लाल क़िले की घटना के बाद किसान आंदोलन का क्या होगा - BBC News हिंदी

लाल क़िले की घटना के बाद किसान आंदोलन का क्या होगा

27-01-2021 07:20:00

लाल क़िले की घटना के बाद किसान आंदोलन का क्या होगा

क्या मंगलवार को हुई हिंसा को आधार बनाते हुए सरकार इस आंदोलन को बंद करवा देगी या फिर किसान आंदोलन और उग्र हो जाएगा?

Getty Imagesपुलिस ने कम से कम चार एफ़आईआर भी दर्ज की है. दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने हिंसा के लिए किसानों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "ट्रैक्टर रैली के लिए वक़्त और रूट कई दौर की बैठकों के बाद तय किया गया था. लेकिन किसान तय रूट की बजाए दूसरी जगह से ट्रैक्टर ले आए और वो भी तय वक़्त से पहले. इसके बाद हुए बवाल में कई पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं."

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वीडियो कैप्शन,ट्रैक्टर परेड: जब किसानों ने बेकाबू भीड़ के हाथों से पुलिसवाले को बचायाज़िम्मेदारी किसकीकिसान इन सबके लिए अपने कुछ 'भटके' हुए साथियों और दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि पुलिस ने कई ट्रैक्टर तोड़ दिए हैं और उन्हें उनका जुर्माना देना होगा.

किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी कर ट्रैक्टर परेड को तत्काल प्रभाव से ख़त्म करने की घोषणा की. इस मामले में राजनीतिक पार्टियों के भी बयान आने लगे. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर परेड में हुई हिंसा की निंदा की है.उन्होंने ट्वीट कर कहा, "दिल्ली में चौंकाने वाले दृश्य. कुछ तत्वों की ओर से की गई हिंसा अस्वीकार्य है. शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे किसानों ने जो साख बनाई है, ये उसे नुक़सान पहुँचाएगा. किसान नेताओं ने ख़ुद को इससे अलग कर लिया है और ट्रैक्टर रैली को रोक दिया है. मैं सभी वास्तविक किसानों से दिल्ली ख़ाली करने और सीमाओं पर लौटने की अपील करता हूँ." headtopics.com

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है और मोदी सरकार को कृषि क़ानून को वापस ले लेना चाहिए.एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने भी कहा कि जिस तरह से आंदोलन को हैंडल किया गया वो अफ़सोसनाक है. आम आदमी पार्टी ने भी इसके लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया. डीएमके और ममता बनर्जी ने भी इसके लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.

मीडिया के साथ बातचीत में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि पुलिस ने उन रास्तों पर भी बैरिकैडिंग की, जिन पर ट्रैकटर रैली की सहमति बनी थी.उन्होंने कहा, "एक रास्ता तो दोगे. ये एक बड़ी साज़िश है. पुलिस ने जो रास्ता दिया, उसी पर बैरिकेडिंग थी तो ज़ाहिर है किसान दूसरे रास्ते पर चले गए. कुछ लोग ऐसे ज़रूर थे, जो कभी आंदोलन का हिस्सा नहीं थे और तय करके आए थे कि आगे ही जाना था. हम उनको चिंन्हित करेंगे. जो एक दिन के लिए आए थे, वो बिगाड़ा करते हैं. लाल क़िले पर जो हुआ वो ग़लत हुआ. कोई धार्मिक प्रोग्राम हमारे आंदोलन का हिस्सा नहीं है. हम इसकी कड़ी निंदा नही करते हैं."

