Rajtilak AajTakकल लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण के लिये 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान होना है. उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर, बिहार की 8 सीटों पर, मध्यप्रदेश की 8 सीट, पश्चिम बंगाल में 8 सीट, झारखंड की 4 सीट, दिल्ली की सभी 7 सीट और हरियाणा की सभी 10 सीटों पर छठे चरण का मतदान होना है. कल के चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. एक तरफ आजमगढ़ में अखिलेश यादव और भोजपुरी सुपरस्टार निरहुआ आमने सामने हैं तो वहीं, भोपाल में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से दो-दो हाथ करेंगी आतंकवाद के आरोपों में घिरी बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कल के मतदान के बाद किसका होगा राजतिलक, इसी पर शुरू करेंगे आज की चर्चा.चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर chitraaum Dekhna parega chitraaum chitraaum Cash in Hand to RadarInCloud

'अब तुम मुझे सिखाओगी' कहकर कॉकपिट में भिड़े पायलट, नाले में घुसा प्लेन - trending clicks AajTakअक्सर प्लेन के कॉकपिट में पायलट और को-पायलट मिलकर प्लेन उड़ाने से जुड़ा कोई भी फैसला लेते हैं, लेकिन यदि दोनों पायलट के बीच में झगड़ा हहहहहहहह are bc ye sab kya ho rha hai😂😂 Both sud b booked under criminal law...shame on such ppl 😠

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष की बैठक को ममता की ना, माया-अखिलेश की चुप्पीमतगणना से पहले विपक्ष को एकजुट रखने और राष्ट्रपति से मिलने की रणनीति सिरे चढ़ती नहीं दिख रही है। MamataOfficial yadavakhilesh Mayawati INCIndia samajwadiparty TMC Opposition Election2019 Loksabhaelections2019 MamataOfficial yadavakhilesh Mayawati INCIndia samajwadiparty MamataOfficial yadavakhilesh Mayawati INCIndia samajwadiparty Ha ha ha

जौनपुर में अखिलेश यादव बोले, 'सपा-बसपा गठबंधन की आंधी में हिल जाएगी BJP की नींव'अखिलेश यादव ने कहा कि हमारा गठबंधन मामूली नहीं है. झूठ और नफरत की नींव पर खड़ी भाजपा को यह उखाड़ फेंकने का काम करेगा. bjp toh khtm hai 23 may ko terwi hogi *FANI तूफान सिर्फ उन्हीं राज्यों में ही क्यों आया है, जहां BJP की सरकार नहीं है..* *उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश..* ये मोदी की साजिश है, हम चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करेंगे.. *महाठगबंधन....* 😜🤣🤣😜



नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चेन्नई में बड़ा प्रदर्शन

महात्मा गांधी ने कई बार कहा कि वो कट्टर हिन्दू हैं: मोहन भागवत

मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर, ब्रिटेन-फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की 5वीं बड़ी इकोनॉमी बना भारत

भारत ने हमारे साथ बहुत अच्छा सलूक नहीं कियाः ट्रंप

गुजरात में ट्रंप के तीन घंटों पर खर्च होंगे 85 करोड़

DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का पति नवीन जयहिंद से तलाक, ट्वीट कर बोलीं- बहुत दर्दभरा एहसास

CAA, NPR और NRC के समर्थन में 154 प्रतिष्ठित नागरिक, याचिका पर किया हस्ताक्षर

टिप्पणी लिखें

Thank you for your comment.
Please try again later.

ताज़ा खबर

समाचार

14 मई 2019, मंगलवार समाचार

पिछली खबर

बुआ ने अपने लिए बड़ा बंगला बनवाया, बबुआ टोंटी चुरा ले गया- योगी आदित्यनाथ

अगली खबर

कंगना रनौत की फिल्म का सरकारी खर्चे पर होगा कान फिल्म फेस्टिवटल में प्रदर्शन
कार्टून: अबकी बार... दीवार के पार पाँच दिन झारखंड में क्या करेंगे डॉ. मोहन भागवत? CAA प्रदर्शनकारियों की मौत पर बोले CM योगी- 'अगर कोई मरने के लिए आ रहा है तो...' राज्यसभा में विपक्ष और होने जा रहा कमज़ोर? राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे नृत्यगोपाल, नृपेंद्र मिश्रा को निर्माण समिति की कमान आज तक @aajtak पीएम मोदी के लोकसभा में जोरदार भाषण के दौरान ZEE NEWS रहा नंबर-1 प्रियंका गांधी राज्यसभा जाएंगी या नहीं, सोनिया गांधी लेंगी फैसला आज तक @aajtak महंत नृत्य गोपाल दास बने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष, नृपेंद्र होंगे निर्माण समिति के चेयरमैन Man vs Wild: पीएम मोदी के बाद रजनीकांत का स्वैग, सामने आया फर्स्ट लुक GST पर BJP सांसद ने उठाए सवाल, बताया 21वीं सदी का सबसे बड़ा पागलपन
नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चेन्नई में बड़ा प्रदर्शन महात्मा गांधी ने कई बार कहा कि वो कट्टर हिन्दू हैं: मोहन भागवत मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर, ब्रिटेन-फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की 5वीं बड़ी इकोनॉमी बना भारत भारत ने हमारे साथ बहुत अच्छा सलूक नहीं कियाः ट्रंप गुजरात में ट्रंप के तीन घंटों पर खर्च होंगे 85 करोड़ DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का पति नवीन जयहिंद से तलाक, ट्वीट कर बोलीं- बहुत दर्दभरा एहसास CAA, NPR और NRC के समर्थन में 154 प्रतिष्ठित नागरिक, याचिका पर किया हस्ताक्षर जब राजीव गांधी ने सोनिया के क़रीब आने के लिए दी थी रिश्वत उमर अब्दुल्ला को किस आधार पर बंद किया गया है? अर्दोआन ने कश्मीर की रट क्यों लगा रखी है दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सुंदरकांड का पाठ करवाएगी AAP, ट्वीट में ऐलान J&K: अनुच्छेद 370 हटाने की आलोचना करने वाली ब्रिटिश सांसद का आरोप, 'नहीं मिली भारत आने की मंजूरी'