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भारत-चीन तनाव: खौफ में लद्दाख के लोग, बताया- 1962 जैसी हो रही सैन्य हलचल

कुछ तो है.. चीन सीमा पर 1962 जैसी है हलचल #INDvsCHINA #laddakh

02-06-2020 06:10:00

कुछ तो है.. चीन सीमा पर 1962 जैसी है हलचल INDvsCHINA laddakh

India News: लद्दाख में जारी भारत-चीन तनाव को खत्म करने के लिए दोनों ओर से बातचीत का सिलसिला जारी है। लेकिन बढ़ते तनाव से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीण दहशत में हैं। चुशुल के सीमावर्ती गांवों के लोगों ने बताया कि 1962 के बाद पहली बार भारतीय सेना की इतने बड़े पैमाने पर हलचल दिख रही है।

Edited By Chandra Pandey |इकनॉमिक टाइम्स | Updated:02 Jun 2020, 08:31:00 AM ISTfacebookemailहाइलाइट्सएलएसी पर पट्रोलिंग के दौरान अक्सर भारत और चीन के सैनिकों में होती रहती है तनातनीहर बार तनातनी को बातचीत से तुरंत खत्म किया जाता था लेकिन पूर्वी लद्दाख में इस बार तनाव बहुत ज्यादा

10तक: ह‍िंदुस्तान ने LAC पर दिखाया दम तो चीन ने पीछे ल‍िए कदम ओवैसी ने पूछा, ना कोई घुसा है, ना कोई घुसा हुआ है तब 'डी-एस्केलेशन' क्यों? डीएसपी देविंदर पाकिस्तानी हाईकमीशन के अधिकारी से जुड़ा था, जो जम्मू-कश्मीर आतंकियों की भर्ती और टेरर फंडिंग में शामिल था

चुशुल में सीमावर्ती गांवों के लोगों में खौफ, बोले- 1962 के बाद पहली बार दिख रही ऐसी सैन्य हलचलचीन की आक्रामकता के जवाब में भारतीय सेना की भी हलचल तेज, बातचीत से हल की कोशिश जारीहकीम इरफान राशिद, श्रीनगरचीन से लहे पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले करीब 2,000 लोग इलाके में जारी भारी सैन्य मूवमेंट से चिंतित हैं। बुजुर्गों का दावा है कि 1962 के बाद पहली बार अपनी तरफ से इतने बड़े पैमाने पर सैन्य मूवमेंट दिखाई दे रहा है। लद्दाख ऑटोनोमस काउंसिल के एक मेंबर के मुताबिक गांव वाले सैनिकों और हथियारों के मूवमेंट से खौफ में हैं। चुशुल के नजदीक 3 पंचायत हलकों के 8 गावों में लोगों को डर है कि इलाके को किसी भी वक्त हिंसा अपनी आगोश में ले सकती है।

ग्रामीण बोले- इससे पहले 1962 में देखी थी ऐसी सैन्य हलचलचुशुल के काउंसिलर कोन्चोक स्टैन्जिन ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'हम अपनी तरफ से असामान्य सैन्य हलचल और तोपों-हथियारों का मुवमेंट देख रहे हैं। हमारे बुजुर्गों ने इससे पहले 1962 में चीन के साथ जंग के वक्त इस तरह की हलचल देखी थी। हम चाहते हैं कि चीजें जल्द से जल्द ठीक हों।'

चीन की हरकत पर शाह, हल्के में नहीं ले रहेलद्दाख ऑटोनोमस हिल डिवेलपमेंट काउंसिल में शिक्षा से जुड़ी एग्जिक्यूटिव काउंसिलर ने भारत और चीन के बीच तनाव कम करने के लिए द्विपक्षीय बातचीत की वकालत की।गलवान घाटी और फिंगर-4 एरिया में चरम पर तनावस्टैन्जिन ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को गांवों का दौरा किया था। लोग खेती के कामों में लगे हुए हैं लेकिन उनमें तनाव बना हुआ है। उन्होंने बताया, 'अभी दो जगहों- गलवान घाटी और फिंगर-4 में तनाव है। जिन जगहों पर तनाव है, वहां से इन गांवों की हवाई दूरी (एरियल डिस्टेंस) 10 किलोमीटर से भी कम है।' फिंगर 4 एरिया में हर साल जाड़े के दिनों में गांव के चरवाहे अपने मवेशियों को चराने जाते हैं। हर साल वे वहां कुछ महीनों तक रहते हैं।

'पहले भी होती थी तनातनी, इस बार मामला बहुत गंभीर'स्टैन्जिन कहते हैं, 'इस साल से पहले तक दोनों पक्षों में कोई तनातनी होती थी तो उसे तुरंत बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाता था। यहां नियमित तौर पर अपनी सेना पट्रोलिंग करती रहती है लेकिन कभी भी अभी जैसे तनावपूर्ण हालात नहीं होते थे।'

पढ़ें: लद्दाख बॉर्डर के पास उड़ रहे चीन के फाइटर प्लेनन संचार नेटवर्क, न पर्याप्त विकास, ग्रामीणों को इसलिए भी ज्यादा चिंताएक स्थानीय निवासी ने कहा कि अगर स्थितियां बिगड़ती हैं तो हम कहां जाएंगे, इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। उसने बताया कि यहां कम्यूनिकेशन नेटवर्क और विकास कार्यों की कमी की वजह से हम और ज्यादा जोखिम में हैं। हालांकि, स्टैन्जिन कहते हैं कि इस चिंता को दूर किया जा रहा है।

