ममता बनर्जी के रुख से कांग्रेस तिलमिलाई, कहा- दीदी अवसरवादी, 2012 के बाद से संप्रग में नहीं

ममता बनर्जी के रुख से कांग्रेस तिलमिलाई, कहा- दीदी अवसरवादी, 2012 के बाद से संप्रग में नहीं #MamataBanerjee #TMC #Congress

Mamatabanerjee, Tmc

02-12-2021 19:20:00

ममता बनर्जी के रुख से कांग्रेस तिलमिलाई, कहा- दीदी अवसरवादी, 2012 के बाद से संप्रग में नहीं MamataBanerjee TMC Congress

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी खेमे में खलबली है। यह इसलिए भी है क्योंकि कांग्रेस जिस संप्रग की डोर से विपक्ष को एकजुट कर नेतृत्व कर रही थी उस पर ही ममता ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी खेमे में खलबली है। यह इसलिए भी है, क्योंकि कांग्रेस जिस संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की डोर से अब तक विपक्ष को एकजुट कर नेतृत्व कर रही थी, उस पर ही ममता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस जाहिर तौर पर तिलमिलाई हुई है और इसने ममता को सीधे-सीधे अवसरवादी करार दिया है। वहीं ममता के निकटस्थ रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने फिर से परोक्ष रूप से राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़ा कर आग को और भड़का दिया है। विपक्ष के कुछ दल चुप्पी साधे देख रहे हैं और बेचैन हैं कि ऐसे में वे क्या करें।

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पिछले कुछ दिनों से लगातार तृणमूल और कांग्रेस की दूरी बढ़ती जा रही थी। इसका चरम बुधवार को तब हुआ, जब मुंबई में शरद पवार से मुलाकात के बाद ममता ने संप्रग के अस्तित्व को ही खारिज कर दिया। संदेश साफ था कि अब जो भी गठबंधन तैयार होगा, उसका नेतृत्व नए सिरे से तय होगा। गौरतलब है कि माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी में भी इसको लेकर कुछ संदेश था। मुखपत्र में लिखा गया था कि कांग्रेस और ममता दोनों ही विपक्ष को नेतृत्व नहीं दे सकती हैं। नेतृत्व का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। ध्यान रहे कि इस पूरी लड़ाई में पवार ही एक ऐसी धुरी बचते हैं, जिनके खिलाफ बयान नहीं आए हैं।

यह भी पढ़ेंममता के बयान के बाद विपक्ष में खुली लड़ाई छिड़ीबहरहाल, ममता के बयान के बाद विपक्ष में खुली लड़ाई छिड़ गई है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने तो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला और कहा कि क्या उनको नहीं पता है कि संप्रग क्या है? बंगाल में जीत के बाद वह सोच रही हैं कि पूरे भारत ने 'ममता-ममता' का जाप करना शुरू कर दिया है। लेकिन भारत का मतलब बंगाल नहीं है और अकेले बंगाल का मतलब भारत नहीं है।' headtopics.com

यह भी पढ़ेंममता पर और तीखे सवाल दागेकांग्रेस का गुबार यहीं तक नहीं थमा। गुरुवार को संसद परिसर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन की मौजूदगी में ममता पर और तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिद्धांतों वाली पार्टी है। लेकिन ममता बनर्जी का जो चरित्र रहा है, वह जब राजग के साथ रहती हैं, तो उसे बेहतर बताती हैं। जब संप्रग के साथ रहती हैं तो उसे अच्छा बताती हैं। वैसे भी वह जिस संप्रग पर सवाल खड़ा कर रही हैं, वह उसके साथ 2012 से ही नहीं थीं।

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यह भी पढ़ेंकपिल सिब्बल और आनंद शर्मा ने संयमित बयान दियाकांग्रेस के ग्रुप-23 में शामिल वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और आनंद शर्मा ने जरूर संयमित बयान दिया और कहा कि यह समय एकजुटता का है। कांग्रेस के बगैर संप्रग वैसा ही है, जैसे आत्मा के बिना शरीर। लेकिन दूसरे सदस्यों के तीखे बयानों के बाद यह तो माना ही जा सकता है कि तृणमूल और कांग्रेस की दूरी अरसे तक बनी रहेगी। दरअसल प्रशांत किशोर के ट्वीट ने कांग्रेस को और उकसा दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि कांग्रेस का एक स्थान है, लेकिन नेतृत्व दैवीय अधिकार नहीं है। उन्होंने तो राहुल का नाम नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस के पवन खेड़ा ने जरूर स्पष्ट कर दिया कि जिसके नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया जा रहा है, वह भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लड़ रहा है।

