पाकिस्तान का जग्गा गुर्जर जिससे कांपता था पूरा लाहौर और देता था जग्गा टैक्स - BBC News हिंदी

जग्गा गुर्जर जिससे कांपता था पूरा लाहौर और देता था जग्गा टैक्स

01-08-2021 07:05:00

जग्गा गुर्जर जिससे कांपता था पूरा लाहौर और देता था जग्गा टैक्स

ये जुलाई 1968 की बात है जब लाहौर में हुई एक 'पुलिस मुठभेड़' में जग्गा गुर्जर की मौत की ख़बर पाकिस्तान के सभी अख़बारों के पहले पन्ने पर छा गई थी. ये वही जग्गा गुर्जर थे जिनके नाम पर 'जग्गा टैक्स' शब्द मशहूर हो गया था और उनके ऊपर पंजाबी में कई फिल्में बनाई गईं.

जग्गा टैक्स की शुरुआतकिसी में भी मना करने की हिम्मत नहीं थी और जल्दी ही इस ज़बरदस्ती वसूल किये जाने वाले टैक्स को जग्गा गुर्जर के नाम पर 'जग्गा टैक्स' कहा जाने लगा. आज भी पाकिस्तान में इस तरह के ज़बरदस्ती वसूल किये जाने वाले टैक्स को आम तौर पर 'जग्गा टैक्स' ही कहा जाता है.

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हसन निसार ने अपने एक कॉलम में लिखा है कि "जग्गा था तो बदमाश, लेकिन उनकी एक ख़ासियत थी, जो उन्हें दूसरे गुंडों से अलग करती थी. वह ख़ासियत यह थी कि जो टैक्स उनके घर जाता था, उसमे गरीबों और विधवाओं का भी हिस्सा होता था."उस समय लाहौर के एसएसपी हाजी हबीब-उर-रहमान ने मुनीर अहमद मुनीर को एक विस्तृत इंटरव्यू दिया था. ये इंटरव्यू 'क्या क्या न देखा' शीर्षक से प्रकाशित हुआ था. हाजी हबीब-उर-रहमान ने अपने उस इंटरव्यू में बताया था कि, "जग्गा का दुर्भाग्य उस दिन शुरू हुआ, जब उनका सामना मोजांग में एक फलों की दुकान पर, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर फ़तेह मोहम्मद ख़ान बांदियाल से हुआ. फ़तेह मोहम्मद ख़ान बंदियाल ने देखा कि फलों की दुकान पर एक जीप आ कर रुकी, उसमें से एक आदमी उतरा, जिसके आगे पीछे छह-सात हथियारबंद लोग थे. वह आदमी फलों की दुकान की ओर गया."

"दुकानदार ने फ़तेह मोहम्मद ख़ान बंदियाल को नज़रअंदाज़ कर उस आदमी को सलाम किया. जग्गा ने अपने ख़ास अंदाज़ में हाथ लहराते हुए जवाब दिया. अपनी कार में फलों की कुछ टोकरियां और शरबत की तीन-चार बोतलें रखवाई और बिना पैसे दिए निकल गया. फ़तेह मोहम्मद ख़ान के लिए यह दृश्य अविश्वसनीय था." headtopics.com

"उन्होंने दुकानदार से पूछा कि वह आदमी कौन था. दुकानदार ने कहा कि आप लाहौर के नहीं लगते, यह जग्गा बादशाह था लाहौर का असली बादशाह. पूरे लाहौर पर उसका राज चलता है."छत्रपति सांभाजी ने क्या शिवाजी की पत्नी सोयराबाई की हत्या की थी?लाहौर के डिप्टी कमिश्नर हैरान

फ़तेह मोहम्मद ख़ान और भी हैरान हुए, उन्होंने सोचा, लाहौर का डीसी तो मैं हूं, यह बादशाह कहां से आ गया? वे वहां से घर जाने की बजाय मोजांग थाने पहुंचे. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अपना परिचय दिया और पूरी कहानी सुनाई. पुलिसकर्मी चुप खड़े रहे. कुछ देर बाद एसएचओ ने कहा, "मुझे लगता है कि आपको ग़लतफ़हमी हुई है."