वीडियो कैप्शन,ट्रैक्टर परेड: किसानों ने लाल किला पर लगाया केसरी झंडाकई लोग इसे दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस की नाकामी भी क़रार दे रहे हैं. लेकिन बीजेपी इसके लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ़ कर रही है.बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, "मैं दिल्ली पुलिस का अभिनंदन करूंगा जिस तरह उन्होंने इतने उकसावे के बाद भी शांतिपूर्ण तरीक़े से स्थिति को संभाला. हमें पुलिस की समस्या समझना चाहिए. अगर पुलिस पहले बल प्रयोग करती तो यह किसान जो विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं और कई राजनीतिक दल जो उस विक्टिम कार्ड को राजनीतिक और इंटेलेक्चुअल कवर दे रहें हैं, उसको और ज़्यादा बल मिलता.''

इमेज स्रोत,Getty Imagesकिसान आंदोलन से जुड़े स्वराज पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने लाल क़िले पर ऐसी हरकत की है, वो पहले दिन से ही आंदोलन का हिस्सा नहीं थे.किसान नेता मंजीत सिंह ने बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा से बातचीत में कहा कि लाल क़िला पर जाने की किसी की कोई योजना नहीं थी. मंजीत सिंह के अनुसार कुछ लोगों को भड़काया गया था. संयुक्त किसान मोर्चा ने भी एक बयान जारी कर कहा कि कुछ असामाजिक तत्व हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन में दाख़िल हो गए थे. headtopics.com

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अपने बयान में कहा कि ''शांति ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है और इसका कोई भी उल्लंघन आंदोलन को नुक़सान पहुँचाता है.''वीडियो कैप्शन,ट्रैक्टर परेड के बाद किसान आगे क्या करेंगे, योगेंद्र यादव क्या बोले?किसान आंदोलन का क्या होगा?मंगलवार की घटना के बाद सबसे अहम सवाल यही है कि अब किसान आंदोलन का क्या होगा. क्या किसान आंदोलन से जुड़े नेता मंगलवार की घटना के बाद किसी तरह के दबाव में हैं और जिस तरह से इस पूरी घटना पर उनका बयान आया, उससे वो थोड़े बैकफ़ुट पर आ गए हैं?

वरिष्ठ पत्रकार सीमा चिश्ती ऐसा नहीं मानतीं. बीबीसी से बातचीत में वो कहती हैं, ''वो (किसान नेता) बहुत परिपक्व और बहुत हिम्मती लोग हैं जिन्हें लंबे अर्से तक कार्यक्रम चलाने का अनुभव है. वो बहुत साफ़ और सीधे तरीक़े से अपनी बात अब तक कहते आए हैं. वो जानते हैं कि जिस प्रकार सरकारी तंत्र और मीडिया तंत्र पर इस सरकार का पूरा नियंत्रण है कि इससे (लाल क़िले की घटना) पूरी बात ही भटक जाएगी. यह उनकी अक़्लमंदी का सबूत है कि वो तीन क़ानून की बात कर रहे हैं ताकि पूरे किसान आंदोलन को सिर्फ़ लाल क़िले की एक घटना से ना जोड़ा दिया जाए.''

कृषि मामलों के जानकार देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि समाज और मीडिया पूरा इलज़ाम किसानों के मत्थे मढ़ने की कोशिश कर रहा है. उनके अनुसार किसानों को अराजक तत्व या आतंकवादी कहना बिल्कुल ग़लत है.देवेंद्र शर्मा भी मानते हैं कि मंगलवार की घटना से किसानों ने अब तक जो मोरल हाइग्राउंड ले रखा था उस पर कोई आँच नहीं आएगी और वो बरक़रार है. देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि मंगलवार की घटना से किसान बहुत दुखी हैं लेकिन अपनी माँगों को लेकर वो बिल्कुल स्पष्ट हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं आएगा.