तनाव से पैंगोंग झील पर पर्यटकों के आने की उम्मीद भी खत्मस्थानीय लोगों के लिए इलाके में पैंगोंग झील आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र है। यह गर्मियों में खुलती है और जाड़े के दिनों में दुनिया से कटी हुई रहती है। गर्मी का ही मौसम है लेकिन कोरोना वायरस महामारी और भारत-चीन के बीच तनाव से अगले कुछ महीनों तक पर्यटकों के यहां आने की उम्मीद बहुत कम है।

कोरोना की वजह से देश में बीते 24 घंटे में अमेरिका से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान, भारत में 425 की मौत जबकि... India-China: कांग्रेस का अटैक- चीन हमारी सीमा से पीछे हटा, पीएम मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए कोरोना वायरस: राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या एक लाख के पार - BBC Hindi

1962 में चीन ने यही से किया था मुख्य हमलापैंगोंग सो झील 1962 के बाद से ही जब-तब दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहती है। 1962 में चीन ने इसी इलाके में भारत पर मुख्य हमला बोला था।अगस्त 2017 में पैंगोंग सो के किनारे भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे। दोनों ओर से जमकर लात-घूसे चले थे। पत्थरबाजी, लाठी-डंडे और स्टील रॉड से एक दूसरे पर हमले हुए थे। 19 अगस्त 2017 को इसका वीडियो काफी वायरल हुआ था।

झील की भौगौलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। यह चुशुल अप्रोच के रास्ते में पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अगर भविष्य में कभी भारतीय क्षेत्र पर हमले की हिमाकत करता है तो चुशुल अप्रोच का इस्तेमाल करेगा क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व है। पैंगोंग सो झील के उत्तर और दक्षिण की तरफ से चीन के दुस्साहस की आशंका हमेशा बनी हुई है।

पैंगोंग सो लेह के दक्षिणपूर्व में 54 किलोमीटर की दूरी पर है। 134 किलोमीटर लंबी यह झील 604 वर्ग किलोमीटर के दायर में फैली हुई है। जिस पॉइंट पर इसकी चौड़ाई सबसे ज्यादा है, वहां यह 6 किलोमीटर चौड़ी है।पैंगोंग झील तिब्बत से लेकर भारतीय क्षेत्र तक फैली है। इसका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है। इसके 89 किलोमीटर यानी करीब 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। झील के 45 किलोमीटर पश्चिमी हिस्से यानी करीब एक तिहाई हिस्से पर भारत का नियंत्रण है।

चीन ने पैंगोंग सो झील के आस-पास मजबूत सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बना लिया है। झील के किनारों से सटे ऐसे सड़क बना लिए हैं जिनमें भारी और सैन्य वाहन भी आ-जा सकते हैं।पैंगोंग सो झील 14,270 फीट यानी 4,350 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। जाड़ों में यहां तापमान शून्य के बहुत नीचे चला जाता है। इस वजह से यह झील जम जाती है।

आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने की है तिलमिलाहटसेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में विजिटिंग फेलो और लद्दाख के रहने वाले चीन मामलों के विशेषज्ञ सिद्दिक वाहिद चीन के मंसूबों को खतरनाक बताते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे जल्द तनाव के खत्म होने की उम्मीद नहीं दिखती। यह कोई टैक्टिकल मूव नहीं है। भारत ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में जो रणनीतिक कदम उठाया था, उसी के जवाब में चीन ने ये रणनीतिक कदम उठाया है।'

LAC को अपने मनमाफिक मान्य कराना चाहता है चीनन्यूयॉर्क के न्यू स्कूल यूनिवर्सिटी में इंडिया-चाइना इंस्टिट्यूट के बॉर्डरलैंड प्रॉजेक्ट से भी जुड़े वाहिद ने बताया कि चीन अब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के अपने हित में परिभाषित करने के लिए बातचीत को मजबूर करने की कोशिश कर सकता है।

सूबे में रही हो क‍िसी की भी सरकार, सबमें रहे व‍िकास दुबे के 'वफादार' चीनी सेना का गलवान में पीछे हटना शांति की पहल या एक और साज‍िश? Annual Amarnathji Yatra to held in restricted manner this year in view of Covid-19 pandemic

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kishoretkt कैलाश मानसरोवर जो वापस लेना है। Chalo China ..waha bhagwa laraheyge आज गुप्ताजी भीकहे समाचारपत्र में मै भी कई बार आगाह की J&Kमें सरकारके किऐका साईडइफेक्ट हैये! मै कही बौद्धवाद हमें बर्बाद कर देगा! भारतीयो ने समय से इसे देश बहर किया !! शर्मा जी कहे तो मै यह भी कही इतना बड़ा क्त्र 5लाख बौद्ध निवास लद्दाख में जनता बसाओ मोदी सुनते नहीं सुनाते

DivinePlay_Of_GodKabir Once Kabir Paramatma discussed knowledge with 104-year-old Ramananda at the age of 5. Introduced himself to him, and showed Satlok. Then Ramananda was determined that Kabir Sahib is the complete Brahman. 3DaysLeft_KabirPrakatDiwas सब नौटंकी है।

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