पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर आया अदालत का फ़ैसला

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर विरोधी याचिकाओं को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने किया ख़ारिज

09-07-2020 13:58:00

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर विरोधी याचिकाओं को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने किया ख़ारिज

पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान मंदिर के लिए 10 करोड़ रुपये देने का ऐलान कर चुके हैं. इसे इस्लामाबाद का पहला हिंदू मंदिर बताया जा रहा है.

शेयर पैनल को बंद करेंImage captionसैदपुर मंदिरइस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की राजधानी में एक कृष्ण मंदिर के निर्माण के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं को प्रभावहीन बताते हुए ख़ारिज कर दिया है.इन याचिकाओं पर फ़ैसला सुनाते हुए इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आमिर फ़ारूक़ ने कहा कि 'राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) के अध्यक्ष और बोर्ड के सदस्यों के पास राजधानी के भीतर किसी भी धार्मिक स्थल को ज़मीन देने की शक्तियाँ हैं और मंदिर के लिए ज़मीन राजधानी के मास्टर प्लान के अनुसार दी गई है, इसलिए अदालत याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाये गए बिंदुओं को ख़ारिज करती है.'

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फ़ैसला पढ़ते हुए, जस्टिस आमिर फ़ारूक़ ने कहा कि 'इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उन्हें बतलाया गया कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी में तीन हिन्दू मंदिर हैं जो इन दो शहरों में रहने वाली हिन्दू आबादी की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त हैं.'उन्होंने बताया कि कोर्ट में यह दलील भी दी गई कि महामारी के दौरान जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही सिकुड़ रही है, तब कृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये ख़र्च करना राष्ट्रीय ख़ज़ाने को बर्बाद करने के समान है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि 'मंदिर निर्माण के लिए अभी तक कोई धनराशि जारी नहीं की गई है और सरकार ने पहले ही इस विषय पर इस्लामिक वैचारिक परिषद से सुझाव लेने की बात कही है.'पाकिस्तान के कुछ मौलवियों द्वारा यह दलील दी गई थी कि 'उनके यहाँ की इस्लामिक सरकार धार्मिक नज़रिये से किसी मंदिर के निर्माण के लिए फंड नहीं दे सकती.'

Image captionइस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के ख़िलाफ़ दायर केस का हाईकोर्ट डॉक्यूमेंटमंदिर निर्माण के ख़िलाफ़ थीं तीन याचिकाएंअदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि 'पाकिस्तान के संविधान में दिये अनुच्छेद-20 के तहत, देश में रहने वाले सभी अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र रूप से अपने धार्मिक संस्कार करने का अधिकार है.'

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि 'मंदिर निर्माण के ख़िलाफ़ दायर हुई इन याचिकाओं में उठाये गए बिन्दुओं के मद्देनज़र, अदालत मानती है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, इसलिए इनका निपटारा किया जाता है. हालांकि, अगर भविष्य में याचिकाकर्ताओं को लगता है कि उनके अधिकारों का किसी भी तरह से उल्लंघन हुआ है तो वे फिर से अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.'

ग़ौरतलब है कि इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई थीं और यह मुद्दा बनाया गया था कि मंदिर का निर्माण इस्लामाबाद के मास्टर प्लान में शामिल नहीं था.पाकिस्तान में मानवाधिकारों के संसदीय सचिव और इमरान ख़ान की सत्ताधारी तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी (पीटीआई) के सदस्य लाल चंद मल्ही ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा है,"रिपोर्टों से पता चलता है कि मंदिर के निर्माण के ख़िलाफ़ दायर हुईं याचिकाएं ख़ारिज कर दी गई हैं और इस्लामाबाद हिन्दू पंचायत को निर्माण से पहले क़ागज़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा गया है. हिन्दू समुदाय अदालत के फ़ैसले का स्वागत करता है और ईमानदारी से इसका पालन करने की कसम खाता है."

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ये भी पढ़ें:निगार जौहर पाकिस्तान के इतिहास की पहली महिला लेफ्टिनेंट जनरलप्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहापाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर बनाया जा रहा है.विवाद शुरू कैसे हुआ?पिछले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर के निर्माण पर विवाद ने तब एक नया मोड़ ले लिया था, जब इसकी चारदीवारी के निर्माण का काम रोका गया.

