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मोदी सरकार-कश्मीरी नेताओं की बैठक: क्या है कश्मीर में प्रतिक्रिया?

25-06-2021 04:34:00

मोदी सरकार-कश्मीरी नेताओं की बैठक: क्या है कश्मीर में प्रतिक्रिया?

मोदी सरकार के कश्मीरी नेताओं के साथ बैठक को लेकर कश्मीर में क्या सोच रहे हैं लोग. पढ़िए आकलन.

समाप्तअमित शाह ने कुछ ही महीने पहले कश्मीर के राजनीतिक दलों के गठबंधन को गुपकार गैंग क़रार दिया था.GROUND REPORT: जम्मू कश्मीर में क्यों निशाने पर हैं पुलिसकर्मी?गुपकार एक पॉश रिहाइशी इलाका है जहां फ़ारूक़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती और अन्य वीआईपी लोगों के आवास हैं. कश्मीर के राजनीतिक दलों के गुपकार गठबंधन चार अगस्त, 2019 को अस्तित्व में आया था. गठबंधन ने संयुक्त तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए के तहत मिले विशेषाधिकार के साथ किसी भी तरह के बदलाव का विरोध करने का संकल्प लिया था.

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इसके अगले ही दिन इन नेताओं के साथ हज़ारों दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया, जम्मू कश्मीर में इंटरनेट और संचार के दूसरे सभी साधनों पर पाबंदी लगा दी गई और पूरे प्रदेश में कर्फ्यू लागू कर दिया गया.अक्टूबर महीने में पाबंदियों में रियायत दी गई और मोदी सरकार ने अब्दुल्लाह और मुफ़्ती परिवारों को दरकिनार करते हुए शांति, समृद्धि और नई लीडरशिप के साथ नए कश्मीर को बनाने के बारे में व्यापक संकेत दिए.

इमेज स्रोत,TWITTER @PMOIndiaवैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व को झटकाइस दिशा में अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है. हालांकि महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी पार्टी के कुछ नेताओं ने अलग होकर अपनी पार्टी का गठन ज़रूर किया, जिसे कथित तौर पर मोदी समर्थक पार्टी भी माना जाता रहा है. कश्मीर की राजनीति में बीते 22 महीने से नए लोग अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार पर झूठे सपने बेचने का आरोप लगाते रहे हैं. headtopics.com

महबूबा मुफ़्ती की सरकार में मंत्री रहे और अपनी पार्टी के नेता अल्ताफ़ बुखारी ने बीबीसी से कहा, "हम वही वादे कर रहे हैं जो पूरे हो सकते हैं. हमें यक़ीन है कि राज्य का दर्जा संभव है, इससे आगे हम नहीं जाएंगे." नए कश्मीर के चेहरे के रूप में पूर्व हुर्रियत नेता सज्जाद लोन और 2010 के आईएएस टॉपर शाह फ़ैसल को देखा जाता रहा है.

इन सबको लेकर दिल्ली, जम्मू और कश्मीर के बीजेपी कार्यकर्ताओं में खुशी दिखती थी लेकिन मोदी सरकार के अचानक सुलह के रुख से वैकल्पिक नेतृत्व की अटकलों को झटका लगा है, क्योंकि मोदी सरकार जिन लोगों के वंशवादी राजनीति का चेहरा बताती रही है उनसे ही बातचीत का रास्ता खोल दिया है. ऐसे में सवाल यही है कि मोदी सरकार ने ऐसा क्यों किया है?

कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन के मुताबिक लद्दाख में चीन के सैन्य अतिक्रमण और पूर्वी सीमा पर भारत के सैन्य महत्वाकांक्षा को देखते हुए पाकिस्तान की चिंता कम करने की अमेरिकी मज़बूरी के चलते, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से मोदी सरकार ने यह क़दम उठाया है.

कश्मीरःअनुच्छेद 370 की बहाली के लिए अब्दुल्लाह-मुफ़्ती आए साथअंतरराष्ट्रीय दबाव में मोदी सरकार का क़दमअनुराधा भसीन ने बताया, "अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से शांतिपूर्ण ढंग से निकलना चाहता है. भारत और पाकिस्तान ने 2003 के सीजफ़ायर को आगे बढ़ाया है. एलएसी पर चीन का दबाव है. ज़्यादा अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भारत कश्मीर में शांति चाहता है." headtopics.com

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कश्मीर को लेकर भारत सरकार के रूख़ में नरमी की वजह चाहे जो हो कश्मीर के अंदर इसको लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं. बीजेपी समर्थक इस क़दम के समर्थन में नहीं दिखे हैं. इस बैठक को लेकर अप्रसन्न एक कश्मीरी बीजेपी नेता ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, "लंबे समय से लाड पाने वाले राजनीतिक और शोषक वर्ग के बंधन से मुक्त कराने के वादे के साथ धारा 370 हटाया गया था. लेकिन ऐसा लग रहा है कि वे फिर से प्रिय बन गए हैं."

