Mppolitics, Mppoliticalcrisis, Madhyapradesh, Madhyapradeshpoliticalcrisis, Madhyapradeshpolitics, Madhya Pradesh Live Updates, Congress, Shivraj Singh, Narendra Modi, Amit Shah, Jp Nadda, Madhya Pradesh, Madhya Pradesh Crisis, Kamal Nath Govt, Madhya Pradesh Congress, Jyotiraditya Scindia, मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश सरकार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, Kamal Nath, Digvijaya Singh, Congress Mlas, Social Media, Hardeep Singh Dang, Surendra Singh Shera, Raghuraj Kansana, Tarun Bhanot, Bala Bachchan, Missing Report, Resignation, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, कांग्रेस विधायक, सोशल मीडिया, Jyotiraditya Scindia Resigns From Congress, Jyotiraditya Scindia Quits Congress, Jyotiraditya Scindia Resigns, Columns News İn Hindi, Blog News İn Hindi, Blog Hindi News

Mppolitics, Mppoliticalcrisis

सिंधिया को भाजपा ही सुरक्षित ठिकाना क्यों नजर आता है?

कुछ साल पहले कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड की देशभर में खासी चर्चा थी। राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जितिन

11-03-2020 02:28:00

सिंधिया को भाजपा ही सुरक्षित ठिकाना क्यों नजर आता है? MPPolitics MPPoliticalCrisis MadhyaPradesh MadhyaPradeshPoliticalCrisis MadhyaPradeshPolitics JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia

कुछ साल पहले कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड की देशभर में खासी चर्चा थी। राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया , सचिन पायलट, जितिन

लेकिन कुछ ही सालों में यह यूथ ब्रिगेड अपनी ही आंधी में बह गई। 2014 चुनाव से पहले राहुल गांधी और उनकी यूथ ब्रिगेड खूब सक्रिय रही, गांव गांव घूमी, जमीनी राजनीति और जनता के सवालों पर धुआंधार प्रचार किया, लेकिन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

अनलॉक 1: एक जून से क्या-क्या खुलने जा रहा है ट्विटर पर ट्रेंड #BoycottChineseProducts, अरशद वारसी-मिलिंद सोमन ने किया सपोर्ट शिवसेना नेता राउत की सलाह, CAA को कुछ दिन के लिए ठंडे बस्ते में डालें

अगले पांच साल इसी उधेड़बुन में निकल गए कि मोदी की आंधी और भगवा लहर को कैसे रोकें। अमित शाह की चाणक्य नीति से कैसे लड़ें। राहुल गांधी यूथ ब्रिगेड के नेता बने रहे, लेकिन उनके बाकी सिपहसालार धीरे धीरे दरकिनार होते रहे।1885 में बनी पार्टी अपने गौरवशाली इतिहास को लेकर, आजादी की लड़ाई में अपनी भूमिका को लेकर और देश पर सबसे लंबे समय तक राज करने को लेकर लगातार चर्चा में रही। अंतर्विरोधों से भरी रही, उतार चढ़ाव के बीच सत्ता की सांप सीढ़ी का खेल खेलती रही।

लेकिन पिछले छह सालों में भाजपा के वर्चस्व के आगे लगातार छटपटाती भी दिखी। जिस यूथ ब्रिगेड ने उम्मीद जगाई थी कि अब कोई नई कांग्रेस नजर आएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। राहुल गांधी जिस जोश के साथ आए थे, उससे ज्यादा बौखलाहट के साथ 2019 के बाद मैदान छोड़कर किनारे हो गए।

जाहिर है आज मध्यप्रदेश में जो कुछ हो रहा है, वह कोई अचानक नहीं है। सिंधिया राजघराने के तार शुरु से ही कांग्रेस और भाजपा दोनों के साथ जुड़े रहे हैं। माधवराव सिंधिया और राजीव गांधी की दोस्ती की वजह से कांग्रेस के साथ इस परिवार को जो रिश्ता रहा, वही विरासत ज्योतिरादित्य 18 सालों तक ढोते आए।

लेकिन एक राज परिवार और सत्ता का मजबूत दावेदार आखिर कबतक हाशिये पर रह सकता है। कांग्रेस के पुराने नेताओं और उनके काम करने के तरीके ने इस यूथ ब्रिगेड को हमेशा बच्चा ही समझा और इनका दबदबा उन्हें मंजूर नहीं हुआ। पार्टी के भीतर ही भीतर गांधी परिवार का नाम ले लेकर खेल चलते रहे और अध्यक्ष को लेकर ही खींचतान चलती रही।