इमेज स्रोत,Getty Imagesहालाँकि वो कहते हैं कि किसान नेताओं को इसकी सामूहिक ज़िम्मेदारी तो लेनी होगी.वो आगे कहते हैं, "जो लोग वहाँ बैठे हैं, वो दर्द और पीड़ा को लेकर आए हैं. उन्हें उम्मीद थी कि वो धरने पर बैठेंगे तो उनका समाधान निकलेगा. दिल्ली सीमा पर भले ही किसान दो महीने से बैठे हैं, लेकिन पंजाब में तो तीन-चार महीने से मूवमेंट चल रहा था. कुछ एक कमी तो रही है कि कोई समाधान नहीं निकला.'' headtopics.com

कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार मंगलवार की घटना की आड़ में किसान आंदोलन को ख़त्म करने की कोशिश कर सकती है.बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ऐसा नहीं मानते और कहते हैं कि सरकार किसी मौक़े का लाभ नहीं लेना चाहती.बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "हम प्रजातांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं. किसान शांतिपूर्ण तरीक़े से आंदोलन करना चाहें, उनका स्वागत है. हम आख़िर तक प्रजातांत्रिक मूल्यों को इस भारत में महत्वपूर्ण स्थान देते हैं. उसमें विरोध करने का और अपनी बात रखने का सबको अधिकार है. लेकिन कोई यह कहे कि अल्पमत में रहने वाले लोगों की बात चल जाएगी तो ऐसा नहीं होगा.''

गोपाल कृष्ण अग्रवाल के अनुसार भारत में 14 करोड़ किसान हैं और दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की तादाद उनकी तुलना में बहुत कम है, जो इस क़ानून का समर्थन कर रहे हैं.इमेज स्रोत,Getty Imagesक्या कर सकती है सरकार?तो क्या सरकार क़ानून की वापसी को लेकर कोई दोबारा विचार कर सकती है?

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देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि सरकार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए था और इन तीन क़ानूनों को वापस ले लेना चाहिए. बीजेपी के प्रवक्ता इससे साफ़ इनकार करते हैं.वो कहते हैं कि जबसे आंदोलन शुरू हुआ है, सरकार ने किसानों से 11 राउंड में 45 घंटे की बात की, 20 से ऊपर बदलाव को लिखित रूप से दिया है, सरकार ने इन क़ानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव रखा और किसानों के साथ मिलकर कमेटी गठन करने का प्रस्ताव रखा. लेकिन सरकार ने सब कुछ ठुकरा दिया.

वो आगे कहते हैं, ''क़ानून वापसी की बात करना जायज़ नहीं है. यह तो अल्पसंख्यक की राय बहुसंख्यक किसानों पर थोपना है. इससे दूसरा आंदोलन खड़ा हो सकता है. 1991 के बाद सबसे महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है. सब बातें करते थे, लेकिन किसी में यह क़ानून लाने की हिम्मत नहीं थी. कभी भी सुधार करना होता है तो उसके लिए राजनीतिक कैपिटल इंवेस्ट करना पड़ता है. मोदी ने इसमें इंवेस्ट किया है. सरकार में यह स्पष्ट मत है कि यह क़ानून किसानों के हित में है और लाखों-करोड़ों किसान इसके समर्थन में हैं."

लेकिन सीमा चिश्ती बीजेपी प्रवक्ता के इस तर्क से सहमत नहीं हैं. वो कहती हैं, ''एक महामारी से दुनिया जूझ रही है, भारत जूझ रहा है. उसके बीच में तीन क़ानून इस तरह से लाए जाते हैं. उन पर बहस नहीं होती है, उन पर वोट नहीं होता है और उनको बिना किसी कमेटी के भेजे यूँ हीं एक दिन में ही पास कर दिया जाता है. तो यह किस तरह की बहुमत है. इसकी अभी ज़रूरत क्या थी कि इसको लाया जा रहा है.''

इमेज स्रोत,Getty Imagesकिसान नेताओं ने कहा है कि वो अपनी अगली रणनीति एक दो दिन में तय करेंगे. किसानों ने एक फ़रवरी को बजट के दिन संसद मार्च करने की घोषणा की थी, लेकिन सीमा चिश्ती को लगता है कि शायद संसद मार्च को अब टाल दिया जाए और मामला को ठंडा करने की कोशिश करेंगे.

