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बुंदेलखंड के इतिहास से रूबरू होने के लिए इन जगहों की जरूर करें सैर

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12-09-2021 16:00:00

बुंदेलखंड के इतिहास से रूबरू होने के लिए इन जगहों की जरूर करें सैर Bundelkhand Bundelkhand History Travel

झांसी के किले का निर्माण सन 1613 में बुंदेल नरेश बीर सिंह जूदेव ने करवाया था। बुंदेलों ने तकरीबन 25 वर्षों तक यहां शासन किया। इसके बाद किले पर मुगलों मराठों और अंग्रेजों का शासन रहा। मराठा शासनकाल में इस जगह को शंकरगढ़ कहा जाता था।

भारत के इतिहास को तीन वर्गों में बांटा गया है। इनमें दूसरे भाग को मध्यकालीन भारत कहा जाता है। मध्यकालीन इतिहास को पुनर्जागरण का भी दौर भी कहा जाता है। इटली को पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। इतिहाकारों की मानें तो इटली में सबसे पहले पुनर्जागरण हुआ था। इसके अग्रदूत दांते हैं। मध्यकालीन भारत में भक्ति युग का उदय हुआ है। तत्कालीन समय में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बुंदेल राजवंश का भी उदय हुआ था। बुंदेलों के बारे में कहा जाता है कि वे विंध्यवासिनी देवी के उपासक थे। इनके शासन क्षेत्रों को बुंदेलखंड कहा जाता है। बुंदेलखंड का प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति है। जेजाकभुक्ति गुप्त काल का प्रमुख राज्य था। यह नर्मदा और यमुना नदी के किनारे बसा है। बुंदेलखंड अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए बेहद लोकप्रिय है। साथ ही यह शूरवीरों का स्थल भी रहा है। इस पावन धरती पर कई शूरवीर पैदा हुए हैं। इसके लिए बुंदेलखंड को शूरवीरों का स्थल भी कहा जाता है। इतिहासकारों की मानें तो झांसी की रानी, मेजर ध्यानचंद, मैथलीशरण गुप्त जैसे महान लोगों का जन्म बुंदेलखंड की धरती पर हुआ है। अगर आप बुंदेलखंड के इतिहास से रूबरू होना चाहते हैं, तो इन जगहों की जरूर सैर करें-

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झांसी का किलाझांसी के किले का निर्माण सन 1613 में बुंदेल नरेश बीर सिंह जूदेव ने करवाया था। बुंदेलों ने तकरीबन 25 वर्षों तक यहां शासन किया। इसके बाद किले पर मुगलों, मराठों और अंग्रेजों का शासन रहा। मराठा शासनकाल में इस जगह को शंकरगढ़ कहा जाता था। हालांकि, सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में खूब लड़ी मर्दानी झांसी की रानी ने किले से लड़ाई लड़ी थी। बुंदेलखंड की सभ्यता और संस्कृति से रूबरू होने के लिए झांसी का किला देखने जा सकते हैं।

यह भी पढ़ेंखजुराहोबुंदेलखंड में आकर्षण का केंद्र खजुराहो है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो है, जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। खजुराहो में कई प्राचीन और मध्यकालीन विश्व प्रसिद्ध सनातन और जैन धर्म के मंदिर हैं। इन मंदिरों का निर्माण चंदेल राजवंशों ने करवाया है। हर साल काफी संख्या में पर्यटक खजुराहो मंदिर और देव दर्शन के लिए आते हैं। अगर आप चंदेल वंश के अद्भुत वास्तुकला का सजीव चित्रण देखना चाहते हैं, तो एक बार खजुराहो जरूर जाएं। headtopics.com

यह भी पढ़ेंपांडव गुफापांडव गुफा मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में स्थित है। महाभारतकालीन गुफा आज भी अवस्थित है। ऐसा कहा जाता है कि गृह त्याग के बाद पांडव इस गुफा में ठहरे थे। गुफा का निर्माण एक बड़े चट्टान पर किया गया है। पांडव गुफा के नाम पर पचमढ़ी शहर का नाम रखा गया है। आज भी पांडव गुफा यथावत अवस्थित है। हर रोज काफी संख्या में पांडव गुफा देखने पचमढ़ी आते हैं। आप जब कभी बुंदेलखंड की यात्रा करें, तो पांडव गुफा देखने पचमढ़ी जरूर जाएं।

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आखिर सवालों मे क्यों है केंद्रीय जांच एजेंसियों की साख? देखें 10 तक

राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली जांच एजेंसियों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी चीज है साख. लेकिन वो साख अब सवालों में हैं. आपको शायद याद होगा साल 2013 में कोयला घोटाले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई पिंजरे में बंद वो तोता बन गयी है जो अपने मालिक की बोली बोलती है. अब साल है 2021, सीबीआई ही नहीं बल्कि ईडी और एनसीबी तक जैसी बड़ी जांच एजेंसियों पर भरोसा छोटा ना हो इसलिए जरूरी है दस्तक देना. इस वक्त मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी नशे के जाल से देश को बचाने वाली एजेंसी वो तालाब बन गई है, जिसके पानी की साख पर सवाल उठ रहे हैं. देखिए 10 तक का ये एपिसोड.

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जानें, मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेजविशेषज्ञों की मानें तो लोगों की सहनशक्ति में असमानताएं हैं। कुछ लोग बुरे वक्त का सामना निर्भीक होकर करते हैं तो कुछ लोग बेहद घबरा जाते हैं। इससे उनके मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति तनाव और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।