भ्रष्ट राजनीति और अफसरशाही के किस्से सुनाती पूर्व आईपीएस की किताब | DW | 07.12.2021

पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल ने अपनी किताब 'दमन तक्षकों का' में कई राजनेताओं, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों के किस्से बेबाकी से लिखे हैं.

Ias, Ips

07-12-2021 06:19:00

पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल ने अपनी किताब ' दमन तक्षकों का ' में कई राजनेताओं, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों के किस्से बेबाकी से लिखे हैं. IAS IPS DamanTakshkonKa BookExcerpt

पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल ने अपनी किताब ' दमन तक्षकों का ' में कई राजनेताओं, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों के किस्से बेबाकी से लिखे हैं.

यह पंक्तियां 1972 बैच के चर्चित आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी किशोर कुणाल की पुस्तक (जीवनी) से ली गई हैं. भ्रष्ट राजनेताओं, अधिकारियों व अपराधियों पर प्रबल प्रहार करती उनकी पुस्तक ‘दमन तक्षकों का' केवल उनकी जीवनी नहीं है, बल्कि देश की तत्कालीन भ्रष्ट व्यवस्था को उजागर करती वह सचाई है जिसे उन्होंने गुजरात, झारखंड, बिहार व भारत सरकार में विभिन्न पदों पर रहते हुए महसूस किया, झेला और उससे लड़े.

अपनी पुस्तक में उन्होंने तक्षक को अपराध का प्रतीक मानते हुए बतलाया है कि समाज में तीन प्रकार के तक्षक मौजूद हैं, जब तक इन तक्षकों का कानून सम्मत दमन नहीं होगा, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है. तक्षक वह नागराज (जहरीला सांप) था, जिसके डंसने से राजा परीक्षित की मौत हुई थी. पौराणिक कथाओं व धार्मिक ग्रंथों के आख्यानों के अनुसार राजा परीक्षित की मौत को कलियुग की शुरुआत माना जाता है.

पूर्व आइपीएस अधिकारी ने अपनी पुस्तक में तक्षकों के तीन प्रकार बताए हैं- खूंखार अपराधी, घूसखोर नेता व बिके हुए अधिकारी. इस पुस्तक से एक से बढ़कर एक तक्षकों के बारे में जानकर पता चलता है कि आठवें व नौंवे दशक में बिहार समेत कुछ अन्य राज्यों के कुछ सत्ताधारी राजनेताओं, अफसरों ने कैसे कानून का शासन ध्वस्त करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. इनकी करतूतों से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि ये अपने ही देश के हैं या फिर कोई बाहरी हमलावर. headtopics.com

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आईएएस मतलब ‘ऑलमाइटी सर्विस'यूं तो इस पुस्तक में कई चौंकाने वाले प्रसंग हैं, किंतु इनमें सबसे हैरतअंगेज राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के बारे में है.1978 में कुणाल जब मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में चार महीने के एक कोर्स के लिए गए तो जिस कमरे में रहने के लिए उन्हें ले जाया गया, उसमें पहले से एक आईएएस प्रोबेशनर रहते थे.

कुणाल लिखते हैं कि जब उन्होंने कमरे में प्रवेश किया वे महाशय केवल अंडरवियर और बनियान में थे और बगल में शराब की बोतलें व जाम थे. कुणाल ने उनसे पूछा, क्या यहां शराब पीने की इजाजत है. इस पर उन्होंने कहा,"अफसर शराब नहीं पियेगा तो ऊर्जा कहां से आएगी!"

फिर बातचीत के क्रम में उन्होंने शबाब का अर्थ और आईएएस का पूरा नाम भी समझाया. कहा,"आईएएस का पूरा नाम इंडियन ऑलमाइटी सर्विस है. ईश्वर को ऑलमाइटी कहते हैं. वहीं कहीं स्वर्ग में रहता होगा. धरती के ईश्वर तो हम हैं. सेवा भाव रहता तो आईएएस में क्यों आता. साहिबी और सेवा, दोनों दो ध्रुव हैं."

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वेतन तो सूखा साग है, ऊपरी कमाई है मलाईगुजरात के आणंद में भारतीय पुलिस सेवा में सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर स्वतंत्र प्रभार वाली पहली पदस्थापना में कुणाल को जो पहला केस मिला उसके संदर्भ में नाडियाद अनुमंडल के पुलिस उपाधीक्षक देसाई साहब के 'दिव्य ज्ञान' की चर्चा उन्होंने पुस्तक के पहले पन्ने में विस्तार से की है. headtopics.com

हत्या के चार फरार गुनहगारों की पैरवी के क्रम में देसाई साहब ने कुणाल से कहा,"पगार तो सरकार को दिखाने के लिए है. परिवार का दारोमदार तो थानेदार बंधुओं पर रहता है. सारे व्यय-व्यापार का जुगाड़ तो वही करते हैं. वेतन तो सूखा साग है, ऊपरी कमाई है मलाई."

