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बांग्लादेश में 'इस्लाम नहीं रहेगा राष्ट्र धर्म', सेकुलर संविधान की वापसी की तैयारी

22-10-2021 05:21:00

बांग्लादेश में 'इस्लाम नहीं रहेगा राष्ट्र धर्म', सेकुलर संविधान की वापसी की तैयारी

पिछले दिनों हिंदुओं के ख़िलाफ़ हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हुई है. देश में तनाव के माहौल के बीच सत्ताधारी पार्टी ने संविधान में बदलाव के संकेत दिए हैं. क्या ये आसान होगा.

लान का विरोध और हिंसा की धमकीजमात-ए-इस्लामी और हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम जैसे कट्टरपंथी समूहों के मौलवियों ने धमकी दी कि अगर ऐसा कोई बिल पेश किया गया तो एक ख़ूनी अभियान शुरू हो जाएगा.हिफ़ाज़त के महासचिव नुरुल इस्लाम जिहादी ने कहा है, "इस्लाम राज्य धर्म था, यह राज्य धर्म है, यह राज्य धर्म रहेगा. इस देश को मुसलमानों ने आज़ाद किया और उनके धर्म का अपमान नहीं किया जा सकता. इस्लाम को राजकीय धर्म बनाए रखने के लिए हम हर बलिदान देने को तैयार हैं."

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यहां तक कि पूर्व मेयर खोकोन जैसे अवामी लीग के नेताओं ने भी मुराद हसन की घोषणा का विरोध इस आधार पर किया है कि "पार्टी के भीतर इस पर विस्तार से चर्चा नहीं की गई."कुछ लीग के नेता ये भी मानते हैं कि 'मुराद हसन का क़द बतौर नेता इतना बड़ा एलान करने योग्य नहीं है और अगर वो ये कर रहे हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री शेख़ हसीना का पूरा समर्थन है.'

नाम न छापने की शर्त पर एक शीर्ष अवामी लीग नेता ने कहा, ''अगर इस तरह की घोषणा से पहले शेख़ हसीना को इसकी जानकारी नहीं होती, वो भी ऐसे समय में जब देश में हिंदुओं के ख़िलाफ़ इतनी हिंसा हो रही है, तो निश्चित रूप से मुराद हसन को पार्टी हाईकमान से डांट मिलती. चूंकि ऐसा नहीं हुआ है, इसलिए यह मानना उचित होगा कि प्रधानमंत्री ने इस फ़ैसले को हरी झंडी दे दी है.'' headtopics.com

मुराद हसन ने ये घोषणा 14 अक्टूबर को की. इससे ठीक एक दिन पहले मुस्लिम भीड़ ने कुमिल्ला, चांदपुर, फेनी, नोआखाली और चटगांव में हिंदू मंदिरों पर हमला किया. दरअसल एक हिंदू भगवान के चरणों में इस्लाम के धार्मिक ग्रंथ क़ुरान की एक तस्वीर फ़ेसबुक पर वायरल हुई जिसके बाद हिंसा शुरू हुई.

इमेज स्रोत,EPAये हिंसा 23 ज़िलों में फैल गई जिसे देखते हुए पीएम शेख़ हसीना को दंगों को नियंत्रित करने के लिए सीमा रक्षक सैनिकों और एलीट रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) की इकाइयों की तैनाती करनी पड़ी.पुलिस ने साढ़े तीन सौ से अधिक दंगाइयों को गिरफ़्तार किया जिनमें कुमिल्ला के वो दो दुकानदार भी शामिल है जिन्होंने कथित तौर पर क़ुरान को हिंदू देवता के चरणों में रखा था और फिर इस तस्वीर को वायरल किया.

इनमें से एक फ़ोयाज़ अहमद हैं जिन्होंने कई सालों तक सऊदी अरब में नौकरी की और फिर बांग्लादेश आकर अपना बिज़नेस शुरू किया.अवामी लीग ने बीएनपी और जमात ए इस्लामी जैसे इस्लामी विपक्षी दलों पर धार्मिक दंगों को भड़काने और हिदुओं के बड़े त्योहार दुर्गा पूजा को बाधित करने का आरोप लगाया है.

धर्मनिरपेक्ष देश से कैसे इस्लामिक देश बना बांग्लादेशअवामी लीग की कोमिल्ला महिला विंग की नेता आयशा ज़मान ने बीबीसी को बताया, "हिन्दू भगवान के चरणों में जो कुरान रखी गई वह सऊदी अरब में छपी थी. बीएनपी के मेयर मोनिरुल इस्लाम सक्कू और व्यवसायी फ़ोयाज़ ने इसे इकबाल हुसैन की मदद से हिंदू देवता के क़दमों में रखा. सीसीटीवी फ़ुटेज में इकबाल ऐसा करते हुए दिख रहा है. यह मुसलमानों को उकसाने का एक सुनियोजित प्रयास था." headtopics.com

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आज से पांच साल पहले नासिरनगर में भी इसी समय के आस-पास सोशल मीडिया का इस्तेमाल इस तरह की तस्वीर वायरल करने के लिए किया गया था.1971 में जब बांग्लादेश बना तो इसकी पहचान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में बनी और इसका आधार बंगाली सांस्कृतिक और भाषाई राष्ट्रवाद रहा, जिसने पाकिस्तान की रूढ़िवादी इस्लामी प्रथाओं को समाप्त किया.