दरअसल सोनिया गांधी अकेले अपने परिवार की विरासत को संभालते संभालते और अपने बच्चों को चौतरफा हमलों से बचाते बचाते पार्टी के भीतर ही मजबूर और कमजोर हो गईं। उनकी मजबूरी का फायदा वही पुराने और तथाकथित रणनीतिकार उठाते रहे जिनकी वजह से कांग्रेस की आज यह हालत हो गई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ ग्वालियर राजघराने के शहंशाह नहीं हैं। उस परिवार की मध्यप्रदेश में आज भी अपनी एक मजबूत जगह है, बेइंतहां इज्जत है। अगर कमलनाथ सरकार के कुछ मंत्री और विधायक सिंधिया के साथ हैं, तो इसके पीछे सिर्फ सत्ता नहीं है, सिंधिया परिवार का सम्मान है।

Unlock1: 30 जून तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, कंटेनमेंट जोन के बाहर 8 जून से खुल सकेंगे मॉल और रेस्टोरेंट केरल में फंसीं महिलाओं को ओडिशा पहुंचाने पर सीएम ने की सोनू सूद की तारीफ कोरोना अपडेटः पाकिस्तान में किस रफ़्तार से बढ़ रहा है कोरोना - BBC Hindi

साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी हालत और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर बेचैनी है। सोनिया गांधी को भेजे गए सिंधिया के इस्तीफे की भाषा बेहद संतुलित और सधी हुई है और बेशक उसमें एक युवा नेता के भीतर की वह बेचैनी भी झलकती है जो उसके राजनीतिक करियर के लिए जरूरी है।

कुछ समय पहले सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा को लेकर भी यह चर्चा चली थी कि वे भाजपा में जाने वाले हैं। दरअसल राहुल गांधी के बेतुके बयानों और कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अपने ही युवा साथियों की अनदेखी ने ये स्थिति पैदा कर दी थी। दरअसल कांग्रेस में जब नेतृत्व की तलाश थी, तब भी गांधी परिवार के भूत ने इन युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारियों से दूर रखा।

चुनाव के दौरान भी जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर सारा फोकस प्रियंका पर रखा गया, उससे भी सिंधिया आहत थे, साथ ही 2019 की जबरदस्त हार के बाद से पार्टी के कामकाज को लेकर उनकी हताशा चरम पर थी।

जाहिर है राजनीतिक महात्वाकांक्षा, आगे बढ़ने और नेतृत्व संभालने की चाहत ने सिंधिया को यह कदम उठाने पर मजबूर किया। हो सकता है कि सिंधिया ने ये जो शुरुआत की है, उसकी गूंज दूर तक सुनाई दे, क्योंकि यह बेचैनी सिर्फ सिंधिया की नहीं है।लेकिन यह ताज्जुब की बात जरूर है कि सिंधिया या इस यूथ ब्रिगेड को भाजपा ही एक सुरक्षित ठिकाना क्यों दिखता है जहां मोदी और शाह के कद के आगे तमाम लोग नतमस्तक रहते हैं और जहां अपनी पहचान खोने का संकट रहता ही है। क्या ऐसे राजनीतिक हालात को देखते हुए कांग्रेस के इस असंतुष्ट यूथ ब्रिगेड को कांग्रेस और भाजपा से अलग कोई मजबूत रास्ता नहीं बनाना चाहिए जो वास्तव में देश को नया विकल्प दे सके।

अगर सिंधिया को मध्यप्रदेश की राजनीति करनी है तो वहां भी उनके आगे भाजपा में ही कई चुनौतियां होंगी और कई कद्दावर नेता उन्हें आगे नहीं आने देंगे। और अगर केन्द्र में आना है तो महज राज्यसभा का सदस्य बनकर रह जाना ही उनकी परिणति हो सकती है। मंत्री पद तुरंत मिले न मिले, यह शाह और मोदी के रहमोकरम पर ही होगा।

वैसे भी मोदी सरकार में मंत्री बनकर भी तमाम कद्दावर नेता अपनी अहमियत खो चुके हैं। ऐसे में सिंधिया का यह दांव कहीं बाद में उनके लिए ही मुश्किल न खड़ी कर दे। प्रसाद, मिलिंद देवड़ा से लेकर तमाम युवा चेहरों के पार्टी में बढ़ते दबदबे के बीच एक नई कांग्रेस की रूपरेखा बनाए जाने की बात कही जा रही थी, यहां तक कि भाजपा में भी इस युवा नेतृत्व को एक चुनौती की तरह देखा जाने लगा था।

