सावरकर ने माफ़ीनामों में क्या-क्या लिखा, छूटने पर क्या-क्या किया? - BBC News हिंदी

सावरकर ने माफ़ीनामों में क्या-क्या लिखा, छूटने पर क्या-क्या किया?

19-10-2021 14:29:00

सावरकर ने माफ़ीनामों में क्या-क्या लिखा, छूटने पर क्या-क्या किया?

राजनाथ सिंह के बयान के बाद से सावरकर पर लगातार चर्चा जारी है, उनके आलोचक और प्रशंसक जो कह रहे हैं उसमें कितनी सच्चाई है

'बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है'रणजीत सावरकर डॉक्टर नारायण राव सावरकर के पोते हैं और मुंबई में 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक' से जुड़े हुए हैं. वे वीर सावरकर पर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हैं.वे कहते हैं, "लोग याचिकाओं में लिखे कुछ वाक्यों को संदर्भ से बाहर ले जा रहे हैं. विलक्षण पुत्र का उल्लेख बाइबल के संदर्भ में है. वे कहना चाह रहे थे कि अंग्रेज़ खुद को भगवान मानने लगे थे. यह व्यंग्य में की गई टिप्पणी थी."

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रणजीत सावरकर के मुताबिक कुछ बयान अलग करके निकाले गए हैं. वे कहते हैं, "उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह बातचीत की है और उन्होंने अंग्रेज़ों की आलोचना भी की है. अगर वे अंग्रेज़ों के आगे झुक जाते तो उस तरह की भाषा कभी नहीं होती. उन्होंने अंग्रेज़ों से कहा है कि अगर आप हमें शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने देना चाहते हैं, तो हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने लिखा कि 1896 की कठोर परिस्थितियों ने हमें हथियार उठाने के लिए मजबूर किया. इसलिए वह यहां अंग्रेज़ों पर आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने बंदियों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की बात कही है."

जहाँ मुस्लिम लीग ने 1940 के लाहौर अधिवेशन में मुसलमानों के लिए अलग देश की बात पहली बार कही थी, सावरकर ऐसा पहले से कहते आ रहे थे. उन्होंने इससे तीन साल पहले 1937 में अहमदाबाद में साफ़ शब्दों में कहा था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं और दोनों का हक़ इस भूमि पर एक बराबर नहीं है. headtopics.com

इस बात को सावरकर की आलोचना की एक बड़ी वजह माना जाता है.इसके जवाब में रणजीत सावरकर कहते हैं, "एक अख़बार ने द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के विषय पर उनकी बात को गलत तरीके से छाप दिया और सावरकर ने तुरंत इसका खंडन किया. लोग केवल उसी के बारे में बात करते हैं जहाँ उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया था, न कि उनके खंडन के बारे में. सावरकर के जन्म से पहले 1883 में सर सैयद अहमद ख़ान ने दो-राष्ट्र सिद्धांत की बात कही थी. सावरकर ने दो राष्ट्र सिद्धांत के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी."

इमेज स्रोत,SAVARKARSMARAK.COM'भारत छोडो कांग्रेस का आंदोलन था'सावरकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल क्यों नहीं हुए. क्यों वे 1942 के भारत छोडो आंदोलन का हिस्सा नहीं बने?रणजीत सावरकर कहते हैं कि 1942 में कांग्रेस चाहती थी कि मुस्लिम लीग उनका समर्थन करे इसलिए महात्मा गांधी ने कहा कि आज़ादी के बाद कांग्रेस मुस्लिम लीग को सरकार बनाने देगी और जिन्ना प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

वे कहते हैं, "सावरकर ने इसे तुष्टीकरण कहा और कहा कि अगर मुसलमानों का तुष्टीकरण जारी रहा तो इससे भारत विभाजित हो जाएगा. अम्बेडकर ने भी भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था. 1942 का आंदोलन केवल कांग्रेस का आंदोलन था. यह कोई राष्ट्रीय आंदोलन नहीं था जिसमें सभी दल शामिल हुए हों."

