बिहार चुनाव: किसानों की नाराज़गी क्या एनडीए पर भारी पड़ेगी - BBC News हिंदी

बिहार चुनाव: किसानों की नाराज़गी क्या एनडीए पर भारी पड़ेगी

26-09-2020 10:36:00

बिहार चुनाव: किसानों की नाराज़गी क्या एनडीए पर भारी पड़ेगी

कोरोना के दौर में होने जा रहे बिहार विधानसभा चुनाव में नए कृषि बिल पर किसानों की नाराज़गी को कितना बड़ा मुद्दा बना पाएगा विपक्ष?

ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से कहा था कि उनकी पार्टी नए कृषि बिल के समर्थन में है, लेकिन वो साथ ही किसानों की उस माँग का भी समर्थन करते हैं, जिसमें एमएसपी से कम दाम पर फसलों की ख़रीद को अपराध घोषित करने की बात है.बिहार के मुख्यमंत्री का बिल को समर्थन देने वाला बयान केसी त्यागी के बयान के बाद आया है.

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कृषि बिल का विरोध सिर्फ़ पंजाब-हरियाणा में ही क्यों, बिहार-यूपी में क्यों नहींनया कृषि बिल और बिहार की स्थितिबिहार में एपीएमसी एक्ट 2006 में ही ख़त्म हो गया था. फिर नए कृषि बिल से बिहार का क्या लेना देना.ये एक आम धारणा है कि नए बिल का विरोध बिहार में नहीं हो रहा है. लेकिन ये आधा सच है, पूरा सच नहीं है. एपीएमसी यानी ऐग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी यानी कृषि उपज विपणन समिति. वो मंडियाँ जहाँ किसानों की फसलें बेची और ख़रीदी जाती हैं.

इमेज स्रोत,Sameeatmaj Mishraये बात सही है कि 2006 से ही बिहार का किसान मंडियों के चंगुल से आज़ाद हो गया था. लेकिन नए कृषि बिल के विरोध में किसानों की लड़ाई सरकारी मंडियों पर नहीं है, बल्कि एमएसपी पर है. जबकि अलग-अलग राजनैतिक दल और राज्य सरकारें एपीएमसी को भी विरोध का मुद्दा बता रहे हैं.

25 सितंबर को जब देश भर के किसानों ने चक्का जाम करने का फ़ैसला किया तो उनकी केवल दो ही माँगें थीं. पहला ये कि एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही किसानों की फसलों को ख़रीदा जाए, चाहे सरकार हो या फिर उद्योगपति और दूसरी माँग ये है कि एमएसपी से कम पर फसल ख़रीदने को अपराध माना जाए.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह से बीबीसी से बातचीत में ये बात कही है. ये वही संस्था है, जिसने इस चक्का जाम का एलान किया है.मोदी सरकार ऐसे कर सकती है किसानों की समस्याओं को हलएमएसपी क्या है?किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था लागू की गई है. अगर कभी फसलों की क़ीमत बाज़ार के हिसाब से गिर भी जाती है, तब भी केंद्र सरकार तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही किसानों से फसल ख़रीदती है ताकि किसानों को नुक़सान से बचाया जा सके.

किसी फसल की एमएसपी पूरे देश में एक ही होती है. भारत सरकार का कृषि मंत्रालय, कृषि लागत और मूल्य आयोग (कमिशन फ़ॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस CACP) की अनुशंसाओं के आधार पर एमएसपी तय करता है. इसके तहत अभी 23 फसलों की ख़रीद की जा रही है.इन 23 फसलों में धान, गेहूँ, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, तिल और कपास जैसी फसलें शामिल हैं, जिनमें से धान, गेहूँ और मक्के की ही खेती बिहार में ज़्यादा होती है. इसलिए माना जा रहा है कि बिहार के किसान नाराज़ नहीं है, ये बात पूरी तरह सही नहीं है.

इमेज स्रोत,SEETU / BBCकिसान वोट बैंक का क्या?बिहार की राजनीति पर क़रीब से नज़र रखने वाले पत्रकार सुरूर अहमद कहते हैं, "कोरोना के दौर में जब ये बिल आया, तो पहले ना नेताओं को और ना ही पत्रकारों को इसके असर के बारे में पता चल पाया. सब घरों में ही क़ैद थे. लेकिन अब जब लोग धीरे धीरे बाहर निकलने लगे हैं, अब जब चाय की दुकान, लोकल ट्रेन और आते-जाते मार्केट में लोगों से बात हो रही है, तब अंदाज़ा लग पा रहा है कि किसान इससे कितना नाराज़ हैं."

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बिहार में अब इस बिल को लेकर एक धारणा बन रही है. पहले तो बिहार की जनता इतना ही समझती थी कि किसान इतनी फसल कहाँ उगाते हैं, जो पंजाब हरियाणा जा कर बेच पाए. जितना उगाते हैं, उसका अधिक हिस्सा अपने लिए रखते हैं और जो बचता है बस उसे लोकल मार्केट में बेच देते हैं.