आठ जून से लागू होगा अनलॉक का पहला चरण, एक जून से ई-पास की अनिवार्यता समाप्त Unlock - 1: एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर नहीं होगी पाबंदी 20 लाख करोड़ का पैकेज: ओवैसी बोले- आंखों में धूल झोंक रही मोदी सरकार

विज्ञापनलेकिन कुछ ही सालों में यह यूथ ब्रिगेड अपनी ही आंधी में बह गई। 2014 चुनाव से पहले राहुल गांधी और उनकी यूथ ब्रिगेड खूब सक्रिय रही, गांव गांव घूमी, जमीनी राजनीति और जनता के सवालों पर धुआंधार प्रचार किया, लेकिन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

अगले पांच साल इसी उधेड़बुन में निकल गए कि मोदी की आंधी और भगवा लहर को कैसे रोकें। अमित शाह की चाणक्य नीति से कैसे लड़ें। राहुल गांधी यूथ ब्रिगेड के नेता बने रहे, लेकिन उनके बाकी सिपहसालार धीरे धीरे दरकिनार होते रहे।1885 में बनी पार्टी अपने गौरवशाली इतिहास को लेकर, आजादी की लड़ाई में अपनी भूमिका को लेकर और देश पर सबसे लंबे समय तक राज करने को लेकर लगातार चर्चा में रही। अंतर्विरोधों से भरी रही, उतार चढ़ाव के बीच सत्ता की सांप सीढ़ी का खेल खेलती रही।

लेकिन पिछले छह सालों में भाजपा के वर्चस्व के आगे लगातार छटपटाती भी दिखी। जिस यूथ ब्रिगेड ने उम्मीद जगाई थी कि अब कोई नई कांग्रेस नजर आएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। राहुल गांधी जिस जोश के साथ आए थे, उससे ज्यादा बौखलाहट के साथ 2019 के बाद मैदान छोड़कर किनारे हो गए।

जाहिर है आज मध्यप्रदेश में जो कुछ हो रहा है, वह कोई अचानक नहीं है। सिंधिया राजघराने के तार शुरु से ही कांग्रेस और भाजपा दोनों के साथ जुड़े रहे हैं। माधवराव सिंधिया और राजीव गांधी की दोस्ती की वजह से कांग्रेस के साथ इस परिवार को जो रिश्ता रहा, वही विरासत ज्योतिरादित्य 18 सालों तक ढोते आए।

लेकिन एक राज परिवार और सत्ता का मजबूत दावेदार आखिर कबतक हाशिये पर रह सकता है। कांग्रेस के पुराने नेताओं और उनके काम करने के तरीके ने इस यूथ ब्रिगेड को हमेशा बच्चा ही समझा और इनका दबदबा उन्हें मंजूर नहीं हुआ। पार्टी के भीतर ही भीतर गांधी परिवार का नाम ले लेकर खेल चलते रहे और अध्यक्ष को लेकर ही खींचतान चलती रही।

दरअसल सोनिया गांधी अकेले अपने परिवार की विरासत को संभालते संभालते और अपने बच्चों को चौतरफा हमलों से बचाते बचाते पार्टी के भीतर ही मजबूर और कमजोर हो गईं। उनकी मजबूरी का फायदा वही पुराने और तथाकथित रणनीतिकार उठाते रहे जिनकी वजह से कांग्रेस की आज यह हालत हो गई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ ग्वालियर राजघराने के शहंशाह नहीं हैं। उस परिवार की मध्यप्रदेश में आज भी अपनी एक मजबूत जगह है, बेइंतहां इज्जत है। अगर कमलनाथ सरकार के कुछ मंत्री और विधायक सिंधिया के साथ हैं, तो इसके पीछे सिर्फ सत्ता नहीं है, सिंधिया परिवार का सम्मान है।

साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी हालत और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर बेचैनी है। सोनिया गांधी को भेजे गए सिंधिया के इस्तीफे की भाषा बेहद संतुलित और सधी हुई है और बेशक उसमें एक युवा नेता के भीतर की वह बेचैनी भी झलकती है जो उसके राजनीतिक करियर के लिए जरूरी है।

कुछ समय पहले सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा को लेकर भी यह चर्चा चली थी कि वे भाजपा में जाने वाले हैं। दरअसल राहुल गांधी के बेतुके बयानों और कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अपने ही युवा साथियों की अनदेखी ने ये स्थिति पैदा कर दी थी। दरअसल कांग्रेस में जब नेतृत्व की तलाश थी, तब भी गांधी परिवार के भूत ने इन युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारियों से दूर रखा।