रणजीत सावरकर के मुताबिक अगर सावरकर को भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल नहीं होने के कारण ब्रिटिश समर्थक करार दिया जाता है, तो अम्बेडकर और कम्युनिस्ट नेता एमएन रॉय भी ब्रिटिश समर्थक हुए.इमेज स्रोत,SAVARKARSMARAK.COMसाठ रूपए महीने की पेंशनसावरकर की एक और बड़ी आलोचना अंग्रेज़ी शासन से हर महीने 60 रूपए की पेंशन लेने की बात पर होती है. headtopics.com

अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर, गठबंधन पर हो सकती है बात Rs 75 में BSNL दे रहा 50 दिन की वैलिडिटी के साथ डाटा और कॉलिंग बेनेफिट्स 'विवादित चेहरा', बेंगलुरु पुलिस बोली रद्द करो मुनव्वर फारुकी का शो, जानें- क्यों?

रणजीत सावरकर की मानें तो यह पेंशन नहीं बल्कि नज़रबन्दी भत्ता था जो सभी दलों के राजनीतिक बंदियों को दिया जाता था. उनके मुताबिक सावरकर को यह भत्ता डेढ़ साल बाद मिला और बाकी बंदियों को जो मिल रहा था उसका आधा ही मिला.वे कहते हैं, "यह पेंशन नहीं बल्कि डिटेंशन अलाउंस था क्योंकि सरकार आपको एक ऐसी जगह पर रख रही थी जहां आपके पास आजीविका कमाने का कोई ज़रिया नहीं है. सावरकर को रत्नागिरी में रखा गया था और उन्हें वकालत करने की अनुमति नहीं थी क्योंकि उनकी एलएलबी की डिग्री मुंबई विश्वविद्यालय ने रद्द कर दी थी और उन्हें रत्नागिरी में भी कानून की प्रैक्टिस करने की अनुमति से वंचित कर दिया गया था. सावरकर की करोड़ों की संपत्ति जब्त कर ली गई. क्या वह 60 रुपये की पेंशन के लिए समझौता करेंगे? यह हास्यास्पद है. अगर उन्होंने अंग्रेज़ों से समझौता किया होता तो वो अपनी संपत्ति वापस मांग लेते."

इमेज स्रोत,SAVARKARSMARAK.COMसावरकर की राजनीतिक ज़िन्दगी के दो दौरवरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े नामों पर 'द आरएसएस: आइकन्स ऑफ़ द इंडियन राइट' नाम की किताब लिखी है जिसमें सावरकर पर भी एक अध्याय है.वे कहते हैं कि सावरकर में दो सावरकर नज़र आते हैं. "पहले सावरकर हिंदुस्तान में बड़े होते हैं, उन्हें छात्रवृत्ति मिलती है , वो राष्ट्रवादी गुटों में शमिल होते हैं, विलायत जाते हैं, लंदन में इंडिया हाउस में रहते हैं, वहां भारतीय क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों में शामिल होते हैं, 1857 की क्रांति पर एक अच्छी किताब लिखते हैं जिसमें वो कहते हैं कि 1857 की क्रांति ब्रिटिश साम्राज्य के लिए इतना बड़ा ख़तरा इसलिए बन गई थी क्योंकि हिंदू-मुसलमान इकट्ठे होकर लड़े थे. यानी एक तरह से वह हिंदू-मुस्लिम एकता का समर्थन कर रहे थे और इसे ब्रिटिश साम्राज्यवाद का मुकाबला करने के तरीके के तौर पर देख रहे थे."