1972 में लागू हुए बांग्लादेश के संविधान ने सभी धर्मों की समानता को सुनिश्चित किया. लेकिन पाकिस्तान से आज़ादी के महज़ चार साल बाद यहां एक ख़ूनी तख़्तापलट हुआ और देश के संस्थापक शेख़ मुजीबुर्रहमान की उनके परिवार के साथ हत्या कर दी गई. केवल दो बेटियां वर्तमान प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और उनकी बहन शेख़ रेहाना बच गईं.

सैन्य शासक जनरलों ज़ियाउर्रहमान और एच एम इरशाद ने जमात ए इस्लामी जैसी इस्लामिक पार्टियों को समर्थन दिया. उन्हें चुनाव आयोग के साथ पंजीकरण करने की अनुमति दी और इस्लाम को राजकीय धर्म के रूप में स्थापित किया.इमेज स्रोत,Getty Imagesसैन्य तख़्तापलट पर किताब "मिडनाइट मैसेकर" के लेखक सुखरंजन दासगुप्ता कहते हैं, "सैन्य शासक अवामी लीग को हाशिए पर लाना चाहते थे इस प्रयास में अवामी लीग के ख़िलाफ़ एक राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश हुई. उन्होंने अवामी लीग के बंगाली राष्ट्रवाद का मुक़ाबला करने के लिए पाकिस्तान के तरह की इस्लामवादी राजनीति का विकल्प चुना. ज़िया और इरशाद दोनों ने ऐसी पार्टियां बनाईं जिन्होंने धार्मिक कार्ड खेला.''

अवामी युवा नेता और "डिजिटल बांग्लादेश' के आयोजक सूफ़ी फ़ारूक़ कहते हैं, ''इरशाद शराब पीने और महिलाओं के प्रति अपने रुझान के लिए जाने जाते थे, उन्होंने शायद ही कभी प्रार्थना की होगी. उन्होंने कुछ कविताएँ लिखीं. लेकिन उनके लिए इस्लाम एक राजनीतिक उपकरण था जैसे कि जिन्ना के लिए था जो सूअर का मांस खाते थे और स्कॉच व्हिस्की पीते थे और शायद ही कभी नमाज़ पढ़ी." headtopics.com

''सैन्य शासन के दो दशक के दौरान और सत्ता में बीएनपी और जमात ए इस्लामी गठबंधन सरकार की अवधि में (1991- 1996 और 2001- 2006) हिंदुओं को भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और हज़ारों लोगों ने भारत में शरण ले ली. बांग्लादेश की 22 प्रतिशत आबादी वाले हिंदू, साल 2010 की जनगणना में 10 प्रतिशत से भी कम हो गए.''

''लेकिन बांग्लादेश सांख्यिकी विभाग के अनुसार, अवामी लीग के शासन के पिछले दस वर्षों में हिंदुओं की आबादी 12 प्रतिशत हो गई है. ये बताता है कि हिंदुओं का पलायन कम हो गया है.''इमेज स्रोत,'चुनाव के वक़्त हिंदुओं केख़िलाफ़होती है हिंसा'

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पूर्व सूचना मंत्री तराना हलीम का कहना है कि देश का इस्लामी माहौल चुनावों में हिंदुओं को निशाना बनाता है. वह कहती हैं, ''दुर्गा पूजा के दौरान हुई इस हिंदू विरोधी हिंसा को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी से इस्लामवादियों को बढ़ावा मिला है, लेकिन दिसंबर 2023 में होने वाले संसदीय चुनावों में अवामी लीग की ही दोबारा जीत होगी.''

प्रधानमंत्री के विशेष सहायक और वर्तमान समय में ऑक्सफ़ोर्ड फ़ेलो बैरिस्टर शाह अली फ़राद कहते हैं, ''ये शर्मनाक है, हमें हर क़ीमत पर हिंदुओं की रक्षा करनी होगी. ''यही कारण है कि प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने संभवत: 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान की वापसी की योजना बनाई है.

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दंगल: क्या अब्बाजान और चिलमजीवी ही यूपी चुनाव के मुद्दे हैं?

उत्तर प्रदेश में चुनाव का माहौल जैसे-जैसे गर्माता जा रहा है, नेताओं की जुबान तीखी होती जा रही है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार को एक बार फिर चिलमजीवी कह के घेरा है. अखिलेश अक्सर चिलम फूंकने का आरोप लगाकर योगी आदित्यनाथ को घेरते रहे हैं. लेकिन चिलम के नाम पर अखिलेश को जवाब संत समाज की ओर से मिला है. कुछ साधु संतों ने इसे संतों का अपमान बताकर अखिलेश से माफी की मांग की है. आज दंगल में देखें क्या चिलम वाले बयान पर अखिलेश ने संतों की नाराजगी मोल ले ली है? और क्या 2022 के चुनाव में इसका असर पड़ेगा? देखें वीडियो.