कुणाल लिखते हैं कि इसी केस के संबंध में कुछ अधिकारियों ने कुणाल की शिकायत गृह विभाग के उप मंत्री रहे माधवलाल शाह से की गई. उनके मुताबिक शाह ने उन्हें फोन पर केस को खत्म करने की हिदायत देते हुए कहा कि तुम्हारा हाथ जल जाएगा, ये (आरोपी) करोड़पति, अरबपति लोग हैं.

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प्रत्युत्तर में कुणाल ने कहा,"कहां लिखा हुआ है कि करोड़पतियों को मर्डर करने की छूट है." कुणाल दावा करते हैं कि इस पर माधवलाल शाह ने उन्हें बोरिया-बिस्तर बांध लेने की धमकी दी और दो-तीन बाद उनका तबादला भी हो गया. हालांकि, पी.के पंत ने जब कुणाल से बात की तो उन्होंने तबादले को रोक कर उन्हें अपना काम करते रहने को कहा.

कुत्सित राजनीति, वीभत्स अपराधकभी पटना से दिल्ली तक की राजनीति को हिला देने वाली लोमहर्षक श्वेतनिशा उर्फ बॉबी हत्याकांड का प्रमाणिक तौर पर जिक्र करते हुए कुणाल ने अपनी पुस्तक में बताया है कि आखिर क्यों कहा जाता है कि ‘समरथ को नहिं दोष गुसाईं.' यह एक महिला की ऐसी हत्या थी जिसमें सेक्स, अपराध और राजनीति का सम्मिश्रण था. headtopics.com

अखबार की खबर पर यूडी केस दर्ज कर कुणाल ने कब्रिस्तान से लाश को निकालकर पोस्टमॉर्टम करवाया. अनुसंधान की इतनी तीव्र गति किसी ने देखी या सोची नहीं थी. इस घटना में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र रघुवर झा समेत कई छोटे-बड़े कांग्रेसी नेताओं का नाम आ रहा था.

तस्वीरेंः रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगरिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगभारत और रिश्वतखोर हुआ2021 की ट्रेस रैंकिंग में भारत 82वें नंबर पर है. पिछले साल उसकी रैंकिंग 77 थी. रैंकिंग तय करते वक्त सरकार से उद्योगपतियों के संपर्क को भी ध्यान में रखा जाता है.

रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगसबसे ईमानदार देशइस रैंकिंग के मुताबिक दुनिया के सबसे ईमानदार देश हैं, क्रमशः डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन.रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगटॉप 10 ईमानदारफिनलैंड, न्यूजीलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, यूके और कनाडा टॉप 10 में शामिल हैं.

रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगसबसे रिश्वतखोर देशट्रेस रैंकिंग में नॉर्थ कोरिया को दुनिया का सबसे रिश्वतखोर देश बताया गया है. उसके बाद तुर्कमेनिस्तान और फिर इरिट्रिया का नंबर आता है.रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगटॉप 10 रिश्वतखोर

वेनेजुएला, सोमालिया, साउथ सूडान, यमन, इक्वेटोरियल गिनी, कंबोडिया सीरिया और चाड दुनिया के सबसे ज्यादा रिश्वतखोर देशों में शामिल हैं.रिश्वतखोरी में और खराब हुई भारत की रैंकिंगपाकिस्तान और चीनभारत के दोनों पड़ोसी चीन और पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से खराब है. पाकिस्तान 194 देशों में 150वें नंबर पर है जबकि चीन 135वें नंबर पर. अमेरिका 23वें नंबर पर है. 

रिपोर्ट: विवेक कुमारकुणाल लिखते हैं कि वरीय अधिकारियों का बर्ताव ऐसा था जैसे सच का पता लगा कर उन्होंने कोई गुनाह कर दिया हो. वह लिखते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने उन्हें फोन कर पूछा कि बॉबी कांड का मामला क्या है. कुणाल ने उन्हें जवाब दिया कि सर कुछ मामलों में आपकी छवि अच्छी नहीं है, किंतु चरित्र के मामले में आप बेदाग हैं, इसमें पड़िएगा तो यह ऐसी तीव्र अग्नि है कि हाथ जल जाएगा. अत: कृपया इससे अलग रहें. जवाब सुनकर मुख्यमंत्री ने फोन रख दिया था.

जांच के क्रम में बॉबी की कथित मां व बिहार विधान परिषद की सदस्य राजेश्वरी सरोज दास ने कुणाल को बताया कि कैसे स्पीकर के पुत्र रघुवर झा की दी दवाई से उसकी तबीयत बिगड़ी, कैसे नकली डॉक्टर ने उसका इलाज किया और कैसे झूठी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक बनी.अदालत को दिए बयान में भी उन्होंने कहा कि बॉबी को कब और किसने जहर दिया था. कुणाल के अनुसंधान से यह साबित हो गया था कि श्वेतनिशा की हत्या षड्यंत्र रचकर की गई थी. इसके लिए मुख्य सचिव ने उन्हें बधाई भी दी थी. किंतु इसी बीच दो मंत्री और 40 विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मिश्र के पास पहुंचे और उन्हें धमकी दी कि अगर केस तत्काल सीबीआई को ट्रांसफर नहीं किया गया तो वे उनकी सरकार गिरा देंगे. मुख्यमंत्री बाध्य हो गए और केस सीबीआई को चला गया.

