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यूनिसेफ: यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए या अपंग हुए | DW | 20.10.2021

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

20-10-2021 11:25:00

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है. UNICEF Yemen

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

यमन में पिछले पांच वर्षों से युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें ईरानी समर्थित हूथी विद्रोही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से लड़ रहे हैं. इस युद्ध में सऊदी अरब और क्षेत्र में उसके सहयोगी भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कि उनकी एजेंसी का अनुमान है कि यमन में अब तक 10,000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2015 में युद्ध में सऊदी गठबंधन के हस्तक्षेप के बाद से हर दिन लगभग चार बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं.

BJP सांसद गौतम गंभीर को पिछले छह दिन में तीसरी बार मिली जान से मारने की धमकी Rs 75 में BSNL दे रहा 50 दिन की वैलिडिटी के साथ डाटा और कॉलिंग बेनेफिट्स 'विवादित चेहरा', बेंगलुरु पुलिस बोली रद्द करो मुनव्वर फारुकी का शो, जानें- क्यों?

यूनिसेफ ने इसे"शर्मनाक मील का पत्थर" बताया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है मार्च 2015 से इस साल 30 सितंबर के बीच यमन में हुई लड़ाई में 3,455 बच्चे मारे गए और 6,600 घायल हुए.दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीसमुद्र में डूबने से बचाया

बच्चा सिर्फ कुछ महीने का था जब एक स्पेनिश पुलिस गोताखोर ने उसे डूबने से बचा लिया. मई के महीने में हजारों लोगों ने यूरोप पहुंचने के लिए मोरक्को से भूमध्य सागर पार करने की कोशिश की थी. ये लोग स्पेन के छोटे से एन्क्लेव सेउता पहुंच गए थे. इस तस्वीर से सेउता में प्रवासी संकट की असली झलक देखने को मिलती है. headtopics.com

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीकोई उम्मीद नहींभूमध्य सागर दुनिया के सबसे खतरनाक प्रवास मार्गों में से एक है. कई अफ्रीकी शरणार्थी समुद्र के रास्ते यूरोप पहुंचने में विफल रहने के बाद लीबिया में फंसे हुए हैं. त्रिपोली में कई ऐसे युवा हैं जो पल-पल अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्हें अक्सर कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है.

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीसूटकेस में बंद जिंदगीबांग्लादेश में कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविर दुनिया के सबसे बड़े आश्रयों में से एक है. यहां म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमानों की एक बड़ी संख्या रहती है. वहां के एनजीओ बाल शोषण, ड्रग्स, मानव तस्करी, साथ ही बाल श्रम और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर चिंता जताते हैं.

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीताजा संकटइथियोपिया के टिग्रे प्रांत में गृह युद्ध ने एक और शरणार्थी संकट पैदा कर दिया है. टिग्रे की 90 फीसदी आबादी विदेशी मानवीय सहायता पर निर्भर है. करीब 16 लाख लोग सूडान भाग गए हैं. इनमें 7,20,000 बच्चे शामिल हैं. ये शरणार्थी अस्थायी शिविरों में फंसे हुए हैं और वे अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीशरणार्थियों को कहां जाना चाहिए?तुर्की में फंसे सीरियाई और अफगान शरणार्थी अक्सर ग्रीक द्वीपों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. कई शरणार्थी ग्रीक द्वीप लेसबोस के मोरिया शरणार्थी शिविर में रहते थे. पिछले साल सितंबर में कैंप में आग लग गई थी. आग के बाद यह परिवार अब एथेंस आ गया है लेकिन अपने अगले गंतव्य के बारे में कुछ नहीं जानता है. headtopics.com

एप्पल का पेगासस के ख़िलाफ़ अदालत जाना भारत सरकार के लिए शर्मिंदगी का सबब बन सकता है संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में नहीं पहुंचे PM मोदी, AAP नेता ने भी किया बहिष्कार Delimitation : परिसीमन का प्रारूप तैयार, जम्मू संभाग की सात और सीटें बढ़ेंगी

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीएक कठिन जीवनपाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 'अफगान बस्ती रिफ्यूजी कैंप' में रहने वाले अफगान बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं है. 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के बाद से यह शिविर अस्तित्व में है. वहां रहने की व्यवस्था बेहद खराब है. शिविर में पीने का पानी और पर्याप्त आवास का अभाव है.