फ़तेह मोहम्मद ख़ान ने कहा, "ग़लतफ़हमी की क्या बात है? मैं सब कुछ अपनी आँखों से देख कर आ रहा हूँ." असली एसएचओ आप हैं. असली अधिकारी एसएसपी या डीसी हैं. यहां गुंडों का राज है. मैं बस सुनता आया था, आज मैंने अपनी आंखों से देख भी लिया कि यहां का असली शासक तो कोई और है."

इमेज स्रोत,Aatish Fishan Publishersइमेज कैप्शन,जग्गा की बदक़िस्ती की शुरुआत उस दिन से हुई जब फलों की एक दुकान पर एक दिन उसका आमना-सामना लाहौर के डिप्टी कमिश्नर फ़तह मोहम्मद ख़ान बन्दयाल से हुआ.उसी समय एसएचओ फ़तेह मोहम्मद ख़ान को फलों की उसी दुकान पर ले गए. दुकानदार एसएचओ को देख कर खड़ा हो गया. एसएचओ ने दुकानदार से फ़तेह मोहम्मद ख़ान जी का परिचय कराया और पूछा कि क्या अभी यहां से जग्गा नाम का कोई व्यक्ति मुफ़्त फ़ल लेकर गया है. दुकानदार ने कहा कि इस नाम का यहां कोई व्यक्ति नहीं आया और फिर हम किसी को मुफ़्त फल क्यों देंगे. फ़तेह मोहम्मद ख़ान यह बात सुनकर हैरान हुए, वह समझ गए कि दुकानदार उनके और एसएचओ के सामने सच नहीं बताएगा." headtopics.com

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हाजी हबीब-उर-रहमान ने बताया, कि "अब फ़तेह मोहम्मद ख़ान ने मुझे बुलाया और मुझे पूरी कहानी सुनाई. मैंने कहा अच्छा हुआ कि आपने यह दृश्य अपनी आंखों से देख लिया. एसएचओ भी कह रहे हैं कि आपको ग़लत फ़हमी हुई है और दुकानदार ने भी यही कहा है कि वहां उस नाम का कोई व्यक्ति आया ही नहीं, ये इन गुंडों का आतंक है. फ़तेह मोहम्मद ख़ान ने कहा कि ये मामले ऐसे नहीं चलेंगे, इन गुंडों से हमें निपटना होगा."

पुलिस महकमे में मौजूद मुख़बिरों की मदद से जग्गा गुर्जर तक भी यह ख़बर पहुंच गई कि लाहौर प्रशासन उनके ख़िलाफ कार्रवाई करने वाला है. एक दिन जग्गा गुर्जर हाजी हबीब-उर-रहमान के कार्यालय पहुंच गया, मोहम्मद शरीफ़ उर्फ़ जग्गा के नाम की एक चिट अंदर भेजी गई. उनके साथ उनका राइट हैंड रियाज़ उर्फ़ राजू गुर्जर भी था.

इमेज स्रोत,इमेज कैप्शन,एसएसपी हबीबुर्रहमानजग्गा ने कहा कि वह पुलिस के लिए काम करने के लिए तैयार है बस उसकी जान बख़्श दी जाये. जग्गा ने रिश्वत और अन्य प्रोत्साहन की पेशकश भी की, लेकिन हाजी हबीब-उर-रहमान ने उनकी मदद करने से इनकार कर दिया. उस समय जमानत पर बाहर होने के कारण उसे गिरफ़्तार भी नहीं किया जा सकता था.

हबीब-उर-रहमान के मुताबिक, स्थिति को भांपते हुए वह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर चला गया. बाद में एक दिन पुलिस को अपने मुख़बिरों से सूचना मिली कि जग्गा अपनी मां से मिलने के लिए बेताब है और लाहौर आने का बहाना ढूंढ रहा है. हाजी हबीब-उर-रहमान ने जग्गा को लाहौर बुलाने के लिए एक योजना बनाई. headtopics.com