सीमा चिश्ती कहती हैं, ''किसान अपने मुद्दे (क़ानून वापसी) पर बात करना चाहेंगे और सरकार चाहेगी कि मुद्दे पर बात ना हो, किसी तरह से इस बात को झंडे पर ही अड़ा दिया जाए. मोदी सरकार के लिए और विशेष रूप से गृहमंत्री के लिए उनके रिकॉर्ड पर बहुत बड़ा कलंक है. रिपब्लिक दिवस पर हर जगह नाका होता है, पुलिस तैनात रहती है. सबको पता है कि किसान ट्रैक्टर रैली करने वाले हैं और इतने बड़े क़िले (लाल क़िले) की हिफ़ाज़त अगर सरकार नहीं कर पाई, तो उनके लिए भी एक धक्का है, उनकी छवि को क्षति पहुँची है."

सीमा चिश्ती के अनुसार सरकार चाहेगी कि इसे क़ानून-व्यवस्था का मामला बनाकर पेश किया जाए लेकिन वो इससे किसान आंदोलन को कमज़ोर होता नहीं देख रही हैं.इमेज स्रोत,Getty Imagesकिसान नेताओं का अगला क़दम क्या होगा उसके बारे में पूरी जानकारी कुछ घंटों में शायद मिले लेकिन इतना ज़रूर है कि मंगलवार की घटना के बाद उनके सामने कुछ चुनौतियाँ ज़रूर हैं.

मसलन आंदोलन में एकजुटता कैसे बरक़रार रखी जाए, आंदोलन में जो युवा वर्ग शामिल हैं, उन्हें कैसे अनुशासन में रखा जाए और इन सबके अलावा सरकार पर कैसे दबाव बनाए रखा जाए ताकि आंदोलन कमज़ोर नहीं पड़े. और पढो: BBC News Hindi »

Disha Ravi case: सामने आ गए 26 जनवरी साजिश के चेहरे? देखें दंगल

जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी से उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा. जिस टूल किट के आधार पर 26 जनवरी की हिंसा के मामले में दिशा रवि गिरफ्तार हुई है, उसे लेकर दिल्ली पुलिस के सूत्र बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं. दिशा रवि का एक व्हॉट्सअप चैट सामने आया है. ये चैट तब का है जब गलती से क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने टूलकिट ट्विटर पर डाल दिया था. Whatsapp Chat में दिशा ने साफ तौर पर ये आशंका जतायी थी कि वो अब UAPA कानून में फंस सकती है. इस बीच टूल किट से जुड़े नए-नए किरदारों का खुलासा भी हो रहा है. कनाडा में रहने वाली अनीता लाल से लेकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करने वाले भजन सिंह भिंडर तक टूलकिट का कनेक्शन पहुंच रहा है. दिल्ली पुलिस के सूत्र ये भी कह रहे हैं कि अंडरग्राउंड हो चुका है, इंजीनियर शांतनु 20 से 27 जनवरी के बीच टीकरी बॉर्डर पर रहा था. क्या दिशा रवि को विपक्ष का एक निहत्थी लड़की कहना भूल है? क्या दिल्ली पुलिस की जांच किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं तक पहुंच सकती है? और क्या अब खालिस्तान की साजिश का पूरा खुलासा होगा? देखें दंगल, रोहित सरदाना के साथ.

Andolan jaari rahega. कुछ चुतिये दलाल बीमार दिमाग इस गुंडे मावली गैंग को किसान समझता है आन्दोलन खत्म होगा अब कांग्रेस का खेल खत्म। Kisaan aandolan jaari rahega ,,jo kuchh hua uski jaanch ho taaki sahi baat saamne aaye Tum aur aag lagao. Iske baad desh ka kya hoga ye sochna chahiye.. andolan us chiz ke oiye jo ab hai hi nahi .bakwas hai..

