मोदी-शाह को क्लीनचिट ना देने वाले अशोक लवासा कौन

नरेंद्र मोदी और अमित शाह को क्लीनचिट ना देने वाले अशोक लवासा कौन हैं?

16-07-2020 13:44:00

नरेंद्र मोदी और अमित शाह को क्लीनचिट ना देने वाले अशोक लवासा कौन हैं?

अशोक लवासा अप्रैल 2021 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनते और 2022 अक्तूबर तक यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव कराते.

शेयर पैनल को बंद करेंइमेज कॉपीरइटImage captionनिर्वाचन आयुक्त अशोक लवासाएशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को सूचित किया कि उसने भारत के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा को निजी क्षेत्र और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के क्षेत्र से जुड़े कामकाज के लिए अपना उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.'

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एडीबी ने एक बयानमें कहा कि लवासा वर्तमान में भारत के चुनाव आयुक्तों में से एक हैं और पूर्व में भारत के केंद्रीय वित्त सचिव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव सहित कई वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं.'

बताया गया है कि लवासा एडीबी में दिवाकर गुप्ता का स्थान लेंगे जिनका कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त होने जा रहा है.समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ 'चुनाव आयोग से इस्तीफ़ा देकर ही अशोक लवासा यह पद संभाल सकते हैं और अगर वे ऐसा करते हैं तो कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफ़ा देने वाले वे दूसरे चुनाव आयुक्त होंगे.

हालाँकि अशोक लवासा की तरफ़ से इस नई नियुक्ति पर कोई बयान सामने नहीं आया है.इमेज कॉपीरइटImage captionवरिष्ठ पत्रकार सिदार्थ वरदराजन का ट्वीटवरिष्ठ पत्रकार सिदार्थ वरदराजन ने एक ट्विटर पर लिखा है कि मोदी सरकार ने अशोक लवासा के पास अब कोई विकल्प नहीं छोड़ा है, क्योंकि पीएम मोदी और शाह के मामले में लवासा की आपत्ति के बाद उनके ख़िलाफ़ जिन मामलों में जाँच बैठाई गई है, अगर वे एडीबी के पद को ठुकरा दें और चुनाव आयोग में बने रहें, तो उन्हें उनका सामना करना होगा.

सोशल मीडिया पर चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रास्ते में आने के बाद से ही अशोक लवासा को निर्वाचन आयोग से दूर किये जाने के कयास लगाये जा रहे थे. यही वजह है कि अशोक लवासा की एडीबी में नियुक्ति की घोषणा के साथ ही उस विवाद की भी दोबारा चर्चा हो रही है.

इमेज कॉपीरइटReutersतब हुआ क्या था?पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग के समक्ष कुछ शिकायतें दर्ज कराई थीं.चुनाव आयोग इन पर विचार करने बैठा जिसके बाद आयोग के तीन सदस्यों में से दो, मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा पीएम मोदी को क्लीन चिट दे रहे थे, जबकि अशोक लवासा पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दिये जाने पर सहमत नहीं थे.

तब फ़ैसला सर्वसम्मति से नहीं, बल्कि बहुमत से हुआ और पीएम मोदी और शाह को क्लीन चिट मिली. आयोग ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के छह मामलों में पीएम मोदी को क्लीन चिट दी थी.इमेज कॉपीरइटANIImage captionलवासा की चिट्ठी मीडिया के हाथ लगने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बयान जारी कर इसे ग़ैरज़रूरी विवाद बताया था

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अशोक लवासा चाहते थे कि 'उनकी अल्पमत की राय को कम से कम रिकॉर्ड किया जाए.'उनका आरोप था कि 'अल्पमत की राय को दर्ज भी नहीं किया जा रहा है', इसीलिए उन्होंने आचार संहिता से संबंधित चुनाव आयोग की बैठकों में जाना बंद कर दिया था.इस बारे में अशोक लवासा की एक चिट्ठी भी स्थानीय मीडिया के हाथ लगी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था,"कई मामलों में उनके अल्पमत के फ़ैसले को दर्ज नहीं किया गया और लगातार उनकी राय को दबाया जाता रहा है जो कि इस बहुसदस्यीय वैधानिक निकाय के स्थापित तौर तरीक़ों से उलट है."

कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न क़रार दिया था.इस दौरान ऐसे कई मौक़े आये जिन पर अशोक लवासा का रुख मोदी सरकार को चुभता रहा.इमेज कॉपीरइटPTIलवासा के पास अभी समय थाअशोक लवासा ने 23 जनवरी 2018 को भारत के चुनाव आयुक्त के तौर पर पद संभाला था. वे हरियाणा कैडर के (1980 बैच) के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं.

अगर सब सही रहता तो अशोक लवासा अप्रैल 2021 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनते और 2022 अक्टूबर तक यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव कराते.अब वरिष्ठता क्रम में तीसरे नंबर पर सुशील चंद्रा हैं जो मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के बाद यह महत्वपूर्ण पद संभालेंगे.

भारत के चुनाव आयुक्त बनने से पहले वो 31 अक्तूबर 2017 को केंद्रीय वित्त सचिव के पद से सेवा-निवृत्ति हुए थे.भारत के वित्त सचिव रहने से पहले वो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय में केंद्रीय सचिव रहे थे.इमेज कॉपीरइटTwitter

37 साल का करियरसक्रिय सेवा में अशोक लवासा को 37 से भी ज़्यादा सालों का अनुभव है. केंद्र और राज्य सरकार में रहते हुए उन्हें सुशासन और नीतिगत सुधार की पहलों में ख़ास योगदान देने का श्रेय दिया जाता है.अशोल लवासा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कई वार्ताओं में भी मुख्य भूमिका निभा चुके हैं.

2015 में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुए पेरिस समझौते के दौरान लवासा ने भारतीय टीम का नेतृत्व किया था.इसके अलावा मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और कन्वेंशन ऑन बायोडायवर्सिटी एंड डीसर्टिफिकेशन के दौरान भी उन्होंने भारतीय टीम को लीड किया था.आर्थिक मामलों के संयुक्त सचिव रहते हुए एशियन डेवलपमेंट बैंक से दर्जनों डेवलपमेंट लोन लेने और वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स बनाने के लिए बातचीत की.

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इमेज कॉपीरइटTwitterImage captionकुछ दिन पहले ही अशोक लवासा ने यह तस्वीर ट्वीट की थी और लिखा था कि 'अरुण जेटली की टीम में काम करना उनका सौभाग्य रहा'वित्तीय सचिवअशोक लवासा उस वक़्त वित्त सचिव रहे जब सरकार में बड़े बदलाव या बड़े फैसले हुए.जीएसटी पेश किए जाने के वक़्त और रेल बजट को आम बजट में मिलाए जाने के वक़्त वो वित्त सचिव के पद पर थे.

इसके अलावा जब बजट पेश किए जाने की तारीख़ को चार हफ्ते आगे बढ़ा दिया गया, उस वक़्त भी वो वित्त सचिव के अहम पद पर थे.जब सामान्य वित्तीय नियमों में संशोधन किया गया, उस वक़्त भी वो ये अहम पद देख रहे थे.वहीं पर्यावरण सचिव रहते हुए भी उन्होंने कई नीतिगत और प्रक्रियात्मक सुधारों की पहल की.

इसके अलावा भी उन्होंने बहुत से मंत्रालयों में अहम पद संभाले.वो उर्जा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहे, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे, आर्थिक मामलों के विभाग (वित्त मंत्रालय) में भी संयुक्त सचिव का पद संभाला.हरियाणा के प्रशासन में भी उन्होंने कई अहम विभागों का काम देखा.

इमेज कॉपीरइटTwitterआईएएस बनने से पहलेआईएएस बनने से पहले वो दिल्ली विश्वविद्यालय में अगस्त 1978 से दिसंबर 1979 तक लेक्चरर रहे.अशोल लवासा ने दिसंबर 1979 से जुलाई 1980 तक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में प्रोबेशनरी ऑफ़िसर के तौर पर भी काम किया.अशोक लवासा का जन्म 21 अक्तूबर 1957 को हुआ था.

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (इंग्लिश ऑनर्स) और इंग्लिश में ही एमए किया.लवासा ने ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया है और उनके पास डिफेंस और स्ट्रेटेजिक स्टडिज़ में एम.फिल की डिग्री भी है.अशोक लवासा को फ़ोटोग्राफ़ी का काफ़ी शौक़ है. अलग-अलग शहरों में उन्होंने अपनी खींची तस्वीरों की प्रदर्शनियां भी की हैं.