चुनाव के दौरान भी जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर सारा फोकस प्रियंका पर रखा गया, उससे भी सिंधिया आहत थे, साथ ही 2019 की जबरदस्त हार के बाद से पार्टी के कामकाज को लेकर उनकी हताशा चरम पर थी।

जाहिर है राजनीतिक महात्वाकांक्षा, आगे बढ़ने और नेतृत्व संभालने की चाहत ने सिंधिया को यह कदम उठाने पर मजबूर किया। हो सकता है कि सिंधिया ने ये जो शुरुआत की है, उसकी गूंज दूर तक सुनाई दे, क्योंकि यह बेचैनी सिर्फ सिंधिया की नहीं है।लेकिन यह ताज्जुब की बात जरूर है कि सिंधिया या इस यूथ ब्रिगेड को भाजपा ही एक सुरक्षित ठिकाना क्यों दिखता है जहां मोदी और शाह के कद के आगे तमाम लोग नतमस्तक रहते हैं और जहां अपनी पहचान खोने का संकट रहता ही है। क्या ऐसे राजनीतिक हालात को देखते हुए कांग्रेस के इस असंतुष्ट यूथ ब्रिगेड को कांग्रेस और भाजपा से अलग कोई मजबूत रास्ता नहीं बनाना चाहिए जो वास्तव में देश को नया विकल्प दे सके।

अगर सिंधिया को मध्यप्रदेश की राजनीति करनी है तो वहां भी उनके आगे भाजपा में ही कई चुनौतियां होंगी और कई कद्दावर नेता उन्हें आगे नहीं आने देंगे। और अगर केन्द्र में आना है तो महज राज्यसभा का सदस्य बनकर रह जाना ही उनकी परिणति हो सकती है। मंत्री पद तुरंत मिले न मिले, यह शाह और मोदी के रहमोकरम पर ही होगा।

वैसे भी मोदी सरकार में मंत्री बनकर भी तमाम कद्दावर नेता अपनी अहमियत खो चुके हैं। ऐसे में सिंधिया का यह दांव कहीं बाद में उनके लिए ही मुश्किल न खड़ी कर दे।विज्ञापनआगे पढ़ें और पढो: Amar Ujala »

JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia चोर चोर मौसेरे भाई JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia हिंदुत्व वादी विचारधारा में राजाओ के महत्व को प्रमुख स्थान दिया जाता है और प्रमुख स्थान पाना ही एक राजा का लक्ष्य होता है फिर उसके लिए वो कुछ भी कर सकता है जैसे नेपाल के राज परिवार के साथ किया गया जिसे सारी दुनिया अपनी आँखी से देखी है पर हश्र क्या हुआ न घर के न घाट के

JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia चलो अच्छा है! मोदी जी कम से कम एक बेरोज़गार को रोज़गार दे रहे हैं!! JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia Request shri narinder Modi ji jo Indian dusre deso m fase h unko apne des m bapis laya jay . JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia योग्यता के आधार पर काम

JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia jinko sangharsh kerne me zor aata ho aur jinko sirf kursi ka anand lena ho unki yahi soch hoti he.. iska haal nitish kumar sa agar na hua to kehna. JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia कयुकी तुम चुटिया हो JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia भाजपा ही एकमात्र राष्ट्रवादी पार्टी है जहाँ परिवार वाद नहीं है।

JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia वो हर मतलब .. परस्त व्यक्ती को .. हर जगह मतलब... ढूडने मे मजा आता है... JM_Scindia BJP4MP BJP4India INCIndia Aaj kal koai bhi baghair kesi fayedy ky kesi ka kaam nhi krta Shayed esko BJP sy zeyada Fayed melne wala hai

भाजपा की सीईसी की बैठक आज, राज्यसभा के लिए करेगी 16 उम्मीदवारों की घोषणाभाजपा मंगलवार को अपने राज्यसभा के उम्मीदवारों की घोषणा कर देगी। पार्टी ने मंगलवार शाम छह बजे केंद्रीय चुनाव समिति

