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भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर रचा इतिहास

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24-07-2021 19:30:00

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मणिपुर की 26 साल की भारोत्तोलक मीराबाई चानू ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय भारोत्तोलक हैं. उन्होंने कुल 202 किलोग्राम (87 किलोग्राम + 115 किलोग्राम) से कर्णम मल्लेश्वरी के 2000 सिडनी ओलंपिक में कांस्य पदक से बेहतर प्रदर्शन किया.

शनिवार को चानू पूरे आत्मविश्वास से भरी थीं और पूरे प्रदर्शन के दौरान उनके चेहरे पर मुस्कान रही. उनके कान में ओलंपिक रिंग के आकार के बूंदे चमक रहे थे, जो उनकी मां ने उन्हें भेंट दिए थे.स्नैच को चानू की कमजोरी माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने पहले ही स्नैच प्रयास में 84 किग्रा वजन उठाया. मणिपुर की इस भारोत्तोलक ने समय लेकर वजन उठाया.

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उन्होंने अगले प्रयास में 87 किग्रा वजन उठाया और फिर इसे बढ़ाकर 89 किग्रा कर दिया, जो उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 88 किग्रा से एक किग्रा ज्यादा था, जो उन्होंने पिछले साल राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में बनाया था.हालांकि वह स्नैच में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बेहतर नहीं कर सकीं और स्नैच में उन्होंने 87 किग्रा का वजन उठाया और वह जिहुई से ही इसमें पीछे रहीं, जिन्होंने 94 किग्रा से नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया.

चीन की भारोत्तोलक का इसमें विश्व रिकार्ड (96 किग्रा) भी है.क्लीन एवं जर्क में चानू के नाम विश्व रिकार्ड है, उन्होंने पहले दो प्रयासों में 110 किग्रा और 115 किग्रा का वजन उठाया.हालांकि वह अपने अंतिम प्रयास में 117 किग्रा का वजन उठाने में असफल रहीं, लेकिन यह उन्हें पदक दिलाने और भारत का खाता खोलने के लिए काफी था. headtopics.com

पदक जीतकर वह रो पड़ीं और खुशी में उन्होंने अपने कोच विजय शर्मा को गले लगाया. बाद में उन्होंने ऐतिहासिक पोडियम स्थान हासिल करने का जश्न पंजाबी भांगड़ा करके मनाया.इस उपलब्धि की उनकी खुशी मास्क से भी छुप नहीं रही थी जो पदक समारोह के दौरान और बढ़ गई.खेलों के लिए बनाए गए कोविड-19 प्रोटोकॉल में पदक विजेताओं को सामाजिक दूरी बनाए रखनी थी और वे ग्रुप फोटोग्राफ के लिए एक साथ नहीं हो सके.

लेकिन तीनों पदकधारियों ने एक दूसरे को बधाई दी और फोटो भी खिंचवाई, लेकिन एक अधिकारी ने उन्हें अलग होने के लिए कह दिया.इस भारतीय ने अंतरराष्ट्रीय एरीना में हर जगह खुद को साबित किया, बस इसमें ओलंपिक पदक की कमी थी, जो अब पूरी हो गई.चानू विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण, राष्ट्रमंडल खेलों में (2014 में रजत और 2018 में स्वर्ण) दो पदक और एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

मीराबाई को ओलंपिक में अपनी दी कानों की बाली पहने देखकर भावुक हुईं उनकी मांमीराबाई चानू के ऐतिहासिक रजत पदक और उनकी मधुर मुस्कान के अलावा शनिवार को इस भारोत्तोलक के शानदार प्रदर्शन के दौरान उनके कानों में पहनी ओलंपिक के छल्लों के आकार की बालियों ने भी ध्यान खींचा जो उनकी मां ने पांच साल पहले अपने जेवर बेचकर उन्हें तोहफे में दी थी.

