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मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल: भीषण महामारी में भी चुनाव कराना जरूरी था? जवाब- जब चुनाव की घोषणा हुई तब संक्रमण कम था, बाद में बदलाव संभव नहीं था

मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल: भीषण महामारी में भी चुनाव कराना जरूरी था? जवाब- जब चुनाव की घोषणा हुई तब संक्रमण कम था, बाद में बदलाव संभव नहीं था #CoronaPandemic #Election #SushilChandra

17-05-2021 12:49:00

मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल: भीषण महामारी में भी चुनाव कराना जरूरी था? जवाब- जब चुनाव की घोषणा हुई तब संक्रमण कम था, बाद में बदलाव संभव नहीं था CoronaPandemic Election SushilChandra

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश के पांच राज्यों में चुनावी रैलियां हो रही थीं। इसे लेकर चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल भी उठाए गए। आरोपों के बीच आयोग ने चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली। भास्कर ने नए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा से बातचीत की। | Was it necessary to hold election s even in a severe epidemic? Chandra's answer - When the election was announced, the transition was less

Was It Necessary To Hold Elections Even In A Severe Epidemic? Answer: When The Election Was Announced, The Transition Was Less, Later Change Was Not Possible.Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपमुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल:

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भीषण महामारी में भी चुनाव कराना जरूरी था? जवाब- जब चुनाव की घोषणा हुई तब संक्रमण कम था, बाद में बदलाव संभव नहीं थानई दिल्लीलेखक: मुकेश कौशिककॉपी लिंकनए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (फाइल फोटो)कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश के पांच राज्यों में चुनावी रैलियां हो रही थीं। इसे लेकर चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल भी उठाए गए। आरोपों के बीच आयोग ने चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली। भास्कर ने नए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा से बातचीत की।

कोरोना महामारी के बीच पांच राज्यों में चुनाव से आपने क्या सबक लिए? क्या आप संतुष्ट हैं?चुनाव से पहले हम सभी संबंधित पक्ष से इनपुट लेते हैं। सभी राजनीतिक दल, गृह, स्वास्थ्य मंत्रालय और यहां तक कि राज्यों के मुख्य सचिवों से बात की जाती है। जनवरी-फरवरी में जब संक्रमण कम था, तब भी हमने 20 अगस्त 2020 की गाइडलाइंस में कोई ढिलाई नहीं बरती। headtopics.com

मतदान केंद्र में लोगों की मौजूदगी पर बंदिशों से लेकर मतदान केंद्रों की संख्या 80 हजार बढ़ाने तक हमने सभी उपाय किए। कोविड नियमों का पालन करते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त होकर वोट डाले गए। यही तो आयोग का मकसद था।प. बंगाल में 8 चरणों में चुनाव जरूरी था?

हालात के कारण प. बंगाल में अधिक चरणों में चुनाव कराने का इतिहास रहा है। 2016 और 2019 में भी 7 चरण में चुनाव हुए। 2021 में आयोग ने दौरा किया तो राजनीतिक दलों ने हर बूथ पर केंद्रीय बलों की मांग की। केंद्रीय गृह सचिव से भी इनपुट मिला। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट पर भी गौर किया गया।

राज्य के गृह सचिव, सभी जिला अधिकारियों, एसपी, आदि से व्यापक विचार-विमर्श के बाद हमने 8 चरण तय किए। लेकिन, मतदान और मतगणना की कुल अवधि कम रखी। 2016 में यह 77 दिन थी जो इस बार घटाकर 66 दिन की गई। इसीका नतीजा है कि शांतिपूर्ण माहौल में 82% मतदान हुआ।हर चरण के मतदान की अलग से अधिसूचना जारी होती है। अगर आखिरी क्षण में कोई तब्दीली की जाती तो सारी चुनाव प्रक्रिया पटरी से उतर जाती। अगर एक-दो चरणों को मिलाया जाता तो सुरक्षा बलों की तैनाती भी बदलनी पड़ती। लिहाजा, हमने ऐसा नहीं किया। इसके बजाए आयोग ने प्रतिबंध सख्त किए।

इस चुनाव का बड़ा सबक क्या है?हमें बड़ी पब्लिक रैलियों के बजाए डिजिटल और वर्चुअल प्रचार अभियान को अपनाना होगा। हम इस बारे में राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों से विचार-विमर्श करेंगे।क्या महामारी के दौर में चुनाव कराना बेहद जरूरी था? इससे बचना नहीं चाहिए था? headtopics.com

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किसी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। जब हमने फरवरी में चुनाव कराने का फैसला किया तो महामारी बहुत कम हो गई थी। चार राज्यों- केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम में प्रचार अभियान 4 अप्रैल को खत्म हो गया था और मतदान 6 अप्रैल को हुआ। उस समय दूसरी लहर नहीं आई थी और मतदान कोविड गाइडलाइंस के तहत ही हुआ।

फिर 16 अप्रैल से लहर आने पर चुनाव आयोग ने कई नई बंदिशें लगाईं। 400 से ज्यादा रैलियां रद्द की गईं। कोविड नियमों का उल्लंघन होने के मामले में एफआईआर दर्ज की गईं। ऐसा पहली बार हुआ कि विजय जुलूसों पर प्रतिबंध लगाया गया।आप अपने कार्यकाल में किन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देना चाहते हैं?