जब 53 साल पहले सिंधिया की दादी विजयाराजे ने गिरा दी थी डीपी मिश्रा की सरकारकांग्रेस के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को पार्टी को अलविदा कहकर अपनी दादी विजयाराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया के आक्रामक तेवरों की याद दिला दी. ज्योतिरादित्य दो बुआ यशोधरा राजे और वसुंधरा राजे बीजेपी में पहले से हैं. अच्छा करते तो शायद कोई याद न करता लेकिन बुराई हमेशा याद रखी जाती है इतिहास गवाह है जिस देश में कभी राम राज रहा हो वो देश गुलाम कैसे हुआ होगा। वर्तमान के घटनाक्रमों को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है। scindia SachinPilot SoniaGandhi IYC aajtak AamAadmiParty BJP4UP वाह!कया बात है जी । तो यह भी रिवाज हो गया है ।सता मे मदहोश होकर पारटी को छोङ दो तो फिर निर्दलीय प्रत्याक्षी के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं । छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक भारद्वाज टाईम्स (साप्ताहिक)पाली राजस्थान मो

MP Political Crisis : सिंधिया कल ले सकते हैं भाजपा की सदस्यता, पूछने पर कहा- हैप्पी होलीदिल्ली में सिंधिया के आवास पर पहले से मौजूद मीडियाकर्मियों ने जब उनसे भाजपा में शामिल होने का प्रश्न पूछा तो सिंधिया ने हैप्पी होली बोलकर चले गए। ऐसे news जल्दी लाया करो। सुन कर अच्छा लगता है। Good News aisa lag raha hai sab apradhiyon ne thane mein plate pakad kar khade hokar photo session karaya hai kisi samuhik apraadh mein pakde jaane pe. sab janta ke apradhi jarur hain jinhone 5 saal tak insab ko chun kar bheja aur ye sab dhoka de gaye paise aur pad ke lalach mein.chee chee

सिंधिया की बगावत थामने को हाईकमान ने खोले सभी विकल्प, कमलनाथ सरकार पर मड़राया संकटभाजपा की मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिराने की कोशिश तेज होते देख कांग्रेस हाईकमान भी अपनी ओर से सिंधिया को समझाने की पहल में जुट गया है। Kamal story sarigila ,mp me sikh dangayi ki mukkho aropi ,bina yudh marigila...Kamal story sarigila.... कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के साथ मिलकर सरकार बनाई है तो शीघ्रपतन होना स्वाभाविक है ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री!

Madhavrao Scindia Birth Anniversary: जब अटल ने दिलवाई थी माधवराव सिंधिया को जनसंघ की सदस्यताMadhavraoScindia Birth Anniversary: जब अटल ने दिलवाई थी माधवराव सिंधिया को जनसंघ की सदस्यता JyotiradityaScindia MadhyaPradeshCrisis Congress

कैलाश खेर को याद आई बचपन की होली, सेलिब्रेशन को याद कर हुए इमोशनलबॉलीवुड के दिग्गज सिंगर्स में शुमार कैलाश खेर (Kailash Kher) को उनके सूफी अंदाज वालों गानों के लिए जाना जाता है. उनकी आवाज हर तीज-त्योहार की खूबसूरती बढ़ा देती है. वहीं बात हो होली की तो कैलाश खेर के गाने सुनकर लोग इमोशनल होते हैं और होली के रंग ज्यादा चमकीले लगने लगते हैं. ZeeNews Kailashkher This is my favourite Holi song-Holi song compares to this one.. wish to listen more similar holi songs,sung by him..

ट्रंप ने चीन को लेकर की दो बड़ी घोषणाएं, WHO से अमरीका को किया अलग चीन के साथ सरहद पर तनाव को लेकर पीएम मोदी का 'मूड ठीक नहीं' है: ट्रंप नरेंद्र मोदी की चिट्ठी- मुझमें कमी हो सकती है, पर देश पर भरोसा e-Agenda Aaj Tak 2020: 1 Year Of Modi Government 2.0, Schedule and List Of Speakers मोदी सरकार 2.0 के मैन ऑफ़ द मैच हैं अमित शाह? मोदी को टक्कर देना छह साल बाद भी इस क़दर मुश्किल क्यों कोरोना अपडेटः भारत में 24 घंटे में संक्रमण के लगभग 8,000 नए मामले, आँकड़ा पौने दो लाख के पास पहुँचा - BBC Hindi मोदी 2.0 का एक साल पूरा, पीएम मोदी ने देशवासियों की लिखी चिट्ठी, दस ख़ास बातें PM मोदी- अब हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा, जनता को लिखे पत्र की 13 खास बातें कोरोना: 46 घंटे की ट्रेन यात्रा, सिर्फ दो बार खाना और तीन बार पानी बिहार में सियासी घमासान तेज, नीतीश सरकार पर आगबबूला लालू परिवार