मुखोपाध्याय कहते हैं कि सावरकर 1910 में नासिक के कलेक्टर की हत्या में शामिल होने के आरोप में लंदन में गिरफ़्तार करने के बाद काला पानी भेज दिया गया था.वे कहते हैं, "सावरकर का हृदय परिवर्तन उनकी किताब 'हिंदुत्व: हम कौन हैं' से स्पष्ट होता है. वो साथ-साथ उपन्यास और नाटक भी लिखते हैं जो सांप्रदायिक तौर पर भड़काऊ होते हैं. वो राजनीतिक तौर पर बलात्कार के इस्तेमाल को जायज़ ठहराते हैं. वो कहते हैं कि अगर मुसलमान आक्रमणकारियों ने हिंदू औरतों की इज़्ज़त लूटी तो हिन्दू राजाओं को भी ऐसा ही करना चाहिए था."

मुखोपाध्याय का मानना है कि हिंदुस्तान के उदारवादी, प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष लोगों की परेशानी सावरकर की राजनीतिक ज़िन्दगी के दूसरे दौर से है. "उदारवादी भी मानते हैं कि सावरकर अपने पहले दौर में राष्ट्रवादी भावना से चल रहे थे और वे राष्ट्रवादी थे. उनके इस्लाम-विरोधी और संप्रदायवाद के सिद्धांत दूसरे दौर में आए. आज की सत्ता सावरकर की ज़िंदगी के दूसरे दौर में लगे धब्बों को उनके पहले दौर का गुणगान करके मिटाना चाहती है." headtopics.com

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क्या तीसरी लहर का सबब बनेगा Omicron वेरियेंट? खबरदार में देखें पूरा विश्लेषण

कोरोना है कि दुनिया का पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा. अभी कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियेंट से दुनिया निपट भी नहीं पाई है कि कोरोना का नया वेरियेंट पैदा हो गया है. जिसका नाम है - ओमिक्रॉन. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि ये नया वेरियेंट डेल्टा से भी ज्यादा संक्रामक है यानी तेजी से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे वेरियेंट ऑफ कंसर्न घोषित कर दिया है. ऐसे में आपको कोरोना के इस नये वेरियेंट से खबरदार रहना जरूरी है और इसके लिए जरूरी है कि आपको इस नये ओमिक्रॉन वेरियेंट के बारे में कोई गलतफहमी ना रहे. इसलिए हम आपको इस नये वेरियेंट से जुड़े हर सवाल का जवाब देंगे. देखिए खबरदार का ये एपिसोड.

? BBC को सावरकर से इतना परेशानी क्यूं है? सत्य तो ये है कि इस बंदे को गांव में कोई जानता भी नहीं है। फालतू में इसकी बेइज्जती करवाने पर तुले हैं ये नेता। इन नेताओं को शिक्षा रोजगार विकास विज्ञान पर बात करने को कहो तो फटती है। एक फालतू टाइप के इंसान को लेकर बेवजह बहस करे जा रहे हैं लोग। Had hai is topic ko band kro or v samassiya hai desh me

अंधभक्तों को कितना भी बता लो समझा लो मानेंगे ये साहेब व पार्टी के भ्रम को ही। सावरकर पर सिलसिलेवार हमला सही नहीं! स्वयं और उनके भाई के कारनामे विशुद्ध साहसी एवं बेजोड़ हैं! व्यक्ति काग़ज़ पर थोड़े लड़ता है। बुद्धिमान थे तभी तो अपने को रिहा करवा लिया! क्या करके गए थे यह महत्वपूर्ण है न कि कैसे मुक्त हुए! गद्दार गांधी को लुड़काने में भी अहम भूमिका थी उनकी।

जैसे ही नेहरू ने सिगरेट सुलगाई और उसकी फूली को महारानी ब्रितानी ने लपक कर ट्रे में रोका आजादी मिल गई🤪😂 Kul mila kar Bht bakwas aadmi tha . सावरकर ने माफी नामे में लिखा था 'पाकिस्तान की अम्मी का भोड़ा' 😂😂😂 सावरकर हिंदुमहासभा का मुखिया था ओर हिन्दू महासभा का सेशन 'नेपाल के राजा को सलामी' 🤔देकर शुरू होता था और 'उनकी लम्बी आयु की कामना पर ख़त्म होता था'.🤔🤔

'सावरकर ने इंग्लैंड की रानी को लिखा था कि आप हिंदुस्तान को नेपाल के राजा को दे दें क्योंकि नेपाल का राजा सारी दुनिया के हिन्दुओं का राजा है'.