कई दिनों से सोशल मीडिया पर अटकलें लगाई जा रही थीं कि धार्मिक भेदभाव की वजह से मंदिर के निर्माण का काम रोका गया है, लेकिन सीडीए ने ऐसी तमाम अटकलों का खंडन किया है.बीबीसी से बात करते हुए सीडीए के प्रवक्ता मज़हर हुसैन ने कहा कि 'मंदिर का निर्माण कार्य बिल्डिंग प्लान (नक्शा) जमा ना कराये जाने के कारण रोका गया है. सीडीए को अब तक नक्शा नहीं मिला है. इसलिए ये कहना सही होगा कि मंदिर निर्माण का काम स्थगित कर दिया गया है.'

उन्होंने कहा कि मंदिर भवन का प्लान मिलने पर निर्माण की इजाज़त दे दी जाएगी.बीबीसी से बात करते हुए, सीडीए के अध्यक्ष आमिर अहमद अली ने कहा कि 'इस्लामाबाद के सेक्टर-एच 9 में मंदिर के लिए भूमि का आवंटन करने पर कोई विवाद नहीं था. कुछ साल पहले भूमि हिन्दू समुदाय को सौंप दी गई थी. हालांकि, निर्माण कार्य के लिए आगे बढ़ने से पहले समुदाय द्वारा बिल्डिंग प्लान के लिए मंज़ूरी लेना ज़रूरी था.'

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को बेबुनियाद बताते हुए, सीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि 'मंदिर का निर्माण कार्य रोका नहीं गया था, बल्कि उसे निलंबित कर दिया गया है. सीडीए स्टाफ़ निर्माण की अनुमति देने से पहले भूमि पर सीमांकन की समीक्षा करेगा.'लाल चंद मल्ही का कहना है कि 'इस्लामाबाद हिन्दू पंचायत फ़िलहाल आवंटित भूमि पर सिर्फ़ अपनी एक दीवार खड़ी करना चाहती थी. मई के महीने में इस संबंध में सीडीए को एक अनुरोध पत्र भेजा गया था, लेकिन संबंधित अधिकारियों से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.'

लाल चंद के अनुसार, परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज़ धार्मिक मामलों के मंत्रालय के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत किए गए हैं.ये भी पढ़ें:पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सबसे बड़ी समस्या क्या है?राजनीतिक और धार्मिक दलों का विरोधपाकिस्तान में लगभग 8,00,000 हिन्दू हैं. अधिकांश हिन्दू परिवार सिंध प्रांत में रहते हैं, जबकि राजधानी इस्लामाबाद में रहने वाले हिंदुओं की संख्या लगभग 3,000 है.

जब से पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने इस मंदिर परियोजना के लिए ज़मीन दी है, तभी से धार्मिक हलकों में इसका विरोध हो रहा है.लाहौर के जामिया अशरफ़िया के मुफ़्ती मोहम्मद ज़कारिया ने मंदिर के निर्माण पर फ़तवा जारी करते हुए कहा कि 'इस्लाम के अनुसार अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थलों को बनाए रखना और उन्हें बहाल करना जायज़ है, लेकिन नए मंदिर नहीं बनाये जा सकते हैं.'

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सोशल मीडिया पर भी मंदिर के निर्माण का विरोध करने वाले अधिकांश लोग यह तर्क दे रहे हैं कि हिंदू मंदिर के निर्माण का पैसा सरकारी ख़ज़ाने से नहीं जाना चाहिए क्योंकि यह एक इस्लामिक देश है और इस्लामाबाद में हिन्दुओं की संख्या भी बहुत कम है.इमेज कॉपीरइटEPA/SOHAIL SHAHZAD