उन्होंने फ़तेह मोहम्मद ख़ान और सिविल डिफ़ेंस के अध्यक्ष से बात की और कहा कि लंबे समय से लाहौर में सिविल डिफ़ेंस के ब्लैकआउट का अभ्यास नहीं हुआ है. सिविल डिफ़ेंस के अध्यक्ष ने दो दिन तक यह अभ्यास कराने की घोषणा कर दी.उन दिनों यह एक सामान्य बात थी. समाचार पत्रों में भी अभ्यास की सूचना प्रकाशित हो गई. अभ्यास का पहला दिन ख़त्म हो गया था. पुलिस को सूचना मिली कि जग्गा उनके जाल में फंस गया है और इस अभ्यास का फायदा उठाते हुए, ब्लैकआउट के दूसरे दिन वह अपनी मां से मिलने लाहौर आ रहा हैं."

"यह जुलाई 1968 की बात है. जग्गा का घर नवांकोट थाना क्षेत्र के बकर मंडी इलाक़े में था. पुलिस ने अपनी पोजीशन संभाल ली. जब जग्गा घर के पास पहुंचा तो पुलिस ने उसे चेतावनी दी और पूछा कि वह कौन है. राजू गुर्जर भी जग्गा के साथ था.इससे पहले कि जग्गा पुलिस को कोई जवाब दे पाता, राजू गुर्जर ने पुलिस पर गोलियां चला दीं. पुलिस ने एक बार फिर जग्गा को हथियार डालने को कहा गया और उसकी जान बख़्श का एलान किया, लेकिन जब आदेश का पालन नहीं किया गया और राजू गुर्जर ने दोबारा पुलिस पर गोलियां चलाईं, तो पुलिस ने जवाबी फायरिंग की जिसमे राजू गुर्जर और जग्गा गुर्जर दोनों मारे गए.

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जग्गा के शव को देखने उमड़ी थी भीड़पुलिस टीम में डीआईजी साहबज़ादा रऊफ़ अली के अलावा सब-इंस्पेक्टर मियां सुल्तान अनवर और राजा मोहम्मद इक़बाल शामिल थे.प्रमुख बुद्धिजीवी और लेखक बाकिर अली शाह ने एक बातचीत में कहा कि "जग्गा गुर्जर और रियाज़ गुर्जर डीआईजी चौधरी मोहम्मद अल्ताफ़ की गोली से मारे गए थे, जो उस ऑपरेशन में ख़ुद भी घायल हुए थे. बाद में लोग उन्हें अल्ताफ़ जाग्गा कहने लगे थे. चौधरी मोहम्मद अल्ताफ़ ने मियां नवाज़ शरीफ़ के दौर में अहमद मोहम्मद मुख़्तार को और बेनजीर भुट्टो के दौर में मियां मोहम्मद शरीफ़ को भी हथकड़ी लगाई थी, जिसके कारण वह दोनों सरकारों की नाराज़गी का शिकार हुए. इस समय चौधरी मोहम्मद अल्ताफ़ लाहौर में रह रहे हैं.

इमेज स्रोत,Jagga Gujjar Film Posterअगले दिन, पाकिस्तान के सभी समाचार पत्र जग्गा के मारे जाने की घटना से भरे हुए थे. हाजी हबीब-उर-रहमान ने बताया, कि "लोग विश्वास ही नहीं कर रहे थे कि जग्गा मर गया है. उसकी लाश देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. जग्गा की लाश को देखने के लिए बकर मंडी से शहर तक लोगों की लाइन लगी हुई थी.

जग्गा को मारने वाली पुलिस टीम को सरकार ने नकद पुरस्कार भी दिया और उन्हें मेडल भी दिए गए. लेकिन लाहौर के लोगों के दिलों से जग्गा गुर्जर और उसका लगाया हुआ 'जग्गा टैक्स' नहीं मिटाया जा सका.1980 और 1990 के दशक में, लाहौर के फ़िल्म उद्योग ने जग्गा गुर्जर पर कई फिल्में बनाईं, जिनमें से ज़्यादातर फिल्मों में जग्गा का किरदार सुल्तान राही ने अदा किया. इन फ़िल्मों में 'जग्गा', 'वहशी गुर्जर', 'जग्गा गुर्जर', 'पुत्तर जग्गे दा' और 'जग्गा टैक्स' जैसी फ़िल्में मशहूर हैं.

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