लेकिन धीरे धीरे अब एक माहौल तो कृषि बिल के ख़िलाफ़ बनता दिख रहा है, लेकिन ऐसा नहीं कि वो सबसे बड़ा मुद्दा हो. बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित ज़रूर है. लेकिन ज़्यादा बड़ा मुद्दा बिहार के नौजवानों के लिए रोज़गार है.यही वजह है कि आरजेडी नए कृषि बिल को पलायन और बेरोज़गारी से जोड़ कर जनता को समझा रही है. शुक्रवार को किसान आंदोलन के दौरान जब आरजेडी नेता तेजस्वी यादव सड़कों पर निकले तो लोगों से कहा, "2006 में एपीएमसी ख़त्म किया, जिस वजह से किसान को फसल की सही क़ीमत नहीं मिली, इसलिए किसानों को पलायन करना पड़ा."

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पाकिस्तान के 11 दलों ने छेड़ी मुहिम, कुर्सी छोड़ो इमरान!

इमरान खान की कुर्सी डोल रही है. पाकिस्तान की 11 विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ लामबंद हो गई हैं और कह रही हैं कि उन्हें कुर्सी छोड़नी होगी. इमरान को सत्ता में आए दो साल हो चुके हैं और इस बीच पाकिस्तान कंगाल हो चुका है. लोगों का गुस्सा इमरान का साथ दे रही पाकिस्तानी सेना पर भी बढ़ता जा रहा है.. इन सबसे बचने के लिए ISI ने एक आतंकी प्लान बनाया है. क्या है ये प्लान आपको दिखाएंगे लेकिन पहले देखिए कैसे शुरु हो चुकी है इमरान की उल्टी गिनती. देखिए विशेष, सईद अंसारी के साथ.

If the elections are free&fare? समझो ईवीएम का आस है, बाकी सुपाड़ा साफ़ है Ha ये किसानों की नहीं बल्कि विरोधी दलों की नाव डूबने के किनारे है ये उनकी नाराजगी है। किसान खुश हैं अपनी मर्जी से अपना सामान जहां ले जाएं ले जा सकते है कोई रोक टोक नहीं। चुनाव है और अब किसी के पास कोई मुद्दा बचा नहीं तो जो खेती नहीं करते वही विरोध कर रहे।

येे नाटक मंडली जनता का खूब मनोरंजन करेगी.... लॉकडाउन खुलने के बाद से चुनाव तक मज़े लो। गली गली मैं शोर है चौकीदार चोर हैं Bilkul bhari padna chahiye भारी , बहुत भारी विपक्ष को इसका बहुत फायदा होगा। जिस किसान की तस्वीर तुमलोग दिखा रहे हो वो तो बिल पारित होने के पहले से ही नाराज़ है। ये लोग पहले भी NDA आगे घुटने टेके है और आगे भी टेकेंगे। 😁😁😂😂

Nahi EVM inka khud ka bnaya huaa h😇😇 Bhari pare ga किसान NDA की ताबूत में आख़री किल ठोकने का काम करेगा... आज तक के इतिहास में किसी भी लोकतांत्रिक देश में किसी भी सरकार ने किसानों पर इतना ज़ुल्म नहीं किया, जितना BJP कर रही है~~~ सब याद रखा जयेगा Bihar Election 2020 RJD चुनाव जीत तो जाएगी पर जीतने वाले विधायक ऐसे न हों जो जीतने के बाद ED IT और CBI के डर से पाला बदल लें तेजस्वी यादव को टिकट बाँटते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि अबकी बार चुनाव वे नहीं बल्कि जनता लड़ रही है NDA से बशर्ते रिजल्ट के बाद एकजुट रख पायें विधायकों को

ha dheek vise he jaise note bandee our GST bhari pada. Bihar ke kisano me koi narajgi nhi h lekin nitish kumar se kuch log naraz jaroor h Na EVM h na wo kam ni aayi to to pm care fund sab kharid lenge हमें रोटी किसानों से मिलती है। अंधभक्ती करने से नहीं इसलिए मैं किसानों के साथ खड़ा हूं जुमले बाज के साथ नहीं

Ha bilkul मोदी के लाखों करोड़ के झांसे में न फंस कर उसे रोकने वाले भी बिहारी थे। धोखा नीतीश ने दिया। फिर भी लोकसभा में प्रचंड बहुमत evm के गेम को ही दर्शाता है। पैदल चले मजदूर क्या सुशांत से प्रभावित होंगे?किसान आंदोलन तो नशेड़ी नेता पुत्रों के प्रचार प्रोपोगंडा से अधिक कुछ नही लग रहा। भारी नहीं बहुत भारी

नहीं. EVM है न. फिर MLA चाहे किसी भी पार्टी के रहे आखिरी पड़ाव तो BJP ही है. BJP का कोई भी नेता हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के UP के गांव में कहीं शहर में आता है तो उसका जूते मार के स्वागत करो भगाओ उसको। = किसान बेरोजगार एकता? किसने कहा की किसान नाराज है किसान भाजपा सरकार से पूरी तरह से खूश है ई जो तुम फोटवा लगाए हो इकरा में से किसान के के है जरा बताओ तो जाने? ई दो गो अनपढ़ के मलाई खाने का जुगाड़ फिट करै के कोशिश हो रहा है समझे कि नाहीं।