Image captionइस्लामाबाद में कुछ प्रदर्शन हुए हैं जिनके ज़रिये स्थानीय लोगों ने सरकार से गुज़ारिश की है कि मंदिर बनने दिया जायेदूसरी ओर, धार्मिक मामलों के संघीय मंत्री नूरुल-हक़ क़ादरी ने भी मंदिर के निर्माण के संबंध में एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'इस परियोजना के लिए इस्लामिक वैचारिक परिषद की सिफ़ारिशों के अनुसार ही धन आवंटित किया जाएगा.'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने 27 जून को अल्पसंख्यक प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी बैठक में मंदिर परियोजना के पहले चरण के लिए 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के आवंटन को मंज़ूरी देने पर सहमति व्यक्त की.इस मंदिर परियोजना का राजनीतिक विरोध भी हुआ है. इमरान ख़ान की सरकार के गठबंधन सहयोगियों में से एक और पंजाब विधानसभा के स्पीकर चौधरी परवेज़ इलाही ने मंदिर के निर्माण का विरोध करते हुए कहा कि 'नए मंदिरों का निर्माण करना इस्लाम की भावना के ख़िलाफ़ है.'

हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार को हिन्दू समुदाय की सुविधा और उनकी श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा मंदिरों को बहाल करना चाहिए और उनकी मरम्मत करवानी चाहिए.कुछ राजनेता और सोशल मीडिया यूज़र नए मंदिर के निर्माण के विचार का समर्थन भी कर रहे हैं. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फ़वाद चौधरी ने एक ट्वीट में लिखा है कि"यह अल्पसंख्यकों के प्रति सहिष्णुता और सद्भावना का प्रतीक होगा."

इस बीच लाल चंद ने आरोप लगाया कि मंदिर के निर्माण स्थल पर तोड़फोड़ की गई है.ये भी पढ़ें:Image captionलाल चंद माल्ही (बीच में)उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा,"स्थानीय प्रशासन द्वारा मिले आश्वासन के बावजूद कि वहाँ पुलिस की तैनाती की जाएगी, कोई कार्यवाही नहीं हुई. इस वजह से कुछ अज्ञात आरोपियों ने सुरक्षा गार्डों पर काबू पा लिया और कल रात लगभग एक टन लोहा निकाल ले गये."

लेकिन पुलिस ने इन दावों को ख़ारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि ठेकेदार ने परियोजना की क़ानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने तक निर्माण सामग्री को साइट से हटा लिया है. और पढो: BBC News Hindi »

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पैंगॉन्ग में चीन ने नया पंगा मोल लिया है. कई बार इस विश्व विख्यात झील के फिंगर 5 से पीछे हटने पर राजी होने के बाद भी चीन ने ही रखी है ये नई शर्त. ये शर्त है भारत भी फिंगर 2 से पीछे हटे तब चीनी सेना पीछे हटेगी. जाहिर है चीन फिर से तनाव बढ़ा रहा है, और क्यों बढ़ा रहा है, देखिए हमारी ये रिपोर्ट.

बिल्कुल सही निर्णय न्यायालय को किसी के दबाव में कार्य नहीं करना चाहिए। बहुसंख्यक के आस्था के आधार पे फ़ैसला होना चाहिए था, अपने यहाँ तो यही होता है न....? Kapoor khan ke kuchh bolo DJ song please मंदिर निर्माण के प्रति नकारात्मकता ये दर्शाता है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी तालिबानी प्रथा किस हद तक हावी है, शुक्र है ही कम से कम पाकिस्तानी अदालत ने सामान नागरिकता अधिकार की रक्षा की

अरे बीबीसी ये सब चूतियापे ज्ञान कहि और बाटना, पाक सुप्रीम कोर्ट की मानता कौन हैं पाकिस्तान में, बाजवा के एक्सटेंशन पर भी पाक सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी, पर एक्सटेंशन रुक क्या🤣 पाकिस्तान में कोर्ट का कोई औचित्य नही हैं, बस दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए खोले गए हैं। जय श्रीराम बहुत अच्छा फैंसला इस्लामाबाद हाईकोर्ट द्वारा

Fir bhi pakiyo ne dhancha gira diya cover kar BBCBreaking Haramistan अच्छा हुआ बहुमत जनता के आस्था के आधार पर फैसला नहीं सुनाया, तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया! Arey dangai KapilMishra_IND ye dekh le Why did Tipu and other emperor construct temples in his time?Do you deserve more knowledge of Islam than him?