लवासा ने 'एन अनसिविल सर्वेंट' नाम की किताब भी लिख है. ये किताब 2006 में छपी थी. और पढो: BBC News Hindi »

सुशांत केस: 10 ऐसे सवाल जिसमें एक्टर की मौत की गुत्थी उलझी है

दो महीने बाद भी बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत एक रहस्य बनी हुई है. सुशांत ने खुदकुशी की या उसकी हत्या हुई? इस सवाल का जवाब न केवल सुशांत का परिवार बल्कि पूरा देश मांग रहा है. आखिर सुशांत की मौत का रहस्य कैसे सुलझेगा? ये सच कैसे सामने आएगा कि सुशांत की मौत कैसे हुई? दस्तक में देखिए सुशांत के मौत से जुड़ी 10 बेहद अहम सवाल जिसमें गुत्थी उलझी है.

Sache bhartiye ashoklawa ये सच्चे देशभक्त हैं अपने जमीर का सौदा नहीं किये। सलाम ऐसे इमानदार लोगों को। Independence of any institution is against the Manuwad. मोदी का कुत्ता बनके नहीं रहा तो गुम करदिया जाएगा . भई तू मोड़ूँगा पट्टा गले मैं डाल वरना .. मारेगा Desh men tanasahi chal rahi hai. Chunav ayog bhi nahin bacha. Sach ke sath khada hone wale election commissioner ko ho bjp sarkar ne hata diya. Ab kewal dare huye log hi bache

अब वो तुम्हारे लिए रविस्तव की प्राप्ति कर चुका है करो प्रचार उसका ,फिर एक दिन ले आना उस पर विस्तृत रिपोर्ट बना कर कि यह देखो पूर्व चुनाव आयुक्त का मोदी सरकार पर आरोप 😂🤣🤣 इतनी जलन है कि फफड़ाने की भी हिम्मत नहीं रही है 😂🤣🤣🤣तुम्हारी बीबीसी वालो 😂🤣 Well played ❤️ अशोक लवासा वही है जिनको एडीबी ने अपना अगला अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है

EMERGENCY से भी बदतर LOCKDOWN. ..20 लाख करोड का जुमला पैकेज...फैलता हुआ कोरोना...गिरती हुई GDP....एतिहासिक बेरोजगारी...तडपते हुए गरीब मजदूर और किसान,,,चरमराती हुई ECONOMY....और..मन की बात ... मोदी जी आधुनिक भारत के भस्मासुर बन चुके है..... अच्छा लवासा हाउसिंग स्कीम में कांग्रेस, दाऊद ने इन्हें ही पैसा घूमाने को दिया है?

Oh...now your time is up..... ये हैं भारत के सच्चे सपूत जो चंद रुपयों के लिए अपना ज़मीर नहीं बेचते हैं.... कांग्रेस का दलाल था ये त्रिकाल सत्य है कि सत्य का आचरण करने वाले अधिकारियों को सत्ता लोलुपता के परिप्रेक्ष्य में गंदी राजनीति का कोपभाजन बनना हीं पड़ता है । हाँ क्लीन चिट दे दिया इसलिए बता रहे हो नहीं तो क्यों बताते की इनको ADB में जगह मिली है ये इम्पोर्टेन्ट थोड़े ना है, अगर क्लीन चिट दे दिये होते तो आपके लिए तो वो भी भक्त हो जाते.... फिर ADB तो और भी फालतू हो जाता....

एक शेर है जो गुजराती ठगों के सामने डटकर खड़ा हो गया था..। China Ka tota hai ye. YafavRamesh Man who given clean chit to Amit shah were made governor man who asked tough questions to Amit shah dead Congi gang कांग्रेसी पिट्ठू है... अगर उसके गूदा है तो चुनाव आयोग में ही बैठा रहे... झूठ बोल कर फंस गया तो भागना चाहता है?