यह भी पढ़ेंकांग्रेस अब राहुल गांधी को आगे रखने में जुटीममता बनर्जी की ओर से संप्रग पर सवाल उठाए जाने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब वह संसद भवन में सांसदों के निलंबन पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में खुद को आगे रख कर लड़ाई लड़ रही है। इनमें राहुल गांधी को वह नेता के तौर पर आगे रख रही है। इतना ही नहीं, राहुल भी इस प्रदर्शन में पूरा समय दे रहे हैं।

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दोनों अपनी अपनी अति महत्वाकांक्षी होने के कारण असफल नेत्री रह गई,राजहठ, बालहठ, त्रिया हाथ तो युगों युगों से प्रसिद्ध है? तिलमिलाने से क्या होगा? सिर्फ औकात बताई है, जो पार्टी बंगाल चुनाव में डबल जीरो अंक लेकर आती हैं, उससे और क्या आशा कर सकते हैं ?

ममता बनर्जी का रिवेन्ज टूरिज्म vs कांग्रेस : क्या 'दीदी एक्सप्रेस' पर सवार होंगे महाराष्ट्र के कांग्रेसी? ममता बनर्जी की यात्रा कड़ियों में जल्द ही और नेताओं के साथ मीटिंग होने की संभावना है क्योंकि वह अन्य नेताओं से मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या वे केंद्र में नए रूप में उन्हें स्वीकार करेंगे? bainjal ममता और मोदी में फर्क़ नहीं, घमंड का टूटना तय है। bainjal Swati is the unofficially spokesperson of maha bakwas aghadi bainjal बगैर कांग्रेस और भाजपा के, कोई सरकार बन ही नही सकती।

बीजेपी का ममता पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप, स्वामी का मोदी के वीडियो से पलटवार - BBC News हिंदीबीजेपी ने मुंबई दौरे में ममता बनर्जी पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया है. इसके बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक वीडियो ट्वीट किया है. क्या है मामला? देश के एक भी राजनेता को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत बोलना नहीं आता तो सम्मान करना कहां से आएगा. बकवास! राष्ट्रगान का सम्मान सिनेमाघरों में हो गया? लोगों को लूटा जा रहा है, पेट भर खाने को नहीं सर छुपाने को छत नहीं काम करने को रोजगार नहीं और बातें बना रहे जो कि कोरा आदर्शवाद और कुछ भी नहीं! शायद ममता बनर्जी मुस्लिम हो सकती है क्योंकि मुस्लिम लोग राष्ट्रगान,वंदे मातरम्, भारत माता की जय कहना पसंद नहीं करते। देश में कुछ ऐसे नेता है जो अपने आप को जनेऊ धारी हिंदू कहते हैं लेकिन हिंदू कहने से कोई हिंदू नहीं हो सकता।

ममता बनर्जी- शरद पवार की मुलाकात और यूपीए के अंत की बात, 2004 से 2021 तक, यूपीए के उत्थान और पतन की दास्तान | Rise and Fall of UPARise and Fall of UPA : 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली केन्द्र की बीजेपी सरकार का विकल्प बनने वाला यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस यानि यूपीए नरेन्द्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का विकल्प नहीं बनेगी क्योंकि अब उसका असित्व खत्म हो चुका है, कम से कम पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की ऐलान से तो ऐसा ही लगता है। 1 दिसंबर 2021 को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) से मुलाकात के बाद तो ममता दीदी ने साफ कह दिया कि कहीं कोई यूपीए नाम की चीज़ है ही नहीं, क्षेत्रीय दलों को खुद साथ आकर मोदी सरकार का विकल्प पेश करना होगा। जनसत्ता की इस खास रिपोर्ट में एक नजर यूपीए के उत्थान और पतन पर..

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