रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के इस द्वीप को बता रहे हैं ‘एक बड़ी जेल’ - BBC News हिंदी

रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के इस द्वीप को बता रहे हैं ‘एक बड़ी जेल’

30-05-2021 14:43:00

रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के इस द्वीप को बता रहे हैं ‘एक बड़ी जेल’

म्यांमार से भागकर आये रोहिंग्या मुसलमानों के रहने के लिए बांग्लादेश की सरकार ने समंदर के बीच एक टापू तय कर दिया है, शरणार्थी जिसकी तुलना जेल से कर रहे हैं.

समाप्तएक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों में दिलारा उन कुछ पहले लोगों में थीं, जो भासन चार पहुँचे.भासन चार समंदर के बीच, ज़मीन का एक टुकड़ा है जिसका आकार 40 वर्ग किलोमीटर बताया जाता है. इस जगह को अभी तक केवल मछुआरे ही थोड़ी देर रुककर आराम करने के लिए इस्तेमाल करते थे.

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इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,शरणार्थियों को अलग-अलग समूहों में नौसेना के जहाज़ों से इस द्वीप पर ले जाया जा रहा है.बांग्लादेश प्रशासन ने कॉक्सेस बाज़ार में ज़रूरत से ज़्यादा भरे हुए शरणार्थी कैंपों की समस्या का यह समाधान निकाला है.कॉक्सेस बाज़ार लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थियों का घर है. इनमें से ज़्यादातर लोग म्यांमार (बर्मा) में हुए नस्लीय हमलों से जान बचाकर साल 2017 में यहाँ आये थे. संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार की सेना द्वारा कराये गए इन हमलों को 'नस्लीय नरसंहार का स्पष्ट उदाहरण' घोषित किया था.

मगर ये शरणार्थी कैंप, जिन्हें रोहिंग्या मुसलमानों ने कुछ वर्ष पहले अपना घर बनाया, बांग्लादेश प्रशासन के अनुसार अब अपराध का गढ़ बन चुके हैं.यह भी पढे़ं:म्यांमार तख़्तापलट: आंग सान सू ची सेना का बचाव किया करती थीं लेकिन अब क्या करेंगी?भासन चार जिसे 350 मिलियन डॉलर ख़र्च करके बांग्लादेश ने शरणार्थियों के लिए तैयार किया है, उसे एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. यह एक द्वीप है जो समुद्र से 15 साल पहले ऊपर आया है. headtopics.com

जिन शरणार्थियों की बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत हुई, वो एक अलग ही कहानी बताते हैं.उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ कोई काम नहीं है. बहुत कम सुविधाएं हैं और एक अच्छे भविष्य की उम्मीद भी ना के बराबर है.वो कहते हैं कि जो लोग इस जगह से भागने की कोशिश करते हैं, उन्हें पकड़कर पीटा जाता है. साथ ही यहाँ रहने वाले शरणार्थी मानसिक तनाव बढ़ने की वजह से एक-दूसरे के साथ झगड़ने लगे हैं. स

बसे भयावह बात ये है कि यह द्वीप समुद्र से सिर्फ़ दो मीटर यानी सिर्फ़ छह फ़ीट की ऊंचाई पर है और लोगों में डर है कि कोई भी बड़ा तूफ़ान उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है.इमेज स्रोत,Getty Imagesइमेज कैप्शन,बांग्लादेश के अनुसार, उन्होंने यहाँ शरणार्थियों के घर बनाने के लिए 350 मिलियन डॉलर ख़र्च किये हैं.

बीबीसी को पिछले साल इस द्वीप का दौरा करने का मौक़ा मिला था. हालांकि, इस समय ये बताना मुश्किल है कि वहाँ क्या हो रहा होगा.भासन चार द्वीप बांग्लादेश की मुख्यभूमि से 60 किलोमीटर दूर है और यहाँ किसी भी पत्रकार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मानवाधिकार संगठनों को स्वतंत्र रूप से जाने की अनुमति नहीं है.

इस रिपोर्ट में लोगों की गोपनीयता बनाये रखने के लिए उनके नाम बदल दिये गए हैं.'बहुत वीरान जगह'हलीमा जब अपने परिवार के साथ दिसंबर में भासन चार पहुँची, तो वो गर्भावस्था के अंतिम चरण में थीं.जिस रात वो यहाँ पहुँचीं, उसे याद करते हुए वे बताती हैं कि "मैं सोच रही थी कि हम यहाँ ज़िंदा कैसे रहेंगे. यह एक बिल्कुल वीरान जगह है, जहाँ हमारे अलावा कोई नहीं है." headtopics.com

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"इस अकेलेपन का अहसास तब और भी बढ़ गया, जब दूसरे ही दिन मुझे लेबर-पेन होने लगा और वहाँ डॉक्टर या नर्स के मिल पाने की कोई संभावना नहीं थी. मैं इससे पहले भी बच्चों को जन्म दे चुकी हूँ, पर इस बार यह बहुत भयानक था. मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि मुझे कितना दर्द हुआ."

उनके पति इनायत ने उसी ब्लॉक में रह रही एक रोहिंग्या महिला से मदद माँगी जिन्हें आया के तौर पर काम करने का थोड़ा अनुभव था.हलीमा बताती हैं कि मेरी मदद ऊपरवाले ने की. उनकी एक बेटी हुई जिसका नाम उन्होंने फ़ातिमा रखा.इनायत ने एक नई ज़िंदगी की उम्मीद में अपने परिवार को बिना बताये इस द्वीप पर आने की सहमति दे दी थी.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने हमें वादा किया था कि हर परिवार को ज़मीन का टुकड़ा (प्लॉट) मिलेगा. गाय-भैंसें मिलेंगी और व्यापार शुरू करने के लिए एक लोन भी मिलेगा.हालांकि, हक़ीक़त इससे बहुत अलग थी. फिर भी हलीमा ख़ुश हैं कि उनके पास साफ़ पानी, बिस्तर, गैस-चूल्हा और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं.

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Bangladesh and Rohangia म्यमार अगर ईसाई देश होता तो बीबीसी यह रिपोर्ट नहीं छापता। बीबीसी की चीन से याराना है तो इन बेचारे रोहिंग्याओं को चीन में ही सेट करा दे। चीन घटती आबादी से वैसे भी चिंतित है बांग्लादेश में इतिहास की पुस्तकों में यदि रामायण और महाभारत पढ़ाई होती तो शायद रोहिंग्याओं को समुद्र के बीच ''डूबने वाले टापुओं '' पर अलग से ले जाकर बसाना नहीं पड़ता । सऊदी अरब इस राह पर चल पड़ा है वहां का प्रिंस काफी अच्छी दूरदृष्टि रखता है ।

Muslim's have made themselves problems everywhere they shd find out the reason n solve it

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