भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ाने 15 दिसंबर से बहाल होंगी: विमानन मंत्रालय - BBC Hindi

भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ाने 15 दिसंबर से बहाल होंगी: विमानन मंत्रालय

26-11-2021 15:45:00

भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ाने 15 दिसंबर से बहाल होंगी: विमानन मंत्रालय

विमानन मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 15 दिसंबर से बहाल हो जाएंगी.

11:33चीन यूरोप के इस छोटे से देश से क्यों इतना परेशान है?Reutersचीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंगImage caption: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंगदुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और यूरोप के एक बेहद छोटे देश लिथुआनिया के बीच पिछले कुछ समय से ताइवान को लेकर संघर्ष जारी है.

लिथुआनिया ताइवान के मुद्दे पर चीन की वन चाइना पॉलिसी को मानने से इनकार कर चुका है.इसके साथ ही लिथुआनिया ने चीन के नेतृत्व वाले यूरोपीय देशों के एक संगठन से ख़ुद को अलग कर लिया है.इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच चुके हैं.

लेकिन बीते बुधवार लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने चीन को लेकर जो कुछ कहा है, उसके बाद चीनी सरकार ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है.चीनी न्यूज़ वेबसाइट द ग्लोबल टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने अमेरिका में एएफ़पी के साथ बातचीत में कहा है कि उनका देश “दुनिया को ये दिखा रहा है कि किस तरह सप्लाई चेन में विविधता लाकर और साथी लोकतांत्रिक देशों के साथ एकजुट होकर चीन के बढ़ते दबाव का सामना किया जा सकता है.” headtopics.com

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उन्होंने कहा,“मुझे लगता है कि लिथुआनिया से जो सबसे बड़ा सबक सीखा जा सकता है, वो ये है कि आर्थिक दबाव का मतलब ये नहीं है कि एक देश विदेश नीति से जुड़े अपने फ़ैसले स्वतंत्रता से लेने बंद कर दे.”चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता चाओ लिजियान ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है –

“लिथुआनिया के विदेश मंत्री ने जो कुछ कहा है, अगर उसका असलियत से कोई वास्ता है – (अगर) लिथुआनिया सरकार स्वतंत्रता के साथ विदेश नीति से जुड़े फैसले ले सकती है तो मैं जानना चाहता हूँ कि वह अमेरिका में क्या कर रहे हैं?”उन्होंने कहा, “ये साबित करता है कि लिथुआनिया के आक्रामक क़दम के पीछे एक कठपुतली चलाने वाला है जो कि ये एक सोची समझी रणनीति के तहत ये सब करवा रहा है. मैं लिथुआनिया की डील पर ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि चीन की संप्रभुता को नुक़सान पहुँचाने के बदले में अमेरिका से एक्सपोर्ट क्रेडिट लेना बेहद अनैतिक और ख़तरनाक है.”

Getty Imagesलिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिसImage caption: लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिसलिथुआनिया इस साल की शुरुआत में चीन की अगुआई वाले सीईईसी (चीन और मध्य-पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच सहयोग) से अलग हो चुका है.28 लाख से भी कम आबादी वाले लिथुआनिया के इस फ़ैसले को सीधे-सीधे चीन को चुनौती के रूप में देखा गया था.

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चीन ने साल 2012 में ये सहयोग फ़ोरम बनाया था. इसे 17+1 भी कहा जाता है. लिथुआनिया ने न सिर्फ़ अपने को इस फ़ोरम से अलग किया है बल्कि बाक़ी सदस्य देशों से भी हटने की अपील की है.इसके साथ ही ख़बरों के मुताबिक़, वन चाइना पॉलिसी को अस्वीकार करते हुए इस्टोनिया, लाटविया और लिथुआनिया के नेता आने वाले हफ़्तों में ताइपे पहुँचने वाले हैं. headtopics.com

ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित ख़बर में कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर लिथुआनिया इसी तरह अपनी चीन नीति पर टिका रहा तो वह अलग-थलग पड़ सकता है.

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