हालांकि कई इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का होशियारी भरा क़दम बता रहे हैं. कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक हारून रेशी ने कहा, "बाजी किनके नाम रही, इसका फ़ैसला अभी नहीं हो सकता लेकिन क़दम पीछे करने से मोदी सरकार को पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में कश्मीर मुद्दे को संभालने के लिए पर्याप्त जगह मिल गई है."

इमरान ख़ान और मोदी सरकार ने क्या एक सच को स्वीकार लिया है?हारून ने यह भी कहा, "अनुच्छेद 370 और 35-ए की वापसी तो संभव नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि मोदी सरकार राज्य का दर्जा वापस दे सकती है. इसके अलावा लोगों को नौकरियां और ज़मीन के स्वामित्व को लेकर गारंटी मिल सकती है. इन मामलों को लेकर जम्मू और कश्मीर के नेताओं की राय एक जैसी है. धारा 370 की वापसी की मांग जल्द ही ग़ायब हो जाएगी और पाकिस्तान इस क़दम का विरोध नहीं कर पाएगा."

कश्मीरी नेताओं की मुश्किलवीडियो कैप्शन,कश्मीर: गुपकार नेताओं की क्या है उम्मीदें?शुक्रवार को फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) में चरमपंथ को पाकिस्तान की कथित फंडिंग मामले की सुनवाई होनी है. हारून सहित कई विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के सामने कश्मीर को लेकर कठोर रुख़ में बदलाव लाने की अपनी मजबूरियां हैं. हारून ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान और पूर्वी लद्दाख में क्या स्थिति रहती है, इस पर ही तय करेगा कि कश्मीर में कब तक शांति रहेगी." headtopics.com

इमरान ख़ान बोले, पाकिस्तान बातचीत को तैयार लेकिन पहले भारत करे ये कामवैसे प्रधानमंत्री की यह बैठक स्थानीय नेताओं के लिए मनोबल बढ़ाने का काम करेगी. हारून रेशी ने बताया, "दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ खड़ा होना ही स्थानीय नेताओं के लिए काफ़ी है. कश्मीर के लोगों ने तो पांच अगस्त, 2019 के बाद मान लिया था कि इन लोगों की कश्मीर की राजनीति में कोई भूमिका नहीं है. लेकिन मोदी सरकार की बैठक से इन्हें नया जीवन मिला है लेकिन अनुच्छेद 370 को छोड़ते हुए वे आम लोगों को दूसरे सपने बेच पाएंगे यह बेहद मुश्किल लग रहा है."

इमेज स्रोत,इमेज कैप्शन,इमरान ख़ान और नरेंद्र मोदीवहीं दूसरी ओर कश्मीर के सैन्य प्रतिष्ठानों ने माना है कि इस साल फरवरी में भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फ़ायर बढ़ाए जाने के बाद हिंसक घटनाओं में कमी आयी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "कश्मीर में अभी भी चरमपंथी सक्रिय हैं, इसलिए हिंसक घटनाएं हो रही हैं. लेकिन सेना और खुफ़िया नेटवर्क में तालमेल बढ़ने से हिंसक घटनाओं में कमी देखने को मिली है. गोलीबारी और सीमा पर छिटपुट हिंसक घटनाएं अभी भी हो रही हैं लेकिन बीते साल की तुलना में संतोषजनक स्थिति है."

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जानिए UP Cabinet Expansion में किन-किन समीकरणों का रखा जा सकता है ध्यान? देखें शंखनाद

संगठन की ओर से 25,26 और 30 जुलाई की तारीख का प्रस्ताव भी दिया गया है. जिस पर योगी आदित्यनाथ फैसला करेंगे .जाहिर सी बात है कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन सारे समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा, जिसे साधकर यूपी में जीत की राह आसान हो सके. संजय निषाद के सांसद बेटे प्रवीण निषाद को मोदी कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चा थी,लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली तो अब निषाद वोटों को जोड़े रखने के लिए संजय निषाद कैबिनेट में शामिल किए जा सकते हैं. निषाद समाज के अलावा राजभर समाज पर भी योगी सरकार की नजर है, जिसका पूर्वांचल में काफी दबदबा है. देखें वीडियो.