Farmers agitation will go on till their demands are met. Now it fight for getting rights . मोदी जी इसके जिम्मेदार हैं उन्हें देश में शांति स्थापित करनी चाहिए। बिल वापस लेने चाहिए अब कुछ नहीं दिल्ली की जनता ही पेलगी इनको। सारा भूत उत्तर जाएगा इन सूअरों का। bbc fool le kr puja kregi ki mera agenda pura kiya.

लाइन में खड़े करके किसान नेताओं को गोली मार दो ही म****** जेहादी है ये लाल रंग कब आम जनता को निचोडेगा, ये लाल रंग कब पीछा छोडेगा ..... The end. बीबीसी का भी So called kisano ki ठुकाई हो gi Kya hogan.. tum jaise media phir bologe kisano ke saath thik nahi ho raha.. ये किसान नहीं गुंडे हैं, असली किसान तो खेत में हैं।

Kisan andolan jindabad यह किसानों का आंदोलन कहाँ था,दंगाईयों और खालिस्तान समर्थकों का आंदोलन था। दंगों का नुकसान इनके नेताओं से वसूली होनी चाहिये MUST READ for Every INDIAN और powerful होकर peacefully चलता रहेगा जैसे अब तक चलता आया है 6 महीने से जब तक मांग नहीं मानी जाती jai गोदी मीडिया के दलाल पत्तल कारों देखो मोदी कि पुलिस किसानों पर लाठियों से फूल बरसा रहे हैं, आंख हो तो देख लो, किसनों के शांतिपूर्ण आंदोलन को मोदी सरकार के शुभ चिंतकों ने भड़काया है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार की है,

Andolan ageh bhi chaleh gah 1st feb ko shansad kah gerav hoga Serkar ki itni galtiyo k baar bhi wo satta me hai ya nahi? Usi terha andolan bhi rahenga. Fark itna hai k kisaan ki galti her channel bata raha hai GOV ki koi nahi bataata. Tension mat lo her derd ki dava hai As expected BBC defended violent incident of kissans and afDelhi n criticised govt As regard further action of govt we all know that it is not farmer movement but conspiracy of antinationalas terrorists traitors jehadis n disgruntled opp leaders Now it is govt to act

Khatm muh me lega atankwadi sab अच्छा दूध खराब करनेके लिए एक बूंद नींबूरस काफी होता है। जबकि,यही एक बूंद ब्यापारी के लिए रसगुल्ले बनाने में मददगार बन जाता है। 💐संजय ओझा कटक💐 कूटे जाएंगे ये किसान नही किसान भेष में गुंडे हैं इनको हर हाल में दिल्ली से बाहर खदेडा जाये। PeacefulProtestContinues It's no longer Kisan Andolan ! Pls don't insult farmers like our tricolour please

किसान आंदोलन जारी रहेगा। ये किसान नहीं दंगाई और आतंकवादी हैं किसान_नहीं_गुंडे DelhiUnderAttack TirangaAboveEverything Koi baat nahi Lal kila pe jhanda Modi supporters hi faila sakte hain,ab suney deol kinara kar rahe ye sahi nahi ,pahle dosti nibhaani chahiye baad mein politics After being viral of Photographs of deepsidhu with AmitShah and iamsunnydeol , Indian media Queens like navikakumar chitraaum anjanaomkashyap are on Back foot. So, FarmersProstests will continue, yes people of India has seen Reality of BJP4India and their Goons.

किसान बैठेंगे, किसी को शर्म आएगी तो आएगा मनानें.!! कुछ नही होगा अब हम किसानो के साथ नही है जो सरकार ने बिल पारित किये है ऊन को स्वीकार कर लो नही तो लंगर चखते रहो ModiYouCantFailFarmers PeacefulProtestContinues ModiYouCantFailFarmers PeacefulProtestContinues अब तो लट्ठ पड़ेंगे, किसान तो थे ही नहीं ये उपद्रवी थे 😡😡

