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रिश्वत, कश्मीर

रिश्वत आरोप के बाद मलिक ने कहा- सबको पता है कि कश्मीर में आरएसएस प्रभारी कौन था

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24-10-2021 18:16:00

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मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे तो उन्हें ‘अंबानी’ और ‘आरएसएस से संबद्ध’ एक व्यक्ति की दो फाइलों को मंज़ूरी देने के बदले में 300 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, हालांकि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था. जब आरएसएस नेता राम माधव से कहा गया कि वह उस समय जम्मू कश्मीर में थे, तो उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई भी व्यक्ति ऐसा कुछ नहीं करेगा.

नई दिल्ली:राजस्थान के झुंझनू में एक कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक यह दावा कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा के केंद्र बन गए हैं, ‘मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कहा गया था कि यदि मैं‘अंबानी’ और ‘आरएसएस से संबद्ध’ एक व्यक्तिकी दो फाइलों को मंजूरी दे दूं तो मुझे रिश्वत के तौर पर 300 करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन मैंने सौदों को रद्द कर दिया था.’

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मेघालय के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक से जब यह पूछा गया कि वो ‘आरएसएस का नेता’ कौन था, तो उन्होंने नाम बताने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि सबको पता है कि ‘जम्मू कश्मीर में आएसएस का प्रभारी कौन था.’इंडियन एक्सप्रेसके मुताबिक उन्होंने कहा, ‘उनका नाम लेना सही नहीं होगा, लेकिन आप पता कर सकते हैं कि जम्मू कश्मीर में आरएसएस प्रभारी कौन था. लेकिन मुझे खेद है, मुझे आरएसएस का नाम नहीं लेना चाहिए था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर कोई अपनी व्यक्तिगत क्षमता में काम कर रहा है या कोई व्यवसाय कर रहा है, तो उसी का ही उल्लेख किया जाना चाहिए था. चाहे वह किसी भी संगठन से जुड़ा हो, संगठन को इसमें नहीं लाया जाना चाहिए था.’इस बीच मलिक के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर आरएसएस नेता राम माधव ने सूरत में कहा, ‘उन्हीं से पूछें कि वह कौन था या क्या था.’ headtopics.com

जब राम माधव से कहा गया कि वह उस समय जम्मू कश्मीर में थे, तो उन्होंने कहा, ‘आरएसएस का कोई भी व्यक्ति ऐसा कुछ नहीं करेगा. लेकिन मैं वास्तव में नहीं जानता कि उन्होंने इसे किस संदर्भ में कहा, या उन्होंने ऐसा कहा भी है या नहीं. आपको उनसे पूछना चाहिए. उन्होंने कहा होगा ‘किसी ने यह कहा है’. मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, आरएसएस से कोई भी ऐसा कभी नहीं करता है. उन्होंने 2014 में कहा था कि हम चुनाव हार रहे हैं और हमने किसानों के साथ अन्याय किया है. यह उनकी राय हो सकती है, सच्चाई क्या है, हम नहीं जानते.’

मालूम हो कि बीते 17 अक्टूबर को राजस्थान में एक कार्यक्रम में मलिक ने कहा था, ‘जम्मू कश्मीर में मेरे सामने दो फाइलें आई थीं. उनमें से एक अंबानी का था, दूसरा आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का था. सचिवों में से एक ने मुझे बताया कि यदि मैं इन्हें मंजूरी दे देता हूं तो प्रत्येक के लिए मुझे 150 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. मैंने यह कहते हुए प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि मैं (कश्मीर में) पांच कुर्ता-पजामा लेकर आया था, और बस इन्हीं के साथ चला जाऊंगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन एहतियात के तौर पर मैंने प्रधानमंत्री से समय लिया और उनसे मिलने गया. मैंने उनसे कहा कि यह फाइल है, इसमें घपला है, इसमें ये शामिल लोग हैं, और वे आपका नाम लेते हैं, आप मुझे बताएं कि क्या करना है.’मलिक के अनुसार, ‘अगर इन परियोजनाओं को रद्द नहीं किया जाना है, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा और आप मेरी जगह किसी और को नियुक्त कर सकते हैं. लेकिन अगर मैं रहता हूं, तो मैं इन प्रोजेक्ट फाइलों को मंजूरी नहीं दूंगा. मैं प्रधानमंत्री के जवाब की प्रशंसा करता हूं- उन्होंने मुझसे कहा कि भ्रष्टाचार पर किसी समझौते की कोई जरूरत नहीं है.’