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीसहायता संगठनों से महत्वपूर्ण समर्थनवेनेजुएला के कई परिवार अपने देश में अपने भविष्य को धूमिल देखकर पड़ोसी देश कोलंबिया चले गए हैं. वहां वे एनजीओ रेड क्रॉस से चिकित्सा और खाद्य सहायता प्राप्त करते हैं. रेड क्रॉस ने सीमावर्ती शहर अरौक्विटा के एक स्कूल में एक अस्थायी शिविर बनाया है.

दुनिया भर से खतरों से भाग रहे शरणार्थियों की लाचारीसमाज में मिलने की कोशिशकई शरणार्थी जर्मनी में अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद करते हैं. कार्ल्सरूहे में लर्नफ्रुंडे हाउस में शरणार्थी बच्चों को जर्मन स्कूल प्रणाली में प्रवेश के लिए तैयार किया जाता है. हालांकि कोविड महामारी के दौरान वे नए समाज में एकीकृत होने में मिलनी वाली मदद के इस अहम तत्व से चूक गए.

दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकटयुद्ध के परिणामस्वरूप अनगिनत यमनी बच्चे अप्रत्यक्ष रूप से घातक तरीकों से प्रभावित हो रहे हैं. यमन वर्तमान में संघर्षों, आर्थिक तबाही, सामाजिक विघटन और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रस्त है.संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिसमें लगभग दो करोड़ लोग या देश की एक तिहाई आबादी को किसी भी सहायता की सख्त जरूरत है. बच्चे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हैं और कुल 1.1 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. यानी पांच में से चार यमनी बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. headtopics.com

इसके अलावा यूनिसेफ के अनुसार लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. एजेंसी के जेम्स एल्डर ने कहा,"वे भूख से मर रहे हैं क्योंकि वयस्कों ने एक युद्ध शुरू कर दिया है जिसमें बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं."अब कैसा है गजाबस मलबा बचा हैगजा में 11 दिन तक बरसे बमों ने घरों के नाम पर बस मलबा छोड़ा है. लोग उसमें भी बसर कर रहे हैं.

अब कैसा है गजा269 लोगों की मौत21 मई को हमास और इस्राएल के बीच युद्ध विराम हुआ था. लेकिन तब तक गजा में 256 और इस्राएल में 13 लोगों की जानें जा चुकी थीं.अब कैसा है गजाकितने आम नागरिक थे?संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गजा में मरने वालों में कम से कम 128 आम नागरिक थे. इस्राएल ने कहा है कि उसने 200 उग्रवादी मारे. हमास के मुताबिक उसके 80 लड़ाके मारे गए.

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अब कैसा है गजा4,300 रॉकेटसंघर्ष के दौरान हमास ने इस्राएल पर गजा से 4,300 से ज्यादा रॉकेट दागे थे. उनमें से 680 तो गजा में ही गिर गए.अब कैसा है गजाकितने घर गिरेफलस्तीन के भवन निर्माण मंत्रालय के मुताबिक कुल 258 इमारतों को नुकसान पहुंचा है जिनमें 1042 घर, दुकानें या दफ्तर थे.

अब कैसा है गजाऔर जो गिरे नहीं756 घरों को भारी नुकसान पहुंचा है जबकि 14,356 को हल्का नुकसान हुआ है.अब कैसा है गजास्कूल, अस्पतालसंघर्ष के दौरान गजा के 54 स्कूल, छह अस्पताल और 11 स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान हुआ है.अब कैसा है गजाकरोड़ों डॉलर का खर्चफलस्तीन का कहना है कि पुनर्निर्माण में दसियों लाख डॉलर का खर्च आएगा. अमेरिका ने बर्बाद हुए गजा को फिर से बनाने के लिए मदद देने का वादा किया है.

अब कैसा है गजाअमेरिकी मददयुद्ध विराम के बाद मध्य पूर्व के दौरे पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने 55 लाख डॉलर यानी लगभग 40 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया था.अब कैसा है गजामहीनों लगेंगेइस पुनर्निर्माण में महीनों का वक्त लगेगा. तब तक गजा के लोग इस मलबे के ढेर पर जिंदगी जीते रहेंगे.