हम वोटर कार्ड की डिलीवरी को चुस्त करना चाहते हैं। एक बड़ा सुधार हम मतदाता सूची को अपडेट करने के बारे में करना चाहते हैं। संविधान में व्यवस्था है कि पहली जनवरी को हर साल चुनाव मतदाता सूची तैयार हो जाए। लेकिन, जो युवा 2 जनवरी या उससे बाद 18 साल के हो रहे हैं, उन्हें मताधिकार के लिए एक साल इंतजार करना पड़ता है। हम चाहते हैं, ऐसा न हो। जब भी कोई 18 साल को जाए जाए तो उसे मताधिकार मिल जाए।

इसके लिए आयोग जनप्रतिनिध कानून 1950 की धारा 14 बी में बदलाव चाहता है। हम मतदाता सूची को आधार डेटा से भी जोड़ना चाहते हैं ताकि कोई मतदाता जब जगह बदले तो वह कई जगह पर पंजीकरण न करा सके।नतीजों के बाद ईवीएम के बारे में सवाल नहीं उठे, क्या घपले की बहस खत्म हो गई? headtopics.com

हर चुनाव के बाद ईवीएम कसौटी पर खरी साबित हुई है। चुनाव आयोग का दृढ़ मत है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड नहीं हो सकती। तकनीकी उपायों और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था के बूते पर हम यह बात मजबूती से कह सकते हैं। इन चुनावों में भी ईवीएम पर आयोग का विश्वास बढ़ा है।एक देश, एक चुनाव की बहस पर आपकी क्या राय है?

1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे। राजनीतिक कारणों से इसमें व्यवधान आ गया। एक साथ चुनाव कराने के लिए राजनीतिक आम सहमति जरूरी है। इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा।देश से बाहर रहे रहे भारतीयों को वोट का अधिकार देने के बारे में क्या किया जा रहा है?

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एनआरआई के मताधिकार का मामला पेचीदा है। आयोग ने 2015 में ही कुछ संशोधनों का प्रस्ताव किया था। फिर 27 नवम्बर, 2020 को आयोग ने कानून मंत्रालय से सम्पर्क किया ताकि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम की सुविधा दी जा सके। विदेश मंत्रालय भी से भी इस बाबत सम्पर्क किया गया है। इस मुद्दे पर कई मंत्रालयों से विचार-विमर्श की जरूरत है।

फोकस इन 4 बड़े लक्ष्य परयुवा जब 18 का हो, तो उसे मताधिकार उसी समय मिल जाए, ताकि उसे 1 साल तक इंतजार न करना पड़े।चुनाव के दौरान रैलियां अधिक से अधिक डिजिटल या वर्चुअल हों।चुनाव खर्च की सीमा बढ़े और जितने भी जरूरी नए सुधार हों, किए जाएं।विदेश में रहने वाले भारतीयों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का अधिकार मिले।

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बहुत कम लोगों को भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के नाम याद होंगे. चर्चा क्रिकेट के खिलाड़ियों की होती है क्योंकि दिल में क्रिकेट बसता है. लेकिन हॉकी की आज की जीत ने नई रीत की नींव डाल दी. भारत ने एक मैच नहीं जीता, आज भारत ने हॉकी की दुनिया में अपनी बादशाहत की तरफ निर्णायक कदम बढ़ाया है. भले ही इस बार कांस्य पदक जीता लेकिन यही पदक एक बार फिर भारतीय हॉकी को स्वर्णिम युग की तरफ ले जाएगा. आज की जीत के मायने आप इससे समझ सकते है कि क्रिकेट को जीने वाला देश आज हॉकी-हॉकी की धुन में डूबा हुआ है. मिलें हॉकी टीम के धुरंधरों से जिन्होंने आज इतिहास रच दिया.

हालात को ध्यान में रखते हुए चुनाव कराना चाहिए था I_am_Anil_Tyagi कभी देश के छात्रो के रोजगार के पेपर और रिजल्ट भी समय पर करवा दिया करो। आपको लगता है कि संक्रमण कम था तो फिर चुनाओ के चरण इतने क्यो किये आप चाहते तो 1 या 2 चरण में भी करवा सकते थे, w h o ने भी पहले ही आगाह कर दिया था कि भारत मे कोरोना की दूसरी लहर भयंकर हो सकती है तो इस स्थिति को आप ने उचित नही समझा

chahe agle election se vote dene wala hi na rahe .? jab exam postpone ki jaa sakti he pichhle saal train band ho sakti he to chunav kyo nhi? 2020कोरोना चैन के नाम जनता की कमर तोड़ी-सड़क पर भूखे पैदल मजदूर मीडिया में जमात 20ताली थाली बजी-21में विश्व में भारत की बदनामी के डंके गूंजे 20दिये जलवाए-21में लाशें जल रही 21कुम्भ हुआ-अब नदी में शव तैर रहे 21चुनाव की भीड़ की-अब अस्पतालों में मरीजों की भीड़ सोच आपकी, ज़मीर आपका

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