विकास दुबे मुठभेड़: देवेंद्र मिश्र ऐसा जज़्बा दिखाकर बने थे सिपाही से डीएसपी

विकास दुबे मुठभेड़ की अगुआई करने वाले देवेंद्र मिश्र की सिपाही से डीएसपी बनने की कहानी

05-07-2020 06:12:00

विकास दुबे मुठभेड़ की अगुआई करने वाले देवेंद्र मिश्र की सिपाही से डीएसपी बनने की कहानी

कानपुर में विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम की अगुआई डीएसपी देवेंद्र मिश्र कर रहे थे.उनकी गिनती यूपी पुलिस के सबसे तेज़तर्रार अफ़सरों में होती थी.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटImage captionदेवेंद्र मिश्रआमतौर पर ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि पुलिस विभाग में कांस्टेबल स्तर पर भर्ती होकर कोई पुलिस उपाधीक्षक के पद तक पहुंच जाए लेकिन कानपुर में विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ का नेतृत्व करने वाले देवेंद्र मिश्र ने यह उपलब्धि हासिल की थी.

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उत्तर प्रदेश में बांदा ज़िले के मूल निवासी देवेंद्र मिश्र साल 1981 में कांस्टेबल के पद पर यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे. विभागीय परीक्षा पास करके वो सब इंस्पेक्टर बने.साल 2005 में उन्नाव ज़िले में आसीवन थाने का इंचार्ज पद संभालते हुए उन्होंने एक शातिर बदमाश का एनकाउंटर किया था जिसकी वजह से उन्हें आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन का इनाम मिला था. इस पदोन्नति ने देवेंद्र मिश्र को इंस्पेक्टर पद तक पहुंचाया.

इंस्पेक्टर पद पर रहते हुए उन्होंने साल 2012 में ट्रेन डकैती करने वाले बदमाशों को पकड़कर लूट का सामान भी बरामद किया था.देवेंद्र मिश्र को इस बहादुरी का इनाम मिला और तत्कालीनी पुलिस महानिदेशक ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. साल 2013 में वाराणसी में कैंट जीआरपी निरीक्षक के रूप में तैनाती के दौरान देवेंद्र मिश्र ने एक ज़हरख़ुरानी गिरोह को धर दबोचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

देवेंद्र मिश्र के साथ काम कर चुके एक पुलिस अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि अपनी तैनाती के दौरान कई बार अपराधियों के साथ मुठभेड़ में वो शामिल रहे और विभाग में उन्हें बहादुर और चालाक अफ़सर के रूप में जाना जाता था.प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

कानपुर एनकाउंटर के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे का घर तोड़ा गयापुलिस विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का एक और इनाम देवेंद्र मिश्र को साल 2016 में मिला जब वो दोबारा आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन पाकर पुलिस उपाधीक्षक बने. देवेंद्र मिश्र अभी बिल्हौर में क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनात थे और अगले साल मार्च में रिटायर होने वाले थे.

मौजूदा वक्त में बांदा ज़िले में तैनात इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव देवेंद्र मिश्र के साथ काम कर चुके हैं. ब्रजेश यादव बताते हैं,"जीआरपी में इंस्पेक्टर रहने के दौरान देवेंद्र जी ने अपनी कार्यशैली से सभी का दिल जीता. वह न सिर्फ़ बहादुर अफ़सर थे बल्कि बेहद मिलनसार स्वभाव के भी थे और हर किसी का दिल जीत लेते थे."

बांदा ज़िले के सहेवा गांव में देवेंद्र मिश्र के परिजन रहते हैं जबकि उनकी पत्नी और दो बेटियां कानपुर में ही उनके साथ रहते थे. गांव में देवेंद्र के छोटे भाई राजीव मिश्र और रामदीन मिश्र रहते हैं. देवेंद्र मिश्र के पिता अध्यापक थे.पुलिस अधिकारी हालांकि इस ऑपरेशन के बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं बताते हैं लेकिन यह ज़रूर कहते हैं कि विकास दुबे को पकड़ने के लिए जो टीम गई थी उसमें अनुभवी, विशेषज्ञ और युवा अधिकारियों को शामिल किया गया था.

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इसी वजह से देवेंद्र मिश्र को इस टीम का नेतृत्व सौंपा गया था. लेकिन इन सबके बावजूद यह ऑपरेशन इतना विफल कैसे हो गया, इस बारे में कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने से कतरा रहा है.बड़ी उपलब्धिइमेज कॉपीरइटSAMIRATMAJ MISHRAकानपुर में देवेंद्र मिश्र ने लंबा समय गुज़ारा था और यहां के कई थानों के वो प्रभारी रह चुके थे.

उनके पड़ोसी गांव जखिनी के रहने वाले उमाशंकर पांडेय बताते हैं,"देवेंद्र मिश्र सिपाही के तौर पर भले ही भर्ती हुए थे लेकिन पढ़ने में तेज़ थे और भर्ती के वक़्त वो ग्रेजुएट थे. उनके अध्यापक पिता ग़रीब ज़रूर थे लेकिन बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में कोई कोताही नहीं की. यही वजह है कि सभी बेटे अच्छी जगहों पर नौकरी कर रहे हैं. साल 2016 में ग़ाज़ियाबाद में तैनाती के दौरान उनका प्रमोशन पुलिस उपाधीक्षक के पद पर हुआ था तो गांव के लोग भी बहुत खुश थे."