जिस हाई कोर्ट के जज ने याचिका को खारिज किया अगर उसके परदादा का नाम पूछोगे? तो वह नहीं बताएगा😜 क्योंकि परदादा भी हिंदू ही होगा। India pakistan ye dono desh me yehi chal raha hain💔🤷‍♂️🙆‍♂️🌚🌚🌚 Pakistan jo Mandiro ko girana chate hai unko Allah se darr na chahiye. Kuch Musalman Raja the jo Bharath mein Mandiro ko girya. Allah se daro Quran aur Hadees padho. Musalman ko kahlifa banaya to Masjido se ziyada dusre mazhab ke logo aur unke mandiro ki hifazath karna chahiye.

Ye haraama ke pille Sab draama kar rahe hai, court or politicians ko pata hai wahan k halala ki paidaaishe mandir nahi banne degi . Secular gandoo sirf hindu hai .😡 Abb Pakistani kuch nahi bol rahe hai dharam jodd ke 😖... so sad 😢 तुम सब मुस्लिम एक दिन धर्म के नाम पर विश्व युद्ध करवाओ गें। KITNA KAMINA PAKISTAN KAHA H DHRAM NIRPEKSHTA HINDU HOTE DILEAR

पाकसुप्रीमकोट का निर्णय संघीयो पर करारा प्रहार है,जो पाक स्थित हिन्दुओं की दशा पर रात दिन घड़ियाली आंसू बहाते हैं। ImranKhanPTI के सत्तासीन होते ही पाकिस्तान में परिस्थितियां वाकई बदलीं हैं। सुदृढ़ समाज के लिए न्यायिक व्यवस्था का निष्पक्ष एवं निर्भीक होना नितांत आवश्यक है। Mandir ban ne do ,pakistan ke kuch kattar vichardhara walon ki vazah se pakistan ki image dunya men kharab ho rahi hai...

Good👍 यह तो अच्छा हुआ हमारे हित में हुआ हमें पाकिस्तान के फैसले का स्वागत करना चाहिए बीबीसी यह वहाँ पाकिस्तान है। जो खुद के मस्जिदों में बंम रखकर धमाके करता है। यहाँ का कोर्ट क्या हिन्दू मंदिर पर याचिका को खारिज करेगा पहले खुद के मस्जिद तो बचा ले 72 हूरो की चाह रखने वालो से 😂😂😂 पाकिस्तान में एक मंदिर बनने पर उसे तोड़ दिया जाता है और यहां पर भाईचारे का मिसाल देते देते 3000000 मस्जिद हो गए 500000 मदरसा और मंदिर बचे हैं बस 10 लाख और गुरुकुल तो खत्म ही हो गए

Ek freely democratic country or non democratic country me bahut fark hota he,,,, hamare yaha ye to nahi hota ki koi mandir ,masjid , nabi bangi, nahi to use mar denge,,, ha religious problem hoti he but sidhe hi kisi religious ke logo marne ki dhamki vo bhi parliament me,,, oooo Agar India me muslim virodhi yachika hoti to accept hojati . Or sanghi jashan manate

Agar India me muslim virodhi yachika hota to accept hojati . Or samghi jashan manate ...

चित्रकूट के खदानों में लड़कियों का शोषण, मेहनताना के बदले ज‍िस्म का सौदानरकलोक, जहां दो जून की रोटी और चंद सिक्कों के लिए बेटियां हवस का शिकार बन रही हैं. ये नरकलोक है मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के चित्रकूट में. जहां गरीबों की नाबालिग बेटियां खदानों में काम करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन ठेकेदार और बिचौलिये उन्हें काम की मजदूरी नहीं देते. मजदूरी पाने के लिए इन बेटियों को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है. परिवार को पालने का जिम्मा इनके कंधों पर आ चुका है. 12-14 साल की बेटियां खदानों में काम करने जाती हैं, जहां 200-300 रुपये के लिए उनके जिस्म की बोली लगती है. छि घटिया लोग Same on you myogiadityanath योगी जी...कुछ कर नही सकते तो उतर क्यों नहीं जाते... UP राम राज का वादा करके 'जंगल राज' चला रहे हो

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