Modi chor hai ड्रामा - नेताओं का जनता से कोई वास्ता नहीं..केंद्रशासित प्रदेश बन जाने से “मुख्यमंत्री-राज्यमंत्री विधायक..” जैसे पद की दुकान बंद है.. ये बैठक नेतागीरी की दुकान शुरू करने के लिए हैं Kashmir Microfinance और Finance वाले अपने Employees को इतना खून चूस लेते है की मत पूछिए सुबह 6 बजे से रात को 9, 10 बजे तक काम करवाते है और जल्दी छुट्टी भी नही देते। लेकिन ये सब News वालो को कहां दिखाने का time है।

समजें.. क्रिया प्रतिक्रिया वही लोग की असर रखती है- जो सत्ता में है, यां जो सत्ता के आसपास/करीब है। बाकी आम लोगोका क्या वो प्रतिक्रिया दे - नादे सब समान है। मनोरंजन के लिये अच्छा है.! इसमें कोई दो राय नही कि पाकिस्तान धारा 370 के लेकर मान चुका है कि अब वो कश्मीर में वापस नही आने वाला। वो ये भी मान चुका है कि लंबे समय तक भारत से दूर नही रह सकते। बहुत सारे पाकिस्तानियों की जिंदगी भारत से जुड़ी है।गुपकार गठबंधन सोचता था कि वे हाशिए पर न चले जाएं।रास्ता खुल गया।

सब ठीक बा 😁😁😁 जो_हिन्दू_हिन्दू_कहकर_चिल्लाते_थे अच्छे_दिन_आएंगे_कहकर_उल्लू_बनाते_थे कश्मीरी नेताओं के चेहरे पर धुआं उड़ रहा है,पाकिस्तानी फंडिंग के सारे रास्ते काट दिए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आदेश को झुक कर सलाम करना पड़ेगा। तिरंगे को ही अपनी जान समझना पड़ेगा। मोदी को समझने वाले आज तक कुई पैदा ही नही हुआ, अब खेला होबे,

Jai Shri Ram 🙏🙏 यूपी का चुनाव है इसलिए सारे चोचले हो रहे है😂😂

मोदी का मिशन कश्मीर 2.0 LIVE: कश्मीरी नेताओं संग जारी है पीएम का मंथनप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर को लेकर अहम बैठक हो रही है. अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के करीब दो साल के बाद केंद्र सरकार की ओर से राज्य के नेताओं के साथ बातचीत की जा रही है.

707 दिन पहले अटकी कश्मीरी नेताओं की सूई, क्या रास आएगा मोदी का फ्यूचर प्लान?पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर के 8 दलों के 14 नेताओं के साथ सीधे संवाद करेंगे. इस बैठक में मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के उन्हीं नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनको काफी समय तक नजरबंद रखा गया था. ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार और कश्मीरी नेताओं के रिश्तों में जमी बर्फ पीएम आवास पर होने वाली बैठक के बाद पिघलेगी?

कश्मीरी नेताओं को मोदी ने दिया भरोसा, महबूबा बोलीं- पाकिस्तान से करें बात - BBC News हिंदीजम्मू कश्मीर के विशेष दर्ज़े की समाप्ति के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में राज्य के 14 नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक के बाद महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्लाह और कश्मीर के अन्य नेताओं ने क्या कहा? Wrong news …. She never talked about Pak in meeting. Correct your facts or don’t mislead us please पाकिस्तान से काहे कि बात pok सीधे दोगे या अन्य तरीकों से यही है तो कर सकते हैं आखिरकार मोदी को गुपकर गैंग के सामने घुटना टेकना पड़ा ।

कश्मीरी नेताओं से बोले PM मोदी- दिल और दिल्ली की दूरी को खत्म करना चाहते हैंJ&K Leaders-PM Modi Meeting: जम्मू-कश्मीर के नेताओं संग बैठक के बाद पीएम मोदी ने कई तस्वीरें ट्वीट की. उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं के साथ आज की बैठक एक विकसित और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर की दिशा में चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया गया है. 👌🚩

क़ानूनी चुनौती में उलझे डिजिटल न्यूज़ पर मोदी सरकार के नए नियम - BBC News हिंदीसोशल मीडिया, ओटीटी और डिजिटल न्यूज़ के नए नियमों से विदेशी कंपनियाँ तो असहज हो ही रही हैं, भारत के अपने डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स ने भी इन्हें अदालत में चुनौती दी है. ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है खबरंडियो, आगे आगे देखो होता है क्या😉 Lol 😅😅😅

Covid Vaccination : हर चरण में असफल हो रही है मोदी सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी : आतिशी मर्लेनाVaccination Drive in Delhi : आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी मर्लेना ने कहा कि जिस आयु वर्ग की पर्याप्त आबादी का वैक्सिनेशन हो चुका है, उनके लिए केंद्र सरकार बार बार वैक्सीन उपलब्ध कराए जा रही थी जबकि 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के लिए हमारे बार-बार मांगने के बावजूद बहुत कम डोज दी गई है। AtishiAAP 11 लाख वैक्सीन होने के बावजूद सिर्फ 76 हजार वैक्सीन ही लगवाई केवल राजनीति करने के लिए AtishiAAP कम से कम आप लोग तो सच का साथ दिया करो,ये लोग तो सरकार बनाने के लिये कुछ भी झूठ बोलेगे AtishiAAP कम से कम मीडिया वालों को जो सत्य है उसको प्रिंट करो, मुझे कोई भी सरकार रोटी नही देती है फिर भी में देश हित की बात करता हूँ इसलिये narendramodi साथ देता हूँ, Team_BJPS ashok94100 AtishiAAP