मीराबाई की मां को उम्मीद थी कि इससे उनका भाग्य चमकेगा. रियो 2016 खेलों में ऐसा नहीं हुआ, लेकिन मीराबाई ने आज सुबह टोक्यो खेलों में पदक जीत लिया और तब से उनकी मां सेखोम ओंग्बी तोम्बी लीमा के खुशी के आंसू रुक ही नहीं रहे हैं.लीमा ने मणिपुर में अपने घर से कहा, ‘मैं बालियां टीवी पर देखी थी, मैंने ये उसे 2016 में रियो ओलंपिक से पहले दी थी. मैंने मेरे पास पड़े सोने और अपनी बचत से इन्हें बनवाया था, जिससे कि उसका भाग्य चमके और उसे सफलता मिले.’ headtopics.com

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उन्होंने कहा, ‘इन्हें देखकर मेरे आंसू निकल गए और जब उसने पदक जीता तब भी. उसके पिता (सेखोम कृति मेइतेई) की आंखों में भी आंसू थे. खुशी के आंसू. उसने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की.’मीराबाई को टोक्यो में इतिहास रचते हुए देखने के लिए उनके घर में कई रिश्तेदार और मित्र भी मौजूद भी मौजूद थे.

मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 25 किमी दूर मीराबाई के नोंगपोक काकचिंग गांव में स्थित घर में कोविड-19 महामारी के कारण कर्फ्यू लागू होने के बावजूद शुक्रवार रात से ही मेहमानों का आना जाना लगा हुआ था.मीराबाई की तीन बहनें और दो भाई और हैं.उनकी मां ने कहा, ‘उसने हमें कहा था कि वह स्वर्ण पदक या कम से कम कोई पदक जरूर जीतेगी. इसलिए सभी ऐसा होने का इंतजार कर रहे थे. दूर रहने वाले हमारे कई रिश्तेदार कल शाम ही आ गए थे. वे रात को हमारे घर में ही रुके.’

उन्होंने कहा, ‘कई आज (शनिवार) सुबह आए और इलाके के लोग भी जुटे. इसलिए हमने बरामदे में लगा दिया और टोक्यो में मीराबाई को खेलते हुए देखने के लिए लगभग 50 लोग मौजूद थे. कई लोग आंगन के सामने भी बैठे थे. इसलिए यह त्योहार की तरह लग रहा था. ’’लीमा ने कहा, ‘कई पत्रकार भी आए. हमने कभी इस तरह की चीज का अनुभव नहीं किया था.’

मीराबाई ने टोक्यो के भारोत्तोलन एरेना में अपनी स्पर्धा शुरू होने से पहले वीडियो कॉल पर बात की और अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया.मीराबाई की रिश्ते की बहन अरोशिनी ने कहा, ‘वह (मीराबाई) बहुत कम घर आती है (ट्रेनिंग के कारण) और इसलिए एक दूसरे से बात करने के लिए हमने वॉट्सऐप पर ग्रुप बना रखा है. आज सुबह उसने हम सभी से वीडियो कॉल पर बात की और अपने माता-पिता से उसने आशीर्वाद लिया.’ headtopics.com

उन्होंने कहा, ‘उसने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने के लिए मुझे आशीर्वाद दीजिए. उन्होंने आशीर्वाद दिया. यह काफी भावुक लम्हा था.’बिंद्रा ने लिखा, कोविड काल में रजत पदक ‘खुशी के पल ही याद’ दिलाता रहेगाटोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू को लिखे प्रशंसा पत्र में महान निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने शनिवार को कहा कि भारतीय भारोत्तोलक की यह शानदार उपलब्धि ऐसे समय में ‘खुशी की छोटी सी याद’ का काम करेगी जब देश कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है.

भारत के अब तक एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने कहा कि यह उपलब्धि आने वाली भारतीय पीढ़ियों को प्रेरित करेगी.बिंद्रा ने चानू को बधाई देते हुए पत्र में लिखा, ‘टोक्यो ओलंपिक 2020 में आपका शानदार प्रदर्शन निश्चित रूप से ओलंपिक खेलों में किसी भारतीय खिलाड़ी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रूप में याद रखा जाएगा और यह आने वाली पीढ़ियों के लिये प्रेरणा के रूप में भी काम करेगा.’

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