Ashok lawasa ek k liye ek raay hai Morning walk pr akele nhi jaye JudgeLoya Tadipaar Thank you BBC, You hit the Bull's Eye जिस प्रकार लवासा पर साम दण्ड इस्तेमाल कर उन्हें हटाया जा रहा है स्प्ष्ट है EVM में झोल है। BBC walo ki kyun itni jal rhi hai 🔥😂 Fake news channel bbc hindi 😂😂😂 FolloForFolloBack

अशोक लवासा अगले मुख्य चुनाव आयुक्त होते लेकिन बने ADB के वीपीलावासा ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में क्लीन चिट दिए जाने का विरोध किया था. FakeNews Time bahut jyada ho gaya lekin abhi tk result nahi aaya FakeNews Bina exam diye jab CBSE ka result A sakta University ka kyu nàhi Alert Sabko dara ke rakho tumhare maalik ne bola hoga yaha wale ya bahar wale

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को बड़ी जिम्मेदारी, बने एशियाई विकास बैंक के उपाध्यक्षएशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को बताया कि उसने चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. मेरठ के अब्दुलापुर गांव में शिव मंदिर के पुजारी कांती प्रसाद द्वारा गले में भगवा गमछा🚩 डालने पर शांतिदूत उन्हें परेशान करते थे, विरोध करने पर उनकी लिंचिंग कर हत्या कर दी गयी। मुख्य आरोपी नदीम मेवाती अभी भी फरार है। क्या सेक्युलरिज्म के नाम पर भारत में भगवा पहनना भी अपराध है? Sidelining kar rahe election commission Jose ghotala kar sake This called Sabka Vikas

अशोक गहलोत बोले- बीजेपी के मंसूबे पूरे नहीं हुए, खुले खेल में खा गए मातबीजेपी पर निशाना साधने के अलावा सचिन पायलट समेत 3 मंत्रियों की बर्खास्तगी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मुझे खुशी नहीं है. मजबूर होकर हमें अपने 3 साथियों को हटाना पड़ा. पिछले 6 महीने से उनका रवैया ठीक नहीं था. जादूगर का जादू , पायलट ने खत्म किया😝😝 अब जादूगर झाड़ू लगायेगा ,या झाड़ू पर बैठकर उड़ जायेगा😜😛😜😛😜😜😛 He means “Filhaal” सह- मात का खेल तो अब शुरू हुआ है, आगे आगे देखिए होता है क्या?

अशोक लवासा को क्यों नहीं बनने दिया गया CEC? वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पूछा तो हो गए ट्रोललवासा को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चुनाव आयोग में लवासा का कार्यकाल अक्टूबर 2022 तक था। ऐसे में अगर लवासा चुनाव आयुक्त के रूप में बने रहते तो मुख्य चुनाव आयुक्त के पद तक पहुंच सकते थे।

पहली बाजी अशोक गहलोत ने जीती, लेकिन पायलट खेमे ने अभी हार नहीं मानीराजस्थान में जारी सियासी उठापटक में पहली बाजी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जीत ली है. अब से थोड़ी देर बाद उन्होंने कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई है. सचिन पायलट की डिप्टी सीएम पद और उनके दो समर्थक मंत्रियों की पद से छुट्टी कर दी गई है. लेकिन पायलट खेमे ने अभी हार नहीं मानी है. देखें आज तक का खास कार्यक्रम देश तक. sardanarohit RahulGandhiजी बड़े जज बने फिरते हो SachinPilotजी के नेतृत्व में राजस्थान चुनाव लड़े सरकार आयी तो ashokgehlot51जी को सीएम बनवा दिये एक नवजवान राजनेता को कुचल दिये JM_Scindia के साथ यही हुआ ये लोग नाराज हुये तो मनाने के बजाय पार्टी से बाहर कर दिया आप सिर्फ देखते रहे ट्वीट करोअब sardanarohit Kendra Sarkar koto Siddhant niche sardanarohit is a BJP news channel there will be no questions for BJP there will be questions for other parties 🤷🤷🤷 and I hate this reporter

Rajasthan Crisis live Updates: सीएम अशोक गहलोत होटल फेयरमॉन्ट से कांग्रेस विधायकों के साथ निकलेसीएम अशोक गहलोत होटल फेयरमॉन्ट से कांग्रेस विधायकों के साथ निकले RajasthanPoliticalCrisis Rajasthan ashokgehlot51 SachinPilot INCIndia ashokgehlot51 SachinPilot INCIndia जब उम्मीदवार किसी दल की उम्मीदवारी का टिकट खरीदेगा तो जीतने के बाद उसे बिकने का भी पूरा अधिकार है ।