किसान नहीं वो सारे कांग्रेसी कार्यकर्ता और कांग्रेसियों का जेहादी गैंग है । जो बिल किसानों के हित में आए हैं इन से किसानों को फायदा ही होगा लेकिन कुछ स्वार्थी नेता जो अपने आप को किसानों के बहुत बड़े नेता कहते हैं इनके नीचे का अंधेरा आपको देखना होगा किसान भाइयों से निवेदन है जैसे पंजाब में जो रोड पर नेता आ रहे हैं और मुंबई में जो बड़े नेता हैं इन्हें पहचा

नही पड़ेगी। Bhaiya sab neta lalchi hai ...kisi p koi bhari nhi kursi do paisa do kharid farokth jo bhi acche se kr lega 5 saal bihar uska .. dukhi hota hai man aisi gandi rajneeti dekh kr.vastav m janta ki kisi ko fikar nhi .. sabko apna pet bharna hai. Abe Pappu pole result dekh😂 बिल्कुल भारी पड़ेगी! अबकीबार जनादेश चोर सरकार का सूपडा़ साफ NoMoreBJP yadavakhilesh

Nahi tab tak he sub Hindu bjp ke ho jaynge .. sub andhbhakt . Farmers are no fools, can run their missionary and anti india agenda Ha bilkul 1500₹/ट्रैक्टर बालू को 3500₹/ट्रैक्टर क्यों कियापूछेगा बिहार हमे चाहिए युवा सरकार💪💪 बिल्कुल भारी पड़ेगी |

बिहार चुनाव का ऐलान, उपचुनाव की तारीखें क्यों टाल गया चुनाव आयोग?चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. बिहार में तीन चरण में चुनाव होगा जबकि देश के तमाम राज्यों में रिक्त पड़ी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की गई है. चुनाव आयोग ने कहा कि उपचुनाव को लेकर 29 सितंबर को ऐलान किया जाएगा. पूरे देश में आज किसान-मजदूर खेती बिल के खिलाफ सडकों पर हैं कि इस कानून से वो भूखे मर जाएंगे.... लेकिन 'राष्ट्रवादी मीडिया' कंगना..रिया..दीपिका..करन जौहर कब क्या खाते थे यह बताते हुए 'किसान-मजदूर मीडिया से कोसों दूर' midia bikau hai जब उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने बल पर सरकार बना सकती है, तो बिहार में क्यों नहीं ? '15 साल भाजपा जदयू को बिहार में सरकार चलाने का मौका दिया। अब जदयू को भाजपा को सरकार चलाने का मौका देना चाहिए।।' 'अबकी बार।बिहार में भाजपा सरकार।।' जय जय श्री राधे।🚩🚩 जय जय श्री कृष्ण।।🚩🚩 ho sakta he ki Madhya Pradesh me kuch transfer posting karni ho kya he in collectors ne bol diya hoga ki ham nahi jitwa ke denge seat ImartiDevi ChouhanShivraj kamalnath BJPdestroysDemocracy

चुनाव आयोग दोपहर 12.30 बजे करेगा बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलानआखिरकार शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनावों की तारीख आ जाएगी. चुनाव आयोग आज दोपहर 12.30 बजे करेगा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा. देश में कोरोनावायरस महामारी के दौर में यह पहला बड़ा चुनाव होगा. aa Rahi Hai :'ZAMMEN-DARI-PRATHA'. BJP4India can't survive by using Media & govt agencies BharatBandh BharatBandh BharatBandh BharatBandh BharatBandh BharatBandh BharatBandh संयोग है कि प्रयोग है

बिहार चुनाव: बिहार का फकीर CM, जिसकी झोपड़ी देखकर रो पड़े थे हेमवंती नंदन बहुगुणासियासी धनबल-बाहुबल और घोटालों के दौर में लोगों को ये सुनकर हैरानी होगी कि कोई नेता दो बार मुख्यमंत्री रहने और तीन दशक से अधिक वक्त तक लगातार चुनाव जीतने के बाद भी रिक्शे पर चलता हो. हम बिहार के ऐसे ही जननायक की बात कर रहे हैं जो अपने सादगीपूर्ण जीवन के कारण जननायक के नाम से मशहूर थे. आज..... यह सब बातें सिर्फ किताबों में ही रह गई है रिक्शा में चलने से जनता की भूख खत्म नहीं होती!! जननायक कर्पूरी ठाकुर भारत के महान विभूतियों मे से एक है।आपकी सत्य,ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा की आदर्श आज भी प्रासंगिक है।

बिहार चुनाव: भाजपा नेताओं की गुटबाजी का शिकार हो रहा भागलपुर, ये है वजहसांसद निशिकांत दुबे का पैतृक घर भागलपुर है। और वे सांसद गोड्डा से है। यह बात उन्हें हमेशा खटकती है। यह दर्द उन्होंने होली पर वसंत गोष्ठी में आयोजित कवि सम्मेलन के सार्वजनिक मंच से भी बयां किया था।

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