It's a welcoming move बहुसंख्यक समाज हमेसा अल्पसंख्यक पर हावी रहा है हमेसा प्रताड़ित किया है चाहे बहुसंख्यक समाज।किसी भी धर्म का हुवा Hahhahaa bas yhi galti shaikh haseena ka wahi hal kar degi jo afganistan main ashraf ghani ka hua.. Jamate islami to chahti thi koi aisa action government le bilkul secular hona chahiye jab minority jyada tadad me hai to kisi ek dharam jaisa qanoon q hindu baha ke citizens hai unko har chiz me brabri ka haq mile

भारत इसकी उल्टी दिशा में जा रहा है। दारु कम पिया करो ब्रो। It would be indeed a commendable move but as of now seems quite unrealistic as anti-social elements, extremist groups,radical islamic scholars surely will endeavour to destabilize and can vitiate the atmosphere through provocation & violence. Join Bangladesh with India as Gharwapsi

Though it's their internal matter, but secularism should be promoted everywhere. Evryone has right to live freely in their own country. And if you don't, the, then you shouldn't be asking them to be patriot. बंगलादेश ऐक स्वस्थ देश स्थाई बढत बना रहा था क्षेत्र मे! Dekho bhai logo hamare islam bhai har jagah rehte hn

दिग्गजों की डुगडुगी : आलिया के फैन रणबीर, सनी देओल के भक्त, फरदीन की वापसीआलिया भट्ट और रणबीर कपूर की निकटता की खूब चर्चा है और यहां तक कहा जा रहा है कि जल्दी ही दोनों शुभमंगल सावधान कर फिल्म इडस्ट्री को दावत दे सकते हैं।

इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नही होता । किसी भी राष्ट्र का कोई राष्ट्रधर्म होना नही चाहिए । कट्टरता से मोह नहीं मिलता किन के प्रमाण श्रेष्ठ में दिखता रहते एक धर्म से सर्व मत फिर इकहत्तर में नए अध्याय ना जुड़ता🧬 Religion is just for the poor…..poor countries are more religious than the rich and developed countries……

बेहतर फैसला। अगर बांग्लादेश ये करके दिखा पाये तो ये दुनिया के लिए एक बड़ी नज़ीर होगी। सारे हिंदुओं को खत्म कर सेकुलर संविधान की तैयारी कर रहे हो, गजब का चू..यापा है। प्लीज़ गोदीमिडिया चेक करो ये सब मोई जी के डर से तो नहीं हो रहा ना हसीना भी यही कर रही हे😂 सब का साथ सबका विकास लिख कर ले लो नही होगा Islam hamesha tha aur rahega chahe kuffar kuchh fir karle

भारतीय पनडुब्बी को अपने जल क्षेत्र में रोकने के पाकिस्तान के दावे की खुली पोलपाकिस्तान के उस दावे की पोल खुल गई है कि उसने पिछले सप्ताह अपने जल क्षेत्र में भारतीय पनडुब्बी को घुसने से रोका था। दरअसल भारतीय नौसेना के सूत्रों ने ऐसे विवरण पेश किए हैं जो बताते हैं कि पनडुब्बी पाकिस्तान के जल क्षेत्र से बहुत दूर मौजूद थी Hijada pakistan

किसी इस्लामिक देश का 'सेक्यूलर' होना बहुत मुश्किल होता है। Ye hi ab bharat m bi hoga Andh Bhakton ko toh SECULAR sabd sey bahut allergy hoti hai.Yahan SECULARISM sey pareshani hoti hai toh Bangladesh mein iss sabd sey bhi Dimaag kharab hotaa hoga चलिए देखते हैं हसीना जी कैसे अपने देश को बचाती है इन जिहादी मानसिकता वालों से।। लेकिन यह कदम सराहनीय है।

हसीना के राजनीति में एर्दोवानीकरण हो गया है। 🤣🤣🤣 इस्लामिक राष्ट्र में खून खराबा गरीबी भुखमरी ही लाती है ये सेक्यूलर कोनसा वाला रहेगा फेक या दिखावे वाला आपके इस पोस्ट पर कोई भी Shanti Doot समर्थन नहीं करेगा भारत को धर्मनिरपेक्षता देश बनाने में रखने के लिए यह लोग निरंतर लड़ेंगे लेकिन बांग्लादेश को नहीं क्योंकि वहां इस्लामिक राज चाहिए इनको

बांग्लादेश की मदद की जानी चाहिए।। Fab India's advrt makes news is Washington Post, but Bangladesh Hindu genocide doesn't. 😂🤣😂🤣😂🎉😂🤣

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