रिपोर्ट: विवेक कुमारयमन में गृहयुद्ध के चलते करीब 20 लाख बच्चे अब स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जबकि हिंसा ने लगभग 17 लाख बच्चों और उनके परिवारों को विस्थापित कर दिया है.एए/सीके (डीपीए, एपी)कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगकोरोना पर भी भारी भुखमरीऑक्सफैम ने अपनी ताजा रिपोर्ट का शीर्षक"हंगर वायरस मल्टीप्लाइज" दिया है. गैर सरकारी संस्था ऑक्सफैम का कहना है कि भुखमरी के कारण मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के कारण मरने वाले लोगों की संख्या से अधिक हो गई है. कोविड-19 से दुनिया में हर एक मिनट में करीब सात लोगों की मौत होती है.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगएक साल में बढ़ी संख्यारिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में अकाल जैसे हालात का सामना करने वाले लोगों की संख्या पूरी दुनिया में छह गुना बढ़ गई है. ऑक्सफैम अमेरिका के अध्यक्ष और सीईओ एबी मैक्समैन के मुताबिक,"आंकड़े चौंका देने वाले हैं, लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि ये आंकड़े अकल्पनीय पीड़ा का सामना करने वाले अलग-अलग लोगों से बने हैं. यहां तक की एक व्यक्ति भी बहुत अधिक है."

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोग15.5 करोड़ लोगों के सामने खाद्य असुरक्षा का संकटऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया में करीब 15.5 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा के भीषण संकट का सामना कर रहे हैं. यह आंकड़ा पिछले साल के आंकड़ों की तुलना में दो करोड़ ज्यादा है. इनमें से करीब दो तिहाई लोग भुखमरी के शिकार हैं और इसका कारण है उनके देश में चल रहा सैन्य संघर्ष.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगकोविड और जलवायु परिवर्तन का भी असरएबी मैक्समैन का कहना है,"आज कोविड-19 के कारण आर्थिक गिरावट और निरंतर संघर्षों और जलवायु संकट ने दुनिया भर में 5.20 लाख से अधिक लोगों को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया है." उन्होंने कहा वैश्विक महामारी से निपटने के बजाय युद्धरत गुट एक दूसरे से लड़ाई लड़ रहे हैं. जिसका सीधा असर ऐसे लाखों लोगों पर पड़ता है जो पहले से ही मौसम से जुड़े आपदाओं और आर्थिक झटकों से कराह रहे हैं.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगमहामारी में भी सैन्य खर्चऑक्सफैम का कहना है कि महामारी के बावजूद वैश्विक सैन्य खर्च बढ़कर 51 अरब डॉलर हुआ है. यह राशि भुखमरी को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को जितने धन की जरूरत है उसके मुकाबले कम से कम छह गुना ज्यादा है.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगइन देशों में स्थिति बेहद खराबरिपोर्ट में उन देशों को शामिल किया गया है जो भुखमरी से"सबसे ज्यादा प्रभावित" हैं. इसमें अफगानिस्तान, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं. इन सभी देशों में संघर्ष जारी है.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोग''भुखमरी युद्ध का हथियार''ऑक्सफैम का कहना है कि भुखमरी को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. लोगों को भोजन और पानी से वंचित रखकर, मानवीय सहायता में बाधा पहुंचाकर भुखमरी को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऑक्सफैम के मुताबिक जब उनके बाजारों, खेतों और जानवरों पर बमबारी हो रही हो तो वे सुरक्षित रूप से नहीं रह सकते या भोजन नहीं तलाश सकते हैं.

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मर रहे लोगसंघर्ष रोकने की अपीलसंस्था ने सरकारों से हिंसक संघर्षों को रोकने का आग्रह किया है. संस्था ने सरकारों से संघर्षों को विनाशकारी भूख पैदा करने से रोकने की अपील की है. उसने कहा है कि सरकारें यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों तक राहत एजेंसियां पहुंच सकें और दान देने वाले देशों से कहा है कि वह यूएन के प्रयासों को तुरंत निधि दें.

रिपोर्ट: आमिर अंसारी और पढो: DW Hindi »

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