सीबीआई ने आरोपियों को अभयदान दे दिया. सीबीआई की जांच में भले ही आरोपी मुक्त हो गए, किंतु जनता ने कुणाल के अनुसंधान पर ही विश्वास किया और श्वेतनिशा उर्फ बॉबी हत्याकांड सेक्स-राजनीति से जुड़े अपराधों के इतिहास में एक रोचक दास्तां बनकर जुड़ गया.कुणाल ने आणंद व मुंगेर की कुछ उन घटनाओं का जिक्र किया है जिसमें पुलिसकर्मी निर्धनों को पकड़कर किसी भी मामले में जेल भिजवा देते थे और त्वरित गति से मामले के उद्भेदन के इसी शैली से वरिष्ठ अधिकारियों से पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र पाते थे.

अपने सरकारी आवास की साज-सज्जा पर डेढ़-दो करोड़ रुपये खर्च करने वाले राज्यसभा के एक सांसद से जब कुणाल ने इतने पैसे खर्च करने का प्रयोजन पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि 'मनीपुर' यानी पैसे के दम पर वह राज्यसभा सांसद बने रहेंगे और इसी बंगले में रहते रहेंगे. वह कभी इस पार्टी से तो कभी उस पार्टी से वे राज्यसभा के सदस्य बने रहे.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंडक्या भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है?सिर्फ 36 प्रतिशत अमेरिकी भारतीयों को लगता है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. 39 प्रतिशत भारतीयों को ऐसा नहीं लगता है. इनमें हर पांच में से एक व्यक्ति का कोई मत नहीं था. यह सर्वेक्षण कार्नेजी एनडाओमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस, जॉन्स ऑपकिंस-एसआईएस और पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय ने मिल कर किया. इसमें 1200 अमेरिकी भारतीयों ने भाग लिया.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंडभ्रष्टाचार सबसे बड़ी चुनौतीसर्वे में रिसर्च और एनालिटिक्स कंपनी यूगव भी साझेदार थी. सर्वे को एक से 20 सितंबर 2020 के बीच कराया गया. सर्वे में यह भी पाया गया कि 18 प्रतिशत अमेरिकी भारतीय भ्रष्टाचार को भारत की सबसे बड़े चुनौती मानते हैं जिसके बारे में तुरंत कुछ किए जाने की जरूरत है.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंडधार्मिक बहुसंख्यकवाद की कम चिंताइससे कम अमेरिकी भारतीय, यानी सिर्फ 15 प्रतिशत, भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं. उस से भी कम, सिर्फ 10 प्रतिशत, लोगों ने कहा कि धार्मिक बहुसंख्यकवाद देश की सबसे बड़ी चुनौती है. अमेरिकी भारतीय अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय हैं.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंडमोदी के प्रशंसकसर्वे में शामिल लोगों में से 49 प्रतिशत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन को सराहा. मोदी के समर्थकों में सबसे ज्यादा रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक हैं, हिंदू हैं, इंजीनियर हैं, अमेरिका के बाहर पैदा हुए हैं और मूल रूप से उत्तर और पश्चिम भारत के रहने वाले हैं. 32 प्रतिशत लोगों ने कहा की वो मोदी को नापसंद करते हैं. बाकी 19 प्रतिशत ने कहा कि इस विषय में उनका कोई मत नहीं है.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंड40 प्रतिशत हैं राजनीति से दूर40 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका भारत में किसी भी राजनीतिक दल की तरफ झुकाव नहीं है. 32 प्रतिशत बीजेपी का समर्थन करते हैं और 12 प्रतिशत कांग्रेस का.अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंड

अमेरिका में उदार, भारत में नहींअधिकतर अमेरिकी भारतीय अमेरिकी मुद्दों पर उदारवादी विचार रखते लेकिन भारत के मुद्दों पर संकुचित विचार रखते हैं. धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों, आप्रवासियों के अधिकारों और आरक्षण जैसे विषयों पर इनके अमेरिकी नीतियों से ज्यादा भारतीय नीतियों के प्रति संकुचित विचार हैं.

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दोहरे मापदंडछोड़ रहे हैं भारत की नागरिकताइसके साथ ही भारत सरकार के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 2015 से 2019 के बीच करीब 6.7 लाख भारतीयों ने भारत की नागरिकता छोड़ दूसरे देशों की नागरिकता अपना ली. 2015 में करीब 1.45 लाख और 2016 में भी लगभग इतने ही लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी थी. 2017 और 2018 में यह संख्या घट कर 1.28 लाख और 1.25 लाख  पर आई, लेकिन 2017 में यह फिर बढ़ कर 1.36 लाख पर पहुंच गई.

रिपोर्ट: चारु कार्तिकेय

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