'... तो क्या कांग्रेसियों का पूजन करूं': कन्या पूजन पर छिड़े राजनीतिक विवाद पर बोले शिवराजमध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री हर सरकारी कार्यक्रम से पहले कन्या पूजन करते हैं. तीन विधानसभा और एक लोकसभा उपचुनाव में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने घर-घर कन्या पूजन किया हालांकि रैगांव सीट पर कन्या पूजन के दौरान कुछ बच्चियों ने लगभग बीजेपी के रंगों जैसी दिखती पगड़ी भी पहनी, जिससे राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. Kya nautanki hai yaar... Woh bachi Tu sach main mata ka roop hai per mama kuch aur hi hai... इस बदतमीज़ आदमी के मुँह लगते ही क्यूँ हैं प्रेस वाले ?

एक नम्बर का गद्दार और देशद्रोही आदमी था सावरकर भाजपा आरएसएस वाले मूर्ख समझते हैं सबको जो राष्ट्रवाद की बातें भी करते हैं और मूर्खों की तरह सावरकर का समर्थन भी गदहे हैं Darpok 'आज की सत्ता सावरकर की ज़िंदगी के दूसरे दौर में लगे धब्बों को उनके पहले दौर का गुणगान करके मिटाना चाहती है.' You read vikramsampath volume 1 and volume 2..

एक संगठन के तौर पर सावरकर आरएसएस को बहुत महत्व नहीं देते थे, 1937 में सावरकर ने कहा था कि आरएसएस के स्वयंसेवक का स्मृति-लेख कुछ ऐसा होगा, 'वह पैदा हुआ था, वह आरएसएस में शामिल हो गया और बिना कुछ हासिल किए मर गया.' इन शब्दों पर गौर करना ओर वास्तविकता से मिलान करना की कितना सटीक कहा Likha tha mujhe riha kar do tum (Angrezo se) me zindagibhar tumhara bafadar rahunga....

माफीवीर को अंग्रेजों से 60/- पेंशन हर माह लेने को नेहरू जी ने बोला था--- निंदा नथ सिंग ये सब को पता है कि क्या लिखा यही लिखा है कि में आपकी गुलामी करुगा मुझे जेल से रिहा कर दो माफी मागा था और इस इतिहास को हमारे ग्रह मंत्री rajnathsingh जी बदलने चले थे🤣😂 जीवन यापन कैसे किस को वजूद में ले चले। किस को ख्याल में रखे भेद विशाल फिर व्यवहार सम तुल्य प्रेरित होकर सब में हुए । फिर भाव में किसको रखे । धारा विपरीत क्रिया परिस्थिति के द्योतक रहे🧬

समझ नही आता इस फालतू के आदमी की कियु बात हो रही है

क्या India और Pakistan मैच हो सकता है रद्द, क्या कहती है ICC की रूलबुक24 अक्टूबर को टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का महामुकाबला होना है. लेकिन कश्मीर में टारगेट किलिंग के बीच भारत-पाक मैच को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की बड़ी टिप्पणी आई. गिरिराज सिंह ने टेरर SPONSER पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच नहीं खेलने की मांग रखी है. सोशल मीडिया पर भी यही चर्चा अब गर्म है. ऐसे में केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी पर सियासत भी शुरू हो गई. तो क्या भारत और पाकिस्तान का टी-20 मैच रद्द हो सकता है? इस सवाल का जवाब BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने दिया. आसीसी की रूलबुक यही कहती है कि भारत अपने इंटरनेशनल कमिटमेंट से पीछे नहीं हट सकता.अगर भारत ऐसा करता है तो क्या होगा इसे भी समझिए . Follow करने का मतलब प्रशंसक होना नहीं, हम तो इस लिए फॉलो करते हैं ताकि गाली दे सके..👎 गोदी_मीडिया Bawla hai wo to

उत्तर प्रदेश चुनावों में 40” फ़ीसदी टिकिट महिलाओं” को देने का फ़ैसला देश की राजनीति बदल सकता है..