इमेज कॉपीरइटImage captionदेवेंद्र मिश्र को अंतिम विदाईप्रमोशन के बाद देवेंद्र मिश्र का तबादला कानपुर में हुआ और वो स्वरूप नगर के सीओ बनकर आए. कुछ समय पहले ही वो सीओ बिल्हौर बनकर गए थे.उत्तर प्रदेश में डीजीपी रहे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी वीएन राय कहते हैं,"कांस्टेबल से भर्ती होने वाले पदोन्नति पाकर अधिकतम इंस्पेक्टर तक पहुंच पाते हैं लेकिन डीएसपी की रैंक तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है. इससे पता चलता है कि उस व्यक्ति ने विभाग की कितनी अहम सेवा की है."

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Aap news channel vali bikau jo kyo iss ghatna me up govt se question nai lar rahe ho kyo debate bandh hai iss parapke aka ne na bola hai ya koi aur reason? बीजेपी के किसी नेता से ये उम्मीद करना कि वो कोई नैतिक जिम्मेदारी लेंगे, बेकार है. सेंगर को जिस तरह से बचाने की कोशिश की गई वो सबके सामने है आज यूपी पुलिस को देवेन्द्र मिश्र जैसे जांबाज पुलिस अधिकारियों की जरूरत है, उन्हें मरणोपरांत मुनासिब सम्मान दिया जाय

Appeals 1970; Submitted+(Saagaarika ASK);x2000; पुलिस भी कम अत्याचार नहीं करतीं । शराब के ठेकेदारों से मिल कर हर गांव में शराब बिक्री करवातीं है और जो विरोध करते हैं उन पर झूठे मुकदमे पंजीकृत करते हैं। रिपोर्ट पढ़कर यह तो पता चला कि कैसे समाज में अच्छे नेक और कर्मठ व्यक्तियों के नरसंहार की सोची-समझी प्रक्रिया चल रही है सरकार और मंत्री अपने लिए अच्छे पुलिस अधिकारी नियुक्त कर जनता को गद्दार प्रशासन और पुलिस कर्मियों के सहारे छोड़ दिया है जिसके वजह से अपराध बढ़ रहे हैं

Kya Vikash dube BJP-RSS se tha.........Agar tha toe uss saare organisation par ban lagna chaiye taaki Vikash dube jaise log dusra na baney... Police. Jajba. Or. Khtra. Lene. Walo. Ko. Sammmaan.or. pad. Bhi. Bda. Deti. Hai. 👍good. Sarji😊 BLACK SHEEPS IN POLICE&POLITICIANS KILLED MANY BRAVE REAL LAW PROTECTORS.INDIANS BHUKTO WORST LAW&ORDER

8 पुलिसकर्मियों के हत्यारे विकास दुबे को 🤔 जिंदगी बचाने वाले डॉ. कफील को जेल😭 NewIndia😠ગુલામ

विकास दुबे कौन, जिनके कारण गई डीएसपी समेत आठ पुलिस वालों की जानगाँव वालों के मुताबिक़, विकास दुबे के दो बेटे हैं जिनमें से एक इंग्लैंड में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है जबकि दूसरा बेटा कानपुर में ही रहकर पढ़ाई कर रहा है. भगवा गिरोह का समर्थन प्राप्त हैं. कौन क्या कर लेगा जब सैया भये कोतवाल डर कहे का! पुलिस वालो का हत्यारा राजनीतिक शरणार्थी! 😠

LIVE: कानपुर पुलिस ने मुठभेड़ में दो बदमाशों को मार गिराया, विकास दुबे की तलाश जारीकानपुर में एक हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने घेरकर गोलियां बरसा दी. इसमें डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए हैं. Shahido amar rahe एक वह पकड़ा जाए तो पूरा यादव फैमिली जेल के अंदर होगी ।।यह गारण्टी देता हूं ।

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कानपुर एनकाउंटर: एक खराब सिस्टम की उपज हैं विकास दुबे जैसे अपराधीकानपुर न्यूज़: यूपी में पुलिस, सियासत और अपराध का गठजोड़ ही ऐसा रहा है। यहां हार्डकोर अपराधियों के लिए पुलिस वाले की हत्या करना दरबार में आए दूत को मारने जैसा अनैतिक अपराध माना जाता है। बड़े से बड़े माफिया, ऑर्गनाइज्ड गिरोह और बाहुबली भरसक कोशिश करते हैं कि पुलिस वाला उनके हाथों न मारा जाए। अलबत्ता पुलिस वालों की बढ़िया पोस्टिंग में अपराधियों से नेता बने जरायम पेशा लोग मददगार जरूर होते रहे। ऐसे न वैसे ये बस नेताओ के संरक्षण से होते है। सुना है भाजपा के कई मंत्रियों के साथ फ़ोटो में नज़र आते रहता था जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया है, इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, कानूनन वह व्यक्ति इस घटना की सजा भी भुगतेगा। मैं इस बात का विश्वास दिलाता हूं कि हमारे जवानों का यह बलिदान किसी भी स्थिति में व्यर्थ नहीं जाएगा: मुख्यमंत्री श्री myogiadityanath जी