पुलवामा हमले में 40 जवानों के शहादत पर अर्नब गुस्वामी ओर उसके आका जश्न मना सकते हैं ,तो लाल किले पर तो तिरंगे के पास निसान साहिब फहराया हैं इस से कुछ नही होगा लोगो में लंगर लगाने के प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी ,इंसानियत का पैगाम जाएगा बाकी किसान जीतेंगे हिटलर हारेगा Mujhe to itna pta h jo achche din aane wale the aa gye ab dekho kya hoga me andhbhakt nhi hun bus itna maloom h jo hua sub nuksaan hi hua h ab tak ye samjhlo godi midia anye sab bekaar h ab to desh ka jhanda leke aandolan karke sarkaar ko htain

अरे हद करते हो आंख मिच कर बोलने वालो कुछ तो शर्म कर लो थोड़ी तो आंखे खोल लो जो बोल रहे हैं कि दिल्ली पुलिस कम नहीं है तो साले अंधभक्तों ये भी तो सोच लो कि पुलिस के जवान भी तो किसान के ही बेटे हैं क्यों उनको एक दूसरे का विरोधी बना रहे हो शर्म करो शर्म शर्म_करो_शर्म_अंधभगतो BBC valo ke pichhvade me ghused diya jaega

यह ब्राह्मणवादी मीडिया किसानों को पहले दिन से देशद्रोही से लेकर खालिस्तानी बता रहा है, लेकिन किसान शांति से अपनी बात रख रहे हैं। कल मतलब 26 जनवरी 2021 के बाद भारत का गणतंत्र संभवतः अधिक समावेशी होगा, और यह परिवर्तन सिर्फ किसानों के चलते हो पा रहा है! मेरा किसानों को सलाम!🙏🙏🙏 Yaar ye bhe koi poochne wali baat hai ke lal qile ki ghatna ke baad kisan aandolan kya hoga.. sabko pata hai kya hoga 😔😔😥😥🙊🙊🙊

कोई भी न्यूज चैनल देख लीजिए यह दलाल गोदी मीडिया कल की घटना को लेकर संविधान की दुहाई दे रहे हैं। वहीं 60 से ज़्यादा किसानों की कड़कड़ाती हुए सर्दी में तड़प तड़प कर मौतों पर कभी शर्मसार महसूस करते नजर नहीं आए यह दलाल साले🤬🤬🤬 कुछ भी हो हम एमएसपी c2+fl चाहिए क्रांति अभी अधूरी है लड़ाई आगे जारी रहनी चाहिए

अब क्या होगा, क्या नही होगा, वो तो बात की बात हैं, पहले दिल्ली पुलिस बताएगी वैक्सीन का ट्रायल देकर उन किसान रूपी दंगाइयों को जिसने 26 जनवरी में वादाखिलाफी करके तांडव मचाया था।😎 Kissan Peaceful Protest kr rhe the aur aage bhi krenge . Janta apne Anndata ke Saath . Sabko pata hai kal ke hinssa me kiska haath hai . PeacefulProtestContinues

बस कर ये किसान हे अब भी सर्म हे की नही जुते से मरना चाहिए तुम जेसे न्यूज़ चेनलो को सारे लेफ्ट किसान रुपी खालिस्तानी आतंकवादी और कोन्ग्रेश पार्टी के लोग जहा भी दिखे अगर सच्चे भारतीये हो और तिरंगे का सम्मान करते हो तो इन्हे जहा दिखे जुते से मरो Sec 144 laga ke khali kara dena chahiye . किसान आंदोलन नहीं रुकेगा चाहे सालो साल निकल जाए किसान अपने हक के लिए अपने खून की आखरी बून्द तक लड़ेगा ....!!!! किसान जीतेगा पूंजीवादी गुलाम हारेगा ..!!!

rashtrapatibhvn RakeshTikaitBKU _YogendraYadav BJP4India capt_amarinder BJP4India BJPLive INCIndia A hard lesson to be learnt by learned citizens of this great country.Identify protestors' leaders & protestors & their modus operandi.Destruction, destruction & destruction. Vahi hoga jo jaliyanwala kand k baad aajadi aandolan ka hua tha