सत्यापाल मलिक ने एक बार फिर केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन करके यहां तकऐलान कर दियाहै कि यदि किसानों का प्रदर्शन जारी रहा तो वह अपने पद से इस्तीफा देकर उनके साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं.इसके अलावा वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में मलिक को कथित तौर पर यह दावा करते हुए देखा जा सकता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को रोशनी योजना के तहत भूखंड मिले थे. headtopics.com

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अब्दुल्ला और मुफ्ती दोनों ने मलिक के आरोप को झूठ बताते हुए खारिज कर दिया है. महबूबा मुफ्ती ने इसे लेकर सत्यपाल मलिक कोकानूनी नोटिसभी भेजा है.मलिक ने कहा, ‘उन्हें पता होना चाहिए कि कानूनी तौर पर वह न तो मुझे कानूनी नोटिस भेज सकती हैं और न ही मेरे खिलाफ कानूनी मामला दर्ज कर सकती हैं. अगर महबूबा ने मुझे फोन कर टिप्पणी वापस लेने के लिए कहा होता, तो मैं अपनी बात वापस ले लेता, क्योंकि मेरे साथ उनके ऐसे संबंध हैं. वह अच्छी तरह जानती हैं कि वह मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती हैं. मैंने जो कहा, मैं उस पर कायम हूं.’

गौरतलब है कि रोशनी अधिनियम फारूक अब्दुल्ला की सरकार में लागू किया गया था, जिसमें राज्य सरकार की जमीन के कब्जेदार को शुल्क देकर मालिकाना हक देने का प्रावधान था. इस योजना से प्राप्त राशि का इस्तेमाल राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं पर खर्च किया जाना था.हालांकि, जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने इस कानून को गैर-कानूनी करार देकर रद्द कर दिया था और लाभार्थियों की जांच करने की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी.

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दंगल: सिद्धू ने इमरान को बताया 'बिग ब्रदर', शुरू हुआ सियासी लड़ाई

नवजोत सिंह सिद्ध करतारपुर साहिब में मत्था टेकने गए थे लेकिन वहां इमरान खान को अपना बड़ा भाई बताकर भारत में नया विवाद पैदा कर दिया. बीजेपी ने सिद्धू के इमरान प्यार को मुद्दा बनाकर हल्ला बोला तो सफाई में सिद्धू फिर सामने आए और कहा कि मैं सकारात्मक सोच वाला आदमी हूं. और भारत-पाकिस्तान के कारोबारी और सांस्कृतिक रिश्ते फिर से शुरु होने की वकालत कर दी. सवाल है कि पाकिस्तान की धरती पर कदम रखते ही सिद्धू को इमरान खान में अपना बड़ा भाई क्यों दिखने लगता है? क्या इसकी कोई सियासी वजह है. देखें दंगल.

नाम आप ही बता दो मलिक साहब, विश्वास करो सबको मालूम है पर कोई नहीं बोलेगा विश्व की इस सबसे कायर प्रजाति के पिछवाड़े में बत्ती जलने लगती है रिश्वत का तो पता नही लेकिन काश्मिर मे RSS है। RSS का प्रभारी है तो ना 1990 मे पलायन करते काश्मिरी पंडितों की, हिंदुओ की मदद की, ना अब पलायन कर रहे हिंदुओं की मदद कर रहे है। ये वहाँ कर क्या रहे है?

स्विस बैंक काला धन आरएसएस के खाते सब निकलेंगे थोड़ा सब्र करो हे राम! हे माधव! Ram Madhav ? Ram madhav?

गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान के 1947 हमले के विरोध में व्यापक प्रदर्शन, आजादी समर्थक लगे नारेप्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और अन्य प्रशासकों से कब्जा किए गए क्षेत्र को छोड़ने की मांग की। पार्टी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीर ी ने कहा पाकिस्तान क्षेत्र पर कब्जा और जम्मू एवं कश्मीर में हजारों निर्दोष लोगों की हत्या करने का अपराधी है। To retweet this, there is no RanaAyyub ReallySwara 🐷 ndtv sagarikaghose And the list goes on........

अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के लिए पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने के समझौते के करीब अमेरिकाअमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को सांसदों को सूचित किया कि उनका अफगानिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों के संचालन के लिए पाकिस्तान से उसके हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान के साथ एक समझौते को औपचारिक रूप देने के करीब है। अच्छा है अब ठुकाई का समय आ गया । और तालिबानों की ठुकाई भी पाकिस्तान ही करवायेगा । इसी बहाने एमरोन खान को कुछ भीख में मिल ही जायेगा ।।।

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पाकिस्तान के पूर्व राजदूत बोले, जम्मू-कश्मीर में दुबई का निवेश भारत की बड़ी सफलतादुबई के जम्मू- कश्मीर में इन्वेस्टमेंट समझौते के बाद से पाकिस्तान की इमरान सरकार को उनके अपने ही कोस रहे हैं। पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने इमरान खान की विदेशनीति पर जमकर निशाना साधा है।