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रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा, केंद्र ने SC से कहा- विचार कर रहे हैं

दिल्ली में रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर

24-11-2020 10:49:00

दिल्ली में रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर

रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 4 सप्ताह बाद इस पर सुनवाई करेगा. केंद्र ने उच्चतम न्यायलय को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में रेलवे लाइनों के साथ 48 हजार झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि रेलवे, शहरी विकास और दिल्ली सरकार एक साथ बैठकर समाधान निकालेंगे और तब तक झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा.

नई दिल्ली: दिल्ली में रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है. फिलहाल इन झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा. रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 4 सप्ताह बाद इस पर सुनवाई करेगा. केंद्र ने उच्चतम न्यायलय को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में रेलवे लाइनों के साथ 48 हजार झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि रेलवे, शहरी विकास और दिल्ली सरकार एक साथ बैठकर समाधान निकालेंगे और तब तक झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा. 

हैवानियत/ केरल में 17 वर्षीय लड़की से 38 पुरुषों ने किया दुष्कर्म, अब तक 20 गिरफ्तार हमसे भी ऊपर कोई अदालत होती तो हमारे आधे आदेशों को पलट दिया जाता : सुप्रीम कोर्ट एक डोज से नहीं बनेगी बात, वैक्‍सीन की लेनी होंगी दो खुराक जानें- कैसे काम करती है बूस्‍टर डोज

यह भी पढ़ेंRead Also: SC ने PM मोदी के वाराणसी से निर्वाचन के खिलाफ दायर BSF के पूर्व जवान की याचिका खारिज कीबताते चलें कि 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की लगभग 48,000 झुग्गी-झोंपड़ियों (Slums) को हटाने का आदेश दिया था. साथ ही निर्देश दिया है कि कोई भी अदालत झुग्गी-झोंपड़ियों को हटाने पर कोई स्टे न दे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा था कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण के संबंध में यदि कोई अदालत अंतरिम आदेश जारी करती है तो यह प्रभावी नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने यह आदेश एम सी मेहता मामले में पारित किया था. 

रेलवे (Railways) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के साथ झुग्गीवासियों का अतिक्रमण हैं जिसमें 70 किलोमीटर लाइन के साथ यह बहुत ज़्यादा है, जो कि क़रीब 48000 झुग्गियां है. रेलवे ने कहा कि एनजीटी ने अक्टूबर 2018 में आदेश दिया था जिसके तहत इन झुग्गी बस्ती को हटाने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स का गठन किया था लेकिन राजनैतिक दख़लंदाज़ी के चलते रेलवे लाइन के आसपास का यह अतिक्रमण हटाया नहीं जा सका है. रेलवे ने कहा कि इसमें काफ़ी अतिक्रमण तो रेलवे के सुरक्षा ज़ोन में है जो कि बेहद चिंताजनक है.  headtopics.com

Read Also: पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में CBI या NIA जांच की याचिका पर SC में सुनवाई टली Listen to the latest songs, only on JioSaavn.comसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने आदेश में कहा है कि ये झुग्गी बस्ती हटाने के लिए चरणबद्ध तरीक़े से काम किया जाए और रेलवे सुरक्षा ज़ोन में सबसे पहले अतिक्रमण हटाया जाए, जो कि तीन महीने में पूरा कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा है कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण हटाने के काम में किसी भी तरह के राजनैतिक दबाव और दख़लंदाज़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. Supreme CourtCentral GovtSlum Near Railway Trackटिप्पणियां भारत में कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus pandemic) के प्रकोप से जुड़ी ताज़ा खबरें तथा Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें

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Balochistan-Sindh आजादी की मांग, क्या Imran Khan से नहीं संभल रहा है Pakistan?

ये सवाल पूरा पाकिस्तान पूछ रहा है, क्या हुआ इमरान, नहीं संभल रहा पाकिस्तान? दरअसल, पाकिस्तान के पांच प्रांतों में से तीन उससे अलग होने की मांग कर रहे हैं. सिंध में अलग सिंधुदेश की मांग को लेकर रविवार को जबरदस्त रैली निकली. पाकिस्तान में परदे के पीछे से फौज ही सरकार चलाती है. इमरान खान को भी फौज की कठपुतली माना जाता है. पाकिस्तान के लोग फौज पर सवाल नहीं उठाते. लिहाजा उनका गुस्सा इमरान के खिलाफ ही फूट रहा है. अलग-अलग प्रांतों में बगावत के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इमरान से पाकिस्तान अब नहीं संभल रहा है? देखें खास कार्यक्रम, सईद अंसारी के साथ.

अति सुन्दर फैसला है पर सोचने वाली बात है आम आदमी को घर देने की जगह तोड़ने की वकालत करने वाला जो भी हो पर मेरे समझ से इंसान कहलाने के लायक नहीं अतिक्रमण को बढाबा दिया जा रहा है दिल्ली में सभी सरकारी जमीन पर झुग्गी वालों को बसा दो इससे दिल्ली की खुबसूरती दिखाई देगी। जब उद्योगपतियों को व्यवसाय में घाटा लगने पर करोड़ों रुपए के लोन राइट आफ किए जा सकते हैं तो वैसे गरीबों को जिन्हें रहने के लिए घर नहीं है, बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उनके वर्तमान घरों को कैसे तोड़ा जा सकता है।

अगर रेलवे को नई लाइन या विस्तार करना है तो फिर कैसे होगा। सरकारी जमीनों पर अवैद्य कब्ज़ा या निवास हो तो फ़िर सरकार नई परियोजना कहा शुरू करेगी। समस्या तो है और सब कुछ सोच कर समाधान करना चाहिए। गरीब रोटी के लिए परेशान है सरकार उनके घर उजाड़ना चाहते हैं जय हो भारत के लोगों बहुत सुंदर