आंदोलन अगर किसान करें तो ठीक मगर अब इस आंदोलन का कोई नेता बना तो सरकार को उसे उठा कर जेल भेज देना चाहिए। क्योंकि ये नेता ही सिधे साधे लोगों का भायदा अपने आर्थिक स्वार्थ के लिए उठाते है। AmitShah capt_amarinder BJP4India शाहीनबाग में हाथ में सविधान पुस्तक रख रक्षा के नाम पर महीनो रोड ब्लाक और फिर 50 से ज्यादा मौत और दंगा हिंसा टैक्टर पिरेड और तिरंगा लेकर राष्टीयपर्व के दिन दिल्ली में हिंसा उत्पादन दंगा देशविरोधी और अराजकतत्वो शांतिपूर्ण सत्याग्रह अभिव्यक्ति की आजादी के नकाब सें फायदा उठाते है

दीप सिद्दू को जानते हो ? ये सनी दयोल का राइट हैंड है ये था झंडा फहराने वाला इसके साथ बीजेपी आरएसएस के गुंडों ने किसानो के बीच घुसपैठ करके अराजकता फैलाई किसान 2 महीने से बार्डर पर ठंड में बैठ कर विरोध कर रहा था चाहता तो पहले दिन से दंगे शुरू कर देता परन्तु जनता समझ गई हिसाब करेगी For every problem there is one and only one solution....modi..

आंदोलन जारी रहेगा! 👍 PeacefulProtestContinues कृषि बिल बापस लेने ही पड़ेंगे अच्छा,वो लाल किला 2018 से डालमिया को ठेके पर दे रखा है। सोचा, याद दिला दूं .. 🚜🚜 अब इन धूर्त BBC न्यूज हिंन्दी ,,आपको क्या लगता है हिजरौंके_देशमे_सुरक्षित_रह_सक्ते_हो वरना कुत्तेकी आवारा गर्दी फौरन कुचल दिया जाता है । Ab to aur sakht kanoon bane

इस आंदोलन का बती बनाकर फर्जी किसान अब अपने पिछवाड़े में डालकर घर को जाएंगे। लाल किला तो फतेह कर लिया, ननकाणा साहिब, करतारपुर साहिब पर कब झंडा फहराओगे...? किसान आन्दोलन कमजोर होगा हम आम लोग अब किसानों का सपोर्ट करेंगे Gand lagegi फिलहाल पूरे दिल्ली में दंगा हुआ पड़ा है। सिंघु बॉर्डर से निकले खालिस्तानी आतंकी अब पूरी दिल्ली को आग लगा रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने दिल्ली के लाल किले से भारत का झंडा हटा कर खालिस्तानी का झंडा लगा दिया। मेरा यकीन करो यह एक टेररिस्ट अटैक है।

वामपंथियों की महीने भर पूर्व से किसान कानून को बहाना बनाकर दिल्ली को हिंसाग्रस्त करने की गुप्त योजना थी और वो 26 जनवरी 2021 को पूर्ण हुई | पुलिस इन वामपंथियों पर कठोर धाराओं में FIR दर्ज करे व सजा दे अन्यथा दिल्ली हिंसा का अखाडा प्रतिवर्ष बनेगी 🙏🙏 HMOIndia CPDelhi So called protests की बत्ती बनाकर पिछवाड़े में डाल दी जाएगी।

योगेन्द्र, राकेश ऐसे किसान नेताओ और जितने भी अराजक तत्व थे उन सब को पहचान के 1,1 करके आजीवन कारावाश होना चाहिये, जो देश का नहीं वो किसान नहीं वो साले आतंकवादी हैं, जिसने तिरंगा फेका उसे उसी जगह पे गोली मार देना चाहिए था सर्म आनी चाहिये केजरिवाल को❓ केन्द्र को❓