जातिसूचक टिप्पणी पर युवराज सिंह की गिरफ्तारी, देखें क्या है मामलाअनुसूचित जाति को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. हालांकि, उन्हें कुछ देर के बाद कोर्ट से जमानत भी मिल गई. युवराज सिंह ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान, क्रिकेटर रोहित शर्मा के साथ इंस्टाग्राम पर बातचीत की थी, जिस दौरान उन्होंने यजुवेंद्र चहल के लिए एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था. इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल हो गया था और बाद में युवराज के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया गया था. देखें ये वीडियो. We want justice and safety of Bangladeshi Hindus 🙏 SaveHindus SaveHinduTemples SaveHumanRights saveHinduFestivals SaveHinduBoys SaveHinduGirls SanatanaDharma BlackdayDurgaPuja2021 PleaseStandWithHindus SaveBangladeshiHindus WeDemandSafety WeDemandJustice Like father, like son. Bad mouthed scoundrels. जब सरकारी फायदा या नौकरी लेना हो , तो जाती लिखना अनिवार्य है। पर जब कोई जाति के नाम से बुला दे , तो ये अपराध...ऐसा क्यो? पूर्व में जाति नाम की कोई चीज नही थी, जो जिस कार्ये में निपुण था , वो उस कार्ये के अनुसार संबोधन था। ये प्रत्येक धर्म मे है, लेकिन हिन्दू को कमज़ोर करने के

Audi Q5 के लिए भारत में शुरू हुई बुकिंग, जानें लॉन्च पर क्या है रिपोर्टनई Q5 कंपनी की बाजार में ब्रिकी को मजबूत करेगी। ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों ने कहा यह (क्यू5) 2021 के लिए हमारा नौवां उत्पाद लॉन्च होगा और हम वर्ष के लिए अपनी प्रगति के बारे में अधिक खुश नहीं हो सकते। अब अगर आदानी और अम्बानी इसे ख़रीदे तो outrage नही करना ,पहले बता देता हू।

Yuvraj Singh: क्रिकेटर युवराज सिंह को हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार, जानें क्‍या है पूरा मामलाक्रिकेटर युवराज सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर तफ्तीश में शामिल किया। जिसके बाद युवराज सिंह को पुलिस द्वारा फारिक कर दिया गया। कोर्ट ने युवराज सिंह को आदेश दिए थे कि व हांसी में दर्ज मामले में तफ्तीश में शामिल हो। 🥺🥺🥺 अच्छा किया इसके साथ योगराज गद्दार को भी पुलीसिया दंड की जरूरत है। एक गुहार -केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय व प्रधानमंत्री जी से NH56लखनऊ से वाराणसी फोरलेन सीमेंटेड कंक्रीट मिस्रणयुक्त सड़क निर्माण में विगत6 वर्षों से लगातार लाखो करोड़ो लीटर सीमित भूगर्भजल की बर्बादी क्यों -जलनायक संदीप अग्रहरि की अपील -मो.9935230146

आज सावरकर की डिमांड बढ़ गई है-सुनते ही बोले कांग्रेस नेता- 'ये वाहियात बात है'डिबेट में जब सावरकर का जिक्र हुआ तो तस्लीम रहमानी चिल्लाते हुए सवाल करने लगे कि- 'कांग्रेस हिंदुत्व के लिए लड़ रही थी या आजादी के लिए लड़ रही थी। ये बहस का मुद्दा है।' Sawarkar ki demand badh gai hai 😝😝 वर्ष 2013 और 2014 में महात्मा गांधी?